मैं 1947 का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं- छठी कड़ी:हरीश भिमानी की आवाज में सुनिए, बंटवारे के खंजर ने किस तरह मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री के टुकड़े किए

6 दिन पहले

मैं 1947 का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं। जनवरी से 15 अगस्त 1947 के बीच हिन्दुस्तान में जो भी हुआ, वह इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। 15 कहानियों की इस सीरीज की छठी कड़ी में आज जानिए, बंटवारे का खंजर किस तरह मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री के भी दो टुकड़े कर रहा था...जून तक तो बंटवारे की गूंज मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में भी साफ-साफ सुनाई देने लगी थी। जैसे ही पता लगा कि पंजाब का एक हिस्सा पाकिस्तान में जाने वाला है, तो कई फिल्मी हस्तियां अपनी जमीन की ओर लौटने की बात कह कर पाक के हक में आ गईं। इनमें नूरजहां, साहिर लुधियानवी, बेगम पारा और बिब्बो जैसे दिग्गज कलाकार शामिल थे।

उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने मन बना लिया था कि वे लाहौर में ही रहेंगे। लता मंगेशकर के गुरु उस्ताद अमानत अली खान भेंडी बाजारवाले भी पाकिस्तानी हो गए। हालांकि, बाद में इनमें से कई लोग हिन्दुस्तान लौट आए। मगर इस बीच, 1947 के हिन्दुस्तान का सिनेमा थमा नहीं। इस साल 15 बोलियों में 280 फिल्में बनीं, जो यह बताने के लिए काफी थीं कि कलाएं किसी विभाजन रेखा की मोहताज नहीं होतीं। इधर, विभाजन का प्रस्ताव तैयार करने वाले माउंटबेटेन ने 2 जून को लंदन से लौटते ही एलान कर दिया कि सत्ता का हस्तांतरण जल्द ही होगा।

नेहरू, पटेल, कृपलानी, जिन्ना, लियाकत अली, अब्दुल रब निस्तार और बलदेव सिंह की मौजूदगी में यह घोषणा की गई। 3 जून 1947 को शाम 7 बजे देश के 4 प्रमुख नेताओं (नेहरू, पटेल, बलदेव सिंह, जिन्ना) ने रेडियो पर घोषणा कर दी कि वे हिन्दुस्तान का बंटवारा करने की योजना पर सहमत हैं। ये सुनते ही मेरे बाशिंदों में हाहाकार मच गया। कई उम्मीदें बंधीं, कई टूटीं। गांधीजी हताश थे। जैसे ही माउंटबेटेन को पता लगा कि गांधीजी कांग्रेस से नाता तोड़कर 4 जून की प्रार्थना सभा में उनकी योजना की निंदा करने वाले हैं, तो उन्होंने गांधीजी को वायसराय हाउस में बुला लिया। माउंटबेटेन कामयाब हो गए। गांधीजी चुप हो गए।

4 जून 1947 की शाम को पत्रकारों से बात करते हुए माउंटबेटेन ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख बताई-15 अगस्त 1947। पूरा देश चकित रह गया। लंदन में भारत की आजादी की तारीख घोषित करने का इंतजार कर रहे ब्रिटिश PM एटली भी चौंक गए। किसी ने नहीं सोचा था कि माउंटबेटेन इतनी जल्दी में होंगे। वहीं, बंटवारे के ऐलान से कश्मीर रियासत में उथल-पुथल मच गई। राजा हरि सिंह का झुकाव पाकिस्तान की ओर था, लेकिन यहां की हिंदू, सिख और बौद्ध आबादी हिन्दुस्तान का हिस्सा बने रहना चाहती थी।

कल सुनिए: बंटवारे पर कैसे फूटे विरोध के सुर

सीरीज की पहली कड़ी में जानिए कैसे हिन्दुस्तान से ब्रिटेन तक उथल-पुथल मची थी…सुनने के लिए क्लिक करें

सीरीज की दूसरी कड़ी में जानिए किस तरह जिन्ना की जिद ने देश को बंटवारे के मुहाने पर खड़ा कर दिया…सुनने के लिए क्लिक करें

सीरीज की तीसरी कड़ी में जानिए आजादी से पहले रजवाड़ों और रियासतों में कैसी बेचैनी थी…सुनने के लिए क्लिक करें

सीरीज की चौथी कड़ी में जानिए, किस तरह जिन्ना की जिद ने देश में बंटवारे के बीज बोएं...सुनने के लिए क्लिक करें

सीरीज की पांचवीं कड़ी में जानिए किस तरह बंटवारे के खंजर ने किस तरह मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री के टुकड़े किए...सुनने के लिए क्लिक करें

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