ग्राउंड रिपोर्टअंजलि की मौत एक्सीडेंट या मर्डर, अब भी कन्फ्यूजन:पुलिस ने हत्या माना, साबित करना मुश्किल; 20 दिन बाद दोस्त निधि गायब

नई दिल्ली8 दिन पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

31 दिसंबर की रात दिल्ली के कंझावला में 20 साल की अंजलि को कार से कुचल दिया गया। इस हादसे को 20 दिन हो गए। पुलिस ने 17 जनवरी को केस में धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) को हटाकर हत्या की धारा 302 शामिल कर ली, लेकिन ये कोर्ट में साबित कैसे होगा, इस पर कन्फ्यूजन अभी भी बना हुआ है।

ऐसा क्यों, इसे दो बयानों से समझिए:

  • ‘जांच के दौरान आरोपियों और अंजलि में पहले से कोई बातचीत, रंजिश या दुश्मनी जैसी बात सामने नहीं आई है, इससे साफ है कि मर्डर प्लानिंग से नहीं हुआ है।’- जांच में शामिल पुलिस अधिकारी
  • ‘पुलिस के पास वही सबूत हैं, जो पहले थे, लेकिन अब उसे कोर्ट में साबित करना होगा कि आरोपियों ने जानबूझकर अंजलि को कार से घसीटा था।’ -सिद्धार्थ लूथरा, सीनियर क्रिमिनल लॉयर

मैंने 20 दिनों में हुई पुलिस की कार्रवाई, कोर्ट में पुलिस के दावे की जांच की और अंजलि की दोस्त निधि के घर और अंजलि के परिवार तक फिर पहुंचा। साथ ही क्रिमिनल लॉयर से समझा कि क्या कंझावला केस में हत्या की धारा को शामिल करना ठीक है और क्या ये केस कोर्ट में टिक पाएगा?

हत्या के पीछे का इरादा साबित करना सबसे बड़ी चुनौती
अंजलि का केस काफी चर्चा में रहा, इसलिए थाना लेवल का कोई भी पुलिस अधिकारी इस पर कुछ बोलना नहीं चाहता। मैं जांच में शामिल एक अधिकारी के पास गया। उनसे पूछा कि केस कहां तक पहुंचा?

पहले उन्होंने कहा, मेरा नाम नहीं देना, फिर बताया- ‘ये बात साफ हो चुकी है कि मर्डर प्लानिंग से नहीं हुआ है। हालांकि ये भी सच है कि कार में बैठे लोगों को पता चल गया था कि नीचे कोई है, फिर भी वे कार चलाते रहे। हम अब इसी से जुड़े सबूत जुटा रहे हैं। मामला कोर्ट में है, इसलिए ज्यादा नहीं बोल सकता।’

जांच अधिकारी की बातों से साफ है कि पुलिस की इन्वेस्टिगेशन अभी भी कन्फ्यूजन में है। एक तरफ पुलिस ने केस में हत्या की धाराएं लगा दी हैं, लेकिन उसे साबित करना मुश्किल है, ये भी मान रही है। पूरा मामला समझने के लिए मैंने क्रिमिनल लॉयर और पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा से बात की।

वे कहते हैं- ‘अगर आरोपियों को पता चल गया था कि लड़की कार के नीचे हैं और वे फिर भी ड्राइव करते रहे, ऐसी स्थिति में धारा 302 के तहत ही केस चलेगा। पुलिस को साबित करना होगा कि लड़की की कार से टक्कर हुई, तो अंदर बैठे लोगों को टकराने की आवाज से, कार में घिसटने की आवाज से या किसी और वजह से पता चल गया था कि लड़की कार के नीचे है और फिर भी वे उसे घसीटते चले गए।’

क्या धारा 302 के तहत मोटिव होना ही जरूरी है? इस केस में पहले से तैयारी और रंजिश जैसा कोई मोटिव तो नहीं दिख रहा?
जवाब में एडवोकेट लूथरा कहते हैं- ‘हत्या हो रही है, इसके बारे में पता होना भी इसी के तहत आता है। अगर मुझे पता है कि मैंने किसी को गाड़ी से टक्कर मारी है, उसके बाद गाड़ी रोककर उसे हॉस्पिटल ले जाने की जगह मैं गाड़ी चलाता रहता हूं, तो मेरा इरादा साफ हो जाता है कि वो मर जाए। हत्या का मोटिव यहीं से तैयार होगा।’

अंजलि की दोस्त निधि और उसका परिवार 3 दिन से लापता
CCTV फुटेज में दिखी अंजलि की दोस्त निधि शुरुआत से शक के दायरे में है। पहले वो अंजलि के एक्सीडेंट के बाद उसे छोड़कर घर चली गई। किसी को भी, यहां तक कि पुलिस को भी इसके बारे में नहीं बताया। फिर कहा कि अंजलि ने शराब पी रखी थी, लेकिन ये दावा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खारिज हो गया। निधि पर 2020 में ड्रग्स तस्करी का केस भी दर्ज हुआ था। हालांकि अब तक पुलिस ने उस पर कोई कार्रवाई या सख्ती नहीं की है।

निधि सुल्तानपुरी में रहती है। मैं उसके घर पहुंचा। करीब 10 मिनट तक इंतजार करने के बाद भी गेट नहीं खुला। पड़ोसियों से पूछा तो पता चला कि 3 दिन से निधि और उसका परिवार नहीं है। ये घटना हुई है, तभी से निधि किसी से भी मिल-जुल नहीं रही थी। घर वाले भी उसे बाहर नहीं निकलने दे रहे थे। इस केस से जुड़े ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब सिर्फ निधि के पास हैं। जैसे…

  1. उस रात वह अंजलि के साथ क्यों गई थी?
  2. अंजलि से दोस्ती कैसे हुई?
  3. होटल से निकलने के बाद स्कूटी के पास क्या बातचीत हो रही थी?
  4. स्कूटी के पास खड़े लड़के कौन थे?
  5. अंजलि का एक्सीडेंट कैसे हुआ?
  6. वारदात के कई घंटे बाद भी उसने पुलिस को कुछ क्यों नहीं बताया?
  7. झूठ क्यों बोला कि अंजलि ने शराब पी थी?
हादसे वाली रात निधि और अंजलि साथ थीं। 31 दिसंबर की रात को दोनों स्कूटी से घर के लिए निकली थीं। 3 जनवरी को सामने आया यह फुटेज OYO होटल के सामने का है।
हादसे वाली रात निधि और अंजलि साथ थीं। 31 दिसंबर की रात को दोनों स्कूटी से घर के लिए निकली थीं। 3 जनवरी को सामने आया यह फुटेज OYO होटल के सामने का है।

अंजलि की मां बोलीं- जो हम शुरुआत से कह रहे थे, अब पुलिस ने भी माना
अंजलि की मां रेखा पहले दिन से कह रही थीं कि बेटी का मर्डर हुआ है। मैं उनके घर पहुंचा, तो वे बिस्तर पर बैठी मिलीं। बगल में अंजलि का छोटा भाई पढ़ाई कर रहा था। रेखा को देखकर समझ आता है कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। वे बताती हैं- इसी महीने दो बार डायलिसिस हो चुका है। बोलने में भी दर्द होता है।

मैंने कहा कि पुलिस ने केस में हत्या की धारा शामिल कर ली है। इस पर बोलीं- ‘हम जो इतने दिन से कह रहे थे, पुलिस ने अब जाकर माना है। पुलिस की जांच सही हो रही है। शुरू में हमें बहुत परेशान किया, लेकिन अब सब सही है।’

अंजलि के परिवार को दिल्ली सरकार की तरफ से 10 लाख रुपए का चेक मिला है। रेखा कहती हैं कि ‘जब मनीष सिसोदिया आए थे, तो उन्होंने तीन वादे और किए थे। एक सरकारी नौकरी, अंजलि के भाई-बहनों की पढ़ाई और मेरी बीमारी का इलाज। अब तक इन तीनों पर कुछ नहीं हुआ है।’

मैंने पूछा कि क्या सरकार में से किसी ने वादों के बारे में लिखकर कुछ दिया था? रेखा कहती हैं- ’जब वो (मनीष सिसोदिया) घर आए थे, तभी ये बात हुई थी। कोई कागज नहीं दिया था।’

4 आरोपियों पर हत्या का केस, दो को जमानत मिली
केस में कुल 7 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से 4 आरोपी अमित खन्ना, मिथुन, कृष्णा और मनोज मित्तल पर हत्या का केस दर्ज किया गया है। कार मालिक आशुतोष भारद्वाज और आरोपियों को छिपने में मदद करने वाले अंकुश खन्ना को जमानत मिल चुकी है। अंजलि को कुचलने वाली कार आशुतोष की ही थी। उसने जमानत के लिए दायर पिटिशन में कहा था कि इस घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है। एक्सीडेंट के दौरान वह कार में नहीं था।

मैंने इस केस में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर रजनीश, DCP हरेंद्र के. सिंह और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अतुल श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश की, लेकिन DCP हरेंद्र के. सिंह के अलावा किसी का जवाब नहीं आया। DCP ने भी बात करने से इनकार ही किया।

दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल को कार ने घसीटा, बोलीं- अंजलि जैसा हश्र होने वाला था
दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल को नशे में धुत एक कार ड्राइवर ने 15 मीटर तक घसीटा। यह घटना 18 जनवरी की देर रात एम्स हॉस्पिटल के पास हुई, जब स्वाति दिल्ली की सड़कों पर रियलिटी चेक करने निकली थीं। पुलिस ने आरोपी 47 साल के हरीश चंद्र को अरेस्ट कर लिया है। घटना के बाद स्वाति ने कहा कि उनके साथ अंजलि जैसा हादसा होने वाला था। उन्हें बस भगवान ने बचा लिया।

स्वाति ने बताया कि वह ड्राइवर उनके पास आया और कार में बैठने के लिए कहने लगा। मैंने मना किया तो वह कार लेकर आगे चला गया, लेकिन 10 मिनट बाद फिर यू-टर्न लेकर आया और बगल में चलने लगा। इसके बाद गंदे इशारे करने लगा। मैं उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ी तो उसने गाड़ी के शीशे बंद कर दिए। इस दौरान मेरा हाथ शीशे में फंसा रह गया, लेकिन आरोपी रुका नहीं। वह करीब 15 मीटर तक घसीटता रहा।
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1. कंझावला केस का गवाह बोला- पुलिस को बताया तो कहा- 'अपना काम कर'

निधि के अलावा इस केस के दो चश्मदीद गवाह और हैं। इनमें से एक विकास मेहरा ने अंजलि को कार में फंसे देखा था। विकास के मुताबिक, वो गाड़ी मुझसे भी टकराने वाली थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि लड़की गाड़ी के नीचे कैसे फंसी हुई थी। कोई रस्सी भी नहीं थी, जिससे वो लड़की बंधी हो। मैंने दो पुलिसवालों को बताया तो उन्होंने मुझसे कहा कि ‘तुझे तो ना लगी ना, तो जा यहां से। हम देख लेवेंगे, जा अपना काम कर।’
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2. न टाइम पर पोस्टमॉर्टम, न मेडिकल, किसे बचा रही पुलिस, कंझावला केस में सवाल
पूरे मामले में दिल्ली पुलिस पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरोपियों ने शराब पीकर एक लड़की को कुचल दिया। लड़की की लाश को 12 किलोमीटर तक गाड़ी के नीचे घसीटते रहे, लेकिन न कोई पुलिस नाका पड़ा और न ही किसी दिल्ली पुलिस पेट्रोल टीम को वे नजर आए। भास्कर ने केस में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और रवैये को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP विक्रम सिंह और क्रिमिनल लॉयर कुमार वैभव से बात की। उन्होंने क्या कहा पढ़िए इस खबर में...