कोरोना ने बचत में की सेंधमारी:2020 के जुलाई से दिसंबर में औंधे मुंह गिरी घरेलू बचत, घरेलू कर्ज में 57% और गोल्ड लोन में 33% बढ़ोतरी; जानिए इससे कैसे बढ़ेंगी आपकी मुसीबतें

4 महीने पहले
  • पहली तिमाही में 21% से घटकर तीसरी तिमाही में GDP का 8.2% रह गईं घरेलू सेविंग्स
  • बैंक में जमा रकम, लोगों के पास कैश, लोन और शेयर बाजार में निवेश पर पड़ा महामारी का असर

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2020 के घरेलू बचत से जुड़े अनुमान जारी किए हैं। ये आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। 2020 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारतीयों की घरेलू बचत, बैंक में जमा रकम और लोगों के पास नकदी घटी है, वहीं घरेलू कर्ज और गोल्ड लोन की आदत बढ़ गई है।

यहां हम आपको कोरोना काल में घटती घरेलू बचत और बढ़ते कर्ज की पूरी तस्वीर दिखा रहे हैं। साथ ही ये भी बताएंगे कि इससे आने वाले दिनों में आम आदमी और सरकार पर क्या असर पड़ेगा?

सबसे पहले जानते हैं कि 2020 में अप्रैल से दिसंबर के बीच कौन से 7 बड़े बदलाव देखने को मिले...

1. घरेलू वित्तीय बचत घट गई

घरेलू वित्तीय बचत यानी किसी परिवार की आमदनी और कुल खर्च का अंतर। कोरोना की शुरुआती लहर में सख्त लॉकडाउन लगा। लोगों ने खर्च कम कर दिया। इस वजह से अप्रैल से जून के दौरान घरेलू वित्तीय बचत बढ़कर 8.15 लाख करोड़ रुपए हो गई। सितंबर तिमाही में घटकर ये 4.91 लाख करोड़ और दिसंबर तिमाही में 4.44 लाख करोड़ बची।

2. घरेलू बैंक डिपॉजिट घट गई

घरेलू बैंक डिपॉजिट यानी किसी परिवार की बैंक में जमा रकम। अप्रैल से दिसंबर के बीच बैंकों का कुल डिपॉजिट तो बढ़ा, लेकिन उसमें घरेलू हिस्सेदारी लगातार घटती जा रही है। सितंबर तिमाही में कुल घरेलू डिपॉजिट 3.67 लाख करोड़ रुपए था, जो दिसंबर तिमाही में घटकर 1.73 लाख करोड़ रुपए रह गया।

3. करेंसी होल्डिंग्स में कमी आई

जब कोरोना की पहली लहर आई तो लोगों ने अपने पास करेंसी बढ़ा दी। जून तिमाही में ये 2.06 लाख करोड़ रुपए थी। सितंबर तिमाही में ये घटकर महज 17,225 करोड़ बची। दिसंबर तिमाही में केस बढ़े तो करेंसी होल्डिंग भी बढ़कर 91 हजार करोड़ हो गई।

4. लाइफ इंश्योरेंस फंड्स बढ़ गया

महामारी आने के बाद इंश्योरेंस इंडस्ट्री में बड़े बदलाव देखने को मिले। लाइफ इंश्योरेंस फंड जून तिमाही में 1.23 लाख करोड़ था। संक्रमण और मौतें बढ़ने के साथ सितंबर तिमाही में ये बढ़कर 1.42 लाख करोड़ हो गया। दिसंबर तिमाही में ये 1.56 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है।

5. म्यूचुअल फंड्स में निवेश बढ़ा

अप्रैल 2020 की शुरुआत में सेंसेक्स 28,265 अंकों पर था, जो इस वक्त 52 हजार पार है। स्टॉक मार्केट में भले सुधार हुआ हो, लेकिन स्टॉक मार्केट में घरेलू निवेश घट रहा है। जून तिमाही में परिवारों की इक्विटी होल्डिंग 18,599 करोड़ रुपए थी, जो सितंबर तिमाही में घटकर 8,291 करोड़ और दिसंबर तिमाही में 5,307 करोड़ रह गई। हालांकि म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा है। ये पहली तिमाही में जीडीपी के 0.3 प्रतिशत से बढ़कर तीसरी तिमाही में 1.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह वित्त वर्ष 2019-20 में 0.2 प्रतिशत और 2018-19 में 0.3 प्रतिशत था।

6. छोटी बचत योजनाओं में कोई बदलाव नहीं

पोस्ट ऑफिस और बैंकों की तमाम छोटी बचत स्कीम की दरें घटाने के बावजूद इनके फंड में कोई बदलाव नहीं आया है। स्मॉल सेविंग्स तीनों तिमाही में 75,879 करोड़ ही बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि इन स्कीम में लॉक-इन पीरियड होता है। निवेशक चाहते हुए भी बिना मेच्योरिटी के इन स्कीम से पैसा नहीं निकाल सकते।

7. घरेलू कर्ज में बढ़ोतरी

घरेलू कर्ज में टीवी, फ्रिज वगैरह के लिए गए कंज्यूमर लोन और बैंकों में कुछ गिरवी रखकर लिए गए लोन दोनों शामिल होते हैं। घरेलू कर्ज जून तिमाही में 1.38 लाख करोड़ रुपए था, जो दिसंबर तिमाही में बढ़कर 2.18 लाख करोड़ हो गया है।

महामारी के दौरान गोल्ड लोन में 33% उछाल

महामारी के दौरान एक साल में गोल्ड लोन में 33% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। RBI की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2020 में गोल्ड लोन 46,415 करोड़ रुपए था, जो मई 2021 में बढ़कर 62,101 करोड़ हो गया। मार्च 2020 से तुलना करें तो इसमें 86.4% की बढ़ोतरी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना काल में लोग कैश की कमी से जूझ रहे हैं।

1960 में घरेलू बचत GDP का 6.03% थी। इसके बाद लगातार पांच दशक तक ये हिस्सेदारी बढ़ती रही। 2008-09 में वैश्विक मंदी का भारत पर कम असर होने के पीछे भारतीयों की घरेलू बचत महत्वपूर्ण मानी गई थी, लेकिन 2020 के दशक में पहली बार घरेलू बजट में गिरावट दर्ज की गई है।

2019 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस और पॉलिसी के एक पेपर ने नोटबंदी और GST से जैसे फैसलों को हाउसहोल्ड सेविंग में कमी के लिए जिम्मेदार बताया। पेपर के मुताबिक इन दोनों फैसलों से माइक्रो, स्मॉल और मीडियम इंटरप्राइजेज को झटका लगा था। गौरतलब है कि घरेलू बचत में गैर-पंजीकृत छोटे बिजनेस की बचत भी शामिल होती है।

आइए, अब जानते हैं कि घरेलू बचत घटने से सरकार और आप की परेशानी कैसे बढ़ सकती है...

बचत न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत मायने रखती है। इससे निवेश करने के लिए पूंजी मिलती है, जो कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है।

HSBC के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, 'अगर किसी देश को टिकाऊ ग्रोथ चाहिए तो उसे निवेश की दर बढ़ानी होगी, लेकिन निवेश के लिए फंडिंग की जरूरत होती है। अगर घरेलू बचत में गिरावट आती है, तो सरकार को बाहरी सोर्स से फंड जुटाना होगा। ये फंड ऊंची ब्याज दरों पर आता है।'

इसका सबूत है कि इस वक्त भारत का कुल विदेशी कर्ज 41.4 लाख करोड़ रुपए है। 2009 में ये 16.1 लाख करोड़ रुपए था। ज्यादा कर्ज पर भारत को ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर कम पैसा खर्च होगा। ये आम आदमी की जिंदगी से सीधे जुड़े हुए हैं।

घरेलू बचत को प्रोत्साहन की जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि विकसित देशों की तरह हमारे यहां सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 82 देशों के सोशल मोबिलिटी इंडेक्स में भारत 76वें स्थान पर है। आप पैसे की बचत करेंगे तो मुश्किल वक्त में पैसा आपकी बचत करेगा।