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भास्कर इनडेप्थ:22 जुलाई से मास्टरकार्ड पर बैन का आपके डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर क्या होगा असर; विदेशी Visa और देसी RuPay में किसे ज्यादा फायदा होगा?

3 दिन पहलेलेखक: आदित्य द्विवेदी
  • 22 जुलाई से मास्टरकार्ड भारत में नए कस्टमर नहीं बना सकेगा
  • डेटा स्टोरेज से जुड़े नियम न मानने पर RBI ने बैन लगाया है

अगर आप डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो संभव है इस खबर से वाकिफ होंगे। 22 जुलाई से मास्टरकार्ड अब भारत में नए कार्ड जारी नहीं कर सकेगा। डेटा स्टोरेज से जुड़े नियम न मानने पर भारतीय रिजर्व बैंक ने ये बैन लगाया है। मास्टरकार्ड अमेरिका की कंपनी है, जिसकी भारत के कार्ड पेमेंट बाजार में 33% हिस्सेदारी है।

RBI की इस कार्रवाई के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मास्टरकार्ड नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहा है? जिनके पास पहले से मास्टरकार्ड, उन पर इस बैन से क्या असर पड़ेगा? भारत के बैंक कितना प्रभावित होंगे? इस बैन से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? मास्टरकार्ड को इससे कितना नुकसान है और क्या ये बैन हटाया जा सकता है?

भारत में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 नाम का एक कानून है। मास्टरकार्ड, वीजा और NPCI जैसी कंपनियां इसी कानून के तरत कार्ड नेटवर्क को ऑपरेट करती हैं। डेबिट और क्रेडिट कार्ड के फंड ट्रांसफर इन्हीं कंपिनियों के जरिए रूट होते हैं। इन पर नजर रखने के लिए RBI को पेमेंट अथॉरिटी बनाया गया है।

6 अप्रैल 2018 को RBI ने एक सर्कुलर जारी किया। इसमें सभी पेमेंट नेटवर्क कंपनियों को 6 महीने के अंदर सभी तरह का डेटा सिर्फ भारत में स्टोर करने के निर्देश दिए गए। इसे लागू करने के बाद कंपनियों को ऑडिट कराना था और RBI को रिपोर्ट सौंपनी थी।

इस सर्कुलर को जारी हुए तीन साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है। अप्रैल में RBI ने अमेरिकन एक्सप्रेस और डाइनर्स क्लब पर प्रतिबंध लगाया था। भारत में इनके ज्यादा कस्टमर नहीं हैं, इसलिए ज्यादा चर्चा नहीं हुई। अब मास्टरकार्ड पर बैन लगने के बाद बैंकिंग सेक्टर में उथल-पुथल मच गई है।

नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे विदेशी पेमेंट नेटवर्क?

मास्टरकार्ड जैसी पेमेंट फर्म का कहना है कि वो 100 से ज्यादा देशों में ऑपरेट करती हैं और उनका स्टोरेज सिस्टम सेंट्रलाइज्ड है। कंपनियों को डर है कि भारत में डेटा स्टोरेज ट्रांसफर करने के लिए उन्हें लाखों डॉलर खर्च करने पड़ेंगे। अगर भारत में ऐसा किया तो अन्य देश भी डेटा के लोकल स्टोरेज की मांग उठा सकते हैं।

ग्लोबल ऑपरेशंस वाली कार्ड फर्म RBI के नियमों को न मानने के पीछे खर्च, सुरक्षा को खतरा, अस्पष्टता और टाइमलाइन की दुहाई दे रही हैं। थिंक टैंक द डायलॉग के फाउंडिंग डायरेक्टर काजिम रिजवी के मुताबिक RBI का ये फैसला डेटा स्टोरेज से जुड़े कानून को प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम है।

पैसा बाजार डॉट कॉम के को-फाउंडर और CEO नवीन कुकेरजा कहते हैं, 'बैन लगाना आखिरी रास्ता है। इसका मतलब है कि RBI के साथ मास्टरकार्ड की बातचीत रुक गई है।'

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि वीजा ने RBI के नियमों का पालन करते हुए भारत में डेटा ट्रांसफर किया है या नहीं।

पुराने कस्टमर पर मास्टरकार्ड बैन से कितना असर?

पुराने कस्टमर जो मास्टर कार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस और डाइनर्स क्लब के क्रेडिट और डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर रहे हैं, वो पेमेंट के लिए इस्तेमाल करते रह सकते हैं। RBI के बैन का पुराने कस्टमर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां नए कस्टमर नहीं बना सकतीं, जब तक RBI बैन नहीं हटा लेता।

इस बैन से बैंकों को कितना नुकसान होगा?

इस बैन से यस बैंक, RBL बैंक और बजाज फिन्सर्व सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, क्योंकि इनकी पूरी कार्ड स्कीम मास्टरकार्ड से जुड़ी हुई थी। HDFC बैंक की 60% कार्ड स्कीम्स मास्टरकार्ड, डाइनर्स और अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़ी हैं। ICICI और एक्सिस बैंक के 35-36% कार्ड मास्टरकार्ड से जुड़े हैं।

नवीन कुकरेजा का कहना है, 'कुछ बैंकों को बिना गलती के नुकसान भुगतना पड़ सकता है। जैसे- यस और RBL बैंक का पूरा नेटवर्क मास्टरकार्ड पर आधारित है। अब Visa और RuPay जैसे नए नेटवर्क से करार करने और बैक-एंड सपोर्ट में कम से कम 8-10 हफ्ते लगते हैं।'

एक सीनियर बैंकर करते हैं कि बैंकों को फौरी तौर पर बिजनेस में नुकसान होगा। मास्टरकार्ड के लिए भी ये एक बड़ा झटका है। 2019 में मास्टरकार्ड ने भारत में पांच साल में 1 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी।

RBL ने एक बयान में कहा है कि RBI के आदेश के बाद वो वीजा के साथ एक करार कर रहे हैं, लेकिन इंटीग्रेशन में 10 हफ्ते का टाइम लग सकता है। RBL हर महीने करीब 1 लाख कार्ड जारी करता है, जो प्रभावित होगा। यस बैंक और सिटी बैंक भी मास्टरकार्ड छोड़कर दूसरे प्लेटफॉर्म में माइग्रेट करने का इवैल्युएशन कर रहे हैं।

इस बैन से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?

भारत में ज्यादातर बैंकों के पास चार तरह के डेबिट और क्रेडिट कार्ड होते हैंः- वीजा, मास्टरकार्ड, माएस्ट्रो और रूपे। नवीन कुकरेजा कहते हैं कि मास्टरकार्ड बैन से वीजा और रूपे जैसे वैकल्पिक नेटवर्क्स को फायदा होगा। बैंक नए करार करेंगे जिससे इनका मार्केट शेयर बढ़ेगा।

अशोक स्टॉक ब्रोकिंग में रिसर्च के हेड आशुतोष मिश्रा का कहना है कि मास्टरकार्ड बैन होने के बाद वीजा और रूपे ही दो बड़े चैनल बचते हैं। ज्यादातर बैंक अब एक से ज्यादा पेमेंट कंपनी के साथ करार कर रही हैं। अधिकांश पब्लिक सेक्टर के बैंक रूपे कार्ड ऑफर कर रहे हैं और प्राइवेट बैंक वीजा कार्ड ऑफर कर रहे हैं।

बैन का दूसरा बड़ा फायदा यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI को भी हो सकता है। इसे कार्ड के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है। UPI का पेमेंट प्रोसेस आसान, तेज और ज्यादा सिक्योर है। इसके साथ ही इसके जरिए पेमेंट पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज भी नहीं लगता है।

क्या ये बैन हटाया जा सकता है?

भारत में मास्टरकार्ड का रिसर्च और टेक्नोलॉजी सेंटर हैं, जहां 4,000 लोग काम करते हैं। ऑनलाइन पेमेंट एनालिस्ट एपी होटा का मानना है कि मास्टरकार्ड RBI गाइडलाइन मानने से इंकार नहीं कर रहा होगा, बल्कि इस प्राेसेस में देरी लग रही होगी। गाइडलाइन मानने के बाद मास्टरकार्ड से बैन हटाया जा सकता है। नवीन कुकरेजा कहते हैं कि अगर 4-5 महीने में बैन हट गया तो कंपनी पर ज्यादा असर नहीं होगा, लेकिन अगर ये बढ़ा तो मार्केट से एक बड़ी हिस्सेदारी चली जाएगी।

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