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जिनके दम पर टिका रहा किसान आंदोलन:पर्दे के पीछे से लड़ाई लड़ने वाले किसान आंदोलन के 5 हीरो, कोई डॉक्टर रहा तो कोई फौजी

2 महीने पहले

आप उन्हें जानते हैं जिनके दम पर किसान आंदोलन पूरे साल थमा रह गया? आइए हम मिलाते हैं उन 5 शख्‍सियतों से जो पर्दे के पीछे से लड़ती रहीं। इनके चलते ही किसान आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ा और पहली बार मोदी सरकार को झुकना पड़ा।

60 साल के गुरनाम सिंह चढूनी भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष हैं। इन्होंने 10 सितम्बर, 2020 को जब हरियाणा के पीपली में किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तब शपथ ली कि अंदोलन को कमजोर नहीं होने देंगे। इन्होंने हरियाणा में आंदोलन खड़ा किया। चढूनी पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वो निर्दलीयी प्रत्याशी थे।
60 साल के गुरनाम सिंह चढूनी भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष हैं। इन्होंने 10 सितम्बर, 2020 को जब हरियाणा के पीपली में किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तब शपथ ली कि अंदोलन को कमजोर नहीं होने देंगे। इन्होंने हरियाणा में आंदोलन खड़ा किया। चढूनी पिछली बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वो निर्दलीयी प्रत्याशी थे।
दर्शन पाल MBBS, MD डॉक्टर हैं। करीब 20 साल पहले नौकरी छोड़ी और तब से अब तक किसानों की आवाज उठा रहे हैं। किसान संगठनों के बीच तालमेल बनाने में डॉक्टर दर्शन पाल ने अहम भूमिका निभाई। वे किसान नेतृत्व के उन चेहरों में शामिल हैं जो क्षेत्रीय भाषाओं के साथ ही अंग्रेजी में भी किसानों की बात पूरी मजबूती से मीडिया के सामने रखते हैं। डॉक्टर दर्शन पाल क्रांतिकारी किसान यूनियन से जुड़े हैं।
दर्शन पाल MBBS, MD डॉक्टर हैं। करीब 20 साल पहले नौकरी छोड़ी और तब से अब तक किसानों की आवाज उठा रहे हैं। किसान संगठनों के बीच तालमेल बनाने में डॉक्टर दर्शन पाल ने अहम भूमिका निभाई। वे किसान नेतृत्व के उन चेहरों में शामिल हैं जो क्षेत्रीय भाषाओं के साथ ही अंग्रेजी में भी किसानों की बात पूरी मजबूती से मीडिया के सामने रखते हैं। डॉक्टर दर्शन पाल क्रांतिकारी किसान यूनियन से जुड़े हैं।
बलबीर सिंह राजेवाल किसान आंदोलन के वो चेहरे हैं जिन्हें अमित शाह सीधे फोन करते हैं। 77 साल के बलबीर भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने ही BKU का संविधान भी लिखा है। इस आंदोलन में किसानों को वैचारिक धार देने और सरकार से बातचीत की न्यूनतम शर्तों को तय करने में बलबीर की मुख्य भूमिका रही। वे इस वक्त BKU राजेवाल के अध्यक्ष भी हैं।
बलबीर सिंह राजेवाल किसान आंदोलन के वो चेहरे हैं जिन्हें अमित शाह सीधे फोन करते हैं। 77 साल के बलबीर भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उन्होंने ही BKU का संविधान भी लिखा है। इस आंदोलन में किसानों को वैचारिक धार देने और सरकार से बातचीत की न्यूनतम शर्तों को तय करने में बलबीर की मुख्य भूमिका रही। वे इस वक्त BKU राजेवाल के अध्यक्ष भी हैं।
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) पंजाब के सबसे मजबूत और सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक है। जोगिंदर सिंह इसके अध्यक्ष हैं या ये भी कह सकते हैं कि जोगिंदर ने ही यह संगठन तैयार किया। वे रिटायर्ड फौजी हैं। उनके प्रभाव के चलते ये संगठन तेजी से लोकप्रिय हुआ। महिला किसान भी संगठन से जुड़ने लगीं। दिल्ली पहुंचे किसानों में ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जो जोगिंदर के नेतृत्व में यहां आए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) पंजाब के सबसे मजबूत और सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक है। जोगिंदर सिंह इसके अध्यक्ष हैं या ये भी कह सकते हैं कि जोगिंदर ने ही यह संगठन तैयार किया। वे रिटायर्ड फौजी हैं। उनके प्रभाव के चलते ये संगठन तेजी से लोकप्रिय हुआ। महिला किसान भी संगठन से जुड़ने लगीं। दिल्ली पहुंचे किसानों में ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जो जोगिंदर के नेतृत्व में यहां आए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के बाद पंजाब में जिस किसान संगठन की सबसे मज़बूत पकड़ है, वह है भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा)। जगमोहन सिंह इसी संगठन के नेता हैं। 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के बाद से ही जगमोहन सिंह पूरी तरह से सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पित हो गए। वो आंदोलन में नए संगठनों को शामिल करने और 30 से ज्यादा किसान संगठनों को एकजुट रखने में वे अहम भूमिका निभाते रहे।
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के बाद पंजाब में जिस किसान संगठन की सबसे मज़बूत पकड़ है, वह है भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा)। जगमोहन सिंह इसी संगठन के नेता हैं। 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के बाद से ही जगमोहन सिंह पूरी तरह से सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पित हो गए। वो आंदोलन में नए संगठनों को शामिल करने और 30 से ज्यादा किसान संगठनों को एकजुट रखने में वे अहम भूमिका निभाते रहे।

5 और नाम हैं। जरूरी हैं। इन्होंने फ्रंटफुट पर आकर ये लड़ाई लड़ी। फ्रंटफुट समझते हैं न। मतलब वो लोग जो अपने चेहरे लेकर सामने आए और सीधे सरकार का मुकाबला किया।

मौजूदा किसान आंदोलन को सिर्फ पंजाब और हरियाणा तक ही सीमित आंदोलन बताया जा रहा था, लेकिन इस धारणा को राकेश टिकैत ने खत्म किया। वे उत्तर प्रदेश से सैकड़ों किसानों को साथ लेकर इस आंदोलन में शामिल हो गए। वो भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। फ्रंटफुट पर आकर आंदोलन की अगुवाई करने वाले नेताओं में से वो सबसे आगे हैं।
मौजूदा किसान आंदोलन को सिर्फ पंजाब और हरियाणा तक ही सीमित आंदोलन बताया जा रहा था, लेकिन इस धारणा को राकेश टिकैत ने खत्म किया। वे उत्तर प्रदेश से सैकड़ों किसानों को साथ लेकर इस आंदोलन में शामिल हो गए। वो भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। फ्रंटफुट पर आकर आंदोलन की अगुवाई करने वाले नेताओं में से वो सबसे आगे हैं।
सुरजीत कौर किसान आंदोलन का महिला चेहरा बनी रहीं। उन्होंने लगातार किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की। वो बाहर आकर सीधे शब्दों में सरकार की आलोचना भी करती रहीं। एक वक्त ऐसा था जब आंदोलन का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में आ गया था।
सुरजीत कौर किसान आंदोलन का महिला चेहरा बनी रहीं। उन्होंने लगातार किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की। वो बाहर आकर सीधे शब्दों में सरकार की आलोचना भी करती रहीं। एक वक्त ऐसा था जब आंदोलन का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में आ गया था।
27 नवंबर, 2020 को हरियाणा इस युवक ने ठंड में किसानों पर पानी की बौछार करने वाली पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर उसे बंद कर दिया था। इसका नाम नवदीप है। उस घटना के बाद नवदीप पर हत्या के प्रयास का आरोप लगा, जिसमें आजीवन कारावास, दंगों और COVID-19 नियमों के उल्लंघन का अधिकतम जुर्माने वाले मामले लगाए गए। इसके बाद से वो पूरी तरह किसान आंदोलन को मजबूत करने में लगा रहा।
27 नवंबर, 2020 को हरियाणा इस युवक ने ठंड में किसानों पर पानी की बौछार करने वाली पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर उसे बंद कर दिया था। इसका नाम नवदीप है। उस घटना के बाद नवदीप पर हत्या के प्रयास का आरोप लगा, जिसमें आजीवन कारावास, दंगों और COVID-19 नियमों के उल्लंघन का अधिकतम जुर्माने वाले मामले लगाए गए। इसके बाद से वो पूरी तरह किसान आंदोलन को मजबूत करने में लगा रहा।
ये वो चेहरा है जो किसान आंदोलन को डिजिटल वर्ल्ड में आगे बढ़ाने और टूलकिट बनाने के लिए गिरफ्तार भी हुई थीं। इनका नाम है दिशा रवि।
ये वो चेहरा है जो किसान आंदोलन को डिजिटल वर्ल्ड में आगे बढ़ाने और टूलकिट बनाने के लिए गिरफ्तार भी हुई थीं। इनका नाम है दिशा रवि।
योगेंद्र यादव इस लिस्ट के आखिरी नाम हैं। इन्होंने किसान आंदोलन को बड़ा बनाने में अपनी भूमिका निभाई थी। हालांकि बाद में ये किसान आंदोलन से बाहर हो गए थे।
योगेंद्र यादव इस लिस्ट के आखिरी नाम हैं। इन्होंने किसान आंदोलन को बड़ा बनाने में अपनी भूमिका निभाई थी। हालांकि बाद में ये किसान आंदोलन से बाहर हो गए थे।
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