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आज की पॉजिटिव खबर:UPSC की तैयारी छोड़ अनुभव ने दोस्त के साथ मिलकर चाय बेचनी शुरू की, आज देशभर में 165 आउटलेट्स; सालाना 100 करोड़ टर्नओवर

इंदौरएक वर्ष पहलेलेखक: मेघा

भारत में अमूमन हर घर में दिन की शुरुआत चाय के साथ ही होती है। ज्यादातर लोगों को इसकी लत भी होती है। सोचिए अगर चाय की इस लत को बिजनेस में बदलकर करोड़ों की कमाई की जाए तो कैसा आइडिया रहेगा? मध्यप्रदेश के रीवा के रहने वाले अनुभव दुबे और उनके दोस्त आनंद नायक इसी चाय की लत को बिजनेस में बदलकर कई लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ करोड़ों का कारोबार भी कर रहे हैं।

अनुभव दुबे की आठवीं तक की पढ़ाई गांव में ही हुई। इसके बाद उनके पिताजी ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए इंदौर भेज दिया। वहां अनुभव की दोस्ती आनंद नायक से हुई। वे भी उनके साथ ही पढ़ाई करते थे। हालांकि आनंद ने कुछ साल बाद पढ़ाई छोड़ दी और अपने रिश्तेदार के साथ मिलकर बिजनेस शुरू कर दिया। इसके बाद अनुभव के माता-पिता ने उन्हें UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया। वे चाहते थे कि उनका बेटा IAS बने।

पिता चाहते थे बेटा IAS बने

अनुभव दुबे मध्यप्रदेश के रीवा के रहने वाले हैं। इससे पहले वे दिल्ली रहकर UPSC की तैयारी करते थे।
अनुभव दुबे मध्यप्रदेश के रीवा के रहने वाले हैं। इससे पहले वे दिल्ली रहकर UPSC की तैयारी करते थे।

दिल्ली जाने के बाद अनुभव दुबे UPSC की तैयारी करने लगे। सब कुछ ठीक चल रहा था। कुछ दिन बाद उनके पास आनंद का अचानक कॉल आया। उन्होंने अनुभव को बताया कि अपना बिजनेस कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। क्या हम लोग साथ मिलकर कुछ नया काम शुरू कर सकते हैं? चूंकि अनुभव के मन में भी कहीं न कहीं बिजनेस का ख्याल रहा था। उन्होंने भी हां बोल दिया और दोनों मिलकर नए बिजनेस की प्लानिंग करने लगे।

अनुभव कहते हैं कि हमारे देश में अगर पानी के बाद कोई सबसे ज्यादा किसी प्रोडक्ट का यूज करता है तो वह चाय है। इसमें बिजनेस के लिहाज से पोटेंशियल हाई है। इसकी हर जगह डिमांड रहती है और इसके लिए बहुत अधिक बजट की भी जरूरत नहीं होती है। इसके बाद उन्होंने आनंद के साथ अपना आइडिया शेयर किया और दोनों ने मिलकर तय किया कि वे चाय की शॉप खोलेंगे। जिसका मॉडल और टेस्ट दोनों यूनीक हो ताकि यूथ को टारगेट किया जा सके।

2016 में 3 लाख की लागत से इंदौर में खोली पहली दुकान

अनुभव दुबे बताते हैं कि उनके अब तक के सफर में उनके दोस्तों का काफी सपोर्ट रहा है।
अनुभव दुबे बताते हैं कि उनके अब तक के सफर में उनके दोस्तों का काफी सपोर्ट रहा है।

अनुभव और आनंद ने मिलकर इंदौर में अपनी पहली दुकान खोली। इसके लिए करीब 3 लाख रुपए खर्च हुए थे, जो आनंद ने अपने पहले वाले बिजनेस की बचत से लगाए थे। अनुभव कहते हैं कि हमने एक गर्ल्स हॉस्टल के बगल में किराए पर रूम लिया। ​​​​सेकेंड हैंड फर्नीचर खरीदे और दोस्तों से उधार लेकर अपने आउटलेट को डिजाइन किया। वे बताते हैं कि इन चीजों में ही हमारे पैसे इतनी जल्दी खत्म हो गए कि हमारे पास बैनर लगाने तक के भी पैसे नहीं बचे थे। हमने एक नॉर्मल लकड़ी के बोर्ड पर ही हाथ से अपनी दुकान का नाम लिखकर लगा दिया।

अनुभव और आनंद ने कुछ दिन तक थोड़ी परेशानी झेलकर दुकान चलाई। कई लोग ताने भी मारते थे और पिता जी से कहते थे कि आपका बेटा UPSC की तैयारी की जगह चाय बेचता है। पिता जी भी नहीं चाहते थे कि मैं यह काम करूं, लेकिन धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ने लगे और उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी। अनुभव कहते हैं कि हमने अपने बिजनेस का नाम चाय सुट्टा बार रखा था। जल्द ही यह नाम फेमस हो गया, मीडिया में हमारे बारे में खबरें चलने लगी। इसके बाद हमें परिवार से भी काफी सपोर्ट मिलने लगा।

सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपए, देशभर में है 165 आउटलेट्स

फिलहाल अनुभव के पास देशभर में 165 आउटलेट्स हैं। जहां कुल मिलाकर हर दिन 18 लाख कस्टमर्स आते हैं।
फिलहाल अनुभव के पास देशभर में 165 आउटलेट्स हैं। जहां कुल मिलाकर हर दिन 18 लाख कस्टमर्स आते हैं।

चाय सुट्टा बार की शुरुआत 2016 में 3 लाख रुपए के निवेश के साथ हुई थी और अब इसका कारोबार बढ़कर लगभग 100 करोड़ रुपए हो गया है। देशभर में उनके 165 आउटलेट्स और विदेशों में 5 आउटलेट्स हैं। अपने साथ ही साथ उन्होंने 250 कुम्हार परिवारों को भी रोजगार से जोड़ा है। वे उनके लिए कुल्हड़ बनाने का काम करते हैं। फिलहाल उनके देशभर के आउटलेट्स में हर दिन 18 लाख कस्टमर्स आते हैं।

अभी वे 9 अलग-अलग स्वाद की चाय बेचते हैं। वे रोज, अदरक, इलायची, पान, केसर, तुलसी, नींबू और मसाला चाय भी बेचते हैं। चाय सुट्टा बार के मैन्यू में 10 रुपए से लेकर 150 रुपए तक की चाय है। जल्द ही वे अपने आउटलेट्स की संख्या बढ़ाने वाले हैं। वे कहते हैं कि हमारी कोशिश है कि देशभर में हर छोटे शहर में भी चाय का एक ऐसा मॉडल हो।

हर नए आउटलेट की ओपनिंग पर एक दिन मुफ्त में सबको चाय पिलाते हैं
अनुभव बताते हैं कि जैसे हमारे यहां आमतौर पर किसी पूजा की शुरुआत में या कोई काम करने के दौरान भंडारा आयोजित किया जाता है। उसी तर्ज पर हम लोग अपने नए आउटलेट की ओपनिंग के दिन चाय का भंडारा आयोजित करते हैं। हम उस दिन सबको मुफ्त में चाय और कॉफी पिलाते हैं। यह एक तरह से बिजनेस स्ट्रैटजी भी है। इसी बहाने लोगों को हमारे बिजनेस के बारे में भी पता चलता है और चाय पसंद आने के बाद वे हमारे कस्टमर भी बन जाते हैं।

अनुभव की टीम में सौ से ज्यादा लोग काम करते हैं। इसमें इंजीनियरिंग से लेकर MBA तक हर बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स शामिल हैं।
अनुभव की टीम में सौ से ज्यादा लोग काम करते हैं। इसमें इंजीनियरिंग से लेकर MBA तक हर बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स शामिल हैं।

फ्रेंचाइजी मॉडल पर करते हैं काम
अनुभव बताते हैं कि जो लोग हमारे साथ मिलकर काम करना चाहते हैं उसके लिए हम फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करते हैं। इसके लिए हम सेटअप जमा देते हैं। अपनी चाय का फॉर्मूला उन्हें भेज देते हैं। उसके बाद हम कुछ कमीशन चार्ज करते हैं और बाकी का बिजनेस जो वह आउटलेट चलाता है उसके हिस्से में जाता है। हर थोड़े दिन बाद हमारे नए आउटलेट्स खुल रहे हैं। कई लोग हमसे इसके लिए डिमांड कर रहे हैं।

अगर चाय के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है तो ये स्टोरीज आपके काम की हैं

  1. मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले अंकित नागवंशी ने पिछले साल लॉकडाउन के बाद अगस्त में इंजीनियर चायवाला नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की। आज उनके हजारों कस्टमर्स हैं। हर दिन तीन हजार रुपए से ज्यादा का वे बिजनेस कर रहे हैं। अभी अंकित हर रोज सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक एक चौराहे पर अपने चाय का छोटा सा स्टॉल लगाते हैं। (पढ़िए पूरी खबर)
  2. महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के रहने वाले रेवन शिंदे 12वीं तक पढ़े हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। एक साल पहले तक वे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। आज वे चाय की होम डिलीवरी का बिजनेस करते हैं। हर दिन एक हजार से ज्यादा उनके पास ऑर्डर आते हैं। इससे हर महीने 2 लाख रुपए से ज्यादा उनकी कमाई हो रही है। (पढ़िए पूरी खबर)
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