भास्कर रिसर्चजालियांवाला बाग की तरह सिओल भी खून से रंगा था:साउथ कोरिया में 1919 में दमन से भड़की चिंगारी, 15 अगस्त ही आजादी का दिन

एक महीने पहले
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15 अगस्त को हम अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। ठीक इसी दिन पांच और देशों में भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। अफ्रीकी देश कॉन्गो, यूरोपीय देश लिक्टेनस्टाइन, मिडिल ईस्ट के बहरीन, नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया भी अपना स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को ही मनाते हैं। कॉन्गो और बहरीन की आजादी अपेक्षाकृत नई है। लिक्टेनस्टाइन ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच एक बहुत छोटा सा देश है जो 1866 में जर्मन फेडरेशन से अलग हुआ था। दोनों कोरियाई देश 1945 में यानी भारत से दो साल पहले जापान से आजाद हुए थे। साउथ कोरिया के लिए सिर्फ स्वतंत्रता दिवस ही नहीं, आजादी के संघर्ष की एक घटना भी भारत के समानता का अजब संयोग दिखाती है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जालियांवाला बाग की घटना ऐसी थी जिसने कितने दिलों में आजादी की चाह एक आग की तरह जला दी थी। 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के छोटे से जालियांवाला बाग में अंग्रेजी फौज ने जिस तरह भारतीयों का दमन किया, उसे कोई नहीं भुला सकता।

संयोग ये है कि इसके ठीक 17 दिन बाद यानी 1 मार्च, 1919 को साउथ कोरिया में शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों पर जापानी फौज ने भी कहर बरपाया था। साउथ कोरिया के सियोल में मुख्य प्रदर्शन हुए थे जहां जापानी फौज ने सड़कों पर लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। एक आकलन के मुताबिक उस दिन साउथ कोरिया में 7,500 लोगों को मारा गया, 15 हजार से ज्यादा घायल हुए थे और 40 हजार से ज्यादा को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना के बाद कोरिया में आजादी की चाह इतनी मजबूत हो गई कि देश से बाहर रहकर भी क्रांतिकारियों ने जंग जारी रखी। अंतत: 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के सरेंडर के बाद कोरिया को आजादी मिली, लेकिन यह दो हिस्सों में विभाजित भी हो गया।

जालियांवाला बाग ने हमें उधम सिंह दिया तो साउथ कोरिया को यू ग्वानसुन

कोरिया में क्रांति का चेहरा बन गईं यू ग्वानसुन।
कोरिया में क्रांति का चेहरा बन गईं यू ग्वानसुन।

जालियांवाला बाग कांड ने भारत को उधम सिंह जैसा क्रांतिकारी दिया, जिसने ब्रिटेन जाकर इस हत्याकांड के जिम्मेदार डायर को गोली मारी। वहीं साउथ कोरिया में पहली मार्च के आंदोलन ने यू ग्वानसुन जैसी क्रांतिकारी को जन्म दिया। उस दिन के प्रदर्शन में शामिल 16 साल की ग्वानसुन के माता-पिता को जापानी सैनिकों ने गोली मार दी थी। ग्वानसुन को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें अपराध स्वीकार करने पर कम सजा मिलती, मगर उन्होंने कभी भी अपने काम को गलत नहीं माना। उन्हें 5 साल की जेल हुई। जेल में भी उन्होंने प्रदर्शन जारी रखे। 1 मार्च, 1920 में जेल के साथियों को लेकर मार्च निकाला। उन्हें इसके लिए भीषण यातनाएं दी गईं। अंतत: 28 सितंबर, 1920 को सिर्फ 17 साल की उम्र में टॉर्चर के कारण उनकी मौत हो गई। साउथ कोरिया में आज भी यू ग्वानसुन को ‘बिग सिस्टर’ बुलाया जाता है।

भारत में सुधार की रफ्तार तेज

साउथ कोरिया ने आर्थिक तरक्की में 77 वर्षों में भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है। मगर भारत में अभी सुधार की रफ्तार तेज है।

  • प्रति व्यक्ति आय साउथ कोरिया में करीब 25 गुना ज्यादा है। मगर 2016 के मुकाबले 2020 में प्रति व्यक्ति आय बढ़ने की दर भारत में करीब 60% रही। जबकि साउथ कोरिया में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी 8.4% ही रही।
  • सेकेंडरी स्कूल एनरोलमेंट के मामले में भी साउथ कोरिया हमसे बेहतर है। मगर 2016 के मुकाबले 2019 के आंकड़े देखें तो भारत में एनरोलमेंट 48 से बढ़कर 50% हुआ है। दूसरी ओर साउथ कोरिया में यह 93.7% से गिरकर 91.3% हो गया है, यानी एनरोलमेंट घटा है।

कई उपलब्धियां हमने पहले हासिल कीं

आजादी के बाद से साउथ कोरिया की प्रगति तेज रही है। हालांकि, कुछ उपलब्धियां ऐसी भी हैं जो हमने पहले हासिल कीं। राजनीतिक मोर्चे पर भारत में सरकार की प्रमुख के तौर पर पहली बार महिला का चुनाव 1966 में हुआ था, जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी थीं। साउथ कोरिया के संवैधानिक ढांचे में राष्ट्रपति ही सरकार का मुखिया होता है जिसे जनता सीधे चुनती है। साउथ कोरिया को एक महिला राष्ट्रपति चुनने में 68 साल लग गए। वहां 2013 में पार्क गुएन-हाइ पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।

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