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देश की पहली कॉर्पोरेट पंचायत से रिपोर्ट:जिस केरल में दुनिया की पहली कम्युनिस्ट सरकार चुनी गई, वहां अब पहली बार कॉर्पोरेट पार्टी ट्वेंटी-ट्वेंटी 14 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

एर्नाकुलमएक वर्ष पहलेलेखक: गौरव पांडेय

जिस केरल में 1957 में बैलेट से दुनिया की पहली कम्युनिस्ट सरकार चुनी गई थी, उसी केरल में इस विधानसभा चुनाव में पहली बार कॉर्पोरेट पॉलिटिक्स की एंट्री होने जा रही है। इसकी शुरुआत वैसे 5 साल पहले ही हो गई थी, जब 2015 में पहली बार कोच्चि से करीब 25 किमी दूर किझाकम्बलम पंचायत के लोगों ने LDF और UDF को नकार कर नई तरह के पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन ट्वेंटी-ट्वेंटी को जिता दिया था। अब यह ऑर्गेनाइजेशन बाकायदा एक राजनीतिक पार्टी बन चुका है और इस विधानसभा चुनाव में 10 से 14 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। पार्टी के चीफ कोऑर्डिनेटर और बिजनेसमैन के साबू एम जैकब ने विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना और अपनी पार्टी के बारे में दैनिक भास्कर से बातचीत की।

2015 में पहली बार कॉर्पोरेट कंपनी की बनाई पार्टी पंचायत चुनाव में उतरी

ट्वेंटी-ट्वेंटी की पॉलिटिकल कहानी 2015 से शुरू होती है, तब यहां हुए लोकल बॉडी के चुनाव में किझाकम्बलम पंचायत के 19 वार्ड में से 17 में ट्वेंटी-ट्वेंटी को जीत मिली और पंचायत पर उसका कब्जा हो गया, लेकिन ऐसा एक दिन में नहीं हुआ था। किटेक्स (Kitex) गारमेंट्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी ने पहले इस पंचायत को गोद लिया और यहां विकास और जन सुविधाओं से जुड़े काम करने शुरू किए।

इसके बाद 2015 में पंचायत चुनाव आने पर कंपनी ने ट्वेंटी-ट्वेंटी नाम से राजनीतिक संगठन बनाया और अपने उम्मीदवार उतारे। चुनाव में संगठन को बड़ी जीत मिली। पंचायत चुनाव में जीत के बाद किझाकम्बलम पंचायत के प्रशासन को ट्वेंटी-ट्वेंटी ने कॉर्पोरेट तरीके से चलाना शुरू किया। एर्नाकुलम जिले में पंचायत संचालन का यह मॉडल इतना लोकप्रिय हुआ कि दिसंबर 2020 में हुए लोकल बॉडी चुनाव में इस पार्टी ने किझाकम्बलम समेत 4 अन्य पंचायतों पर भी अपने प्रत्याशी उतारे और जीत भी दर्ज की।

पंचायत के अंदर गरीबों के लिए ट्वेंटी-ट्वेंटी ने गॉड्स विला के नाम से चार कॉलोनियां बनाई हुई हैं, हर एक में 30 से 40 घर बनाए गए हैं।
पंचायत के अंदर गरीबों के लिए ट्वेंटी-ट्वेंटी ने गॉड्स विला के नाम से चार कॉलोनियां बनाई हुई हैं, हर एक में 30 से 40 घर बनाए गए हैं।

किझाकम्बलम पंचायत नहीं, मिनी सिटी लगता है

केरल में पंचायतों का आकार उत्तर भारत से बड़ा होता है। एक पंचायत में 45 से 70 हजार तक वोटर्स होते हैं। किझाकम्बलम पंचायत की बात करें तो यह कहीं से पंचायत नजर नहीं आती है, बल्कि ऐसा लगता है कि यह कोच्चि शहर की कोई मिनी सिटी है। पंचायत की मुख्य सड़क पर एक मिनी बस स्टॉप है, जिस पर कुछ यात्री बस के इंतजार में बैठे हैं। सामने फूलों की सुंदर क्यारी है। बगल में कुछ कंस्ट्रक्शन का काम भी चल रहा है। पंचायत के अंदर घुसते ही एक सुपर मार्केट दिखाई देती है। पूछने पर पता चलता है कि यह मार्केट पंचायत के लोगों के लिए बनाई गई है। यहीं से वो अपनी रोजमर्रा की खरीदारी करते हैं। इसी दौरान मुझे फोटो खींचते हुए देखकर सिक्युरिटी गार्ड दौड़े-दौड़े आते हैं, कहते हैं आप फोटो नहीं ले सकते। अनुमति लेने की बात बताने पर वो वापस चले जाते हैं।

पंचायत में सुपर मार्केट से आधे दाम पर मिलता है हर सामान

सुपर मार्केट 1300 स्क्वॉयर मीटर इलाके में बना हुआ है। मार्केट के अंदर-बाहर अच्छी-खासी भीड़ है। अंदर मछली, चिकन, सब्जी और दूध से लेकर दाल, तेल, मसाला सबकुछ उपलब्ध है। मार्केट में ही सामने खरीदने आए चंद्रेश कहते हैं कि यहां मुझे बस राशन कार्ड दिखाने से ही आधे दाम पर कोई भी सामान मिल जाता है। आधा लीटर दूध मैंने 6 रुपए में लिया है। मार्केट के बाहर बड़ी संख्या में मिनी ट्रकों से सामान उतर रहा है।

इसी दौरान मेरी मुलाकात इस पंचायत को चलाने वाली ट्वेंटी-ट्वेंटी के लिए काम करने वाले शिनॉय से होती है। वो मुझे पंचायत और अंदर गांवों को दिखाने ले जाते हैं। यहां तकरीबन हर सड़क पक्की है, साफ-सुथरा जगहें और पक्की नहरें हैं। शिनॉय बताते हैं कि पंचायत के अंदर गरीबों के लिए ट्वेंटी-ट्वेंटी ने गॉड्स विला के नाम से चार कॉलोनियां बनाई हुई हैं, हर एक में 30 से 40 घर बनाए गए हैं। इन्हें गरीबों को उन्हीं की जमीनों पर फ्री में बनाकर दिया गया है। पहले ये लोग यहां झुग्गी-झोपड़ियों में रहते थे। गॉड्स विला किसी प्राइवेट कॉलोनी से कम नहीं दिखते हैं। पंचायत में आंगनबाडी केंद्र और स्कूल भी हैं, लेकिन ये अभी कोरोना के चलते बंद हैं।

ये पंचायत में स्थित ट्वेंटी-ट्वेंटी सुपर मार्केट है। यहां हर सामान आधे दाम पर मिलता है, लेने के लिए सिर्फ राशन कार्ड दिखाना होता है।
ये पंचायत में स्थित ट्वेंटी-ट्वेंटी सुपर मार्केट है। यहां हर सामान आधे दाम पर मिलता है, लेने के लिए सिर्फ राशन कार्ड दिखाना होता है।

मलयाली बिजनेस मैन जैकब ने बनाई है ट्वेंटी-ट्वेंटी

अब बात ट्वेंटी-ट्वेंटी के बनने की। हमारी मुलाकात ट्वेंटी-ट्वेंटी के फाउंडर किटेक्स (Kitex) गारमेंट्स लिमिटेड और अन्ना ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर साबू एम जैकब से होती है। जैकब उन एक मलयाली बिजनेस मैन में से एक हैं, जो हर साल हुरुन लिस्ट ऑफ बिलेनियर में शामिल होते हैं। इस कंपनी को उनके पिता ने यहीं किझाकम्बलम में महज 8 कर्मचारियों के साथ शुरू किया था। फिलहाल इसमें 12,500 से ज्यादा कर्मचारी हैं और इनमें से ज्यादातर इसी पंचायत में काम करते हैं। कंपनी का सालाना टर्नओवर 1000 करोड़ रुपए है।

साबू इसी किझाकम्बलम पंचायत में एक महलनुमा बिल्डिंग में रहते हैं। बिल्डिंग से सटी हुई फैक्ट्री भी है। साबू मिलते ही पूछते हैं,"और हमारी पंचायत कैसी लगी?" बातचीत शुरू होती है तो कहते हैं, हमारा यहां काम करने का तरीका एकदम अलग है। सरकार किसी प्रोजेक्ट को किसी तरह से पूरा करने के मकसद से काम करती है, जबकि हमारा एप्रोच बिल्कुल अलग है। ट्वेंटी-ट्वेंटी का मकसद किसी भी प्रोजेक्ट को करप्शन फ्री रखने के साथ डिसिप्लिन और साइंटिफिक स्टडी के जरिए पूरा करना होता है।

दूसरे फेज में रेवेन्यू टॉवर्स, स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं पर फोकस

साबू बताते हैं कि पहले इस पंचायत में जो भी काम होता था, उसमें 60% पैसा ऑफिसर, पॉलिटिशियन, कांट्रेक्टर के बीच में बंट जाता था, सिर्फ 40% इस्तेमाल होता था, लेकिन पिछले 4-5 साल में ट्वेंटी-ट्वेंटी ने यहां जितने काम कराए हैं, उसमें 100% पैसे का इस्तेमाल काम में हुआ, किसी भी काम में पैसे की कमी नहीं हुई। यहां हमने सबसे पहले लोगों की बेसिक जरूरतों को पूरा करने का काम किया, जैसे पीने का पानी, अच्छी सड़क, एजुकेशन आदि। इसीलिए पंचायत में आप बदलाव देख सकते हैं।

अब दूसरे फेज में यहां के लोगों के लिए लग्जरी सुविधाओं की व्यवस्थाओं पर फोकस कर रहे हैं, जैसे शॉपिंग मॉल, स्विमिंग पूल, हेल्थ सेंटर्स, रेवेन्यू टॉवर्स, सिनेमा आदि।

पंचायत कर्ज मुक्त हो गई है

साबू बड़े विश्वास के साथ कहते हैं, 'अगले 10 साल में यहां जन सुविधाओं से जुड़ी हर चीज होगी। फिर किसी भी वेलफेयर के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत भी नहीं होगी। यह सिर्फ यहीं नहीं, पूरे देश के हर पंचायत में हो सकता है, बस जरूरत लॉन्ग टर्म प्लानिंग, साइंटिफिक स्टडी, करप्शन फ्री वर्क और गैरजरूरी खर्चों को बंद करने की है। जब 2015 में पंचायत की जिम्मेदारी ट्वेंटी-ट्वेंटी ने ली तो इस पर 39 लाख रुपए का कर्ज था, लेकिन 5 साल में ही हमने कर्ज को खत्म करके 13.57 करोड़ रुपए बैंक में जमा कर दिए।'

सरकारी तरीके से ही चलती है पंचायत

तस्वीर पंचायत के आंगनबाड़ी भवन की है। यह किसी आलीशान भवन की तरह लग रहा है। कोरोना के चलते अभी बंद है।
तस्वीर पंचायत के आंगनबाड़ी भवन की है। यह किसी आलीशान भवन की तरह लग रहा है। कोरोना के चलते अभी बंद है।

क्या पंचायत के अपने कोई निजी नियम और कायदे भी हैं? इस पर साबू कहते हैं, 'पंचायत के लिए सरकारी नियम-कायदे वैसे ही हैं, जैसे बाकी पंचायतों के लिए होते हैं। हम भी सरकार के नियमों के तहत ही काम करते हैं। हम सिर्फ चुनाव जीतकर इस पंचायत का प्रशासन चलाते हैं, जैसे अन्य पंचायतों को LDF, UDF और BJP चलाती हैं। बस हमारे काम करने का तरीका उनसे अलग है।' किझाकम्बलम पंचायत में 19 वार्ड हैं, इनमें करीब 12 हजार परिवार और 48 हजार लोग रहते हैं।

सरकार जैसे हर पंचायत और वॉर्ड के लिए पैसे देती है, वैसे यहां के लिए भी देती है। यहां विकास के जो भी काम हुए हैं, सरकारी पैसे से ही हुए हैं। क्या कंपनी अपनी ओर से भी कुछ पैसे पंचायत पर खर्च करती है? इस सवाल पर साबू कहते हैं, 'कंपनी के कॉर्पोरेट फंड का इस्तेमाल पंचायत के लोगों के व्यक्तिगत फायदे जैसे फूड सब्सिडी, उपचार आदि के लिए लिए करते हैं, लेकिन उसका पंचायत के खर्च से कोई मतलब नहीं है।'

ट्वेंटी-ट्वेंटी पांच पंचायतों में चुनाव लड़ी थी, चार में जीतने में कामयाब रही

साबू बताते हैं कि हाल ही में हुए लोकल बॉडी चुनाव में हम आसपास की 4 अन्य पंचायतों पर भी चुनाव लड़े थे। इनमें से 3 पंचायत में हमें बड़ी जीत मिली। एक में हम सिर्फ 8 वार्ड ही जीत पाए, लेकिन वहां हम सभी सीटों पर लड़े भी नहीं थे। किस तरह ट्वेंटी-ट्वेंटी के प्रत्याशी चुनते हैं? इस सवाल पर साबू कहते हैं कि हमारे सभी प्रत्याशी पढ़े-लिखे थे। 65% पोस्ट ग्रेजेएट, 30% ग्रेजुएट और 5% के पास डिप्लोमा होल्डर थे। प्रत्याशियों को चुनने का काम ट्वेंटी-ट्वेंटी की वार्ड कमेटी करती है।

'इस बार 10 से 14 सीटों पर लड़ेंगे, अगली बार सभी 140 सीटों पर'

क्या विधानसभा चुनाव में भी ट्वेंटी-ट्वेंटी के प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे? इस सवाल पर साबू कहते हैं कि हां, बिल्कुल इसके लिए हमारा एर्नाकुलम में मेंबरशिप कैंपेन भी चल रहा है। एर्नाकुलम जिले में 14 सीटें हैं, कम से कम 10 सीटों पर तो लड़ेंगे ही, अच्छा रिस्पांस आया तो सभी 14 सीटों पर भी लड़ सकते हैं।

केरल चुनाव में मुद्दों के सवाल पर साबू कहते हैं, राज्य के लोग UDF, LDF से ऊब गए हैं, उन्हें बदलाव चाहिए, क्योंकि एक बार LDF , दूसरी बार UDF आ जाती है और कोई ऑप्शन ही नहीं है। लोग यहां ऑप्शन ढूंढ रहे हैं, इसीलिए पंचायत चुनावों में ट्वेंटी-ट्वेंटी के उम्मीदवार जीते भी। विकास, वेलफेयर, करप्शन ही बड़े इश्यू हैं।

ट्वेंटी-ट्वेंटी का फ्यूचर रोडमैप पर क्या है? इस पर साबू कहते हैं कि फिलहाल हमारा प्लान 2025 में राज्य की सभी पंचायतों पर चुनाव लड़ने का है। यदि इस चुनाव में भी हमें जनता का समर्थन मिला तो 2026 के विधानसभा चुनाव में ट्वेंटी-ट्वेंटी सभी 140 सीटों पर लड़ेगी।

राज्य में किसकी सरकार बनेगी? इस पर साबू कहते हैं, 'अभी कुछ भी नहीं कह सकते हैं, पिछले साल तक लगता था कि LDF ही अबकी बार कंटीन्यू करेगी, लेकिन अब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। खासकर तब से जब राहुल गांधी लगातार राज्य के दौरे कर रहे हैं। 50-50 मुकाबला है। हमसे सभी पार्टियां सपोर्ट के लिए संपर्क कर रही हैं।'

क्या ट्वेंटी-ट्वेंटी केरल की आम आदमी पार्टी बन सकती है? इस पर साबू मुस्कराते हुए कहते हैं कि मैं कुछ नहीं कह सकता हूं, अगर पब्लिक चाहेगी तो ऐसा जरूर होगा।

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