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फिलिस्तीन-इजराइल झड़प पर रिपोर्ट:'सायरन बजने के 45 सेकेंड बाद हम बंकर में होते हैं, अब यह नॉर्मल है, फाइटर जेट गड़गड़ाते रहते हैं और शहर अपनी रफ्तार से चला करता है'

एक वर्ष पहलेलेखक: पूनम कौशल
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फिलिस्तीन और इजराइल के बीच बीते सोमवार से शुरू हुआ संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 5 दिनों से जारी जंग में हमास इजराइल पर अब तक 1,750 रॉकेट दाग चुका है तो बदले में इजराइल, फिलिस्तीन के कब्जे वाले गाजा पट्टी इलाके पर 600 एयरस्ट्राइक कर चुका है। हमलों में अब तक 103 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें 27 बच्चे भी हैं।

दस मई को यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद में इजराइली सुरक्षाकर्मियों और फिलिस्तीनी लोगों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुई हिंसा अब युद्ध के खतरे में बदल रही है। उन इलाकों में क्या स्थिति है? दैनिक भास्कर ने इसके लिए इजराइल में रहने वाले कुछ भारतीयों से बात की। उन्हीं के हवाले से जानते हैं कि युद्ध जैसे स्थितियों के बीच वहां क्या हालात हैं...

बंकर के बुलेट प्रूफ रोशनदान से झांकते रहते हैं
डॉ. उरियल मॉर इजराइल के अश्दोद शहर में रहते हैं। अश्दोद गाजा पट्‌टी से 40 किमी दूर है और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र बिंदु है। डॉ. उरियल मॉर बताते हैं कि रात के दस बजकर दस मिनट हो रहे हैं और पूरे अश्दोद में वार्निंग सायरन बज रहे हैं। आसमान रॉकेट की आवाज से गूंज रहे हैं। डॉ. उरियल मॉर के पूरे परिवार ने घर में ही बने बम रोधक बंकर में पनाह ली है। इस बंकर में एक रोशनदान भी है, जिस पर बुलेट प्रूफ कांच लगा है। उसी से ये लोग बाहर देख लेते हैं। मॉर बताते हैं कि उनका दस साल का बेटा भी बंकर में ही है। मॉर के मुताबिक, वार्निंग सायरन बजते ही परिवार बंकर की तरफ दौड़ने लगता है। सायरन के बंद होने के पंद्रह मिनट बाद तक सभी को यहीं रहना होता है। मॉर बताते हैं कि पूरे परिवार को आजकल दिन में कई बार बंकर में पनाह लेनी पड़ती है।

डॉ. उरियल मॉर गाजा पट्‌टी के पास के शहर अश्दोद शहर में रहते हैं। उनकी पत्नी भारतीय हैं। वे बताते हैं कि वार्निंग सायरन सुनने के 45 सेकेंड के भीतर बंकर में पहुंच जाते हैं।
डॉ. उरियल मॉर गाजा पट्‌टी के पास के शहर अश्दोद शहर में रहते हैं। उनकी पत्नी भारतीय हैं। वे बताते हैं कि वार्निंग सायरन सुनने के 45 सेकेंड के भीतर बंकर में पहुंच जाते हैं।

अश्दोद के आसमान में इजराइल की सुरक्षा प्रणाली आयरन डोम लगी है। जो फिलिस्तीन की ओर से आ रही मिसाइलों को मारकर गिरा देती है। ये दृश्य रंग-बिरंगी आतिशबाजी सा लगता है। रॉकेटों की सनसनाती आवाज इसमें खौफ घोल रही है। डॉ. मॉर बताते हैं, ' सायरन सुनने के 45 सेकेंड के भीतर हमें बंकर में पहुंचना होता है। यहां अधिकतर घरों में बंकर बने हैं। कुछ सामुदायिक बंकर भी हैं, जहां लोग छुपते हैं। जिन पुराने घरों में बंकर नहीं हैं, वहां लोग अपने सिरों को हाथों में रखकर घुटनों के बल बैठ जाते हैं। कुछ शहरों में तो चेतावनी सायरन बजने के दस सेकेंड के भीतर सुरक्षित ठिकाने पर छुपना होता है।'

डॉ. मॉर की पत्नी भारतीय हैं। उनके तीन बेटे हैं। डॉ. मॉर कहते हैं, 'मेरी पत्नी कई बार परिवार को लेकर भारत जाने पर जोर देती हैं, लेकिन मेरे लिए इजराइल जन्नत है। जो भी भारतीय मेरे साथ काम कर रहे हैं, वो सब इजराइल को प्यार करते हैं। हम यहां बहुत अच्छा जीवन जी रहे हैं। यहां स्टार्टअप कंपनियां हैं, कंप्यूटर, बॉयोटेक, हाई-टेक और मेडिसिन कंपनियां हैं। यहां लोग बहुत इनोवेटिव हैं। इस हिंसा और संघर्ष को छोड़कर यहां बाकी सब बहुत अच्छा है।'

इजराइल उन्हें घर बनाने के लिए सीमेंट देता है, लेकिन वे उससे सुरंग बनाते हैं
हाल के महीनों में इजराइल ने कई अरब देशों के साथ समझौते भी किए हैं। इससे इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच भी स्थाई शांति स्थापित होने की उम्मीदें पैदा हुईं, लेकिन अब ताजा हिंसा ने सब कुछ पटरी से उतार दिया है। ये लड़ाई कहां खत्म होगी किसी को नहीं पता, लेकिन ये तय है कि यदि ये जारी रही तो इसमें नुकसान बहुत ज्यादा है। डॉ. मॉर का मानना है कि फिलिस्तीनियों को लग रहा है कि दुनिया ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है। वो कहते हैं, 'वो कहीं न कहीं ये महसूस कर रहे हैं कि वो पीछे छूट गए हैं और शायद इसी वजह से आतंकवाद के रास्ते पर चल रहे हैं।'

डॉ. मॉर कहते हैं, 'इजराइल और मिस्र ही गाजा की हर जरूरत को पूरा करते हैं। हम उन्हें घर बनाने के लिए सीमेंट भेजते हैं। हमास उसका इस्तेमाल सुरंगे बनाने में करता है। ये सुरंगे इजराइल में आकर खुलती हैं। इजराइल इन्हें खोजकर बंद करता है।' इजराइल गाजा में हमास के ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहा है। इसमें अभी तक सौ के करीब लोग मारे जा चुके हैं। डॉ. मॉर इजराइल का बचाव करते हुए कहते हैं कि इजराइल नागरिकों को नुकसान न पहुंचाने की पूरी कोशिश करता है। इमारतों पर हवाई हमले करने से पहले वहां नागरिकों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी जाती है।

इजराइल के ज्यादातर घरों, कॉलोनियों में बंकर बने हुए हैं। कुछ जगहों पर सामुदायिक बंकर भी बनाए गए हैं। जहां लोग इमरजेंसी में पनाह ले सकते हैं।
इजराइल के ज्यादातर घरों, कॉलोनियों में बंकर बने हुए हैं। कुछ जगहों पर सामुदायिक बंकर भी बनाए गए हैं। जहां लोग इमरजेंसी में पनाह ले सकते हैं।

मैं जिस लैब में काम करता हूं, वहां भी एक बंकर है
डॉ. विजय कुमार शर्मा इजराइल में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे हैं। वे तेल अवीव के बहुत पास रहते हैं। विजय बताते हैं, 'मैं पहली बार इस तरह के हालात देख रहा हूं। सायरन सुनते ही बंकर में भागना हमारे लिए बिलकुल ही अलग तरह का अनुभव है। परसों रात सायरन बहुत तेज बजा। लोग शेल्टर में भाग रहे थे। बहुत तेज धमाके हो रहे थे, इमारत कांप रही थी। पंद्रह मिनट ये सब चलता रहा। बाहर निकले तो पता चला कि हमास ने सैकड़ों रॉकेट दागे हैं।'

डॉ. विजय फिलहाल तेल अवीव में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वे कहते हैं कि वे लैब में काम करते हैं, लेकिन उन्हें भी आपात हालात के दौरान बंकर में कैसे शरण ली जाए, इस बारे में ब्रीफ किया गया है।
डॉ. विजय फिलहाल तेल अवीव में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वे कहते हैं कि वे लैब में काम करते हैं, लेकिन उन्हें भी आपात हालात के दौरान बंकर में कैसे शरण ली जाए, इस बारे में ब्रीफ किया गया है।

डॉ. विजय कहते हैं, 'उस दिन रात को लोग डरे हुए थे। रॉकेट दागे जाने की आवाजें आ रही थीं। बावजूद इसके शहर में माहौल सामान्य सा दिख रहा था। लोग अपना काम करते नजर आ रहे थे। वाहन चल रहे थे।' डॉ. विजय जिस लैब में काम करते हैं, वहां भी एक सुरक्षित बंकर हैं और उनके डिपार्टमेंट हेड ने जरूरत पड़ने पर वहां शरण लेने के लिए उन्हें ब्रीफ किया है। डॉ. विजय कहते हैं, 'हर समय अलर्ट रहना पड़ता है। लोग हर पल चौकन्ने रहते हैं और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद भी करते हैं। यही वजह है कि मैं यहां असुरक्षित महसूस नहीं कर रहा हूं। इजराइल के पास टेक्नोलॉजी है जो हमें सुरक्षा का अहसास कराती है।'

डॉक्टर विजय बताते हैं कि इजराइल में आम भावना ये है कि हमास की तरफ से हो रहे रॉकेट हमलों का जोरदार तरीके से जवाब दिया जाए। डॉ. विजय बताते हैं, 'यहां की सेना भी वीडियो बनाकर शेयर करती है और गाजा पर हमलों के समर्थन में अपना तर्क देती है। अभी एस्केलोफ शहर में हुए एक हमले में एक भारतीय महिला और एक अन्य इजराइली महिला की मौत के बाद सेना के कमांडर वहां पहुंचे और वीडियो बनाकर सवाल किया कि जब हम पर इस तरह के हमले हो रहे हैं तो हम क्यों न जवाब दें?'

इजराइल की आयरन डोम तकनीक के कारण राजधानी तेल अवीव और दूसरे कई शहर मिसाइल हमलों से सुरक्षित रहते हैं, लेकिन तेज धमाकों के कारण खिड़कियों और गाड़ियों के कांच अक्सर टूट जाते हैं।
इजराइल की आयरन डोम तकनीक के कारण राजधानी तेल अवीव और दूसरे कई शहर मिसाइल हमलों से सुरक्षित रहते हैं, लेकिन तेज धमाकों के कारण खिड़कियों और गाड़ियों के कांच अक्सर टूट जाते हैं।

पहली बार देख रहा हूं कि इजराइली और अरबों के बीच दंगे शुरू हो गए हैं
पश्चिम बंगाल के रहने वाले डॉ. किंगसुक सरकार 2018 से इजराइल में रह रहे हैं। वो पिछले छह महीने से राजधानी तेल अवीव में रह रहे हैं। सरकार कहते हैं, 'इस समय इजराइल में हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। यहां पिछले तीन सालों से कुछ न कुछ हो रहा था, लेकिन ये सबसे गंभीर स्थिति है।'
डॉ. सरकार कहते हैं, 'दस मई को यरुशलम से शुरू हुई हिंसा समूचे इजराइल में फैल रही है। मैं पहली बार देख रहा हूं कि उन शहरों में भी हिंसा हो रही है जहां अरब और इजराइली लोग साथ रहते आए हैं।'
डॉ. सरकार कहते हैं, 'मैं जहां रहता हूं वहां कुछ अरब लोगों की भी दुकाने हैं। एक अरब नाई की दुकान हैं। ये सब दो दिनों से बंद हैं। मैं ये पहली बार देख रहा हूं कि इजराइल के शहरों में दंगे भड़क गए हैं।'

डॉ. सरकार कहते हैं कि गाजा से रॉकेट तेल अवीव तक भी पहुंच रहे हैं। कुछ ड्रोन हमले होने की भी खबरें हैं। इजराइल के सबसे दक्षिणी क्षेत्र ऐलात तक गाजा से दागे गए रॉकेट पहुंचने की खबर है, जिससे पता चलता है कि इस बार गाजा से होने वाले हमले कितने गंभीर हैं। डॉ. सरकार के मुताबिक तेल अवीव और आसपास के शहरों में दिन भर फाइटर जेट के गड़गड़ाने की आवाजें आती रहती हैं। डॉ. सरकार के मुताबिक इजराइल में बड़ी तादाद ऐसे उदारवादी लोगों भी रहते हैं जो चाहते हैं कि हिंसा समाप्त हो और स्थाई शांति स्थापित हो, लेकिन कुछ कट्टरवादी लोग भी हैं जो गाजा की तरफ से होने वाले हर हमले का पूरी ताकत से जवाब देने पर जोर देते हैं।

पश्चिम बंगाल के रहने वाले डॉ. किंगसुक सरकार 2018 से इजराइल में रह रहे हैं। वे कहते हैं कि पहले झड़पें गाजा और उसके आसपास तक ही सीमित रहती थीं, लेकिन इस बार गाजा से हमले साउथ इजराइल तक हुए हैं। साथ ही इजराइल के कई शहरों में अरबों-इजराइलियों के बीच दंगे भी शुरू हो गए हैं।
पश्चिम बंगाल के रहने वाले डॉ. किंगसुक सरकार 2018 से इजराइल में रह रहे हैं। वे कहते हैं कि पहले झड़पें गाजा और उसके आसपास तक ही सीमित रहती थीं, लेकिन इस बार गाजा से हमले साउथ इजराइल तक हुए हैं। साथ ही इजराइल के कई शहरों में अरबों-इजराइलियों के बीच दंगे भी शुरू हो गए हैं।

इजराइल में कम ,लेकिन गाजा पट्‌टी में ज्यादा नुकसान होता है
भारतीय शोध छात्रा मयूरी यरुशलम में रहती हैं। यहां के एक व्यस्त चौराहे का हाल बताते हुए मयूरी कहती हैं, 'यरुशलम में अभी हालात सामान्य हैं। बाजार खुला है और लोग सामान खरीद रहे हैं। बीते दो दिनों में यहां कोई रॉकेट नहीं गिरा है। हम यही दुआ कर रहे हैं कि शांति बनी रहे।' मयूरी बताती हैं कि 'गाजा से जो रॉकेट दागे जाते हैं उन्हें इजराइल आयरन डोम के जरिए आसमान में ही मार गिराता है, लेकिन गाजा के पास ऐसी सुरक्षा प्रणाली नहीं हैं। इजराइल के जवाबी हमलों में गाजा में लोग मारे जाते हैं। ऐसे में इजराइल का नुकसान कम होता है और गाजा का ज्यादा। दोनों तरफ शक्ति असंतुलन बहुत ज्यादा है।'

इजराइल में लोग मानते हैं कि हमास की ताकत के पीछे ईरान
इजराइल में बहुत से लोग ये भी मानते हैं कि गाजा में हमास की ताकत के पीछे ईरान है। डॉ. मॉर कहते हैं, 'ईरान ही हमास को हथियार पहुंचा रहा है। सिर्फ गाजा ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में ईरान हथियार पहुंचा रहा है।' डॉ. सरकार के मुताबिक इजराइल के अधिकतर लोग ये मानते हैं कि हमास और इस्लामिक जिहाद को ईरान से हथियार मिल रहे हैं। वो कहते हैं, 'इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच संघर्ष एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है जो आसानी से सुलझता नहीं दिख रहा है।'

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