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आज की पॉजिटिव खबर:जयपुर से चेन्नई गईं तो भाषाई दिक्कतें आईं, डॉक्टरी छोड़ मंडला आर्ट बनाना शुरू किया; सालाना कमा रहीं 12 लाख

चेन्नई3 महीने पहलेलेखक: नेहा यादव

2008 का साल था। शादी के बाद जयपुर से चेन्नई शिफ्ट हो गई। यहां आने के बाद लैंग्वेज को लेकर दिक्कतें आने लगीं, जिस वजह से डॉक्टरी की प्रैक्टिस करना कठिन था। साथ ही फैमिली और जॉब, दोनों एक साथ मैनेज करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए मैंने डॉक्टरी छोड़ दी।

राजस्थान के जयपुर की रहने वाली होम्योपैथ डॉक्टर छाया मीणा ये बातें कहती हैं। दरअसल, छाया BHMS करने के बाद होम्योपैथ डॉक्टर की प्रैक्टिस कर रही थीं, लेकिन शादी के बाद जयपुर से चेन्नई शिफ्ट होने के बाद डॉक्टरी करने में उन्हें परेशानी आ रही थी।

डॉक्टरी छोड़ने के बाद छाया अब आर्ट एंड क्राफ्ट में अपना करियर बना रही हैं। इससे वे हर महीने एक लाख से ज्यादा की कमाई कर रही हैं।
डॉक्टरी छोड़ने के बाद छाया अब आर्ट एंड क्राफ्ट में अपना करियर बना रही हैं। इससे वे हर महीने एक लाख से ज्यादा की कमाई कर रही हैं।

अब डॉक्टरी छोड़कर छाया आर्ट एंड क्राफ्ट में अपना करियर बना रही हैं और लाखों की कमाई कर रही हैं। दरअसल, लगातार होम डेकोर यानी आर्ट एंड कल्चर से जुड़ी चीजों की मांग मार्केट में बढ़ रही है। छाया मंडला आर्ट के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं। मंडला आर्ट सबसे पुराने आर्ट्स फॉर्म्स में से एक है।

‘ART_O_ WALLS’ नाम से चला रही बिजनेस

डॉक्टरी छोड़ने के बाद छाया मीणा ‘ART_O_ WALLS’ नाम से अपना बिजनेस चला रही हैं। इसके जरिए वे खूबसूरत मंडला पेंटिंग की दुनियाभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग कर रही हैं।

छाया इसके अलावा रेजिन आर्ट, ज्वेल मंडला आर्ट, बीच इस्केप, लिप्पन, पिचाई, वर्ली और फ्यूजन आर्ट भी बनाती हैं। वो ट्रेडिशनल मंडला आर्ट को नई टेक्नीक के साथ बना रही हैं। छाया अपने बिजनेस से हर महीने लगभग एक से 1.5 लाख रुपए की कमाई कर रही हैं।

छाया बताती हैं, घर पर खाली बैठना पसंद नहीं था, इसलिए 2009 में आर्ट एंड क्राफ्ट पर काम करना शुरू किया।
छाया बताती हैं, घर पर खाली बैठना पसंद नहीं था, इसलिए 2009 में आर्ट एंड क्राफ्ट पर काम करना शुरू किया।

साल 2009 में की आर्ट बनाने की शुरुआत
छाया बताती हैं, घर पर खाली बैठना पसंद नहीं था, इसलिए मैंने 2009 में आर्ट एंड क्राफ्ट पर काम करना शुरू किया। इसके लिए छाया ने काफी रिसर्च और आर्ट प्रैक्टिस की। शुरुआती दिनों के बारे में छाया बताती हैं, मंडला आर्ट बनाकर पहले इसकी मार्केटिंग फैमिली और फ्रेंड्स के बीच करती थी। वो कहती हैं, जब बच्चे हुए तो इस आर्ट को छोड़ना पड़ा।

सोशल मीडिया के जरिए बनाई खास पहचान
बच्चों के बड़े होने के बाद छाया ने एक बार फिर अपने पैशन को फॉलो करने की ठानी और साल 2016 में उन्होंने अपने पैशन को प्रोफेशन में बदला। कोरोना काल में छाया ने इंस्टाग्राम पेज बना कर अपने आर्ट वर्क को शेयर करना शुरू किया। इसकी सोशल मार्केटिंग करनी शुरू की। सोशल मीडिया पर उन्होंने मंडला आर्ट के करीब 20 से 25 ट्युटोरियल वीडियो की सीरीज बनाकर शेयर किया, जिसका बढ़िया रिस्पॉन्स मिलने लगा। अभी छाया के इंस्टाग्राम पर 3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

छाया कहती हैं, जब बच्चे हुए तो इस आर्ट को छोड़ना पड़ा, लेकिन बच्चों के बड़े होने के बाद उन्होंने फिर से साल 2016 में इसे शुरू किया।
छाया कहती हैं, जब बच्चे हुए तो इस आर्ट को छोड़ना पड़ा, लेकिन बच्चों के बड़े होने के बाद उन्होंने फिर से साल 2016 में इसे शुरू किया।

अब छाया लोगों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से मंडला आर्ट बनाने की ट्रेनिंग दे रही हैं। वह मंडला आर्ट बनाने की किट भी लोगों को प्रोवाइड कराती हैं। साथ ही छाया जगह-जगह जाकर वर्कशॉप भी लेती हैं।

छाया ने ज्वेल मंडला नाम से खुद के आर्ट फॉर्म को इन्वेंट किया है। जिसको ट्रेडिशनल मंडला आर्ट की जगह कुंदन, नग और कांच से बनाया जाता है। अब इस आर्ट की काफी डिमांड है। छाया कस्टमाइज आर्ट वर्क भी करती है। उनके आर्ट की अब इतनी मार्केट डिमांड है कि उनके आर्ट वर्क 250 रुपए से लेकर 45 हजार रुपए में बिक रहे हैं।

छाया बताती है, मंडला पेंटिंग को बनाने में कम-से-कम 20 से 30 घंटे का समय लगता है।
छाया बताती है, मंडला पेंटिंग को बनाने में कम-से-कम 20 से 30 घंटे का समय लगता है।

दिलचस्प है कि मार्केटिंग से लेकर मैनेजमेंट, प्रोडक्शन और डिलीवरी का सारा काम छाया खुद ही करती हैं। इसमें परिवार उनका पूरा साथ देता है। छाया बताती है, मंडला पेंटिंग को बनाने में कम-से-कम 20 से 30 घंटे का समय लगता है।

जानिए मंडला आर्ट के बारे में
मंडला आर्ट को लेकर छाया कहती हैं , ये कला बहुत ही पुरानी है और सदियों से लोग मंडला बनाते आए हैं। मंडला शब्द संस्कृत से लिया गया है और इसका अर्थ है “चक्र”। यह एक डिजाइन या पैटर्न है। दावा किया जाता है कि मंडला आर्ट की उत्पत्ति आज से 3000 साल पहले हिंदू और बाद में बौद्ध धर्म में हुई थी।

दावा किया जाता है कि मंडला आर्ट की उत्पत्ति आज से 3000 साल पहले हिंदू और बाद में बौद्ध धर्म में हुई थी।
दावा किया जाता है कि मंडला आर्ट की उत्पत्ति आज से 3000 साल पहले हिंदू और बाद में बौद्ध धर्म में हुई थी।

दरअसल, मंडला का डिजाइन एक तरह से ब्रह्माण्ड को दर्शाता है। जिस तरह ब्रह्माण्ड अपने में सभी वस्तुओं को समा लेता है, उसी तरह मंडल में चिन्हित सभी आकर उसके केंद्र में समा जाते हैं।