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कहानी पाकिस्तान की सिख लड़की की:एक साल शेल्टर होम में गुजारा, इसके बावजूद हारना पड़ा, जिस लड़के ने अपहरण किया अब उसी का घर होगा जगजीत कौर का ससुराल

अमृतसर2 महीने पहलेलेखक: रविंदर सिंह रॉबिन
  • पिछले साल अगस्त में जगजीत के परिवार ने मोहम्मद हसन पर आरोप लगाया था कि उसने उनकी बेटी से जबरन शादी कर उसका धर्म परिवर्तन किया
  • जगजीत का परिवार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात करते हुए कह रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है

1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ और इसके दो हिस्से हुए, तब पंजाब का बंटवारा भी हुआ था। पंजाब का एक हिस्सा भारत में रहा और दूसरा हिस्सा पाकिस्तान में। बंटवारे के बाद पाकिस्तान के हिस्से में आए पंजाब से ज्यादातर लोग तो भारत लौट आए, लेकिन कुछ लोग वहीं रहे। इसी पंजाब में एक जगह है ननकाना साहिब। ये वही जगह है जहां सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। ननकाना साहिब पिछले एक साल से चर्चा में बना हुआ है। कारण है- जगजीत कौर।

जगजीत कौर वो लड़की है, जिसके परिवार ने मोहम्मद हसन नाम के लड़के पर उनकी बेटी का जबरन अपहरण करने, शादी करने और धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाया था। परिवार का कहना था कि मोहम्मद हसन से शादी के बाद जगजीत कौर का धर्म परिवर्तन कर उसे मुस्लिम बनाया गया और उसका नाम भी बदलकर आयशा रख दिया। हालांकि, खुद जगजीत कौर ने इन पूरे आरोपों को झूठा बता दिया।

पिछले साल परिवार की तरफ से आरोप लगने के बाद पुलिस ने मोहम्मद हसन को गिरफ्तार कर लिया था और जगजीत उर्फ आयशा को लाहौर के दार-उल-अमन यानी शेल्टर होम भेज दिया था। पिछले हफ्ते ही लाहौर हाईकोर्ट का इस पर फैसला आया है। हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, अब जगजीत शेल्टर होम से निकलकर अपने ससुराल यानी पति हसन के घर जा सकेंगी।

कुछ दिन पहले जगजीत कौर के न्याय के लिए पाकिस्तान में सिखों ने मीटिंग की थी।
कुछ दिन पहले जगजीत कौर के न्याय के लिए पाकिस्तान में सिखों ने मीटिंग की थी।

जगजीत कौर का मामला आने के बाद भारत में भी इसकी जमकर चर्चा हुई। जगजीत के परिवार ने भारत से भी इस मामले में दखल देने की गुहार की थी। पिछले साल सितंबर में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर इस मामले में कुछ भी न कर पाने की बात कही थी।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, "कई दिन के बाद भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जगजीत कौर की मदद करने में नाकाम रहे हैं। जगजीत का जबरन धर्म परिवर्तन हुआ और उसकी इच्छा के खिलाफ शादी कर दी गई। मैं उस लड़की को अपना पूरा सपोर्ट देना चाहूंगा और उसे और उसके पूरे परिवार को पंजाब लाने में मुझे खुशी होगी।"

पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के हालात हमेशा से ही चिंताजनक रहे हैं। यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम का डेटा बताता है कि पाकिस्तान में हर साल हजार से ज्यादा लड़कियों का जबरन अपहरण होता है। उनकी इच्छा के खिलाफ किसी मुस्लिम से शादी होती है और बाद में उनका धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है।

लेकिन, जगजीत कौर का ये मामला टेढ़ा-मेढ़ा रहा है। कारण है कि परिवार कुछ कह रहा था और जगजीत कुछ और। इसी वजह से लाहौर हाईकोर्ट ने जगजीत को उनके पति के साथ ही जाने का फैसला दिया है।

पाकिस्तान के साथ ही दूसरे देशों में रहने वाले सिखों ने भी जगजीत के न्याय लिए प्रदर्शन किए, सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया।
पाकिस्तान के साथ ही दूसरे देशों में रहने वाले सिखों ने भी जगजीत के न्याय लिए प्रदर्शन किए, सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया।

जगजीत कौर का पूरा मामला क्या है?
जगजीत कौर अपने परिवार के साथ ननकाना साहिब में रहती हैं। उनके पति मोहम्मद हसन उनके पड़ोसी हैं। जगजीत के पिता एक सिख पुजारी हैं। पिछले साल अगस्त में जगजीत के परिवार ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद हसन ने पहले तो उनकी बेटी का अपहरण किया, फिर शादी की और बाद में उसका धर्म परिवर्तन कर दिया। धर्म परिवर्तन के बाद जगजीत का नाम आयशा रखा गया।

जगजीत कौर के परिवार ने मोहम्मद हसन और उनके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जगजीत को शेल्टर होम में रखा गया। जगजीत के परिवार का कहना था कि उनकी बेटी नाबालिग है, जिसकी उम्र 15 साल है। उन्होंने सबूत के तौर पर स्कूल सर्टिफिकेट भी पेश किया था।

लेकिन, मोहम्मद हसन के वकील ने नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के रिकॉर्ड पेश किए, जिनके मुताबिक जगजीत की उम्र 19 साल थी।

जगजीत कौर के परिवार ने मोहम्मद हसन नाम के लड़के पर उनकी बेटी का जबरन अपहरण करने, शादी करने और धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाया था।
जगजीत कौर के परिवार ने मोहम्मद हसन नाम के लड़के पर उनकी बेटी का जबरन अपहरण करने, शादी करने और धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाया था।

जगजीत के परिवार ने सरकार से अपनी बेटी की वापसी की गुहार लगाई थी। इस मामले में पाकिस्तान के गृह मंत्री ब्रिगेडियर एजाज अहमद शाह ने भी इस मामले को सुलझाने का वादा किया था। एजाज शाह खुद ननकाना साहिब से ही आते हैं।

इस पूरे मामले की चर्चा न सिर्फ पाकिस्तान में, बल्कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में भी चर्चा हुई। दुनियाभर के सिख समुदाय के लोगों ने इस पर नाराजगी जाहिर की और जगजीत को इंसाफ दिलाने की मांग की। हालांकि, जगजीत ने खुद कोर्ट में कहा था कि उन्होंने अपनी मर्जी से हसन से शादी की और इस्लाम कबूला। उनका कहना था कि वो अपने पति के साथ ही रहना चाहती हैं।

पंजाब के गवर्नर का समझौता भी बेअसर ही रहा
जब जगजीत कौर का मामला हाईकोर्ट में चल रहा था, उसी बीच लाहौर में अंतर्राष्ट्रीय सिख सम्मेलन भी हुआ। इस सम्मेलन में शामिल हुए प्रवासी सिखों के सामने भी परिवार ने जगजीत को वापस लाने की अपील की थी। कनाडा के सरदार गुरचरण सिंह ने तो पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय सिख सम्मेलन का बायकॉट करने की चेतावनी तक दी थी। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पाकिस्तान में रहने वाले गैर-मुस्लिमों को सेफ्टी और सिक्योरिटी नहीं दिए जाने पर पाकिस्तान की निंदा की थी।

भारत समेत दुनिया के कई देशों की बढ़ते दबाव के बाद पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के गवर्नर चौधरी मोहम्मद सर्वर ने इस मामले में दखल दिया। उन्होंने जगजीत कौर और मोहम्मद हसन के परिवार के बीच आपसी समझौता भी करवाया। उस समय हसन के पिता ने कहा, अगर लड़की अपने माता-पिता के साथ जाना चाहती है, तो वो उसे रोकेंगे नहीं। इस पूरे विवाद को आपसी समझौते से सुलझाने के बाद मोहम्मद सर्वर ने ट्वीट भी किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मामला आपसी समझौते से सुलझा लिया गया है।

हालांकि, मामला सुलझने के बाद भी जगजीत को शेल्टर होम भेज दिया गया। जगजीत के भाई सविंदर सिंह बताते हैं कि गवर्नर के वादे के बावजूद भी जगजीत को उन्हें नहीं सौंपा गया। इस बीच मोहम्मद हसन के रिश्तेदारों ने गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर हमला भी किया।

12 अगस्त को आया लाहौर हाईकोर्ट का फैसला
लाहौर हाईकोर्ट ने 12 अगस्त को जगजीत मामले पर फैसला सुनाया। फैसले के मुताबिक, जगजीत कौर उर्फ आयशा शेल्टर होम से निकलकर अपने मुस्लिम पति मोहम्मद हसन के साथ जाएंगी। फैसले से निराश पाकिस्तान के सिख समुदाय के लोगों ने अब प्रवासी भारतीयों से मदद की गुहार लगाई है। जगजीत का परिवार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात करते हुए कह रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है। वहीं, इस पूरे मामले पर पाकिस्तान के खालिस्तानी विचारक गोपाल सिंह चावला सामने तक नहीं आए। चावला की चुप्पी बताती है को वो आईएसआई की कठपुतली मात्र बनकर रहे गए हैं।

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