• Hindi News
  • Db original
  • Jharkhand's Avinash Started Logistic Services Startup During Kovid, Now Annual Turnover Of Reached 10 Crores Rupees.

आज की पॉजिटिव खबर:झारखंड के अविनाश ने कोविड के दौरान लॉजिस्टिक सर्विसेज का स्टार्टअप शुरू किया, अब सालाना 10 करोड़ टर्नओवर, 70 लोगों को नौकरी भी दी

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

कोरोना के बाद हेल्थ और इकोनॉमी के साथ ही लॉजिस्टिक सर्विसेज भी बहुत हद तक प्रभावित हुईं। संक्रमण के डर से सप्लाई चेन लगभग बंद सी हो गई थी। लोगों की तरफ से डिमांड आ रही थी, कंपनियों के पास ऑर्डर भी आ रहे थे, लेकिन कोई मूवर्स या कूरियर सर्विस कंपनी काम करने के लिए आसानी से तैयार नहीं हो रही थी। इस परेशानी को देखते हुए जमशेदपुर के रहने वाले अविनाश राघव ने पिछले साल एक पहल की और बड़े लेवल पर लॉजिस्टिक सर्विसेज का काम शुरू किया।

उन्होंने कोविड प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए काम करना शुरू किया और देशभर में सप्लाई चेन को जारी रखा। इसका उन्हें फायदा भी हुआ और 2 साल से कम समय में ही उनकी कंपनी का टर्नओवर 10 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच गया।

43 साल के अविनाश मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर से ताल्लुक रखते हैं। 1999 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे दिल्ली शिफ्ट हो गए। यहां करीब 7 साल तक उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में काम किया। इसके बाद साल 2006 में मिडिल ईस्ट कंट्री में चले गए। तब से लेकर अभी तक वहीं काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने दो दर्जन से ज्यादा कंपनियों के लिए बिजनेस एनालिसिस और पॉलिसी बनाने का काम किया है। इस लिहाज से लगभग हर इंडस्ट्री का उनके पास अच्छा खासा अनुभव है।

तीन साल पहले ही रणनीति बनाना शुरू कर दी थी

43 साल के अविनाश मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर से ताल्लुक रखते हैं। पिछले 15 साल से वे मिडिल ईस्ट कंट्री में काम कर रहे हैं। (ब्लैक जैकेट में)
43 साल के अविनाश मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर से ताल्लुक रखते हैं। पिछले 15 साल से वे मिडिल ईस्ट कंट्री में काम कर रहे हैं। (ब्लैक जैकेट में)

अपने स्टार्टअप आइडिया को लेकर अविनाश कहते हैं कि तीन साल पहले मेरे माइंड में इस सेक्टर में काम करने का ख्याल आया था। मैंने रियलाइज किया था कि इस सेक्टर में बहुत ज्यादा स्कोप है और काम करने वाले लोग कम हैं। इसलिए मैंने मार्केटिंग और रिसर्च लेवल पर पहले से ही काम करना शुरू कर दिया था। मैं भारत के अलग-अलग शहरों में ग्राउंड पर गया, लोगों की जरूरतें समझीं। लोग किस तरह से लॉजिस्टिक सर्विसेज का इस्तेमाल करते हैं और कंपनियां किस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं, इसको लेकर मैंने जानकारी जुटानी शुरू की।

इसके बाद मुझे पता चला कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए तो जैसे-तैसे करके मूवर्स मिल जाते हैं, लेकिन आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर लोगों को तो पता ही नहीं चलता कि वे कहां और किससे कॉन्टैक्ट करें। वे अपने सामान और हाउस होल्ड की चीजें एक जगह से दूसरी जगह तक कैसे भेजें। कई बार उन्हें जरूरत से ज्यादा अमाउंट का भुगतान करना पड़ता है। ट्रस्ट का इश्यू भी बहुत ज्यादा होता है, क्योंकि यह सेक्टर ऑर्गेनाइज्ड नहीं है। इसलिए मैंने तय किया कि इस सेक्टर में काम करेंगे।

कोविड में आपदा को अवसर में बदला अविनाश बताते हैं कि हमने Shift Freight नाम से अपने स्टार्टअप की शुरुआत तो कोविड से ठीक पहले यानी फरवरी 2020 में कर दी थी। दिल्ली में सेटअप भी जमा लिया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कोविड के चलते लॉकडाउन लग गया। कुछ दिनों तक तो हम समझ ही नहीं सके कि क्या करें। इस सेक्टर में काम करने वाले ज्यादातर लोगों ने काम बंद कर दिया था। सप्लाई चेन एक तरह से ठप सी हो गई थी। लिहाजा संक्रमण को ध्यान में रखते हुए हमने भी काम बंद कर दिया। यह हमारे लिए किसी सेटबैक से कम नहीं था।

अविनाश की टीम में फिलहाल 70 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इसमें हर फील्ड से जुड़े लोग शामिल हैं।
अविनाश की टीम में फिलहाल 70 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इसमें हर फील्ड से जुड़े लोग शामिल हैं।

वे कहते हैं कि कुछ दिनों बाद मुझे पता चला कि कोविड की वजह से लोग मार्केट नहीं जा पा रहे हैं, अपनी जरूरत की चीजें वे घर से ही ऑर्डर कर रहे हैं। ऐसे में यह सही मौका है काम करने का। अभी लोगों को लॉजिस्टिक सर्विसेज की जरूरत है। फिर क्या था, हमने खुद को नए सिरे से तैयार किया, कोविड प्रोटोकॉल के हिसाब से रणनीति बनाई। बड़े लेवल पर सैनिटाइजर्स, पीपीई किट और मास्क की व्यवस्था की। अपने इम्प्लॉइज को इसके लिए ट्रेनिंग दी और कस्टमर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉन्टैक्ट लेस डिलीवरी की शुरुआत की। कई कस्टमर्स को भी हमने पीपीई किट और मास्क प्रोवाइड किए।

पहले ही साल 30 गुना बढ़ गए ऑर्डर्स
अविनाश की टीम कोविड प्रोटोकॉल के साथ लोगों तक उनके प्रोडक्ट की डिलीवरी करने लगी। जल्द ही उन्हें बेहतर रिस्पॉन्स मिलना शुरू हो गया। महीने दर महीने उनकी ग्रोथ बढ़ती गई। एक साल के भीतर ही उन्होंने देशभर में अपनी पहुंच बना ली। दिल्ली के साथ ही दूसरे शहरों में भी अपना ऑफिस शुरू कर दिया। वेंडर्स और डिलीवरी पार्टनर्स की संख्या बढ़ने लगी। पहले जहां हर महीने 50 तक ऑर्डर्स आते थे, वहीं एक साल के भीतर इसकी संख्या 1500 से ज्यादा पहुंच गई। अभी अविनाश की टीम में 70 से ज्यादा लोग काम करते हैं। देशभर में 1500 से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स से उन्होंने टाइअप किया है। हर दिन वे 70 से ज्यादा ऑर्डर्स की डिलीवरी कर रहे हैं।

हाउस होल्ड से लेकर गाड़ी तक हर चीज के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट

अविनाश बताते हैं कि हमारे टीम मेंबर्स और डिलीवरी करने वाले कोविड प्रोटोकॉल का खासा ध्यान रखते हैं, ताकि कस्टमर्स को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।
अविनाश बताते हैं कि हमारे टीम मेंबर्स और डिलीवरी करने वाले कोविड प्रोटोकॉल का खासा ध्यान रखते हैं, ताकि कस्टमर्स को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

वे बताते हैं कि फिलहाल हम लोग प्लांट और पेट्स को छोड़कर हर चीज के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रोवाइड कर रहे हैं। इसमें हाउस होल्ड, डेली यूजेज, गाड़ी, ऑफिस के सामान, कॉर्पोरेट आइटम्स जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं, जिनकी डिलीवरी हमारी टीम सीधे कस्टमर्स के घर तक करती है। देशभर में कहीं भी औसतन 15 दिन के भीतर हमारी टीम सुरक्षित सामान पहुंचा देती है। वे कहते हैं कि हमारी टीम तीन लेयर पर पैकिंग करती है, ताकि प्रोडक्ट को नुकसान नहीं हो।

कैसे करते हैं काम? कस्टमर्स कैसे करते हैं ऑर्डर?
अविनाश बताते हैं कि फिलहाल हम लोग खुद की वेबसाइट-ऐप के साथ ही सोशल मीडिया और गूगल के जरिए मार्केटिंग कर रहे हैं। इसके साथ ही हमारा एक टोल फ्री नंबर भी है। लोग इसके माध्यम से हमसे कॉन्टैक्ट कर सकते हैं। लोग चाहें तो हमारी टीम से भी बात कर सकते हैं। एक बार जब हमारे पास ऑर्डर या लोगों की रिक्वेस्ट आती है तो उसके हिसाब से हमारी टीम काम करना शुरू कर देती है। इसके लिए अलग-अलग लेवल पर कई टीमें हैं।

एक टीम लोगों की रिक्वेस्ट हैंडल करती है। दूसरी टीम हर तरह की डिमांड को कैटेगराइज करती है और फिर उन्हें संबंधित टीम के पास भेज देती है। तीसरी टीम कस्टमर के घर से प्रोडक्ट कलेक्ट करती है और फिर चौथी टीम उसकी पैकेजिंग का काम करती है। इसी तरह अगली टीम उस प्रोडक्ट की डिलीवरी को मैनेज करती है और उसे तय जगह पर पहुंचाने की व्यवस्था करती है।

अविनाश बताते हैं कि हमने देशभर में अपने डिलीवरी पार्टनर्स रखे हैं, जो कस्टमर्स के प्रोडक्ट को तय जगह पर पहुंचाते हैं।
अविनाश बताते हैं कि हमने देशभर में अपने डिलीवरी पार्टनर्स रखे हैं, जो कस्टमर्स के प्रोडक्ट को तय जगह पर पहुंचाते हैं।

आगे इस सेक्टर में करियर या स्टार्टअप के लिहाज से कितनी डिमांड है?
भारत में पिछले कुछ सालों में लॉजिस्टिक सर्विसेज की डिमांड बढ़ी है। जैसे-जैसे नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं, लोग ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं, वैसे-वैसे इस सेक्टर का दायरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि जितनी अधिक डिमांड है, उतने सप्लायर्स नहीं हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर रोज करीब 40 हजार लॉजिस्टिक सप्लाई होती है। जबकि डिमांड करोड़ों में है। यानी अभी भी इस सेक्टर में बहुत ज्यादा स्कोप है।

अविनाश कहते हैं कि हम जल्द ही इस सेक्टर में ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाले हैं। इसको लेकर हमारी टीम काम कर रही है। हम एक ट्रेनिंग सेंटर भी बनाने जा रहे हैं। जहां लोगों को लॉजिस्टिक सर्विसेज के बारे में हर तरह की जानकारी दी जाएगी।

खबरें और भी हैं...