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गाजा पर एक साल बाद सबसे बड़ा हमला:इजराइल ने तीन दिन रॉकेट बरसाए, खतरा बन रहे इस्लामिक जिहाद की पूरी लीडरशिप खत्म

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल

इजराइल ने 6 अगस्त को गाजा पट्‌टी पर अचानक हमला कर दिया। इस बार निशाना हमास की जगह फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद नाम का संगठन था। इजराइल इन संगठनों को अपने लिए खतरा मानता है। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर सैकड़ों रॉकेट दागे गए। पिछले साल मई में 11 दिन चली लड़ाई के बाद यह गाजा पर सबसे बड़ा हमला था।

मिस्र की मध्यस्थता से ये लड़ाई रुक गई। अल जजीरा के मुताबिक, 6 से 8 अगस्त के बीच इजराइली हमले में 47 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई। इनमें 16 बच्चे हैं।

इजराइली हमले के जवाब में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद ने भी सैकड़ों रॉकेट दागे। इनमें ज्यादातर इजराइल ने हवा में ही खत्म कर दिए।
इजराइली हमले के जवाब में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद ने भी सैकड़ों रॉकेट दागे। इनमें ज्यादातर इजराइल ने हवा में ही खत्म कर दिए।

अब दो सवाल उठते हैं। पहला कि इजराइल ने एक साल की शांति के बाद इतना बड़ा ऑपरेशन किया क्यों? और दूसरा इससे उसे हासिल क्या हुआ।

आइए, इनके जवाब में उतरते हैं। सबसे पहले जान लें कि फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद यानी PIJ है क्या। गाजा में इजराइल विरोधी कई संगठन एक्टिव हैं। इनमें हमास सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद का नाम कम ही सुनाई देता है। इसे ईरान का समर्थन है। सीरिया की राजधानी दमिश्क में संगठन का हेडक्वार्टर है।

इजराइल का कहना है कि इस्लामिक जेहाद की तरफ से उस पर बड़े हमले का खतरा था। इसलिए ऑपरेशन ब्रेकिंग डॉन शुरू किया गया। इसका मकसद संगठन की लीडरशिप को खत्म करना था। इजराइली सेना के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान फिलिस्तीनी इस्लामिक जेहाद का मुखिया खालिद मंसूर और संगठन के कई बड़े कमांडर मारे गए। इसकी लीडरशिप तकरीबन खत्म हो गई है।

हमास की चुप्पी यानी इजराइल विरोधी संगठनों में मतभेद
इस बार के ऑपरेशन से इजराइल हमास और इस्लामिक जिहाद के बीच मतभेद पैदा करने में भी कामयाब रहा। गाजा के कुछ हिस्सों पर इस्लामिक जिहाद का नियंत्रण है। ज्यादातर हिस्से पर 2007 के बाद से हमास का कब्जा है। इजराइल हमास को आतंकी संगठन मानता है।

ऑपरेशन ब्रेकिंग डॉन के दौरान हमास ने इजराइल के खिलाफ कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमास इस लड़ाई में शामिल हो जाता, तो ये और भी लंबी खिंच सकती थी। इससे मरने वालों की तादाद भी बढ़ जाती।

गाजा में गलियां बेहद पतली हैं। इजराइल के हमले के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कई घरों को तोड़ना पड़ा।
गाजा में गलियां बेहद पतली हैं। इजराइल के हमले के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कई घरों को तोड़ना पड़ा।

हमले के दौरान गाजा के लोगों का क्या हुआ...
गाजा पट्टी की लंबाई 365 वर्ग किलोमीटर है। इजराइल और मिस्र ने इसकी घेराबंदी कर रखी है। यहां करीब 21 लाख लोग बहुत मुश्किल हालात में रहते हैं। इजराइल ने जहां ऑपरेशन किया, वहां पतली गलियां हैं। घर एक-दूसरे से बिलकुल सटे हैं। इस वजह से घायलों को लेने के लिए एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाईं।

यरूशलम में रहने वाले जलाल अबुखतीर फिलिस्तीन के मुद्दों पर लिखते रहे हैं। भास्कर से बातचीत में जलाल ने बताया कि गाजा में बिजली नहीं है। अस्पताल काम नहीं कर पा रहे हैं। लोग डरे हुए हैं। गाजा पर हमले के खिलाफ फिलिस्तीन समर्थकों ने यरूशलम में प्रदर्शन करने की कोशिश की थी, लेकिन इजराइली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस यरूशलम या इजराइल में कहीं प्रदर्शन नहीं करने दे रही।

गाजा में रहने वाले पत्रकार इसाम अदवान कहते हैं कि इजराइली लगातार आसमान से बमबारी कर रहे थे। गाजा के लोग खौफ में घरों में कैद थे। संघर्ष विराम ने इजराइल की बमबारी को तो रोक दिया, लेकिन गाजा के आसमान में हर समय इजराइली ड्रोन मंडराते रहते हैं। उनकी आवाज लोगों को डराती है।

इजराइल के तेल अवीव में रहने वाले डॉ. उरियल बताते हैं कि संघर्ष विराम से पहले यहां दहशत का माहौल था। फिलिस्तीनी रॉकेटों की वजह से लोगों को बंकरों में भागना पड़ता था। रात को भी लोग सो नहीं पा रहे थे। अब बमबारी रुकी है, तो लोगों ने चैन की सांस ली है।

ब्रिटेन में इजराइल के डिप्टी ऐंबैस्डर ओरेन मार्मेस्टीन ने बंकर में छिपे होने की ये फोटो शेयर की है।
ब्रिटेन में इजराइल के डिप्टी ऐंबैस्डर ओरेन मार्मेस्टीन ने बंकर में छिपे होने की ये फोटो शेयर की है।

ब्रिटेन में इजराइल के डिप्टी ऐंबैस्डर ओरेन मार्मेस्टीन ने सोशल मीडिया पर अपनी बेटियों के साथ बंकर में छिपे होने की फोटो शेयर कर वहां का हाल लिखा है। उन्होंने लिखा कि मैं और मेरी बेटियां। एक और सायरन की आवाज। तेल अवीव पर फिलिस्तीनी रॉकेट का एक और हमला।

इजराइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति की भी नहीं सुनी
गाजा पर इजराइल के ऑपरेशन पर इस बार दूसरे देशों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। ऑपरेशन के पहले दो दिन रूस, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, अमेरिका और अरब देशों ने कहा कि इजराइल को संयमित अभियान चलाना चाहिए।

पश्चिमी देशों ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा करने का अधिकार है, लेकिन उसके ऑपरेशन का निशाना आम लोग नहीं बनना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऑपरेशन के दो दिन के बाद लड़ाई बंद करने की अपील की, जिसे इजराइल ने नजरअंदाज कर दिया।

इजराइल ने गाजा की सीमा पर इस तरह बाड़ लगा रखी है। उसकी पुलिस वहां के लोगों की हर एक्टिविटी पर नजर रख रही है।
इजराइल ने गाजा की सीमा पर इस तरह बाड़ लगा रखी है। उसकी पुलिस वहां के लोगों की हर एक्टिविटी पर नजर रख रही है।

फिलिस्तीन का मुद्दा अब दुनिया के लिए अहम नहीं
अमेरिका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर मुक्तदर खान मानते हैं कि फिलिस्तीन का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बहुत अहम नहीं रह गया है। वे कहते हैं कि इजराइल ने दावा किया कि बड़े हमले को रोकने के लिए उसने ये ऑपरेशन किया है, लेकिन उसने UN, अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इसका कोई सबूत पेश नहीं किया।

अरब देशों ने हाल ही में इजराइल के साथ अब्रहामिक अकॉर्ड (अब्राहम समझौता) किया है। इसमें बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के अलावा मोरक्को और सूडान भी शामिल हैं। इजराइल के पहले से ही मिस्र और जॉर्डन के साथ राजनयिक संबंध हैं।

प्रोफेसर खान कहते हैं कि फिलिस्तीन के लोगों को इससे ये संदेश भी मिला है कि अरब देशों में अब उनके मुद्दे के प्रति न सब्र है और न समर्थन। अरब देश लिप सर्विस करते रहेंगे, यानी बयान तो देंगे, लेकिन इजराइल के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे।

भारत का रवैया बैलेंस बनाने वाला
भारत के बारे में मुक्तदर खान कहते हैं कि पहले भारत का रुख फिलिस्तीन की तरफ झुका नजर आता था, लेकिन अब बैलेंस बनाने की कोशिश होती है। भारत इजराइल के साथ सहयोग बनाए रखना चाहता है। दोनों देशों के बीच कई मोर्चे पर ये बढ़ भी रहा है।