बात बराबरी की:औरतों पर जबर्दस्ती का मर्ज जेनेटिक बीमारी से भी खतरनाक, यह पुरुषों के DNA में घुसकर हंगामा मचा देता है

2 महीने पहलेलेखक: मृदुलिका झा
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उत्तरी लंदन का बेहद खूबसूरत हिस्सा- इजलिंगटन। पर्शियन मूल की महिला से पहली मुलाकात में बड़ी ही दिलकश किस्म की घबराहट ने मुझे दबोच लिया। 2 साल के प्रवास के दौरान उस देश में वो मेरी चौथी मकान मालकिन थीं।

गहरे कत्थई बालों में नीला फूल लगाए 'मे' (यही नाम था उनका) ने मेरे उलझे बालों को छूते हुए पूछा- तुम भारतीय लड़कियां क्या वाकई सांप का तेल लगाती हो… जवाब मुझे याद नहीं। शायद मैंने पुरानी धूल पोंछने की कोशिश की हो, या आंय-बांय बोला हो, लेकिन मैं खुद उनके सम्मोहन में थी।

तीन महीने बाद! हरदम मीठे अंदाज वाली ‘मे’ फोन पर चीखते हुए बात करते-करते फफककर रो पड़ीं। रस्म-ए-तसल्ली के दौरान पता लगा कि जिन कत्थई बालों को मैं उनके असल बाल समझती थी, वो दरअसल विगन यानी बनावटी बाल था। विग क्यों? इसलिए कि चरित्रवान ईरानी स्त्री को अपने बाल गैर-पुरुषों को नहीं दिखाने चाहिए।

अंग्रेजी ढब के कपड़े पहनने, उन्हीं की भाषा बोलने, मेहमानों के हिसाब से शराब की किस्म तय करने वाली ये महिला ब्रिटिश नागरिक बन चुकी थी। पेशे से वकील। रोज दर्जनों लोगों से मिलती, लेकिन 'जड़ें' नहीं छोड़ सकी। वो परेशान थी कि नया विग नहीं आएगा, तो उसे पुराने से ही काम चलाना होगा या फिर स्कार्फ से सिर ढांपने की नौबत आ जाएगी।

कह नहीं सकती कि उनके असल बाल देखने की इच्छा को किस मशक्कत से दबाया। और कितनी मेहनत लगी, उनपर हंस न देने के लिए। नहीं चाहती थी कि वर्क प्लेसमेंट के समय मुझे नया कमरा खोजना पड़े।

बाद में पता लगा कि इस विग को शेतलिन कहते। कुछ महिलाएं एहतियात रखते हुए इसके साथ हैट भी लगातीं ताकि भूले से भी पुरुष उनके बालों की झलक न पा लें।

अब ईरान जल रहा है। वहां के तकरीबन 50 शहर सुलग रहे हैं। इसके साथ ही धधक रही हैं बेड़ीबंद सोच। लड़कियां हिजाब उतार रही हैं- घर में नहीं, शौहर के सामने नहीं, रात में नहीं- दिन के उजाले में, खुली सड़क पर।

उसे जलाते हुए वे आजादी के नारे लगा रही हैं। ये वो लड़कियां हैं, जिनकी सोच पर से क्लोरोफॉर्म का फाहा उठ चुका। नीम-बेहोशी से होश में आई ये औरतें जानती हैं कि अब नहीं तो कभी नहीं!

दरअसल कुछ रोज पहले ही तेहरान में 22 साल की एक युवती महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। महसा ने चोरी नहीं की। कत्ल नहीं किया। सरकार से बेअदबी भी नहीं की। बस, गलती ये हुई कि कुर्दिस्तान से तेहरान घूमने आई महसा राजधानी की लड़कियों को आजाद मान बैठीं।

उन्होंने अपने बालों को हवा में सांस लेने छोड़ दिया कि जब घर लौटें तो दिल के साथ-साथ बालों के पास भी आजादी की याद हो। यहीं गड़बड़ हो गई। सड़क पर घूमती गश्त-ए-इरशाद (मोरैलिटी पुलिस) की एक टुकड़ी ने उन्हें घसीटकर जीप में बिठा लिया। ये घटना है 13 सितंबर की। तीन रोज में इस सेहतमंद, लड़की की मौत हो गई। पुलिस ने कारण बताया- हार्ट अटैक।

इसके बाद, क्या तेहरान, क्या कुर्दिस्तान- पूरा मुल्क दहक उठा। सोती हुई लड़कियों को मरी हुई महसा ने झिंझोड़कर जगा दिया। तानाशाही मुर्दाबाद के नारे लगने लगे।

जिन औरतों से दुनिया के नाम पर रसोई से ज्यादा कुछ नहीं देखा था- जिन चेहरों को पति-पिता-भाई के अलावा किसी ने नहीं देखा- जिनकी आवाज में मनुहार के अलावा कुछ नहीं रहा- वे दिन की चौड़ी रोशनी में गले की नस खिंचते तक चीख रही हैं। आजाद मुल्क ईरान की गुलाम लड़कियां बागी हो चुकीं।

और हों भी क्यों न, बगावत की वजहें भी हैं। जब एलन मस्क दूसरे ग्रह पर इंसानी बस्ती बनाने का एलान कर रहे थे, ठीक तभी ईरानी सरकार ने ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों को आदेश दिया कि टीवी या फिल्मों पर खास तरह के दृश्य न दिखाए जाएं।

वो दृश्य, जहां रेस्त्रां में पुरुष वेटर, कस्टमर स्त्री को खाना परोसता दिखे। या दफ्तर में महिलाओं को पुरुष चाय सर्व करते हों। सेंसरशिप उन दृश्यों पर, जहां स्त्री पारदर्शी गिलास में काली चाय या कॉफी पी रही हो, क्योंकि इससे शराब का भ्रम होता है।

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) को सैंडविच खाती औरतें भी पसंद नहीं, क्योंकि उनसे आधुनिकता की गंध आती है। तो सैंडविच खाती लड़कियां भी अब पर्शियन फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं रहीं।

इस तरह से हुआ ये कि पंछियों से लेकर कीड़े-मकोड़े भी देश में आजादी से घूमने लगे, बस स्त्रियां गुलाम होती गईं। वो चाहे-अनचाहे सांस लेने वाली सुंदर पुतलियों में बदलती चली गईं, जो घरों के कमरों से होते हुए सीधे कब्र में पहुंच जातीं।

वैसे औरतों पर जबर्दस्ती का ये मर्ज किसी जेनिटक बीमारी से भी खतरनाक है, जो पुरुषों के DNA में चुपके से घुसकर हल्ला बोल देता है। चाहे वे ईरान से हों, या हिंदुस्तान से, या फिर महिला लीडर वाले देश न्यूजीलैंड से। कुछ महीनों पहले ही वहां के मशहूर हेंडरसन हाई स्कूल ने लड़कियों की स्कर्ट की लंबाई तय कर दी।

बेहद निरीह लगती, लेकिन असल में बेहद धूर्त दलील थी- ‘बच्चियों की सुरक्षा!’ हो-हल्ला के बाद नियम में ढील दी गई, लेकिन डरी हुई लड़कियां ‘अपनी चॉइस’ पर लंबी स्कर्ट पहनने लगीं। इस चॉइस की झलक बीते दिनों हिंदुस्तान के कर्नाटक में भी दिखी। और अफगानिस्तान के काबुल में भी।

ईरान की लड़कियों को महसा की मौत ने जगा दिया। वे तथाकथित ‘अपनी चॉइस’ को आग में फेंकते हुए जंग का एलान कर चुकीं। वो जंग, जहां सैनिकों की जगह लड़कियां होंगी और हथियारों की जगह इंकलाब। वो जंग जिसके खत्म होने पर एक मुल्क या प्रांत नहीं, बल्कि आधी आबादी आजाद होगी।

चलते-चलते बात बराबरी सीरीज की ये 3 स्टोरीज भी पढ़ लीजिए

1. औरत कितना भी खुद को साबित करे, लेकिन मर्द शक करना नहीं छोड़ते

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) को सैंडविच खाती औरतें भी खास पसंद नहीं। ये मॉडर्न होती हैं, अधपकी चीजें खाकर अधपके विचार उगलती हैं। लिहाजा सैंडविच भकोसती लड़कियां भी अब पर्शियन फिल्मों का हिस्सा नहीं रहेंगी। ईरान में सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर हल्ला शुरू हो गया, लेकिन सरकारी फरमान जैसे शक्की मर्द का मिजाज बन चुका है। बीवी चाहे जितना कह ले, शक छूटता ही नहीं। (पढ़िए पूरी खबर)

2. पत्नी अगर पढ़ाई-लिखाई या पैसों में पति से बेहतर है; तो बाहर भले ही उसकी तारीफ हो, लेकिन बंद कमरे में पति की हिंसा झेलनी पड़ेगी

मेरी गलतियों को मेरे साथ सो जाने दो! तुम्हारी याद में जलता मेरा सिर बहुत जल्द पानी में समाकर ठंडा हो चुका होगा। भगवान हमेशा तुम्हारे साथ रहे..!’ मेरी जिंदा बच गईं। दोबारा कोशिश हुई, लेकिन वे फिर बच गईं। इस दौरान कई स्त्रियों के साथ रह चुके उसके पति ने पूर्व पत्नी को सनकी और मर्दखोर बताते हुए कह दिया कि उसके पास तर्कों के अलावा करने को कुछ और था ही नहीं। (पढ़िए पूरी खबर)

3. पत्नी या प्रेमिका कितनी भी गोरी और सुंदर क्यों न हो, लेकिन उसका कद पुरुष से उन्नीस ही होना चाहिए

एक बार टाइम मैगजीन के कवर पर प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल की तस्वीर छपी। हल्के बैकग्राउंड पर प्रिंस और उनकी पत्नी काले-सफेद कपड़ों में किसी म्यूजियम के आर्ट फॉर्म की तरह दिख रहे थे। प्रेम और हिम्मत से भरा हुआ युवा जोड़ा। आंखें कैमरे पर सीधा ताकती हुईं। सबकुछ सुंदर, लेकिन तस्वीर जैसे किसी हथौड़े की तरह लोगों की कुंद-जहनियत को ठुकठुका रही हो। वे हैरी को नामर्द और मेगन को हावी होने वाली औरत कहने लगे। (पढ़िए पूरी खबर)