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एक्सपर्ट एनालिसिस:कोरोना की दूसरी लहर के पीछे क्या डबल म्यूटेंट वायरस है? यह इतनी तेज रफ्तार से क्यों फैल रहा है?

नई दिल्ली14 दिन पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
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भारत में महाराष्ट्र से शुरुआत करने वाला कोरोना का डबल म्यूटेंट स्ट्रेन अब दुनिया के 17 देशों में पहुंच चुका है। विदेशों में इसे इंडियन स्ट्रेन भी कहा जा रहा है। सेकेंड वेव में भारत संक्रमण की जिस तेज रफ्तार से जूझ रहा है, उसे देखते हुए डबल स्ट्रेन वायरस पर चर्चा तेज हो गई है। एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि यह नया स्ट्रेन संक्रमण की रफ्तार को तेजी से बढ़ाने वाला है। अभी इस नए स्ट्रेन पर बड़े स्तर पर स्टडी नहीं हुई है।

भारत में आई कोरोना की सेकेंड वेव में संक्रमण की तेज रफ्तार के पीछे क्या यह डबल म्यूटेंट स्ट्रेन है? यह कितना घातक है? नए स्ट्रेन पर कितनी रिसर्च हुई है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के डायरेक्टर और वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) गोरखपुर के डायरेक्टर डॉ. रजनीकांत से बातचीत की, पढ़िए उसके प्रमुख अंश..

क्या सेकेंड वेव के इतना तेज होने के पीछे डबल स्ट्रेन वायरस B.1.617 का हाथ है?
डॉ. रजनीकांत-
देखिए शुरुआती शोध यह तो बता चुके हैं कि इस नए स्ट्रेन की संक्रमण दर बहुत ज्यादा है। लेकिन सेकेंड वेव में संक्रमण दर के इतने तेज होने के पीछे यही एक फैक्टर नहीं है, बल्कि दूसरे अन्य फैक्टर भी हैं। जैसे लोगों का कोविड गाइडलाइंस को फॉलो न करना। दरअसल हुआ यह कि फर्स्ट वेव के बाद लोगों को लगा कि अब हम उबर चुके हैं। लोग लॉकडाउन की वजह से उकताए भी थे। लॉकडाउन हटते ही बिना रोक-टोक लोगों ने घुलना मिलना शुरू कर दिया। उधर, कुंभ और चुनाव में भी खूब भीड़ बढ़ी। इस नए वैरिएंट के संक्रमण की दर को इन सब कारकों ने हवा देने का काम किया।

प्रो. शहीद जमील- सेकेंड वेव के पीछे करोना का नया वैरिएंट वजह है, अभी इसका कोई प्रमाण हमारे पास नहीं, इसलिए कुछ कहना संभव नहीं। लेकिन, यह संभव है कि नए वैरिएंट का सेकेंड वेव को तेज करने में बड़ा योगदान हो। एक बात पक्के तौर पर कही जा सकती है कि सेकेंड वेव के पीछे लोगों का कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर यानी कोविड गाइडलाइन का पालन न करना एक बड़ा कारक है।

कितना घातक है यह?
प्रो. शाहिद जमील और डॉक्टर रजनीकांत- बिना बड़े स्तर पर शोध हुए कुछ नहीं कहा जा सकता।

इस पर अब तक कोई रिसर्च हुई है?
डॉ. रजनीकांत-
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलोजी ने (NIV) ने 1 जनवरी से मार्च के बीच इकट्ठा किया एक डेटा महाराष्ट्र की लैब्स के साथ साझा किया है। उन्होंने 361 नमूने इकट्ठा कर वायरस का जीनोम सिक्वेंसिंग यानी जेनेटिक कैरेक्टर डेटा इकट्ठा किया। इसमें से 220 सैंपल्स में डबल म्यूटेंट यानी देसी स्ट्रेन B.1.617 पाया गया। यानी 61 फीसद सैंपल में यह नया वैरिएंट पाया गया, लेकिन यह शोध अभी बहुत छोटे स्तर पर किया गया है। इस नए वैरिएंट पर शोध के लिए बड़े स्तर पर सैंपल इकट्ठा करने और उसके जेनेटिक कैरेक्टर को जानने की जरूरत है। तभी सटीक तौर पर यह कहा जा सकता है कि इसकी संक्रमण दर कितनी है, यह कितना घातक है?

इस वायरस का स्ट्रक्चर कैसा है?
प्रो. शाहिद जमील-
वायरस के इस वेरिएंट में दो म्यूटेशन हुए हैं। E484Q और L452R दोनों ही म्यूटेशन अलग-अलग कोरोना वायरस के कई वैरिएंट में पाए जाते हैं, लेकिन भारत में पहली बार एक ही वेरिएंट में दो म्यूटेशन पाए गए। दोनों म्यूटेशन वायरस की स्पाइक प्रोटीन, यानी वायरस का वह हिस्सा जो मानव शरीर में अंदर घुसने में मदद करता है, में हुए हैं। यह प्रोटीन मानव शरीर में घुसने में मदद करती है। इसमें पहला म्यूटेशन यूनाइटेड किंगडम में पाए जाने वाले वाले वैरिएंट B.1.1.7 और दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले वैरिएंट B.1.351 में हुए E484K म्यूटेशन के समान है।

जबकि दूसरा म्यूटेशन L452R कैलिफोर्निया में पाए गए वैरिएंट B.1.427 और B.1.429 में हुए म्यूटेशन के समान है। संभव है संक्रमण की दर को कई गुना बढ़ाने का काम यही प्रोटीन करता है। ये दोनों म्यूटेशन अलग-अलग इतने घातक नहीं हैं, लेकिन इनका कॉम्बिनेशन इन्हें मानव शरीर में घुसने और तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने में मददगार है। यह भी संभव है कि यह वायरस एंटीबॉडी को भी धोखा देने में सक्षम हो, लेकिन अभी जब तक इस पर बड़े स्तर पर शोध नहीं होते तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं।

आने वाला समय कितना चुनौतीपूर्ण
प्रो. शाहिद जमील-
अभी तक का अनुभव यही बता रहा है कि यह स्ट्रेन संक्रमण तेजी से फैला रहा है। हालांकि बड़े स्तर पर स्टडी के बाद ही यह सामने आएगा की पहले से मौजूद वायरस के मुकाबले यह कितनी गुना तेज संक्रमण फैलाता है। भारत पहले से ही वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। इसमें अगर इस वायरस का हाथ है तो फिर आने वाला समय चुनौतियों से भरा होगा।

डॉ. रजनीकांत- म्यूटेशन होना वायरस का जनरल कैरेक्टर है। लेकिन कुछ म्यूटेशन खतरनाक होते हैं। फिलहाल यह नया स्ट्रेन सबकी चिंता का सबब बना हुआ है। ट्रांसमिशन रेट के साथ अगर जानलेवा भी है तो फिर चुनौती बड़ी होगी।

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