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  • Jayant Of Rajasthan Got Cancer 6 Times One After The Other, But Never Gave Up; Now A Motivational Speaker, Gives Encouragement To Millions Of People

खुद्दार कहानी:राजस्थान के जयंत को 6 बार कैंसर हुआ, 60 बार रेडियोथेरेपी करवानी पड़ी, लेकिन हार नहीं मानी; अब मोटिवेशनल स्पीकर हैं, लाखों लोगों को हौसला देते हैं

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: मेघा

कैंसर ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही जान हलक में अटक जाती है। इसने न जाने कितनों की जान ली है, लेकिन इसे हराने वालों की गिनती में भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी हिम्मत और जज्बे की हम दाद देते हैं। आज की खुद्दार कहानी भी ऐसे ही एक लड़के की है, जिसने कैंसर को एक बार, दो बार, तीन बार नहीं बल्कि 6 बार हराया है। 23 साल के जयंत कंदोई राजस्थान के अजमेर जिले के रहने वाले हैं। पूरे भारत में जयंत पहले ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने कैंसर को 6 बार हराया है।

जयंंत को बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई का खूब शौक था। वे अपने स्कूल में टॉपर हुआ करते थे वो भी फुल अटेंडेंस के साथ। इसके साथ ही जिला स्तर पर खोखो चैम्पियन, डांसर, सिंगर और एंकरिंग में भी आगे रहते थे, लेकिन कैंसर नामक कीड़े ने उनकी इस हंसती-खेलती जिंदगी पर ब्रेक लगा दिया।

2013 में पहली बार हुआ कैंसर, 12 बार कीमोथेरेपी हुई

बार-बार कैंसर होने की वजह से जयंत की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित रही, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब वे MBA कर रहे हैं।
बार-बार कैंसर होने की वजह से जयंत की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित रही, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब वे MBA कर रहे हैं।

जयंत को पहली बार साल 2013 में कैंसर हुआ। तब वे 10वीं क्लास में पढ़ते थे। उनके गले के दाहिने तरफ Hodgkin's lymphoma हुआ। जिसका इलाज भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में हुआ। इस दौरान जयंत की 12 बार कीमोथेरेपी हुई थी। कैंसर के इलाज के साथ जयंत के बोर्ड एग्जाम्स भी थे। थेरेपी के साथ ही जयंत ने परीक्षा भी दी और अपने स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया।

इसके बाद सब ठीक चल रहा था, लेकिन कैंसर ने एक बार फिर जयंत पर अटैक किया। साल 2015 में फरवरी में जयंत के गले के दूसरे तरफ यही बीमारी हो गई। इसके लिए जयंत को रेडियोथेरेपी का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान जयंत ने 60 रेडियोथेरेपी के सेशन लिए।

कैंसर का इलाज हुआ और वे ठीक हो गए। अपने इलाज के दौरान भी जयंत ने कभी पढ़ना-लिखना नहीं छोड़ा। इसके बाद जयंत बीकॉम की पढ़ाई करने दिल्ली चले गए। पहले साल अप्रैल से जुलाई 2017 के बीच जयंत को पेट में दर्द की शिकायत होने लगी। जब दर्द बहुत ज्यादा बढ़ गया तो जयंत को अस्पताल ले जाया गया, पता चला कि फिर से कैंसर है। इस वक्त जयंत ने एक स्टार्टअप शुरू किया था, जिसे जल्द ही 1 करोड़ की फंडिंग मिलने वाली थी, लेकिन इलाज के लिए जयंत को अपनी पढ़ाई और स्टार्टअप दोनों बीच में ही छोड़ना पड़ा।

2020 में छठी बार कैंसर हुआ

जयंत को पहली बार कैंसर साल 2013 में हुआ। तब वे 10वीं क्लास में पढ़ते थे, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं खोया और अस्पताल से जीतकर लौटे।
जयंत को पहली बार कैंसर साल 2013 में हुआ। तब वे 10वीं क्लास में पढ़ते थे, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं खोया और अस्पताल से जीतकर लौटे।

जयंत फिर से अस्पताल में भर्ती हुए। दो साल तक इलाज चला। इस दौरान जयंत ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर सिटी स्टार क्लब नाम से एक संस्था खोली। जिसमें वे कैंसर के मरीजों की मदद करते हैं। साल 2019 की शुरुआत में जयंत के पैंक्रियाज में और दिसंबर 2019 में बाजू में छोटी-छोटी गांठ हुई। इस बार भी जयंत हिम्मत नहीं हारे और कैंसर को मात दी। इसके बाद फिर 6वीं बार नवंबर 2020 में जयंत कैंसर की चपेट में आ गए और तब उनका बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया गया।

कैंसर को हराने की इस जर्नी में जयंत के माता-पिता उनका सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम थे। जयंत बताते हैं कि उनके पापा ने कहा था कि तुझे भगवान से भी जीत कर ले आऊंगा। जयंत बताते हैं - मेरे दोस्त मेरे साथ नहीं खेलते थे, कुछ दोस्त हमदर्दी देते थे। परिवारों को अलग किया गया ताकि हम उनसे पैसे न मांगें।

कैंसर के बाद जयंत का जीवन बदल गया था, लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी। लोग आज भी कैंसर को बहुत बड़ी बीमारी मानते हैं। और ये बहुत गलत है। जयंत कहते हैं कि हमें सबके साथ एक बराबर का व्यवहार करना चाहिए। किसी को निराश न करें, रोग कुछ समय बाद दूर हो जाएगा, लेकिन रिश्ता खराब हो जाएगा। अगर हम सब कैंसर से मिलकर लड़ेंगे तो जल्द ही जंग जीत लेंगे।

जयंत कहते हैं कि हमें कैंसर से डरना नहीं चाहिए। अगर वक्त पर इलाज किया जाए और पॉजिटिव सोच रखी जाए तो जीत निश्चित है।
जयंत कहते हैं कि हमें कैंसर से डरना नहीं चाहिए। अगर वक्त पर इलाज किया जाए और पॉजिटिव सोच रखी जाए तो जीत निश्चित है।

अब लोगों को हौसला देने का काम कर रहे हैं
जयंत अपने स्वभाव में हुए बदलाव को लेकर कहते हैं कि - पहले मैं बहुत जिद्दी, मनमाना, गुस्सैल हुआ करता था। अब मैं जिंदगी को दूसरे नजरिए से देखने लगा हूं। मैं लोगों की मदद कैसे कर सकता हूं, मैं उस बात पर ज्यादा ध्यान देता हूं। जयंत की एक किताब जल्द ही पब्लिश होने वाली है और वे इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। अपनी संस्था की तरफ से भी वे कई लोगों की मदद कर रहे हैं। 2017 में जयंत ने अपने 5 दोस्तों के साथ मिलकर संस्था को शुरू किया था, आज उससे 700 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।

इसके साथ ही उन्होंने 2018 में ही ज्ञान की बातें नाम से एक ऐप लॉन्च किया था, जिसे अब 10 लाख से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं। जल्द ही वो लोकल दुकानदारों के लिए भी एक ऐप लॉन्च करने वाले हैं। फिलहाल जयंत एक मोटिवेशनल स्पीकर और MBA के सेकेंड ईयर के स्टूडेंट भी हैं। जयंत अपना एक खुद का अस्पताल खोलना चाहते हैं जिसमें वो कैंसर के मरीजों का मुफ्त में इलाज करवाना चाहते है। ताकि कैंसर होने के बाद किसी को भी इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

पिछले चार साल से जयंत अपने दोस्तों के साथ मिलकर लोगों की मदद के लिए संस्था चला रहे हैं। इससे 700 से ज्यादा लोग जुड़े हैं।
पिछले चार साल से जयंत अपने दोस्तों के साथ मिलकर लोगों की मदद के लिए संस्था चला रहे हैं। इससे 700 से ज्यादा लोग जुड़े हैं।
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