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आज की पॉजिटिव खबर:जयपुर के प्रतीक घर की छत पर फार्मिंग सिस्टम इंस्टॉल करते हैं; देश भर में 4 हजार कस्टमर, 1.5 करोड़ टर्नओवर

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

हमारे घर की छत पर थोड़ी-बहुत जगह होती हैं, जहां हम अपने इस्तेमाल की सब्जियों की खेती कर सकते हैं। कुछ लोग ऐसा करते भी हैं, लेकिन ज्यादातर लोग वक्त और व्यवस्था की कमी के चलते चाहते हुए भी ऐसा नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों की मदद के लिए जयपुर के प्रतीक तिवारी ने एक पहल की है। वे कस्टमर्स की छत पर एक कंप्लीट फार्मिंग सिस्टम इंस्टॉल करते हैं। इसमें बीज, खाद, मिट्टी से लेकर प्लांट की देखरेख की हर जरूरी चीज मौजूद होती है। पिछले 4 साल में वे देशभर में 4 हजार से ज्यादा घरों में अपना सिस्टम इंस्टॉल कर चुके हैं। सालाना 1.5 करोड़ रुपए उनका टर्नओवर है।

45 साल के प्रतीक ने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने लंबे वक्त तक अलग-अलग बड़ी कंपनियों में नौकरी की। इस दौरान एक फार्मिंग स्टार्टअप के साथ भी कुछ समय के लिए उन्होंने काम किया।

प्रतीक कहते हैं कि मैं फार्मिंग बैकग्राउंड से नहीं था, लेकिन एग्रीकल्चर से पढ़ाई करने और फिर उससे जुड़े स्टार्टअप के साथ काम करने के दौरान मुझे काफी कुछ सीखने को मिला। इस दौरान मुझे यह रियलाइज हुआ कि ऐसे कई लोग हैं जो अपनी जरूरत के लिए खुद फार्मिंग करना चाहते हैं। खुद सब्जियां उगाना चाहते हैं, लेकिन वे ऐसा कर नहीं पाते हैं। किसी के पास जगह की कमी है तो किसी के पास वक्त की। खास करके शहरों में।

एक ऐसे सिस्टम की जरूरत थी, जिससे लोग खुद ही सब्जियां उगा सकें

45 साल के प्रतीक ने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अब वे लिविंग ग्रीन्स ऑर्गेनिक्स नाम से अपना स्टार्टअप चला रहे हैं।
45 साल के प्रतीक ने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अब वे लिविंग ग्रीन्स ऑर्गेनिक्स नाम से अपना स्टार्टअप चला रहे हैं।

भास्कर से बात करते हुए प्रतीक कहते हैं कि शहरों में बड़े-बड़े घर होते हैं। ज्यादातर लोगों की छत खाली होती है। इसका इस्तेमाल फार्मिंग के लिए किया जा सकता है। कुछ लोग करते भी हैं। कोई गमले में करता है तो कोई वाटर प्रूफ सिस्टम डेवलप करके, लेकिन ये दोनों ही तरीके कारगर नहीं है। इससे छत को भी नुकसान पहुंचता है।

साल 2013 से प्रतीक ने इसको लेकर काम करना शुरू किया। वे कहते हैं, 'थोड़ा बहुत रिसर्च के बाद मुझे यह बात तो समझ आ गई कि लोग अब खाने-पीने को लेकर अवेयर हो रहे हैं। इसमें हेल्थ और वेल्थ दोनों ही लिहाज से मार्केट बहुत है। अब उनके सामने यह सवाल था कि आखिर छत को फार्मिंग में बदलने के लिए किस तरह का मॉडल तैयार किया जाए। ताकि तरीका कारगर भी हो, किफायती भी हो और छत को किसी तरह से नुकसान भी नहीं पहुंचे। साथ ही लोग आसानी से उसे मैनेज भी कर सकें।

2017 में शुरू किया पोर्टेबल फार्मिंग सिस्टम

प्रतीक कहते हैं कि 3-4 साल की मेहनत और कई पायलट प्रोजेक्ट करने के बाद हमने लिविंग ग्रीन्स ऑर्गेनिक्स नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया और एक कंप्लीट पोर्टेबल फार्मिंग सिस्टम डेवलप किया। जिसमें खाद, मिट्टी, प्लांट और सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम की व्यवस्था रखी। इसके साथ ही हम लोगों के घर सिस्टम इंस्टॉल करने और कस्टमर्स को गाइड करने के लिए अपनी टीम भी भेजते थे।

प्रतीक कहते हैं कि अब छोटे शहरों के साथ ही बड़े शहरों में भी उनके कस्टमर्स बढ़ रहे हैं। कोविड के दौरान इसकी डिमांड बढ़ी है।
प्रतीक कहते हैं कि अब छोटे शहरों के साथ ही बड़े शहरों में भी उनके कस्टमर्स बढ़ रहे हैं। कोविड के दौरान इसकी डिमांड बढ़ी है।

वे बताते हैं कि तब हमारे पास बजट भी कम था और टीम भी छोटी थी। साथ ही लोगों को इसके लिए तैयार करना भी मुश्किल टास्क था। कई लोगों को लगता था कि बिना जमीन की खेती नहीं हो सकती। हालांकि हम कोशिश करते रहे और धीरे-धीरे लोग हमसे जुड़ते गए। इसके बाद हमने सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप की मदद ली। इससे हमें काफी फायदा हुआ और कस्टमर्स की संख्या बढ़ गई।

शहरों में डिमांड बढ़ी, बिहार सरकार से भी हुआ करार

प्रतीक बताते हैं कि जैसे-जैसे हमारा काम आगे बढ़ा, वैसे वैसे लोगों का रिस्पॉन्स भी मिलता गया। लोग एक दूसरे को हमारे काम के बारे में बताते गए। इससे हमारा नेटवर्क बनता गया। फिर हमने खुद की वेबसाइट से भी लोगों तक पहुंचना शुरू किया। कई खबरें मीडिया में भी आईं। इसका भी हमें फायदा हुआ। छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों में अब हमारे कस्टमर हैं। इनमें मिडिल क्लास से लेकर अपर क्लास तक के लोग शामिल हैं। अब तक साढ़े चार हजार कस्टमर्स तक हम अपनी सर्विस पहुंचा चुके हैं।

प्रतीक कहते हैं कि हमारा फार्मिंग सिस्टम ऐसा है कि इसे हर कोई आसानी से मैनेज कर सकता है।
प्रतीक कहते हैं कि हमारा फार्मिंग सिस्टम ऐसा है कि इसे हर कोई आसानी से मैनेज कर सकता है।

वे कहते हैं,'हाल ही में हमने बिहार सरकार के साथ भी करार किया है। हम वहां के चार जिलों - पटना, भागलपुर, गया और मुजफ्फरपुर में हम काम कर रहे हैं। जहां लोगों को 50% सब्सिडी पर यह सुविधा मिल रही है। फिलहाल वहां एक हजार घरों में फार्मिंग सिस्टम लगाने का हमारा टारगेट है।' अगर यह प्रयोग सफल होता है तो आगे बिहार के सभी जिलों के लिए हम काम करेंगे। इसको लेकर हम तैयारी भी कर रहे हैं। सरकार से भी ग्रीन सिग्नल मिल गया है।

कैसे करते हैं काम? क्या- क्या फैसिलिटी मिलती है कस्टमर को?

प्रतीक कस्टमर्स को कम्प्लीट पोर्टेबल फार्मिंग किट मुहैया कराते हैं। जो 10 फीट लंबा, 4 फीट चौड़ा होता है। जिसमें करीब 50 प्लांट लग सकते हैं। इसकी कीमत अभी 12 हजार रुपए है। इसमें बीज, मिट्टी, खाद, स्प्रे सहित सब्जी उगाने के लिए हर जरूरी चीज उपलब्ध होती है। इसमें सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगा है। ताकि कस्टमर को सिंचाई में असुविधा नहीं हो।

वे कहते हैं कि हमने अपने सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया है जिससे कि कोई भी कस्टमर खुद ही इसे इंस्टॉल कर सके। फिर भी अगर किसी को दिक्कत होती है तो इस किट के साथ यूजर गाइड और वीडियो सपोर्ट भी होता है। जिसमें सिस्टम को इंस्टॉल करने और उसकी देखरेख की पूरी प्रोसेस होती है।

प्रतीक बताते हैं कि यह फार्मिंग सिस्टम किफायती होने के साथ ही मजबूत भी है। धूप और बारिश से बचाव की सुविधा भी इसमें है।
प्रतीक बताते हैं कि यह फार्मिंग सिस्टम किफायती होने के साथ ही मजबूत भी है। धूप और बारिश से बचाव की सुविधा भी इसमें है।

प्रतीक के मुताबिक सब्जियों के प्लांट का चयन भी कस्टमर्स ही करते हैं। उन्हें पहले लिस्ट भेजी जाती है। उनमें से जिस-जिस प्लांट को वे सिलेक्ट करते हैं। उन्हीं प्लांट के बीज किट के साथ भेजा जाता है। यानी कस्टमर्स के पसंद की ही सब्जी होगी। इसके अलावा सब्जियों की देखरेख के लिए 7 अलग-अलग ऑर्गेनिक स्प्रे भी इस किट में मौजूद होते हैं। जिस पर सप्ताह के सभी दिनों के नाम लिखे होते हैं। उन्हें डे वाइज प्लांट पर स्प्रे करना होता। इससे सब्जियों का प्रोडक्शन बढ़ता है।

कोविड में शुरू किया ऑनलाइन सपोर्ट सिस्टम

प्रतीक कहते हैं कि पहले हम अपनी टीम को कस्टमर्स के पास सिस्टम इंस्टॉल करने के लिए भेजते थे। पिछले साल जब कोविड आया तो ऐसा करना मुमकिन नहीं था। तब हमने ऑनलाइन सपोर्ट सिस्टम शुरू किया। इसके लिए हमने एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है। जहां कस्टमर्स अपनी दिक्कतें बता सकते हैं। वे रेगुलर अपनी प्लांट की फोटो-वीडियो ग्रुप में भेजते हैं और हमारी टीम उन्हें उसके हिसाब से सॉल्यूशन बताती हैं। इतना ही नहीं कस्टमर चाहें तो हमें वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। हमारे पास ऑर्गेनिक एक्सपर्ट की एक टीम है, जो कस्टमर्स को गाइड करती है कि किस तरह प्लांट का ख्याल रखना है। जगह, मौसम और क्लाइमेट के हिसाब से किस प्लांट को कब और कितना खाद-पानी देना है।