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बात बराबरी की:हुजूर... औरत मां है, किसी सितार का तार नहीं; जिसे जब चाहा, मन मुताबिक खींचकर चुस्त कर दिया

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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फरवरी में करीना कपूर दोबारा मां बनीं। बच्चा कुल जमा साढ़े 4 महीने का हुआ। मां ताजा-ताजा सिजेरियन डिलीवरी से उठी हुई, लेकिन लोग चाहते हैं, उसका पेट सितार के तार की तरह कस जाए। बांहें पहली-सी सुडौल और कमर, युवा-अनब्याही करीना जितनी पतली दिखे। त्वचा नए कांच-सी पारदर्शी और चेहरा कमसिन हो ताकि जब स्क्रीन पर आए तो आंखों को भरपूर ताप मिले।

इधर करीना अपने मातृत्व सुख में इतनी भरी-भरी हैं कि उन्हें इसकी खास परवाह नहीं। इंस्टाग्राम पर योगा करती करीना की तस्वीर, असल में एक मां की तस्वीर है। डिलीवरी के बाद टांकों के दर्द से हाल में राहत पाई। उनींदी और थकी हुई। लेकिन औरत का थकना मना है, खासकर जब बात ताजगी और वजन की आए। लिहाजा करीना जमकर ट्रोल हो रही हैं।

सूजे चेहरे और आंखों वाली एक्ट्रेस ने फैंस को अपनी खैर-खबर देने से इरादे से तस्वीर डाली होगी, लेकिन लोगों को उनका ये रूप रास नहीं आया। वे तस्वीर पर भद्दे-भद्दे कमेंट कर रहे हैं। कोई चेहरे की सूजन पर तमंचा ताने है तो कोई तस्वीर को ही इंची-टेप से मापते हुए उन्हें मोटी बता रहा है। करीना अब मोटी हैं और किसी काम की नहीं।

वजनी औरत का केवल मजाक उड़ सकता है। या फिर किसी के दिल में झेलम-चिनाब का पानी हरहरा रहा हो तो वह उसे दया से देख सकता है। बेचारी औरत। अपने ही वजन तले खत्म हो जाएगी। औरत के शरीर पर चर्बी की कितनी परतें होनी चाहिए- इसका पूरा हिसाब किताबों में है। साथ में इसकी जिद भी मिलेगी कि वह वक्त के चाहे जितने थपेड़े झेल ले, चेहरा एकदम कसा हुआ हो। कविता-कहानियों की किताबों से होते हुए स्त्री के चिरयुवा होने का ये आग्रह दुनिया के हर कोने तक चला गया।

मर्दों की कनपटी पर झांकते सफेद बाल, या आंखों के कोरों पर पड़ती लकीरें उसे तजुर्बेदार बनाती हैं। पेट के परतदार होने या फिर बालों के घटने से उसकी जेब वजनदार दिखती है। यानी कुल मिलाकर पुरुष का तजुर्बा उसकी मांग बढ़ाता है। जबकि औरत के पास शरीर से परे कुछ बाकी ही नहीं। वह इतनी जवान है कि बूढ़ा होने की कल्पना भी उसे डराती है। इतनी हसीन कि एक दाग भी रतजगे का कारण बन सकता है। हद तो ये है कि मां बनने या उसके बाद बढ़े हुए वजन को भी लोग घेरे में लेने लगे।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट में ऐसी औरतों का जिक्र है, जिन्हें गर्भवती होने पर बधाइयों की बजाए बढ़े हुए वजन पर टिप्पणी मिली। स्टडी के मुताबिक, 21% गर्भवती औरतों को 'मोटापे' पर ताने सुनने के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि परिवार में ही कोई न कोई ऐसा 'मजाक' कर देता है। तकरीबन 25% महिलाओं ने कहा कि उन्हें टीवी या फिल्मों पर दुबली-पतली हीरोइनों को देखकर डर लगा रहता है कि प्रेग्नेंसी के बाद उनका छरहरापन चला न जाए। वहीं 33% ने साफ कहा कि परिवार, दोस्तों से लेकर दफ्तर और अनजान लोग तक वजनी औरतों को कमतर और कमअक्ल मानते हैं।

पहले से ही वजनी महिलाओं के साथ मुश्किल और ज्यादा है। उन्हें लगातार बताया जाता है कि वे प्रेग्नेंट होने के लिए काफी मोटी हैं। या फिर वे बच्चा इसलिए न करें कि उनका बच्चा भी उनकी ही तरह भारी-भरकम निकलेगा।

इसका असर दूर तक जाता है। गर्भवती खाने-पीने में कटौती करने लगती हैं, जिससे उसकी सेहत के साथ बच्चे की सेहत भी खतरे में आ जाती है। दूसरा असर ज्यादा डायरेक्ट है, जिसका ताल्लुक गर्भ में बढ़ते भ्रूण के दिमाग से है। मां जितना तनाव लेती है, बच्चे का इम्यून सिस्टम उतना कमजोर होता जाता है। ऐसे में हो सकता है कि शिशु दिमागी तौर पर पूरी तरह से विकसित न हो। या फिर जन्म के साथ कई बीमारियों से घिरा हो। जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में आई ये स्टडी खासतौर से उन मर्दों और परिवारों को ध्यान में रखकर की गई, जिनका मां की सेहत से कोई लेना-देना नहीं, लेकिन बच्चा जो भरपूर सेहतमंद चाहते हैं।

वैसे बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान 12 से 16 किलो तक वजन बढ़ना सामान्य है। ये अतिरिक्त वजन नहीं, बल्कि गर्भ में पलते शिशु की जरूरत है। यही वजह है कि गर्भवती का वजन उम्मीद के मुताबिक न बढ़ने पर डॉक्टर परेशान हो उठते हैं।

बच्चे की आस में ही सही, समाज ने इन नौ महीनों के लिए ‘मोटी औरत को सहना’ स्वीकार कर लिया। नौ महीने। मियाद पूरी होते ही उसे अपने शरीर से वजन ऐसे हटाना है, जैसे कपड़े उतारे जाते हैं। ये और बात है कि खुद मेडिकल साइंस के अनुसार, वजन, बच्चे के जन्म के अगले 6 से 12 महीनों में घटाया जाना चाहिए। लेकिन फिर वही डर आता है कि सालभर मोटी औरत नजर के सामने रहेगी तो मर्दाना सौंदर्यबोध भोथरा न हो जाए! तो लीजिए साहब, इतने ताने दो कि औरत खुद ही पेट पर पट्टा बांध ले।

ग्रीक दुनिया, जिसे आज भी इतिहासकार जहां-तहां उठा लाते हैं, दरअसल वहीं से स्त्री पर खूबसूरत और कमनीय काया का दबाव शुरू हुआ। यूनानी प्रेम की देवी अफ्रोडायट की मूर्तियां ग्रीस में हर ओर सज गईं। खूबसूरत नोंक-पलक वाली ये स्त्री सुराहीदार गर्दन और नशीली आंखों वाली थीं, जिसकी कमर से नीचे का हिस्सा बेहद भारी था। ग्रीस पुरुष इसी कद-काया वाली औरतें खोजने लगें। वही औरत राजसी सुख भोगती और वही वंश चलाती। बेडौल औरतें केवल क्षणिक सुख के लिए पोसी जातीं।

यूनानी चलन का असर दुनिया के हर कोने, और तकरीबन हर पुरुष तक गया। हजारों साल फर्लांगते हुए ये हमारी पीढ़ी में तक में रच-बस गया। करीना की ट्रोलिंग कोई नया मामला नहीं, उनके पहले ऐश्वर्या राय थीं और लारा दत्ता भी। इन सबके बीच अच्छी खबर ये है कि करीना किसी कंदरा में कैद नहीं हुईं। वे बढ़े हुए वजन और अधमुंदी आंखों के साथ सबके सामने हैं। लो देखो, मैं मां हूं। एक औरत। एक शरीर। किसी सितार का तार नहीं, जिसे जब चाहा, खींचकर चुस्त कर दिया।

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