उडुपी की बदली फिजा पर भास्कर की पड़ताल:मुस्लिम छात्राओं के लिए भी हिजाब टेंशन की वजह बना; विधायक बोले- केवल 6 की जिद सैकड़ों पर भारी

6 महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल

अरब सागर के तट पर बसे खूबसूरत शहर उडुपी में उठे हिजाब विवाद ने बहुत कुछ बदल दिया है। इस विवाद की वजह से मुस्लिम छात्राओं को अपने भविष्य को लेकर टेंशन बढ़ गई है। उनका कहना है कि इसकी वजह से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। साथ ही छात्राओं के मन में ये भी डर है कि अगर कोर्ट ने फैसला उनके हक में नहीं हुआ तो क्या होगा। वहीं स्थानीय विधायक रघुपति भट ने कहा कि इस बेवजह के विवाद को केवल 6 लड़कियों ने तूल दिया, लेकिन इससे सैकड़ों मुस्लिम छात्राओं को नुकसान हो रहा है। उडुपी में इस विवाद ने और क्या- क्या बदल दिया, भास्कर ने इसकी पड़ताल की।

पेश है ग्राउंड रिपोर्ट। इससे पहले आप एक सवाल का जवाब देकर इस पोल में हिस्सा ले सकते हैं।

अरब सागर के तट पर बसे उडुपी के शांत समुद्रतट पर जरीना हिजाब पहनकर अपने परिवार के साथ बैठी हैं। भारत के दक्षिण पश्चिम तट पर बसे इस खूबसूरत शहर में हिजाब को लेकर उठे तूफान ने सिर्फ कर्नाटक, बल्कि पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है।

जरीना ये सोचकर परेशान हैं कि हिजाब इतना बड़ा मुद्दा कैसे बन गया। दस साल पहले उडुपी के स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाली जरीना कहती हैं, "तब ना हिजाब का कोई ऐसे समर्थन करता था और न ही इस तरह विरोध। सभी धर्मों की छात्राएं टिफिन साझा करती थीं।"

जरीना याद करती हैं, "मैं हेडस्कार्फ पहनती थी। मुझे नहीं याद कि कभी किसी ने उसका विरोध किया हो। अब लड़कियां और भी आगे बढ़कर पूरा चेहरा ढकने लगी हैं। उस समय स्कार्फ तो था, लेकिन इस तरह का हिजाब नहीं।"

कर्नाटक के उडुपी जिले के गवर्नमेंट गर्ल्स प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज (सीनियर सेकेंड्री स्कूल के समकक्ष) की कुछ छात्राओं ने दिसंबर के अंत में स्कूल प्रशासन के हिजाब पहनने पर रोक के निर्णय का विरोध शुरू किया।

पहले उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, फिर नेशनल मीडिया में और अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन रही हैं। इन लड़कियों की तरफ से हिजाब पहनने के अधिकार को लेकर दायर याचिका अब कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच में पेंडिंग है।

इसी बीच हाईकोर्ट ने अपने अगले आदेश तक हिजाब पहनने पर रोक लगा दी है। इससे पहले कर्नाटक सरकार ने भी हिजाब मामले की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था और फिलहाल स्कूल समितियों को आदेश दिया था कि वे छात्राओं को क्लास में हिजाब पहनकर न आने दें।

मानसिक तनाव की वजह बन रहा है हिजाब विवाद
सरकार के इस आदेश की वजह से उन स्कूलों में भी लड़कियों को हिजाब पहनने से रोका गया है, जहां वे पहले से हिजाब पहनकर आती रहीं थीं। रेशमा (बदला हुआ नाम) उडुपी के ऐसे ही एक स्कूल में 12वीं क्लास में पढ़ती हैं, जिसमें विवाद होने के बाद हिजाब बैन किया गया है। वे भविष्य को लेकर बहुत डरी हुई हैं।

रेशमा का मानना है कि दूसरी मुस्लिम स्टूडेंट की तरह ही वे भी हिजाब के मुद्दे से बहुत अधिक प्रभावित हैं। वे कहती हैं कि इस वजह से उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और वे मानसिक तनाव में हैं। वे जिस कॉलेज में पढ़ती हैं वहां हिजाब पहनकर क्लास में आने की इजाजत थी, लेकिन छात्राओं के प्रदर्शन के बाद उनके कॉलेज ने भी हिजाब पर रोक लगा दी है।

रेशमा कहती हैं, "इस कॉलेज में हिजाब की अनुमति थी और इस वजह से ही हमने यहां दाखिला लिया था। अब यहां भी हिजाब पर रोक लगा दी गई है। मैं नहीं जानती कि आगे क्या होगा। मैं अपने भविष्य को लेकर बहुत डरी हुई हूं।"

याद नहीं कभी धर्म पर विवाद हुआ हो
सोफिया (बदला हुआ नाम) भी एक स्कूल में बारहवीं (प्री यूनिवर्सिटी सेकंड ईयर) की छात्रा हैं। सोफिया कहती हैं, "उडुपी कर्नाटक का एक बेहद शांत शहर है। यहां पहले धर्म को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ है।

पहले जब कोई मुझसे पूछता था कि तुम कहां से हो तो मुझे ये बताते हुए बहुत गर्व होता था कि मैं उडुपी से हूं, लेकिन जब से हिजाब बनाम भगवा शॉल का विवाद शुरू हुआ है, मैं इसे लेकर बहुत दुखी हूं।"

सोफिया कहती हैं, "जब मैंने देखा कि कुछ मुस्लिम छात्राओं को सिर्फ इसलिए क्लास के बाहर बैठना पड़ रहा है, क्योंकि उन्होंने हिजाब पहनने का अपना संवैधानिक अधिकार मांग लिया, तब मुझे बहुत बुरा लगा। ये विवाद पड़ोस के कुंडापुर तक पहुंच गया, जहां एक प्रिंसिपल ने हिजाब पहनकर आई छात्राओं के लिए कॉलेज का गेट ही बंद करवा दिया। ये सब बहुत गलत हो रहा है।"

हिजाब को लेकर प्रिंसिपल को धमकाया गया
सोफिया का कहना है कि वे जिस स्कूल में पढ़ती हैं वहां सालों से लड़कियों को हिजाब पहनने दिया जा रहा है और अब पीयू कॉलेज के विवाद के बाद उनके कॉलेज में भी लड़कियों को हिजाब पहनने के लिए मना किया गया है। वे कहती हैं, "इस सोमवार को अचानक हमारे स्कूल प्रशासन ने कहा कि अब हम हिजाब पहनकर नहीं आ सकते हैं, लेकिन हम इस पर सहमत नहीं हुए।"

सोफिया बताती हैं, "बाद में हमें पता चला कि हमारे स्कूल के हिंदू छात्रों ने प्रिंसिपल को चेतावनी दी थी कि अगर हम हिजाब पहनकर आए तो वे भगवा शॉल पहनकर स्कूल आएंगे और उनके दबाव में ही प्रिंसिपल ने हमसे हिजाब हटाने के लिए कहा था।"

कई के एग्जाम छूटे, दोस्त भी दूर हुए
सोफिया के मुताबिक बीते मंगलवार को जब लड़कियां हिजाब पहनकर कॉलेज पहुंचीं तो उन्हें क्लास में नहीं जाने दिया गया और कई के प्रैक्टिकल एग्जाम थे जो छूट गए। सोफिया पूछती हैं, "मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि अचानक हमारे हिजाब पहनने से क्या समस्या खड़ी हो गई है? जो हमारी हिंदू दोस्त हमेशा से हमारे साथ थीं वे भी अचानक हिजाब के खिलाफ कैसे हो गईं?"

हिजाब ने लोगों को दो धड़ों में बांट दिया है। एक इसके समर्थन में हैं और दूसरे विरोध में। जो समर्थन में है वे इसे अपनी धार्मिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं। जो विरोध में हैं उनका कहना है कि स्कूल में सभी की ड्रेस एक जैसी होनी चाहिए, स्कूल की यूनीफॉर्म में धार्मिक प्रतीक ना हों।

हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल छात्रा की बात
आकांक्षा जिस कॉलेज में पढ़ती हैं वहां हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन हुआ है और हिंदू छात्रों ने भगवा शॉल पहनकर हिजाब के खिलाफ नारेबाजी की है। आकांक्षा भी ऐसे ही एक प्रदर्शन में शामिल रही हैं।

आकांक्षा कहती हैं, "मैं भी उस प्रदर्शन में शामिल थी और भगवा शॉल लेकर गई थी। हमने बहुत सारे छात्रों को इकट्ठा किया था। जब से ये मैटर शुरू हुआ है तब से हम सिर्फ यूनीफॉर्म की मांग कर रहे हैं, लेकिन वे बेवजह धर्म को बीच में ला रहे हैं। हम पढ़ना चाहते हैं, हमें वहां धार्मिक आधार पर बंटवारा नहीं चाहिए।"

हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों में शामिल आकांक्षा कहती हैं, "हमने एक दिन पहले ही प्रिंसिपल से बात की थी और कहा था कि अगर वे हिजाब पहनकर आएंगी तो हम भी भगवा शॉल पहनकर ये दिखाएंगे कि यदि धर्म को शिक्षा के बीच में लाया गया तो क्या होगा। एक तरह से ये हमारी योजना थी। हम सब तैयार होकर पहुंचे थे कि अगर बात आगे बढ़ी तो हम भगवा शॉल निकालकर प्रदर्शन करेंगे।"

उडुपी में इससे पहले कभी हिंदू-मुस्लिम के बीच कोई बड़ा विवाद नहीं रहा है। यहां साक्षरता दर 83 प्रतिशत है और मुस्लिम लड़कियां भी उच्च शिक्षा हासिल करती हैं। यहां हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दोस्ताना रिश्ते भी हैं, लेकिन इस प्रदर्शन ने इन रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर दी है।

आकांक्षा कहती हैं, "मेरी मुस्लिम दोस्त हैं, लेकिन वे बात को समझना नहीं चाहतीं। उन्हें लगता है कि हम उनके धर्म के विरोध में हैं, लेकिन बात ये है कि हम उनके धर्म का विरोध नहीं, स्कूलों में यूनीफॉर्म का समर्थन कर रहे हैं।"

आकांक्षा कहती हैं, "ऐसा दिखाया जा रहा है मानों हम उनसे ये कह रहे हैं कि वे अपने धर्म का पालन करना बंद कर दें, लेकिन ऐसा नहीं है। वे समझते हैं कि हम लोग बेवजह उनके विरोध में जा रहे हैं।

मेरी मुस्लिम दोस्तों ने मुझसे कहा है कि उन्हें ये उम्मीद नहीं की थी कि मैं ऐसा करूंगी। उन्हें ऐसा लग रहा है कि मैं उनके खिलाफ हूं, लेकिन ऐसा नहीं है। हम पहले दिन से ही ये मांग कर रहे हैं कि यूनीफॉर्म होनी चाहिए। अगर वे अपने धर्म को यूनीफॉर्म में लाएंगे तो बाकी धर्म भी हैं जो ऐसा करेंगे।"

हिजाब पहनकर आने वाली छात्राएं अक्सर एक साथ रहती हैं और एक समूह में होती हैं। आकांक्षा का मानना है कि इससे एक तरह का विभाजन पैदा होता है। वे कहती हैं, "हम हॉबी और पसंद के आधार पर दोस्त बनाते हैं, लेकिन अब किसी को हिजाब में देखते हैं तो धर्म भी बीच में आता है।

हम नहीं चाहते कि बच्चे धर्म देखकर दोस्ती करें। जब आप एक समूह को बुर्का या उस जैसा कुछ पहनते हुए एक साथ देखते हैं तो मेरे मन में विचार आता है कि जब एक धर्म की लड़कियां एक साथ हैं तो मुझे भी अपने धर्म की लड़कियों के साथ होना चाहिए।"

आकांक्षा कहती हैं, "मेरी क्लास में कुछ मुस्लिम लड़कियां हिजाब पहनकर आती थीं, किसी को कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब जब ये मामला इतना गंभीर हो गया है तो स्कूल ने उनसे कहा है कि वे हिजाब पहनकर ना आएं।"

आकांक्षा कहती हैं, "जब से ये मामला शुरू हुआ है, हम अपनी मुस्लिम दोस्तों के साथ बात नहीं कर पाए हैं। गलतफहमी पैदा हो गई थी। एक स्कूल से ये बात शुरू हुई और पूरे राज्य में फैल गई। हमें ऐसा लगता है कि किसी ने इन छात्राओं का इस्तेमाल करके हिजाब को मुद्दा बनाया है और हिंदू-मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की है।"

100 में से केवल 6 लड़कियों को ही हिजाब की जिद?
रघुपति भट्ट उडुपी से बीजेपी विधायक हैं और यहां के सभी कॉलेजों के चेयरमैन हैं। सरकारी कॉलेजों का प्रबंधन कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी करती है और स्थानीय विधायक इसके प्रेसिडेंट होते हैं।

मौजूदा विवाद पर रघुपति भट्ट कहते हैं, "उडुपी विधानसभा क्षेत्र में 12 सरकारी प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज (PUC) हैं। इनमें एक गर्ल्स कॉलेज है, को-एड भी है। विधायक होने के नाते मैं ही सबकी सीडीसी का प्रेसिडेंट हूं। किसी दूसरे कॉलेज में हिजाब का मुद्दा नहीं हुआ है।"

"PUC में 8वीं से 12वीं के बीच करीब एक हजार लड़कियां पढ़ रही हैं। इनमें सौ मुसलमान लड़कियां हैं जिनमें 75 पीयूसी में हैं। इन 6 लड़कियों को छोड़कर बाकी सभी हिजाब हटाकर क्लास में बैठ रही हैं। सिर्फ इन छह लड़कियों को ही समस्या है, बाकी मुस्लिम लड़कियों को कोई प्रॉब्लम नहीं है।"

रघुपति भट्ट कहते हैं, बहुत से कॉलेजों में लड़कियां हिजाब पहनकर आ रहीं थीं, कोई उनका विरोध नहीं कर रहा था, लेकिन गर्ल्स PUC की लड़कियों के विरोध की वजह से अब सरकार ने सभी कॉलेजों से कहा है कि वे हिजाब पर अगले आदेश तक रोक लगा दें।

भट्ट दावा करते हैं कि विवाद की शुरुआत में कांग्रेस नेताओं और स्थानीय मुस्लिम नेताओं ने भी प्रदर्शन कर रही लड़कियों को समझाने की कोशिश की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।

यहां के लोग इस विवाद को सियासी स्टंट मान रहे हैं
फिलहाल उडुपी में धारा 144 लागू है। स्कूल कॉलेज बंद हैं, लेकिन शहर में लोग इस मुद्दे को लेकर बहुत बंटे हुए नहीं है। आम लोग इसे राजनीतिक स्टंट मानकर नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहे हैं।

उडुपी के प्रसिद्ध कृष्ण मठ के पास दुकान चलाने वाली 45 साल की लता कहती हैं, "उडुपी में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। न कभी ऐसा सुना था। मैं तो बस बच्चों से यही कहना चाहूंगी कि पढ़ाई छोड़कर ये सब क्या हो रहा है, ये नहीं होना चाहिए।"

लता कहती हैं, "कोरोना की वजह से जरूर लोग परेशान थे। स्टूडेंट से कभी यहां कोई समस्या नहीं हुई है, लेकिन पिछले एक महीने से हिजाब को लेकर विवाद चल रहा है, जो नहीं होना चाहिए। स्कूल विवाद की नहीं पढ़ने की जगह होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि इस मुद्दे के पीछे राजनीति है।"

वसुधा मंदिर देखने आई हैं। वे बस इतना ही कहती हैं, "उडुपी में विवाद की जगह नहीं है। यहां सब बराबर हैं।" वहीं दुकानदार विजय कहते हैं, "उडुपी शहर पर इसका बहुत असर नहीं होगा। जैसे पूरे हिंदुस्तान में हिंदू-मुसलमान मिलकर रहते हैं वैसे ही रहेंगे।

कृष्ण मंदिर में मुसलमान भी आते हैं। उन्हें कभी यहां रोका नहीं गया है। आगे भी नहीं रोका जाएगा।" हिजाब विवाद ने यहां चिंताएं जरूर पैदा की हैं। सबसे अधिक चिंतित वे छात्राएं हैं जो हिजाब पहनकर स्कूल जाती थीं।

ऐसी ही एक छात्रा कहती है, “हमें अदालत पर पूरा भरोसा है कि वह हमारे हक को बरकरार रखेगी, लेकिन अगर फैसला हमारे हक में नहीं आया तो मैं नहीं जानती की क्या होगा। मैं हिजाब भी पहनना चाहती हूं और आगे पढ़ना भी चाहती हूं। एक के लिए मैं दूसरे को नहीं छोड़ सकती।”

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