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  • Initiative Of The 7th Pass Youth, Free Cakes Are Given On Birthdays To Girls Up To 5 Years Of Age, They Distribute 7 Thousand Kilo Cakes Every Year.

आज की पॉजिटिव स्टोरी:7वीं पास युवक की पहल,  5 साल तक की बच्चियों को जन्मदिन पर फ्री में केक देते हैं, हर साल 7 हजार किलो केक बांटते हैं

सूरत6 महीने पहलेलेखक: सुनील पालडिया
संजय कहते हैं कि जन्मदिन पर केक देने के बाद बच्चियों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर उन्हें बेहद सुकून मिलता है।
  • कथावाचक मोरारी बापू की रामकथा में ‘बेटी बचाओ’ प्रवचन से प्रेरणा लेकर शुरू किया था अभियान
  • संजय चोडवडिया कहते हैं - बर्थडे के दिन उस प्यारी सी बच्ची के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, इससे सुकून मिल जाता है

आज की पॉजिटिव स्टोरी में हम आपको ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहे हैं जिसने बेटी बचाओ अभियान को अलग ही तरीके से आगे बढ़ाने का काम किया है। सूरत के रहने वाले संजय चोडवडिया गरीब तबके की 5 साल की बच्चियों को उनके जन्मदिन पर फ्री में केक देते हैं। शहर में बेकरी चलाने वाले संजय अब तक हर साल 7 लाख रुपए की कीमत के 7 हजार से ज्यादा केक बांट चुके हैं। उनका यह अभियान पिछले 12 सालों से लगातार जारी है।

मूलत: अमरेली जिले के सावरकुंडला शहर के रहने वाले संजय चोडवडिया करीब 20 सालों से सूरत में रह रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते वे सिर्फ 7वीं कक्षा तक ही पढ़ सके और इसके बाद रोजगार की तलाश में सूरत आ गए थे। सूरत आने के बाद उन्होंने 8 सालों तक डायमंड फैक्ट्री में हीरे घिसने का काम किया। इसके बाद एम्ब्रॉयडरी के कारखाने में और फिर खुद की बेकरी शुरू की थी। वे पिछले 12 सालों से डभोली इलाके में घनश्याम बेकरी और केक नाम से दुकान चला रहे हैं। अब इसी नाम से 14 ब्रांच भी हैं।

संजय ने सरकारी अस्पताल से बच्चियों के जन्म की जानकारी लेकर उसके घर केक पहुंचाने से शुरूआत की थी।
संजय ने सरकारी अस्पताल से बच्चियों के जन्म की जानकारी लेकर उसके घर केक पहुंचाने से शुरूआत की थी।

मोरारी बापू के प्रवचन सुनकर शुरू किया अभियान
संजय बताते हैं ‘यह करीब 12 साल पुरानी बात है। कतारगाम इलाके में कथावाचक मोरारी बापू के प्रवचन हो रहे थे। बापू का यह प्रवचन बेटी बचाओ अभियान को लेकर था। बापू के इसी प्रवचन को सुनने के बाद मैंने अभियान में जुड़ने का फैसला कर लिया था और इसके लिए सबसे अलग तरीका अपनाया। मैंने गरीब तबके की बच्चियों के जन्मदिन पर केक देना शुरू किया और इसके लिए सरकारी अस्पताल से बच्चियों के जन्म की जानकारी लेकर उसके घर केक पहुंचाने से शुरूआत की थी। इसके बाद जन्म तारीख नोट कर बेटी के लगातार 5 साल के होने तक उसके घर केक पहुंचाने का सिलसिला जारी रहता है।’

कई सामाजिक संस्थाएं कर चुकीं सम्मानित
संजयभाई कहते हैं कि बेटियां आगे बढ़ेंगी तो ही सही मायने में देश आगे बढ़ेगा। इसके लिए सभी लोग सच्चे मन से प्रयत्न करें तो परिवर्तन ला सकते हैं। इसके लिए हमें किसी का इंतजार किए बगैर ही आगे बढ़ जाना चाहिए। संजय ने पहले साल 1 हजार किलो केक बांटकर इस अभियान की शुरुआत की थी। आज उनकी 14 ब्रांचों से हर साल 7 हजार किलो केक बेटियों के घर पहुंचाए जा रहे हैं। संजय की किसी भी ब्रांच से संपर्क कर परिवार फ्री में केक ले सकता है। संजय की इस अद्भुत पहल के लिए कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

इस अभियान को लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी भी चल रही है।
इस अभियान को लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी भी चल रही है।

लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी
संजय की बेकरी की ओर से बच्चियों के लिए 100 रुपए की कीमत का 250 ग्राम केक फ्री में दिया जाता है। अब वे हर साल 7000 किलो केक मुफ्त में बांट रहे है, जिसकी कीमत 7 लाख रुपए होती है। संजय बताते हैं कि उनसे कई लोगों ने इसके बारे में पूछा कि केक देने से क्या होता है। इसके जवाब में संजय कहते हैं कि बर्थडे के दिन उस प्यारी सी बच्ची के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है बस। संजय के इस अभियान से जुड़े कुछ लोगों के बताए अनुसार इस अभियान को लिम्का बुक रिकार्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी चल रही है।