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वैक्सीन के रख-रखाव में केरल नंबर-1 कैसे:हेल्थ वर्कर्स की अच्छी ट्रेनिंग, हर डोज के इस्तेमाल का मॉडल; 6 पॉइंट में जानिए कैसे एक भी वैक्सीन बर्बाद नहीं की

4 महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय

केरल ने फिर देश को बता दिया है कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बाकी राज्यों से बेहतर क्यों है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी केरल की तारीफ करनी पड़ी है। केरल के हेल्थ वर्कर्स देश में सबसे कुशल माने जाते हैं। आज उन्हीं की वजह से केरल कोरोना वैक्सीन के नुकसान को कम करने के मामले में देश में नंबर एक है। नुकसान तो छोड़िए, हेल्थ वर्कर्स ने तय डोज में से ज्यादा लोगों को वैक्सीन डोज दी है। आइए समझते हैं यह कैसे हुआ...

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को वैक्सीन के 10% तक वेस्टेज की छूट दी है। केरल को 73 लाख 38 हजार 806 वैक्सीन की डोज मिली थीं, जिनमें से उसने लोगों को 74 लाख 26 हजार 164 डोज दीं। इसका मतलब हुआ कि केरल ने 87 हजार 358 अतिरिक्त लोगों को वैक्सीन दी। केरल ने 1% भी वैक्सीन को बर्बाद नहीं होने दिया। वहीं, जिन राज्यों में वैक्सीन वेस्टेज होने का औसत सबसे कम है, उनमें तमिलनाडु और लक्ष्यद्वीप शामिल हैं। तमिलनाडु में यह दर 8.83% और लक्षद्वीप में 9.76% है।

केरल ने कैसे बनाई अतिरिक्त डोज और कैसे वैक्सीन की बर्बादी को रोका? इस सवाल पर तिरुअनंतपुरम में एच1एन1 और कोविड-19 के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉक्टर अमर फेटल बताते हैं कि ऐसा सिस्टमैटिक मैनेजमेंट और करेक्ट टाइमिंग से ही हो पाया है। हमारे यहां अभी दूसरी फेज का वैक्सीनेशन चल रहा है, लेकिन हम प्राथमिकता के हिसाब से लोगों को वैक्सीन लगा रहे हैं।

अमर बताते हैं कि मान लीजिए किसी सेंटर पर 100 लोगों को वैक्सीन लगनी है, तो उसमें से हम फिलहाल 70 से 80 ऐसे लोगों को चुन रहे हैं, जिन्हें सेकंड डोज लगानी है। बाकी हम फर्स्ट डोज लगाते हैं। फिलहाल हम और वैक्सीन का इंतजार कर रहे हैं। केरल सरकार ने 1.5 लाख वैक्सीन का ऑर्डर दिया है।

डॉक्टर अमर कहते हैं कि डोज का वेस्टेज रोकने और अतिरिक्त डोज लगाने के लिए हेल्थ वर्कर्स ने किसी की निश्चित डोज में कोई कटौती नहीं की, बल्कि तय मानक के मुताबिक ही हर किसी को डोज लगाई गई है, लेकिन इस सबके बीच साइंटिफिक और सिस्टमैटिक प्रक्रिया अख्तियार करने से ज्यादा लोगों को डोज लग सकी है। इसके लिए हमने अपने हेल्थ वर्कर्स को अच्छी ट्रेनिंग दी हुई है।

केरल वैक्सीन वेस्टेज को कैसे रोक रहा और हर ड्रॉप को यूज कर रहा है?
डॉक्टर फेटल बताते हैं- वैक्सीनेशन शुरू होने के पहले केरल ने ड्राइव का लेकर प्रोटोकॉल बनाया, जो केंद्र की गाइडलाइन से अलग है। इसके तहत स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और प्रशासन के लिए सख्त नियम बनाए गए। हेल्थ वर्कर्स को ट्रेनिंग दी गई। इसमें एक्सपर्ट्स ने नर्स को बताया किस तरह एक भी ड्रॉप वैक्सीन को बेकार नहीं जाने देना है। फिर नर्सेज ने इस ट्रेनिंग का कमाल वैक्सीन ड्राइव में करके दिखाया। और उन्होंने दिन प्रतिदिन एक निश्चित और सही अमाउंट में वैक्सीन लगाकर, एक्स्ट्रा डोज क्रिएट कर डाले।

इसके अलावा आशा और आंगनबाड़ी वर्कर्स के जरिए लोगों को वैक्सीन के बारे में अवेयर किया गया, ताकि स्वास्थ्य केंद्र पर एक दिन में निश्चित डोज लग सकें और वैक्सीन बर्बाद न हो। हेल्थ वर्कर्स ने वैक्सीन की शीशी को तभी खोला, जब 10 लोग मौजूद थे।

केरल में वैक्सीनेशन ड्राइव के प्राेसेस और उसके एग्जीक्शून को 6 प्वॉइंट्स में समझिए...ong>...

1. केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलेजा ने सबसे पहले राज्य में वैक्सीनेशन प्रोग्राम का एक्शन प्लान जारी किया। इसके मुताबिक, सबसे पहले 14 जिलों में 133 कोविड सेंटर्स बनाए गए, जहां वैक्सीनेशन शुरू हुआ।

2. इस एक्शन प्लान में बताया गया कि एक सेंटर पर सिर्फ 100 लोगों को ही वैक्सीन लगाई जाएगी। ये भी बताया गया कि कैसे लगानी है, लोग कैसे आएंगे। आंगनबाड़ी और आशा वर्कर्स को लोगों को वैक्सीनेशन सेंटर्स तक लाने की जिम्मेदारी दी गई।

3. वैक्सीनेशन से पहले राज्य की 2.39 लाख मिडवाइव्स में से 1.54 लाख मिडवाइव्स को जिला और ब्लॉक लेवल पर वैक्सीन लगाने की ट्रेनिंग दी गई। इसमें वैक्सीन वेस्टेज को रोकने के लिए एक्यूरेसी और टाइमिंग के महत्व को बताया गया।

4. हर वैक्सीनेशन सेंटर पर कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार वेटिंग एरिया और ऑब्जर्वेशन रूम बनाए गए। यहां हर वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्ति की 30 मिनट तक निगरानी सुनिश्चित की गई है। ताकि किसी को साइडइफेक्ट दिखें तो इलाज हो सके।

5. इसके बाद हर जिले में डीएम की निगरानी में एक वैक्सीन टास्कफोर्स बनाई गई। हर जिले में कोऑर्डिनेशन के लिए एक कंट्रोल रूम भी है। हर टास्क फोर्स में विशेषज्ञों का एक पैनल होता है, जो वैक्सीनेशन सेंटर्स पर लॉजिस्टिक, इक्विपमेंट और प्लानिंग से जुड़े कामों को देखता है।

6. हाई स्टीयरिंग कमेटी प्लानिंग, एग्जीक्यूशन और मॉनिटरिंग का काम कर रही है। जिसके अध्यक्ष राज्य के चीफ सेक्रेटरी हैं।

1 शीशी से 10 की जगह 11 से 12 लोगों को लग रही डोज केरल कोविड एक्सपर्ट्स कमेटी के सदस्य डॉक्टर अनीश टीएस बताते हैं कि हमारे हेल्थ वर्कर्स 10 की जगह 11, 12 लोगों को वैक्सीन लगा रहे हैं। सुनीता पलक्कड़ में सनराइज हॉस्पिटल में नर्स हैं, फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में तैनात हैं और लोगों का एंटीजन टेस्ट कर रही हैं। कहती हैं कि यहां टेस्ट और वैक्सीनेशन के अलग-अलग सेंटर बनाए गए हैं। इमरजेंसी केसेस में ज्यादा पॉजिटिव आ रहे हैं। कल 15 मरीज आए, जिसमें 5 पॉजिटिव आ गए। हमने उन्हें कोविड सेंटर्स पर भेज दिया। मेरे अस्पताल में सिर्फ एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। जो नर्सें वैक्सीन लगा रही हैं, उन्हें वैक्सीन ड्राइव प्रोग्राम से पहले वैक्सीन लगाई गई थी।

बड़ी तादाद में केस के बावजूद केरल में उत्तर भारत जैसा सीन बिल्कुल नहीं
त्रिवेंद्रम के वरिष्ठ पत्रकार अनिल एस बताते हैं कि न सिर्फ वैक्सीनेशन के मामले में केरल अच्छा कर रहा है। बाकी लॉकडाउन के जरिए कोविड स्प्रेड को भी काफी हद तक कंट्रोल कर रहा है। हॉस्पिटल भरे हैं, केस भी ज्यादा आ रहे हैं, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों जैसे पैनिक सीन बिल्कुल नहीं है। सभी को इलाज मिल रहा है। लॉकडाउन के चलते कोई भूखा न रहे, सरकार ने कम्यूनिटी किचन शुरू किया है। लोगों को दवाओं के लिए बाहर न जाने पड़े, इसलिए सरकार लोगों को कोविड किट भेज रही है। इसके साथ ही सरकारी डॉक्टर मोबाइल और फोन के जरिए भी कंसल्टेशन कर रहे हैं।

केरल की 19% आबादी को अब तक वैक्सीन लग चुकी है। राज्य में 67.36 लाख लोगों को एक डोज और 20.20 लाख को दोनों डोज लग चुकी है। कुल 87.57 लाख लोगों को वैक्सीन लगी है। हर जिले में वैक्सीनेशन की सेपरेट टीम है। इन्हीं के देखरेख में वैक्सीनेशन कैंपेन चल रहा है।
केरल की 19% आबादी को अब तक वैक्सीन लग चुकी है। राज्य में 67.36 लाख लोगों को एक डोज और 20.20 लाख को दोनों डोज लग चुकी है। कुल 87.57 लाख लोगों को वैक्सीन लगी है। हर जिले में वैक्सीनेशन की सेपरेट टीम है। इन्हीं के देखरेख में वैक्सीनेशन कैंपेन चल रहा है।

हर जिले में वैक्सीनेशन ड्राइव की सेपरेट टीम है
कोझिकोड की पत्रकार पूजा नायर बताती हैं कि यहां अभी सेकंड फेज का वैक्सीनेशन चल रहा है। 45 साल से अधिक उम्र वालों को ही वैक्सीन लग रही है। केरल को केंद्र से वैक्सीन की ज्यादा डोज नहीं मिली, इसलिए अभी तक मीडिया के लोगों को भी वैक्सीन नहीं लग पाई है। लेकिन यहां सिस्टम बहुत ट्रांसपेरेंट है, इसलिए चीजें सिस्टमैटिक चल रही हैं। यही वजह है कि तय डोज से ज्यादा डोज लोगों को लग पाई है।

पूजा कहती हैं कि दरअसल यहां वैक्सीन ड्राइव बहुत ही साइंटिफिकिली चल रहा है। फेज वाइज हो रहा है, इसीलिए अच्छा हो रहा है। अभी वैक्सीनेशन सिर्फ सरकारी हॉस्पिटल में ही चल रहा है। प्राइवेट हॉस्पिटल को वैक्सीनेशन से दूर रखा गया है। राज्य के हर जिले में वैक्सीनेशन ड्राइव की सेपरेट टीम मिली हुई है। इन्हीं के देखरेख में वैक्सीनेशन कैंपेन चल रहा है। हर वार्ड में एक नोडल ऑफिसर हैं, जो वैक्सीनेशन को मॉनिटर कर रहे हैं।