देश की पहली मस्जिद से ग्राउंड रिपोर्ट:केरल के त्रिशूर का यह इलाका लेफ्ट का गढ़, पर लोगों की जुबान पर भाजपा भी चढ़ रही है; 50 से 55 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक

त्रिशूर10 महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय
त्रिशूर जिले में स्थित चेरामन जुमा मस्जिद, देश की पहली मस्जिद है। फिलहाल मस्जिद का मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट के तहत रेनोवेशन का काम चल रहा है।
  • 5 बार से जो पार्टी त्रिशूर लोकसभा सीट जीतती है, उसी की राज्य में सरकार बनती है
  • कोडंगलूर में दिसंबर में हुए लोकल बॉडी चुनाव में भाजपा ने 44 में से 21 सीटें जीत लीं

केरल के त्रिशूर जिले में स्थित चेरामन जुमा मस्जिद देश की पहली मस्जिद है। यह त्रिशूर से करीब 40 किमी और कोच्चि से करीब 35 किमी दूर कोडंगलूर विधानसभा सीट के मेथला गांव में स्थित है। हालांकि, अब यहां गांव जैसा कुछ भी नहीं दिखता है। मस्जिद का निर्माण 629 ईस्वी में दीनार ने करवाया था। फिलहाल मस्जिद का मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट के तहत रेनोवेशन का काम चल रहा है। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष फैसल कहते हैं कि इस काम के लिए विजयन सरकार ने 1.18 करोड़ रुपए दिए हैं, इसके अलावा करीब 15 करोड़ रुपए हमने चंदे में जुटाए हैं।

मस्जिद के बाहर गेट से लेकर सड़क तक जगह-जगह बस CPI के ही झंडे दिखाई देते हैं। कोडंगलूर सीट CPI की हमेशा से गढ़ रही है। 2016 में CPI के वीआर सुनील कुमार यहां से विधायक चुने गए थे। इस सीट पर अब तक 10 विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें से 8 बार CPI के उम्मीदवार ही यहां से जीते हैं।

तस्वीर मस्जिद परिसर के मुख्य गेट की है, जो अभी बंद है। यह त्रिशूर से करीब 40 किमी और कोच्चि से करीब 35 किमी दूर मेथला गांव में स्थित है।
तस्वीर मस्जिद परिसर के मुख्य गेट की है, जो अभी बंद है। यह त्रिशूर से करीब 40 किमी और कोच्चि से करीब 35 किमी दूर मेथला गांव में स्थित है।

फैसल कहते हैं कि यहां किसी को कोई दिक्कत नहीं है। हम सब सेक्युलर लोग हैं, यहां सभी धर्म के लोगों के बीच भाईचारा और एकता है। चेरामन मस्जिद तो वैसे भी अपनी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के लिए ही मशहूर है। मस्जिद का आकार और निर्माण हिंदुओं ने हिंदू कला और वास्तुशिल्प के आधार पर ही किया था। मस्जिद के अंदर स्थित प्राचीन लैंप मलायम कल्चर की ही प्रतीक है।

मस्जिद के अंदर मजार के पास मौलवी अकेले इबादत कर रहे हैं। आसपास रेनोवेशन का काम चल रहा है, मस्जिद परिसर का मुख्य गेट अभी बंद है। मौलवी मोहम्मद फैसल कहते हैं कि यहां वैसे तो ज्यादातर लोग LDF के ही समर्थक हैं, लेकिन पिछले लोकल बॉडी चुनाव में भाजपा ने भी यहां अच्छा किया है। कोडंगलूर लोकल बॉडी में कुल 44 सीट हैं। इनमें से पिछले साल दिसंबर में हुए चुनाव में भाजपा ने 21, LDF ने 22 और कांग्रेस ने एक सीट जीती है। इससे भाजपा की मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मस्जिद के बाहर मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट का बोर्ड लगा है। LDF सरकार चेरामन मस्जिद का रेनोवेशन इसी प्रोजेक्ट के तहत करा रही है।
मस्जिद के बाहर मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट का बोर्ड लगा है। LDF सरकार चेरामन मस्जिद का रेनोवेशन इसी प्रोजेक्ट के तहत करा रही है।

मस्जिद से कोडंगलूर मार्केट की ओर आगे बढ़ने पर सड़क के दोनों किनारों पर मानों ऐसा लगता है कि भाजपा और LDF के बीच बैनर और पोस्टर लगाने की होड़ मची हो। मार्केट से पहले ही देवी जी का मंदिर है। मंदिर के मुख्य गेट के बाहर भाजपा का बड़ा पोस्टर चस्पा है। मंदिर परिसर के अंदर कुछ दुकानें हैं, इन्हीं के बीच में भाजपा का कार्यालय भी है। मोहनदास की यहीं पर 20 साल से पुरानी दुकान है। LDF सरकार कैसी है? यह पूछने पर मोहनदास कहते हैं कि 'बहुत अच्छा काम किया है। हमें राशन किट देती है, पेंशन देती है और क्या चाहिए।' बिजली, पानी की स्थिति पूछने पर कहते हैं कि यहां इसकी कोई दिक्कत नहीं है।

मार्केट के ही हरि बताते हैं कि इस बार भाजपा अच्छा कर सकती है। हमारे इलाके के वार्ड चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ही जीते थे। मस्जिद के सामने फल की दुकान चलाने वाले मृदुल हिंदी नहीं बोल पाते हैं, लेकिन अंग्रेजी में कहते हैं कि यहां सब अच्छा है। मस्जिद से हमें रोजगार मिलता है।

मस्जिद से थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर एक मंदिर है। मंदिर परिसर के अंदर कुछ दुकानें हैं, इन्हीं के बीच में भाजपा का कार्यालय भी है।
मस्जिद से थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर एक मंदिर है। मंदिर परिसर के अंदर कुछ दुकानें हैं, इन्हीं के बीच में भाजपा का कार्यालय भी है।

वैसे यहां एक बात और लोगों के बीच बहुत चर्चित है कि त्रिशूर के लोग पहले ही बता देते हैं कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी। ऐसा पिछले पांच चुनावों से देखने को मिल रहा है। त्रिशूर के राजगोपालन बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के नतीजे ही तय करते हैं कि अगले विधानसभा चुनाव में राज्य में किस पार्टी की सरकार बनने जा रही है। 2019 आम चुनाव में इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार टीएन पार्थापन जीते हैं। यहां के लोग कहते हैं कि इससे लगता है कि इस बार UDF की सरकार बन सकती है। उससे पहले देखिए, 2014 में यहां CPI उम्मीदवार जीते थे, तो राज्य में 2016 में LDF की सरकार बनी थी। 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार जीते थे, तब 2011 में UDF की सरकार बनी थी।

राज्य में 26% वोटर्स मुस्लिम हैं, 24 से 30 सीटों पर मुस्लिम लीग लड़ती है

कोडंगलूर सीट CPI का गढ़ रही है। मस्जिद के बाहर गेट से लेकर सड़क तक जगह-जगह बस CPI के ही झंडे दिखाई देते हैं।
कोडंगलूर सीट CPI का गढ़ रही है। मस्जिद के बाहर गेट से लेकर सड़क तक जगह-जगह बस CPI के ही झंडे दिखाई देते हैं।

कोडंगलूर इलाके में करीब 30% आबादी मुस्लिम है। मुस्लिम इस पर जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च (CPPR) के चेयरमैन डॉक्टर धनुराज बताते हैं कि वैसे तो राज्य में मुस्लिम वोटर्स करीब 26% हैं। यह करीब 50 से 55 सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं। इसमें से भी 24 से 30 सीटों पर मुस्लिम लीग के उम्मीदवार उतरते हैं। पिछली बार मुस्लिम लीग के 18 उम्मीदवार जीते थे।

मस्जिदों-चर्चों का रेनोवेशन करा दोनों माइनॉरिटी कम्युनिटी को साध रही है LDF सरकार

डॉ. धनुराज बताते हैं कि LDF सरकार चेरामन मस्जिद का रेनोवेशन मुजिरिस प्रोजेक्ट के तहत करा रही है। यही यहां मुद्दा है। कोस्टल बेल्ट में मुस्लिम और क्रिश्चियन कम्युनिटी से जुड़ी तमाम मस्जिदें और चर्च हैं, सरकार ने इन्हें मुजिरिस प्रोजेक्ट में शामिल किया है। इसमें चेरामन बस मोहरा है। इसके जरिए सरकार की मंशा माइनॉरिटी कम्युनिटी के वोट हासिल करना है। विपक्षी दल कह रहे हैं कि यह वोट बैंक की राजनीति है। इसके लिए सरकार इंटरनेशनल फंडिंग भी ले रही है। यह काम केरल काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (KCHR) की देखरेख में चल रहा है। हालांकि, इस बारे में सरकार का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों के सहेजने के मकसद से काम किया जा रहा है।

मस्जिद के मौलवी मोहम्मद फैसल कहते हैं कि यहां वैसे तो ज्यादातर लोग LDF के ही समर्थक हैं, लेकिन पिछले लोकल बॉडी चुनाव में भाजपा ने भी यहां अच्छा किया है।
मस्जिद के मौलवी मोहम्मद फैसल कहते हैं कि यहां वैसे तो ज्यादातर लोग LDF के ही समर्थक हैं, लेकिन पिछले लोकल बॉडी चुनाव में भाजपा ने भी यहां अच्छा किया है।
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