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आज की पॉजिटिव खबर:रूस, सूडान सहित कई मिडिल ईस्ट कंट्री में डिफेंस एडवाइजर रहे; अब भारत के लिए बना रहे हैं काउंटर ड्रोन, जो टेररिज्म और साइबर अटैक पर लगाएगा ब्रेक

नई दिल्ली9 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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देश की पैरामिलिट्री फोर्सेज के लिए साइबर सिक्योरिटी और काउंटर टेररिज्म पर काम करने वाले डॉ. निशाकांत ओझा की देखरेख में काउंटर ड्रोन बनाने का काम शुरू हो चुका है। - Dainik Bhaskar
देश की पैरामिलिट्री फोर्सेज के लिए साइबर सिक्योरिटी और काउंटर टेररिज्म पर काम करने वाले डॉ. निशाकांत ओझा की देखरेख में काउंटर ड्रोन बनाने का काम शुरू हो चुका है।

आने वाले कुछ महीनों में भारत के पास खुद का काउंटर ड्रोन होगा। जो पूरी तरह मेक इन इंडिया के कॉन्सेप्ट पर आधारित होगा। इसके निर्माण का काम शुरू हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत तक पहला ड्रोन बनकर तैयार हो जाएगा। यह मॉडर्न टेक्नोलॉजी बेस्ड होगा, जो दुश्मनों को मार गिराने के साथ-साथ आतंकवाद और साइबर अटैक को रोकने में भी कारगर भूमिका निभाएगा। देश की पैरामिलिट्री फोर्सेज के लिए साइबर सिक्योरिटी और काउंटर टेररिज्म पर काम करने वाले डॉ. निशाकांत ओझा की देखरेख में इसका निर्माण चल रहा है।

निशाकांत इलाहाबाद से ताल्लुक रखते हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई इलाहाबाद में ही हुई। इसके बाद डेनमार्क से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की। वे रूस और सूडान में काम कर चुके हैं। कई मिडिल ईस्ट कंट्री में बतौर सिक्योरिटी एडवाइजर सेवाएं दे चुके हैं। अभी वे ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) में बतौर साइबर और एअरस्पेस सिक्योरिटी एडवाइजर काम कर रहे हैं।

ड्रोन बनाने का आइडिया कैसे मिला?
निशाकांत कहते हैं कि हमारे देश के ज्यादातर डिफेंस इक्विपमेंट्स बाहर से आते हैं। दिन पर दिन हमारी डिपेंडेंसी दूसरे देशों पर बढ़ती जा रही है। जो ड्रोन हम बाहर से खरीदते हैं उसके लिए 200 करोड़ से ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है, जबकि हम इसे अपने देश में 40 से 50 करोड़ में खुद बना सकते हैं। दूसरी बात कि ये ड्रोन एकदम से नए नहीं होते हैं। पुरानी टेक्नोलॉजी ही हमें खरीदनी पड़ती है।

इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी दूसरे देशों पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, क्योंकि जब भी कोई देश किसी दूसरे देश को कोई सॉफ्टवेयर हैंडओवर करता है तो उसका एक्सेस कहीं न कहीं अपने पास रख लेता है। आप चीन का ही उदाहरण ले लीजिए। देश में कई जगहों पर चाइनीज कैमरे लगे हैं। इसके जरिए चीन हमारे यहां की इंफॉर्मेशन लेते रहता है। इस तरह की कई चीजें सामने आ चुकी हैं। हाल ही में मैंने 6 लाख से ज्यादा ऐसे कैमरों के बारे में सरकार को जानकारी दी थी।

निशाकांत कहते हैं कि मैं दूसरे देशों को डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी में हेल्प करता हूं। तो मैं अपने देश के लिए इनिशिएटिव क्यों नहीं ले सकता। यही सोचकर हमने काउंटर ड्रोन पर काम करना शुरू किया।

किस तरह कर रहे हैं ड्रोन बनाने का काम?
निशाकांत कहते हैं कि हम ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के आधार पर काम कर रहे हैं। ऐसे कई छोटे- छोटे देश हैं जिनके पास टेक्नोलॉजी तो है, लेकिन उनके पास रिसोर्सेस नहीं है। इसी तरह देश में कई स्टार्टअप कंपनियां हैं जिनके पास आइडिया है लेकिन फंड नहीं है। हम इन दोनों की मदद ले रहे हैं। जिन देशों से टेक्नोलॉजी लेंगे उन्हें हम उसकी रॉयल्टी प्रोवाइड कराएंगे। हम पूरी तरह मेक इन इंडिया के तर्ज पर काम कर रहे हैं। इसके सभी पार्ट्स और सॉफ्टवेयर भारत में ही बनेंगे।

कब तक बनकर तैयार होगा ड्रोन?
निशाकांत बताते हैं कि कई कंपनियों से हमारा एग्रीमेंट हो गया है। कुछ स्टार्टअप्स ने काम भी शुरू कर दिया है। अभी प्रॉसेस इनिशियल स्टेज में है फिर भी उम्मीद है कि इस साल दिसंबर तक या अगले साल की शुरुआत में पहला ड्रोन बनकर तैयार हो जाएगा। वे कहते हैं कि अभी तो यह हमारा इंडिविजुअल एफर्ट है, लेकिन जब ड्रोन बनकर तैयार होगा तो मैं पूरी टेक्नोलॉजी इंडियन आर्मी को हैंडओवर कर दूंगा।

कैसे काम करेगा काउंटर ड्रोन?
यह ड्रोन पूरी तरह मानव रहित होगा। इसमें रडार इनबिल्ट है। इसकी प्रोग्रामिंग इस तरह से की जाएगी कि ये सेल्फ ऑपरेट भी हो सके और जरूरत पड़ने पर इसे ऑफिस में बैठकर भी कंट्रोल किया जा सके। एक बार चार्ज करने के बाद यह चार से पांच दिनों तक हवा में निगरानी कर सकता है। बैटरी कम होने या जरूरत पड़ने पर इसे वापस भी बुलाया जा सकता है। इसकी स्पीड 440 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी और यह 55 हजार फीट की ऊंचाई तक जाकर काम कर सकेगा। इसके निर्माण में इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि इसके द्वारा कैप्चर किए गए इमेज की क्वालिटी अच्छी हो।

सूडान के पूर्व राजदूत सिराजुद्दीन हामिद यूसुफ और वर्तमान राजदूत अहमद यूसुफ के साथ निशाकांत ओझा।
सूडान के पूर्व राजदूत सिराजुद्दीन हामिद यूसुफ और वर्तमान राजदूत अहमद यूसुफ के साथ निशाकांत ओझा।

आतंकवाद से निपटने में कैसे करेगा मदद?
इस ड्रोन में सेल्फ सुसाइडल बम लगा है। साथ ही यह विपन इंटीग्रेटेड भी है। यानी यह टारगेट को अटैक करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर खुद ब खुद ब्लास्ट भी हो सकता है। कोई दुश्मन देश इसे अपने कब्जे में लेकर जानकारी हासिल नहीं कर सकता है।

सीमा पार से आतंकी गतिविधियों के बारे में इसकी मदद से जानकारी ली जा सकती है। कौन कहां से घुसपैठ की फिराक में है इसकी जानकारी पलक झपकते हमारी सेना को मिल जाएगी। इसके साथ ही नक्सल एरिया में भी इसकी मदद ली जा सकती है।

साइबर अटैक को रोकने में भूमिका
यह काउंटर ड्रोन साइबर अटैक को रोकने में भी अहम भूमिका निभाएगा। निशाकांत के मुताबिक, इसमें इनबिल्ट रडार पड़ोसी दुश्मन देश के सैटेलाइट को जामकर आसपास के एक्टिव डेटा को हैक कर लेगा। अगर कोई देश हम पर साइबर अटैक की कोशिश करेगा तो उसकी इन्फॉर्मेशन ये कमांड सेंटर को भेजेगा।

साइबर अटैक कितनी बड़ी चुनौती और इसे कैसे कंट्रोल कर सकते हैं?
आज के दौर में साइबर अटैक सबसे बड़ी चुनौती है। खासकर के चीन हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है और वह लगातार अटैक भी कर रहा है। हाल ही में इस तरह की चीजें सामने भी आई थीं कि चीन ने हमारे देश में क्लोन डोमेन रजिस्टर करा लिए हैं। और उसके जरिए वह हमारा डेटा कलेक्ट कर रहा है। पिछले साल मुंबई में पावर ग्रिड फेल होने के पीछ भी चीन का नाम आया था। निशाकांत कहते हैं कि साइबर अटैक को कंट्रोल करने के लिए तीन चीजों का होना जरूरी है।

  • साइबर लॉ- यह सबसे अहम पार्ट है। देश में एक मजबूत साइबर लॉ और रिजल्ट ओरिएंटेड पॉलिसी होनी चाहिए। ताकि हम अलग-अलग डेटा को बेहतर तरीके से मॉनिटर कर सकें।
  • साइबर वॉर रूम- यह फिजिकल वॉर रूम की तरह ही होता है। इसमें हम अलग-अलग सोर्सेज से आ रहे डेटा को रीड करते हैं, एनालाइज करते हैं और फिर अटैक करते हैं। दुनिया के कई छोटे-छोटे देशों में साइबर वॉर रूम है, लेकिन हम अपने देश में इसे डेवलप नहीं कर सके हैं। इसको लेकर काम करने की जरूरत है।
  • कैटेगरी वाइड वैन (WAN)- WAN यानी वाइड एरिया नेटवर्क। हमें अलग-अलग सेक्टर्स के लिए अलग-अलग WAN डेवलप करना चाहिए। जैसे सेना के लिए अलग, सरकार के लिए अलग और आम लोगों के लिए अलग।
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