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काशी से ग्राउंड रिपोर्ट:PM मोदी जब काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा कर रहे थे, तब ज्ञानवापी मस्जिद में क्या हो रहा था?

10 महीने पहले

जिस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में पूजा और भ्रमण कर रहे थे, उस वक्त मंदिर के ठीक बगल में खड़ी मुगल काल में बनी विशाल ज्ञानवापी मस्जिद में नमाज पढ़ी जा रही थी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रधानमंत्री मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो आज अपने उद्घाटन के साथ पूरा हो गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए मंदिर परिसर के आसपास बने मकान और अन्य स्थल हटाए गए हैं। खुली जमीन में ज्ञानवापी मस्जिद अब पहले से ज्यादा साफ और बड़ी दिखने लगी है।

मस्जिद की इंतेजामिया समिति काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन से खुश है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद, वाराणसी के संयुक्त सचिव सैयद एम यासीन कहते हैं, 'कॉरिडोर से मस्जिद भी सुरक्षित हुई है।' कॉरिडोर के उद्घाटन पर खुशी जाहिर करते हुए यासीन कहते हैं कि जिस समय प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में थे, मस्जिद में नमाजी आ रहे थे। मुसलमानों को मस्जिद में पहुंचने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई है, बल्कि पहले से आसानी ही हुई है। हम खुश हैं कि इतने शांतिपूर्ण माहौल में कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ है।

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर विवाद भी है। हिंदूवादी समूह आरोप लगाते रहे हैं पहले मूल काशी विश्वनाथ मंदिर यहीं था जिसे तोड़कर ये मस्जिद बनाई गई थी। मस्जिद की ऊंची मीनार से होते हुए नजर जब नीचे आती है तो मस्जिद मंदिर सी लगने लगती है, क्योंकि इसकी मूल दीवार अभी भी प्राचीन मंदिर का ढांचा ही लगती है।

इस मस्जिद को लोहे के मजबूत जाल से घेरा गया है और इसकी सुरक्षा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान 24 घंटे मुस्तैद खड़े रहते हैं। बाहरी लोगों को मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। सिर्फ स्थानीय मुसलमानों को ही यहां नमाज पढ़ने दी जाती है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद एक बार फिर चर्चा में है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी दौरे पर हैं। उन्होंने गंगा में स्नान के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी दौरे पर हैं। उन्होंने गंगा में स्नान के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की।

सैयद एम यासीन कहते हैं कि ये पूरी परियोजना बहुत अच्छी है और हमें खुशी है कि यहां अच्छा काम हुआ है। हमारे लिए आज का दिन बहुत अच्छा है। हमारे नमाजियों को मस्जिद में जाने में कोई परेशानी नहीं हुई है। एक तरफ मंदिर में पूजा हो रही है और दूसरी तरफ मस्जिद में नमाज पढ़ी जा रही है। इससे अच्छा और क्या हो सकता है। विश्वनाथ धाम के इस लोकार्पण से जितनी खुशी हिंदू भाइयों को है उतनी ही खुशी हमें भी हैं। जो कुछ दिक्कतें थीं, अब वो भी दूर हो जाएंगी।

वाराणसी का माहौल बताते हुए यासीन कहते हैं कि मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है और मस्जिद में नमाजियों की भी। हम सभी को इस ऐतिहासिक पल की मुबारकबाद देना चाहते हैं। ज्ञानवापी एक ऐतिहासिक मस्जिद है। इसका प्रबंधन मुसलमानों की समिति करती है जो वाराणसी की अन्य मस्जिदों की जिम्मेदारी भी संभालती है। वे कहते हैं कि मुसलमान मस्जिद के लिए किसी भी तरह का फंड सरकार से नहीं लेते हैं। मस्जिद की जरूरतें मुसलमानों से मिलने वाले पैसे से पूरी हो जाती हैं।

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कई विवाद भी अदालतों में चल रहे हैं। इसी साल 8 अप्रैल को वाराणसी की एक अदालत ने मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण का आदेश दिया था जिस पर बाद में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।

यासीन बताते हैं कि यहां की स्थानीय अदालतों में जो मुकदमें चल रहे हैं वो तो चल ही रहे हैं। इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी केस चल रहा है। पुरातात्विक सर्वेक्षण पर स्टे है, इसके अलावा एक मामले में फैसला सुरक्षित है। जो स्थानीय अदालतों में मुकदमे हैं वो प्राइमरी स्टेज पर हैं। इस तरह के मुकदमों से लोगों को राजनीतिक फायदा भी मिलता है। कुछ लोग शोहरत हासिल करना चाहते हैं, ऐसे में मुकदमें तो चलते ही रहेंगे। हम मुकदमों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

ये तस्वीर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की है। गृहमंत्री अमित शाह ने कल रात ये तस्वीर शेयर की थी।
ये तस्वीर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की है। गृहमंत्री अमित शाह ने कल रात ये तस्वीर शेयर की थी।

अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद की जगह भगवान राम के मंदिर के बनने का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है। वहां मंदिर निर्माण शुरू हो चुका है, लेकिन बहुत से लोग ये नारा देते हैं कि अभी काशी मथुरा बाकी है। इस तरह के नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए यासीन कहते हैं कि ऐसे नारों से हमें फर्क नहीं पड़ता है। ये नारा देने वाले वही लोग हैं, जो राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं और अपनी शोहरत चाहते हैं। मथुरा को लेकर फैसला आ चुका है।

यासीन कहते हैं कि वाराणसी में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं। इनमें दरार डालने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन इस तरह की कोशिशें नाकाम ही रहती हैं। हम सब आपस में मिलते-जुलते हैं। नमाज पढ़ने आते वक्त दुआ सलाम होती है।

कुछ महीनों बाद ही उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं। धार्मिक मुद्दों को भी हवा दी जा रही है। क्या काशी विश्वनाथ कॉरिडोर या काशी-मथुरा भी चुनावों का मुद्दा हो सकते हैं, इस सवाल पर यासीन कहते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं धर्मस्थलों के संरक्षक हैं। मुझे लगता है कि हिंदू-मुसलमान के मुद्दे से बड़ा मुद्दा विकास का है और प्रधानमंत्री भी इस बात को समझते हैं। काशी विश्वनाथ का भी उन्होंने विकास ही किया है और चुनावों में वो इसके आधार पर वोट तो मांगेंगे ही और इसमें कुछ गलत भी नहीं है। जो काम करता है वो उसे दिखाता भी है।

वाराणसी में कई लोगों ने दावा किया है कि वो ज्ञानवापी मस्जिद की जगह मंदिर बनाकर रहेंगे। ऐसे लोगों को जवाब देते हुए यासीन कहते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद है और रहेगी। हम जिस तरह भाईचारे की बात करते हैं, हम ये उम्मीद करते हैं कि वो भी भाईचारे की बात करें। ऐसी कोई बात न हो जिससे हमें तकलीफ हो, क्योंकि हम ऐसी कोई बात नहीं करते जिससे उन्हें तकलीफ हो।

यासीन कहते हैं कि हिंदू भाइयों से हमारा भाईचारा पहले जैसा ही है। हम सब आपस में मिलते जुलते हैं। नमाज पढ़ने आते वक्त दुआ सलाम होती है।
यासीन कहते हैं कि हिंदू भाइयों से हमारा भाईचारा पहले जैसा ही है। हम सब आपस में मिलते जुलते हैं। नमाज पढ़ने आते वक्त दुआ सलाम होती है।

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वाराणसी की अदालत का फैसला आने के वक्त सैयद एम यासीन का लहजा थोड़ा सख्त था। उन्होंने कहा था कि ज्ञानवापी मस्जिद को बचाने के लिए मुसलमान अपनी जान तक देने को तैयार हैं, लेकिन अब उनका लहजा नरम पड़ा है। यासीन कहते हैं कि कॉरिडोर के बनने से बहुत सी बातें साफ हुई हैं। हमें ये भरोसा दिया गया है कि ज्ञानवापी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

ज्ञानवापी का इतिहास

इतिहासकारों का मानना है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर विश्वेश्वरा मंदिर को ध्वस्त कर ये मस्जिद बनाई गई थी। स्थानीय लोग मस्जिद की पिछली दीवार में नजर आ रहे खंडहरों को दिखाते हैं जो मंदिर के ढांचे जैसा नजर आते हैं। ज्ञानवापी मस्जिद की पिछली दीवार दो संस्कृतियों के टकराव और मिलन की एक साथ गवाही देती है। नीचे पुराने मंदिर के खंडहर इसकी भव्यता बताते हैं, तो ऊपर मस्जिद के सादे-सफेद चूने के गुंबद मुगल काल में ले जाते हैं। मस्जिद और मौजूदा विश्वनाथ मंदिर के बीच एक दस फीट का गहरा कुआं है, जिसे ज्ञानवापी कुआं कहा जाता है। इसी कुएं के नाम पर मस्जिद का नाम पड़ा है।

ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग को लेकर अदालत में याचिका डालने वाले 74 साल के हरिहर पांडे स्कंद पुराण का हवाला देते हुए कहते हैं कि 'जब धरती पर गंगा नहीं थी, मानव पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसता था तब भगवान शिव ने स्वयं लिंगाभिषेक के लिए अपने त्रिशूल से ये कुआं बनाया था और यहीं अपनी पत्नी पार्वती को ज्ञान दिया था। इसलिए ही इस जगह का नाम ज्ञानवापी या ज्ञान का कुआं पड़ा।'

प्रोफेसर राकेश पांडे बताते हैं कि मंदिर के आधार के ऊपर ही गुंबद बनाकर उसे मस्जिद का रूप दे दिया गया था।
प्रोफेसर राकेश पांडे बताते हैं कि मंदिर के आधार के ऊपर ही गुंबद बनाकर उसे मस्जिद का रूप दे दिया गया था।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर और धरोहर प्रबंधन केंद्र के समन्वयक राकेश पांडे बताते हैं कि ज्ञानवापी काशी का केंद्रीय स्थल है, जहां प्राचीन काल से शिव मंदिर है। वहां वापी स्थान है, जिसे ज्ञान का तालाब भी कह सकते हैं। कभी वहां बड़ा तालाब रहा होगा। मस्जिद और मंदिर के विवाद पर प्रोफेसर पांडे कहते हैं कि 'तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभ से इस्लामी शासकों ने कई बार ज्ञानवापी परिसर पर हमले किए। विश्वनाथ मंदिर से लेकर कई और प्राचीन मंदिरों पर भी कई बार हमले हुए।'

प्रोफेसर पांडे बताते हैं, 'जो विश्वैश्वरा मंदिर औरंगजेब के आदेश पर तोड़ा गया था, वो उसी के परदादा मुगल सम्राट अकबर के आदेश पर बनवाया गया था। अकबर ने वहीं मंदिर बनाने का आदेश दिया था जहां प्राचीनकाल से मंदिर चला आ रहा था। अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल और काशी के ब्राह्मण नारायण भट्ट ने मंदिर बनवाया और औरंगजेब के आदेश पर तोड़े जाने तक ये मंदिर ही था। पूरा मंदिर नहीं तोड़ा जा सका था, मंदिर के आधार के ऊपर ही गुंबद बनाकर उसे मस्जिद का रूप दे दिया गया था।'

ज्ञानवापी को लेकर पहले भी हो चुका है संघर्ष

ज्ञानवापी को लेकर बनारस में कई बार संघर्ष भी हो चुका है। डियाना एल ऐक की किताब के मुताबिक साल 1809 में जब हिंदुओं ने विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के बीच एक छोटा स्थल बनाने की कोशिश की थी, तब भीषण दंगे हुए थे। तब से कई बार ज्ञानवापी को लेकर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संघर्ष हो चुका है।

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