बागी IPS अमिताभ ठाकुर से बातचीत:अगर गलत होते देखकर भी कोई चुप है, तो यह चुप्पी खतरनाक है; मैं भी ऐसा करके बच सकता था, लेकिन घुट-घुटकर जीने का क्या फायदा?

लखनऊ7 महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल
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  • मैं राजनीति को बुरा नहीं मानता, अवसर मिलेगा तो राजनीति में भी आऊंगा लेकिन सवाल यही है कि मेरे लिए अवसर होगा कहां?

लखनऊ में 5/426 विराम खंड, गोमतीनगर के पते पर एक नेमप्लेट लगी है। उस पर IPS अमिताभ ठाकुर के नाम के आगे जबरिया रिटायर्ड भी लिखा है। केंद्र सरकार ने अमिताभ ठाकुर को नौकरी के लायक न मानते हुए जबरदस्ती रिटायर कर दिया है। यूपी सरकार की भी इस फैसले पर सहमति है। यूपी कैडर के IPS अमिताभ ठाकुर हमेशा चर्चाओं और विवादों से घिरे रहे। सरकार किसी की भी रही हो, लेकिन उनकी पटरी किसी के साथ नहीं बैठी। वे उत्तर प्रदेश में दस जिलों के पुलिस कप्तान रहे हैं। फिलहाल वे यूपी पुलिस में IG के पद पर थे।

अगर उन्हें लगातार टाइमबाउंड प्रमोशन मिलता तो उन्हें ADG रैंक का अधिकारी होना चाहिए था। ठाकुर कहते हैं कि सच के साथ खड़े रहने का मेरा स्वभाव ही इसमें रोड़ा बनता रहा। मूलरूप से बोकारो, झारखंड के रहने वाले अमिताभ ठाकुर 1985 में IIT में पढ़ाई करने कानपुर आए थे और तब से उत्तर प्रदेश के ही होकर रह गए। 1992 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ था।

अमिताभ ठाकुर सबसे पहले साल 2006 में तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के समधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अमिताभ उन दिनों फिरोजाबाद के SP थे। तब मुलायम सिंह यादव के समधी रामवीर सिंह ने जसराना में उन्हें थप्पड़ मार दिया था। जिसके बाद उन्होंने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। यहां से अमिताभ की सत्ताधारियों से लड़ाई शुरू हुई और फिर ये चलती रही है।

अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉक्टर नूतन ठाकुर ने 2015 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कई शिकायतें दर्ज कराईं। तभी जुलाई 2015 में मुलायम सिंह यादव ने अमिताभ ठाकुर को फोन करके फिरोजाबाद का किस्सा याद दिलाते हुए सुधर जाने की नसीहत दी थी। अमिताभ ठाकुर ने इसे धमकी बताते हुए मुलायम सिंह यादव के खिलाफ ही धमकी का मुकदमा दर्ज करा दिया था।

एक के बाद एक विवाद बढ़ते गए

इस प्रकरण के बाद अमिताभ ठाकुर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा भी दर्ज हुआ। जांच हुई, लेकिन उसमें ऐसे आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन इसके बाद अमिताभ के साथ जुड़े विवाद बढ़ते गए। गाजियाबाद की एक महिला ने अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया। हालांकि, बाद में यह मामला फर्जी निकला। इस केस में अमिताभ के खिलाफ साजिश रचने का मुकदमा महिला आयोग की तत्कालीन सदस्य अशोक पांडेय, गायत्री प्रजापति और आरोप लगाने वाली महिला पर अभी भी चल रहा है।

इन सब विवादों के बाद अमिताभ ने केंद्र सरकार से अपना कैडर बदलने की अर्जी भी लगाई थी, लेकिन 2017 में यूपी में भाजपा सरकार आने के बाद उन्होंने अपनी अर्जी वापस ले ली। उन्हें उम्मीद थी कि शायद अब हालात बदलें, लेकिन नई सरकार में भी वे किनारे पर रहे। इस सरकार में अमिताभ के साथ कोई बड़ा विवाद तो नहीं रहा, लेकिन अब इसी सरकार ने उन्हें जबरिया रिटायर कर दिया है। इस फैसले पर ठाकुर कहते हैं कि 'शुरू में मुझे उम्मीद थी कि ये सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त रुख अपनाएगी। लेकिन कुछ नहीं बदला। यहां भी मेरी आवाज चुभने लगी।'

अमिताभ ठाकुर पर जब भी आरोप लगे हैं वो अदालत गए हैं। इस बार जब उन्हें सेवा के अयोग्य मानते हुए रिटायर ही कर दिया गया है तो क्या वो अदालत जाएंगे? इस सवाल पर ठाकुर कहते हैं, 'जो लोग मुझे जानते हैं उन्हें लगता है कि ये गलत फैसला है और वो इसे लेकर दुखी भी हैं। मेरी आत्मा भी यही कहती है, लेकिन सवाल ये है कि क्या मैं साबित कर पाऊंगा कि ये गलत फैसला है? कई बार कातिल कत्ल करता है और खून का धब्बा भी नहीं छोड़ता। यदि सरकार ने पूरी सफाई से मुझे खत्म किया है तो मैं खामोश हो जाऊंगा। इसे अपनी किस्मत मान लूंगा, लेकिन अगर मैं खून के धब्बे खोज लेता हूं और साबित कर पाता हूं कि गलत हुआ है, तो मैं निश्चित तौर पर इसे कोर्ट ले जाऊंगा।

IPS अमिताभ ठाकुर और उनकी एक्टिविस्ट पत्नी नूतन ठाकुर अब तक सात सौ से अधिक शिकायतें कर चुके हैं। दो सौ के करीब शिकायतें उन्होंने मौजूदा सरकार के दौरान की हैं। यूपी में सरकार चाहे जिसकी रही हो, अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर हमेशा विवादित मुद्दों को उठाते रहे हैं। अमिताभ ठाकुर कहते हैं कि 'मैंने हमेशा सत्ता और ताकत के आगे सच बोला है। यही मेरी सबसे बड़ी अयोग्यता बन गई। यदि गलत को गलत कहना अयोग्यता है तो हो सकता है मैं अयोग्य हूं।'

जांच पर जांच, निकला कुछ नहीं

अमिताभ ठाकुर कहते हैं कि 'मैं शुरू से ही चीजों को लेकर आवाज उठाता रहा। इस वजह से मेरी खुद की दर्जनों जांच हुई। शायद मैं ऐसा अधिकारी हूं, जिसकी सबसे ज्यादा जांच हुई है। सरकार मेरे ऊपर जांच पर जांच बिठाती रही, लेकिन कभी मेरे खिलाफ कुछ निकला ही नहीं।' वे कहते हैं कि 'सरकारें जांच का आदेश देकर भूल जाती हैं। मैं बार-बार पत्र लिखकर कहता रहता हूं कि मैं जांच में सहयोग को तैयार हूं, जांच पूरी की जाए। अभी भी मेरे खिलाफ पांच-छह जांचें लंबित हैं।'

परिवार का सहयोग हमेशा मिलता रहा

अमिताभ ठाकुर अपनी निजी जिंदगी के बारे में बताते हैं। वे IIT में दाखिला, IPS में चयन, नूतन ठाकुर से शादी और अपने दोनों बच्चों के जन्म को अपनी जिंदगी का सबसे अहम पड़ाव मानते हैं। अमिताभ ठाकुर की बेटी कानून में पीएचडी कर रही है, जबकि बेटा दिल्ली के JNU से पीएचडी कर रहा है। ठाकुर कहते हैं कि 'मैंने अपनी मां से जो कुछ सीखा उसे हमेशा याद रखा। वे अद्भुत महिला थीं। आज मेरा जो भी चरित्र है, उन्हीं की वजह से है।'

अमिताभ ठाकुर भले ही यूपी पुलिस में बड़े पदों पर रहे, लेकिन उन्होंने अपने घर में कभी सरकारी नौकर-चाकर नहीं रखे। ठाकुर कहते हैं कि 'अभी मैं IG रैंक पर था, लेकिन मेरे घर पर कोई सरकारी कर्मचारी नहीं था। मेरी पत्नी खुद खाना बनाती हैं। मैं अपने कपड़े खुद धोता हूं। मेरे बच्चे अपने सारे काम स्वयं करते थे।' ठाकुर कहते हैं, 'मेरे हर फैसले में मेरे परिवार ने सहयोग किया। कभी शिकायत नहीं की। शायद यही वजह है कि मैं इतना मुखर रह पाया। मुझे जहां बोलना जरूरी लगा, मैं बोला बिना ये परवाह किए कि इसका मेरे परिवार पर क्या असर हो सकता है।'

रिटायर्ड किए जाने के बाद क्या उन्हें परिवार चलाने में दिक्कत होगी? इस सवाल पर वो कहते हैं, 'मुझे लगता है मेरे परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए मेरी पेंशन काफी होगी। हो सकता है मेरे बच्चों को अपने खर्च से कुछ समझौता करना पड़े। इस बारे में घर में चर्चा शुरू भी हो गई है।'

अमिताभ ठाकुर कहते हैं कि सिर्फ ईमानदार होने से किसी अधिकारी की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है बल्कि जो गलत हो रहा है उसके खिलाफ बोलना भी उसकी जिम्मेदारी में आता है। ठाकुर कहते हैं कि 'मेरा अपना अनुभव ये है कि सिस्टम में आज भी 30% से अधिक लोग ईमानदार हैं। वे भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं बनते। लेकिन सिर्फ ईमानदार होना काफी नहीं है। यदि वे गलत होता देखकर भी चुप हैं तो उनकी ये चुप्पी खतरनाक है। तूफान में घास बच जाती है, क्योंकि वो तेज हवा के सामने झुक जाती है। लेकिन क्या सिर्फ अपने आप को बचाए रखना काफी है? यदि मैं भी ऐसा ही सोचता तो बचा रहता, लेकिन बचकर, घुट-घुटकर जीकर क्या करता?'

'मुझे राजनीति से परहेज नहीं'

क्या जबरिया रिटायर किए जाने के बाद वो चुप हो जाएंगे या कोई और विकल्प तलाशेंगे, राजनीति में संभावनाएं देखेंगे? इस सवाल पर ठाकुर कहते हैं, 'चुप रहना तो मेरे चरित्र के खिलाफ होगा। अपनी क्षमता से मैं आवाज उठाता रहूंगा।' राजनीति में आने के सवाल पर वो कहते हैं कि 'भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीति को सबसे ऊपर रखा गया है। मैं राजनीति को बुरा नहीं मानता। अवसर मिलेगा तो राजनीति में भी आऊंगा, लेकिन सवाल यही है कि मेरे लिए अवसर होगा कहां?'

अभी अमिताभ ठाकुर की नौकरी में साढ़े सात साल बाकी थे। अब आगे क्या करेंगे? इस सवाल पर ठाकुर हंसते हुए कहते हैं कि 'वहीं करूंगा जो हमेशा करता रहा था। उन लोगों की आवाज उठाऊंगा जिन्हें चुप किया जाता रहा है। अब तो पुलिस सेवा के नियमों की बंदिशें भी नहीं होंगी।'

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