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नूपुर की टिप्पणी से मचे बवाल पर तारिक फतेह बोले:भारत में मुस्लिम लीडरशिप देवबंदी-बरेलवी मौलानाओं के हाथ, इन्हें बस मार-काट ही सूझती है

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: प्रेम प्रताप सिंह

भारत सरकार को मुस्लिम सेक्युलर लीडरशिप को आगे लाना चाहिए। मुस्लिमों को सुधारने का जिम्मा पढ़े-लिखे मुस्लिमों को ही उठाना होगा। आमिर खान जैसे लोगों को मुस्लिम धर्म की कुरीतियों पर फिल्म बनानी चाहिए। सलमान और शाहरुख को कहना चाहिए कि मौलवी अपने घर जाएं, मुस्लिमों को बरगलाना छोड़ें। मदरसों और मस्जिदों से निकलने वाले मुस्लिम नेताओं से आज का मुस्लिम युवा भी तंग आ चुका है। असल मायने में देश में मुस्लिमों की दुर्दशा की जड़ ये मौलवी हैं।

अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चित रहने वाले तारिक फतेह से पूरी बातचीत पढ़ने से पहले आप इस पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं..

पाकिस्तानी मूल के कनाडाई पत्रकार और लेखक तारिक फतेह ने दैनिक भास्कर से भारत में बढ़ रहे हिंदू मुस्लिम विवाद पर लंबी बात की। आप भी पढ़िए पूरी बातचीत …

सवाल: नूपुर शर्मा के पैगंबर पर बयान के बाद जो रिएक्शन हो रहा है, उसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब : हिंदुस्तान की मुस्लिम लीडरशिप आज के दौर के मुताबिक नहीं है। ये न तो फ्रीडम ऑफ स्पीच को सम्मान देते हैं, न इनमें नुक्ताचीनी सहन करने की गुंजाइश है। यही वजह है कि दुनिया भर में मुस्लिम पिछड़े नजर आते हैं।

मैं मानता हूं कि नूपुर शर्मा का लहजा ठीक नहीं था, लेकिन शिवलिंग को लेकर कुछ लोग उन पर तंज कस रहे थे।

दिक्कत ये है कि मुस्लिम लीडरशिप 12वीं सदी की सोच से बाहर नहीं निकल पाई है। अभी हमें 21वीं सदी की खबर नहीं हुई है। इन्हें लूटमार करना, गर्दन काटना, पथराव करना और घर जलाना, यही सब दिखता है। ये लीडरशिप की हताशा दिखाता है।

सवाल: नूपुर शर्मा को उनकी टिप्पणी के लिए ‌BJP से निकाल दिया गया। फिर भी देश में उपद्रव देखने को मिल रहा है। आप इसके पीछे क्या पैटर्न देखते हैं?

जवाब : ये देश का बंटवारा कराने वाली ताकतों का एक्सटेंशन है। अब भी उसी तरह की सोच हावी है। ये नहीं सोचते कि औरंगजेब मर चुका है, फिर मुगल नहीं आने वाले। तैमूर भी नहीं आने वाला। ये मुस्लिम लीडरशिप देवबंदी और बरेलवी मौलवियों के हाथ में है। मदरसों और मस्जिदों से तो लीडर निकलते हैं। देश में बढ़ रहे उपद्रव के लिए मौलवियों को जिम्मेदार मानता हूं।

सवाल: शुक्रवार को इबादत का खास दिन होता है। दुआएं मांगी जाती हैं। उस दिन मुस्लिम समुदाय हिंसा पर क्यों उतारू हो जाता है? क्या इस्लाम ऐसा करने की इजाजत देता है?

जवाब : दुनिया भर में मुसलमान ये दुआ मांगते हैं कि कुफ्र पर इस्लाम की जीत हो। काफिर पर जीत की बात की जाती है। काफिर कौन है? हिंदू, ईसाई और यहूदी। हिंदुस्तान में काफिर कौन है? हिंदू। जब तक काफिर शब्द का इस्तेमाल होगा, तब तक हिंदुस्तान का मुसलमान हिंदुस्तानी नहीं हो सकेगा।

जब तक मुस्लिम लीडरशिप ऐसे लोगों के हाथ नहीं आती, जो सियासत और धर्म को अलग रखने के हिमायती हों, तब तक ये सिलसिला चलता रहेगा।

पहले कहा गया कि मुसलमान हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते। इस चक्कर में हिंदुस्तान का बंटवारा कर दिया।

अब भी चैन नहीं है। अब अगर हिंदुस्तान के मुसलमान कहें कि वे हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते, तो क्या करें? हिंदुस्तान के इतिहास को जला दें? कुछ लोगों को ये खटकता है कि कयामत का दिन तब तक नहीं आएगा, जब तक सारे मंदिरों को नष्ट न कर दिया जाए और हिंदुओं को मार न दिया जाए।

हिंदुस्तान को इस नजर से देखा जाता है कि इस पर कब्जा करना है। इसे इस्लाम के तहत लाना है।

सवाल: UP में योगी सरकार की ओर से हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ बुलडोजर चलाया जा रहा है। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि हर शुक्रवार के बाद शनिवार आएगा। इसे आप किस तरह देखते हैं?

जवाब : घरों को तोड़ा जाना एक ट्रैजेडी है। घर बनाने में समय और पैसा लगता है। योगी जी बेहतर समझते हैं कि कानून व्यवस्था को कैसे काबू करना है। मुसलमानों का कसूर है कि वे बेवजह उपद्रव कर रहे हैं। जो लोग अरब देशों की शिकायतों को सेलिब्रेट कर रहे हैं, उन्हें अपना समझना मुश्किल हो जाता है।

नूपुर शर्मा के बयान पर मुस्लिम देशों की आपत्ति पर एक भारतीय मुसलमान को खुश नहीं होना चाहिए। दिक्कत ये है कि अब तक मुसलमान खुद को हिंदुस्तानी नहीं समझ पाए हैं। कतर में वोट देने का अधिकार नहीं है। माइनॉरिटी जिंदा नहीं रह सकती वहां। वह देश भारत को लेक्चर दे रहा है कि उसे कैसे अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव करना चाहिए?

सवाल: इस तरह के मसलों से निपटने के लिए आप भारत सरकार को क्या सलाह देंगे?

जवाब : भारत सरकार को मुस्लिम सेक्युलर लीडरशिप को आगे लाना चाहिए। आरिफ मोहम्मद खान जैसे तमाम अच्छे लोग हैं, जो मुसलमानों को नई दिशा दे सकते हैं। ओवैसी जैसे लोगों को दरकिनार करना चाहिए। ये संविधान का दुरुपयोग अपने फायदे के लिए करते हैं। ये तब कभी नहीं बोलते जब अरब देशों से आकर शेख हैदराबाद से बच्चियों को खरीद कर ले जाते हैं। ओवैसी जैसे लोगों को बताना चाहिए कि भारत इस्लामिक रियासत नहीं है। न ही आप पर इसे इस्लामिक रियासत बनाने की कोई जिम्मेदारी है। इतने बड़े मुल्क को संभालने में मदद करनी चाहिए।

सवाल: पूरे देश में हिंसा और दंगों की खबरों के बीच मुस्लिम लीडरशिप की चुप्पी की वजह क्या है?

जवाब: भारत में मुस्लिम लीडरशिप कहां है। आप जो चाहिए कह दीजिए। मौलवी फतवा जारी कर देंगे। उन्हें उकसाने का मौका चाहिए। मार-काट के अलावा कुछ सूझता नहीं इनको। पाकिस्तान में देखिए क्या हो रहा है। ईसाई औरत को मार दिया। कराची में दो हिंदू मंदिर तोड़ डाले।

सवाल: इस्लाम में हिंसा की क्या जगह है?

जवाब : इस्लाम में हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन पैगंबर मोहम्मद के इंतकाल के बाद ही दंगे शुरू हो गए थे। 18 घंटे तक नबी को दफनाया नहीं जा सका था। मुसलमानों ने हजारों मुसलमानों को मार डाला। तब इस्लाम को आए हुए एक साल भी नहीं हुआ था। हिंदुओं को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और मुसलमानों से बातचीत करते रहना चाहिए। जागरूकता का ही असर है कि मुसलमान अब एक्स मुस्लिम बनते जा रहे हैं।

सवाल: भारत में मुस्लिम कट्टरपंथ को आप कैसे देखते हैं, आजादी से पहले, आजादी के तुरंत बाद, नब्बे का दशक और अब मोदी सरकार का कार्यकाल। ये अब किस दिशा में जा रहा है?

जवाब : जिन मुस्लिम कट्‌टरपंथियों की वजह से पाकिस्तान बना, वे तो यहीं रह गए। इस वजह से कट्‌टरता भी यहीं बनी हुई है। पैगंबर ने कभी नहीं कहा था कि भारत पर कब्जा कर लो। उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान से अच्छी हवाएं आती हैं। खुशबू आती है। दिक्कत ये है कि भारतीय मुसलमानों की निष्ठा कतर के साथ नजर आती है, जिसकी भारत के सामने कोई हैसियत नहीं है।

सवाल: पिछले 8 साल से भारत में राष्ट्रवादी सरकार है, इस सरकार के दौर में धारा 370, CAA-NRC, राम मंदिर जैसे कई मुद्दों पर फैसले हुए हैं। सरकार का ये रुख क्या मुसलमानों की नाराजगी की वजह है?

जवाब : PM मोदी ने अपने आठ साल के कार्यकाल में मुसलमानों के खिलाफ कुछ नहीं कहा। पिछले कई सालों से आपको जबलपुर दंगे, बंबई दंगे जैसे वाकये देखने को नहीं मिले। मोदी ने ऐसा कुछ नहीं किया जो मुसलमानों के लिए नुकसानदेह हो, उन्हें खतरा पहुंचाता हो।

मुसलमानों को चाहिए कि ज्ञानवापी और मथुरा जैसे विवादों को खुद खत्म करने की पहल करें। अपने पूर्वजों के जुर्म से हमें क्यों प्यार होना चाहिए। हम इसके जिम्मेदार नहीं हैं कि औरंगजेब ने किस किस का कत्ल किया।

सवाल: क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम देशों को भारत के आंतरिक मामले में दखल देना चाहिए?

जवाब: दिक्कत ये है कि हिंदुस्तान का मुसलमान उन लोगों से मदद चाहता है, जो अपने लोगों को किसी तरह का अधिकार नहीं देते। भारत में 400 बोलियां हैं। 29 राज्य हैं। दुनिया के छह बड़े धर्म हैं। गुरुनानक से लेकर गौतम बुद्ध तक यहां पैदा हुए हैं। मिडिल ईस्ट के देश हमें नसीहत कैसे दे सकते हैं? अरब देशों से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनानी चाहिए।

सवाल: आपकी नजर में इसका समाधान क्या है? भारत में हिंदू मुस्लिम कैसे अच्छे से रह सकते हैं?

जवाब : मैं तो कहता हूं कि हर मुस्लिम लड़की को हिंदू लड़के से शादी करनी चाहिए। दिक्कत ये है कि हमारे हिंदू दोस्त इसे लव जिहाद कहते हैं। क्या ये जरूरी है कि बंदा बदसूरत हो तभी मुसलमान कहलाए? भारत में दिलीप कुमार जैसे अच्छे लोग हैं। ऐसे लोगों को लीडर मानना चाहिए। मुसलमान भी मौलवियों से तंग आ चुके हैं। मौलवियों के खिलाफ स्टैंड लेना चाहिए।

आमिर खान को मुस्लिमों के नजरिए से भी फिल्म बनानी चाहिए। उनकी बेगम ने कहा कि भारत में रहने में डर लगता है। तो उनको दुनिया में जाकर देखना चाहिए कि मुसलमान किस हालत में रह रहे हैं। यदि भारत में आपको मुश्किल है तो दुनिया के बारे में पता नहीं है।

सवाल : क्या आप आमिर, सलमान, शाहरुख खान को मुस्लिमों पर फिल्म बनाने की सलाह देंगे?

जवाब : सलमान तो अच्छे इंसान हैं। बाकी जो दो हैं, उनकी तो फैन फॉलोइंग काफी बड़ी है। इन्हें सामने आकर कहना चाहिए कि मौलवी अपने घर जाएं।

सवाल : नसीरुद्दीन शाह के लिए आपकी क्या सलाह है?

जवाब : वह अच्छे इंसान हैं। समझदार हैं, कभी-कभी दबाव में आकर गलत बात कर जाते हैं।