Sunday जज्बात:मुझे लड़के 'अबे मीठे- अबे गुड़' कहके चिढ़ाते हैं, उन्हें कैसे बताऊं कि गे के साथ उठने-बैठने से कोई गे नहीं हो जाता

2 महीने पहलेलेखक: प्रकाश झा

मैं प्रकाश झा बिहार का रहने वाला हूं। अब भोपाल में सेटल्ड हो गया हूं। एक दिन घर में मां ने मुझे तेज आवाज देकर बुलाया। आमतौर पर वह ऐसा नहीं करती हैं। उनके लहजे से मैं समझ गया कि मामला गड़बड़ है। अपना काम छोड़कर फौरन उनके पास गया। उन्होंने पूछा कि राजू क्या तुम दूसरे मर्दों के साथ सोते हो? यह सुनकर मुझसे कुछ बोलते नहीं बना। कुछ देर बाद मैंने साफगोई से मां को बताया कि हां, मैं नॉर्मल लड़का नहीं हूं, गे हूं।

इतना सुनने के बाद मां कुछ देर शून्य में ताकती रही। मैंने देखा कि उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उन्होंने कोई सवाल नहीं किया। बस इतना कहा कि तुम्हारे गे होने से ऐसा नहीं है कि तुम मेरे बेटा नहीं रह जाओगे, लेकिन कभी कोई गलत काम मत करना। तब से लेकर आज तक मां ने कभी इसका जिक्र नहीं किया। पूरे समाज से मेरे लिए लड़ी। वो मजाक में कहती है कि सबका बेटा बहू लाता है और मेरा यह बेटा मेरे लिए दामाद लाएगा।

हालांकि पापा को इस बारे में नहीं पता है। वे दिल के मरीज हैं। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से उनकी जरा सी भी तबीयत खराब हो। बाकी तो घर में मां,भाई और बहन सभी को पता ही है।

अब चलिए मैं आपको अपनी जर्नी के बारे में बताता हूं। बात तब की है जब मैं दूसरी क्लास में पढ़ रहा था। स्कूल के एनुअल प्रोग्राम में मुझे राधा बनाया गया। राधा बनने पर कुछ अजीब सा, लेकिन अच्छा लगा।

इसके बाद तो मेरा लड़कियों की तरह सजना-संवरना शुरू हो गया। जब भी मौका मिलता शीशे के सामने मां के मेकअप का सामान लेकर मेकअप करने लगता था, लेकिन मां कभी इन हरकतों से परेशान नहीं हुई। पापा और भाई बहुत बवाल करते थे कि देखो यह क्या कर रहा है...दिन भर शीशे में अपने आपको निहारता रहता है। इस पर मेरी मां कहती थी कि तुम अपना संभालो, अपना देखो, वो जो कर रहा है उसे करने दो, उसकी जिंदगी है।

प्रकाश का कहना है, "कॉलेज टाइम तक मैं गे बन चुका था। कुछ खास दोस्त भी इसके बारे में जानते थे। कई लोग इसको लेकर मेरा मजाक भी उड़ाते थे।"
प्रकाश का कहना है, "कॉलेज टाइम तक मैं गे बन चुका था। कुछ खास दोस्त भी इसके बारे में जानते थे। कई लोग इसको लेकर मेरा मजाक भी उड़ाते थे।"

बस यहीं से शुरू होती है मेरी गे बनने की जर्नी। सबसे पहले अपने स्कूल के एक दोस्त राहुल को इसके बारे में बताया था। जब मैं इंजीनियरिंग के पहले साल में था तब मैंने राहुल से कहा कि मैं गे हूं। उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया, बोला इट्स ओके, क्या दिक्कत है। इससे पहले भी मैं कई दोस्तों को बताना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं हुई। क्योंकि वो लोग बातचीत में ऐसे लोगों का मजाक उड़ाया करते थे। मुझे लगा कि वो मेरा भी मजाक उड़ाएंगे।

वक्त बीतता गया। मेरे साथ क्या हो रहा था मुझे खुद को समझ नहीं आ रहा था। अब मैं छठी-सातवीं क्लास में आ चुका था। मैं अपने आपको लेकर बहुत पसोपेश में था। मैं सोच रहा था कि मैं ट्रांसजेंडर हूं, इंसान हूं, लड़का हूं, लड़की हूं आखिर मैं हूं कौन? मैं दूसरे लड़कों की तरह लड़कियों को देखकर आकर्षित नहीं होता हूं। मुझे लड़के अच्छे लगते हैं। कोई लड़की अगर मुझे छू देती है तो मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता है, लेकिन अगर कोई लड़का मुझे छू देता है तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

मेरे भाई का एक दोस्त था। वो मेरा भी अच्छा दोस्त था। एक दिन घर पर कोई नहीं था तो वह मेरे घर पर आया। हम दोनों बातचीत करने लगे। मैं बचपन से ही मस्तीखोर रहा हूं। धीरे-धीरे उस दोस्त ने मुझे छूना शुरू किया। मुझे अच्छा लगा। वो जो भी कर रहा था मैंने उसे रोका नहीं। इस घटना के बाद मैं और परेशान हो गया कि आखिर मैं कौन हूं?

मेरे दोस्त लड़कियों के बारे में बात किया करते थे। मैं ऐसा नहीं कर पाता था। मुझे कुछ समझ नहीं आता था कि आखिर मैं कैसा हूं, मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। स्कूल में इसे लेकर बहुत प्रताड़ित भी हुआ हूं। जब भी कहीं से गुजरता था तो लड़के बोलते थे 'अबे गुड़..' 'अबे मीठे..' 'लेडीज'। मुझे खराब लगता था जब मैं उन्हें जवाब नहीं दे पाता था।

प्रकाश बोले- मैं बचपन से ही मस्तीखोर रहा हूं। अपनी लाइफ अपने हिसाब से जीना पसंद रहा है।
प्रकाश बोले- मैं बचपन से ही मस्तीखोर रहा हूं। अपनी लाइफ अपने हिसाब से जीना पसंद रहा है।

अब मैं दसवीं क्लास में दाखिल हो चुका था। साथ के लड़के फिल्म एक्ट्रेस के साथ अपनी फैसिनेशन पर बातें करते थे, लेकिन मुझे अक्षय कुमार अच्छा लगता था। मुझे लगता था कि काश अक्षय कुमार मेरा ब्वॉयफ्रेंड होता। अक्षय कुमार के अलावा स्कूल और कॉलेज में कुछ सीनियर मेरा क्रश रहे हैं। खासकर कॉलेज में। वे स्ट्रेट थे। किसी तरीके से मैंने उनसे बातचीत के तरीके निकाले। मेरे लिए इतना ही बहुत था कि मेरी उनसे बात हो जाती थी। मैं जानता था कि इससे ज्यादा ये लोग मुझे हासिल नहीं हो सकते हैं।

कॉलेज में भी मेरे साथ यही हुआ। मैं कॉलेज में कल्चरल एक्टिविटिज का इंचार्ज था। मेरे दोस्त एक ग्रुप बनाकर मुझे देखकर गुपचुप बातें किया करते थे। समझ आता था कि मेरे बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन क्या कर सकता था। मैं कुछ नहीं बोलता था। इंजीनियरिंग के पहले साल में जाकर मुझे पूरी तरह से यकीन हो गया था कि मैं एक गे हूं।

शुरुआती साल में वहां मेरी एक गर्ल फ्रेंड बनी, लेकिन मैं उसे गर्लफ्रेंड की बजाय दोस्त समझता था। हम एक दूसरे को डेट कर रहे थे। एक बार वो शारीरिक संबंध बनाने का दबाव देने लगी। मुझे कोई आपत्ति नहीं हुई। हमारे बीच शारीरिक संबंध बने, लेकिन मुझे बहुत अजीब सा लगा। घिन सी हुई और दोबारा कभी लड़की से संबंध बनाने की इच्छा नहीं हुई। जबकि उस लड़की से पहले मेरे कई लड़कों के साथ शारीरिक संबंध रह चुके थे। मुझे लड़कों के साथ ऑर्गेज्म फील होता था।

कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद मैं उन दिनों मुंबई में रहता था। रोहन पुजारा (मिस्टर गे-2018) के साथ इंस्टाग्राम पर जुड़ा हुआ था। कभी कभार बात भी हो जाती थी। सच कहूं तो वो मेरा क्रश था।

रोहन पुजारा ने मुझे एक वेब सीरीज में काम करने का ऑफर दिया। उसने मुझे डायरेक्टर से मिलवाया। डायरेक्टर ने बताया कि मुझे बेड पर किस करते हुए सीन देना है। मैं राजी हो गया। वो वेब सीरीज हिट हो गई। इसे करोड़ों लोगों ने देखा। मेरे सगे भाई ने भी देख लिया और मां से शिकायत कर दी कि तुम्हारा बेटा तो मुंबई में मर्दों के साथ सो रहा है। मैंने मां को समझाया कि वो एक फिल्म थी। सिर्फ ऑन कैमरा सीन देना होता है।

प्रकाश का कहना है कि उनका भाई आज भी ताने देता है तो मां बुरी तरह से उनकी क्लास ले लेती है कि तू अपने से मतलब रख, वो अपना देख लेगा।
प्रकाश का कहना है कि उनका भाई आज भी ताने देता है तो मां बुरी तरह से उनकी क्लास ले लेती है कि तू अपने से मतलब रख, वो अपना देख लेगा।

हालांकि बाद में मैंने मां को भी बता दिया कि मुझे लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है। पहले तो वो मेरी बात समझी नहीं। फिर मैंने उनसे कहा कि जैसे आपको पापा को देखकर फीलिंग आती है या पापा को आपको देखकर आती है, वैसी फीलिंग मुझे किसी लड़की को देखकर नहीं आती बल्कि लड़के को देखकर आती है। मां ने बहुत भोलेपन से पूछा कि राजू तू कभी शादी नहीं करेगा ? मैंने कहा कि नहीं, मुझे कोई हक नहीं है कि मैं किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दूं।

मेरी मां ने मेरी पूरी बात सुनी और एक गहरी सांस ली। मां ने कहा कि यह तुम्हारी जिंदगी है। मेरे लिए सिर्फ तुम मेरे बेटे हो और मेरे लिए सिर्फ तुम्हारी खुशी मायने रखती है। बस तुम खुश रहो। मां के यह शब्द सुनकर उस दिन मैं बहुत बहुत रोया। राहत की सांस ली। उसके बाद कभी मां ने अहसास नहीं होने दिया कि मैं गे हूं। वो साथ ऐसे रहती है जैसे मैंने उन्हें कुछ बताया ही न हो, कुछ हुआ ही न हो। सब नॉर्मल हो। मेरा भाई आज भी जब मुझे ताने देता है तो मेरी मां बुरी तरह से उसकी क्लास ले लेती है कि तू अपने से मतलब रख, वो अपना देख लेगा।

मां की तरह ही बहन से भी मेरा बहुत मजबूत रिश्ता है। बहन की शादी को एक साल हुआ था। मैंने अपनी बहन को फोन लगाया। मैं उससे कहा कि दीदी मुझे तुम्हे कुछ बताना है, लेकिन ओवर रिएक्ट मत करना। मैंने कहा कि तूने एलजीबीटी समुदाय के बारे में सुना है कभी? दीदी ने मना कर दिया। फिर मैंने उससे पूछा कि तूने गे सुना है कि कौन होते हैं ? दीदी ने कहा कि हां गे के बारे में तो सुना है।

प्रकाश का कहना है कि गे होना इतना आसान नहीं है। समाज अभी भी ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे लोगों का सपोर्ट मिला।
प्रकाश का कहना है कि गे होना इतना आसान नहीं है। समाज अभी भी ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे लोगों का सपोर्ट मिला।

मैंने दीदी से कहा कि मैं एक गे हूं। यह सुनते ही मेरी बहन रोने लगी। वो इसलिए नहीं रोई कि मैं एक गे हूं बल्कि इसलिए रोने लगी कि मुझे कोई अच्छा पार्टनर नहीं मिलेगा और मैं जीवन में अकेला रह जाउंगा। मैंने उसे समझाया कि ऐसा नहीं है। मैं अकेला नहीं रहूंगा। अब जब भी मेरी बहन का फोन मुझे आता है तो वो पूछती है कि शादी के लायक कोई लड़का मिला? किसी को आजकल डेट कर रहा है या नहीं ?

हालंकि मैं दो साल से अकेला रह रहा हूं। इससे पहले रिलेशनशिप में था। गे रिलेशनशिप बहुत मुश्किल होते हैं। भरोसा बहुत जरूरी होता है, लेकिन उस रिश्ते में इतनी कड़वाहट हो गई थी कि हर दिन लडाई झगड़ा ही रहता था।। मैं उस रिश्ते से बाहर आ गया।

होमोसेक्शुअलिटी को आज भी समाज नॉर्मल नहीं लेता है। समाज का तर्क है कि होमोसेक्शुअल होना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन हमारा बच्चा होमोसेक्शुअल न हो बल्कि पड़ोसी का हो। समाज अपने बच्चों को हमसे दूर रखता है। हमारे साथ खेलने नहीं देता है, उठने बैठने या दोस्ती नहीं करने देता है। जबकि लोगों को यह पता होना चाहिए कि होमोसेक्शुअल के साथ उठने बैठने से कोई होमोसेक्शुअल नहीं हो जाता है।

प्रकाश झा ने ये सारी बातें भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से शेयर की हैं...