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लॉकडाउन का एक साल:गिलोय घनवटी लेने वाले 94% कोरोना मरीज 10 दिन में निगेटिव हुए; जबकि हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने वालों में निगेटिव आने का आंकड़ा 64% ही रहा

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: विकास वर्मा
  • भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान ने गिलोय घनवटी के कोरोना पर असर को लेकर करीब दो महीनों तक रिसर्च व क्लिनिकल ट्रायल किया
  • 7 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से तैयार आरोग्य कसायन भी रहा फायदेमंद, फरवरी 2021 तक 46 हजार मरीजों को इसकी डोज दी गई

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नेहरू नगर हिल्स पर मौजूद पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान ने गिलोय घनवटी के कोरोना पर असर को लेकर करीब दो महीनों तक रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल किया। रिसर्च में यह सामने आया कि सिर्फ गिलोय घनवटी भी कोविड संक्रमण को खत्म कर सकती है। दरअसल, कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए अक्टूबर 2020 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग की अनुमति दी थी, लेकिन इससे दो महीने पहले ही भोपाल के इस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में जुलाई से सितंबर के बीच रिसर्च की गई।

पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज दिसंबर 2020 तक सरकारी कोविड केयर सेंटर भी था। यहां भर्ती हुए 30 कोविड मरीजों पर हुए पहले क्लिनिकल ट्रायल के दौरान उन्हें 15-15 के दो ग्रुप (ग्रुप-ए और ग्रुप-बी) में बांटा गया। इस दौरान मरीजों का औसत ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 95% था।

ग्रुप-ए के 15 मरीजों को दिन में दाे बार 500-500 एमजी गिलोय घनवटी दी गई। जबकि ग्रुप-बी के मरीजों को पहले दिन 800 एमजी और उसके बाद रोज 400 एमजी हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट यानी एचसीक्यूएस दी गई। इसके अलावा इन मरीजों को कोई और दवा नहीं दी गई। यह रिसर्च कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर गिलोय घनवटी और एचसीक्यूएस के असर को जानने के लिए किया गया।

दवा देने के 10 दिन बाद सभी मरीजों की RT-PCR जांच कराई गई। इसमें गिलोय घनवटी ले रहे 94% और एचसीक्यूएस लेने वाले ग्रुप बी के 64% मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई।

पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक संस्थान के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला का कहना है कि कोरोना के इलाज में आयुर्वेद ज्यादा कारगर साबित हुआ है।
पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक संस्थान के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला का कहना है कि कोरोना के इलाज में आयुर्वेद ज्यादा कारगर साबित हुआ है।

10 दिनों में अपनी ही प्रतिरोधक प्रणाली का शिकार होने की संभावना आधी हुई

कॉलेज के प्राचार्य और क्लीनिकल ट्रायल प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. उमेश शुक्ला ने यह रिपोर्ट सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) को भेजी है। इस साल यह रिसर्च पेपर इंटरनेशनल जर्नल में भी पब्लिश हुआ।

डॉ. उमेश शुक्ला बताते हैं, ‘कोविड मरीजों में संक्रमण बढ़ने के कारण आईएल- 6 का लेवल बढ़ जाता है। इससे मरीज के फेंफड़ों में साइटोकाइन स्टॉर्म की स्थिति बनती है। यानी एक ऐसी स्थिति जब शरीर का रक्षा प्रणाली कोरोना वायरस की जगह अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं और टिशू को मारने लगती है। गिलोय घनवटी का इलाज ले रहे ग्रुप के मरीजों में आईएल- 6 का औसत लेवल 6.50 था। जो 10 दिन बाद घटकर 3.15 हुआ। यानी अपनी ही प्रतिरोधक प्रणाली का शिकार होने की संभावना आधी हो गई। वहीं, एचसीक्यूएस की तुलना में गिलोय घनवटी लेने वाले कोविड मरीज पहले नेगेटिव आए और किसी भी मरीज में कोई साइड इफेक्ट नहीं मिला।

हाई सस्पेक्ट और कॉन्टैक्ट केसेज वाले मरीजों को दिया गया ‘आरोग्य कसायन’

प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला बताते हैं, ‘पिछले साल जब कोरोना की शुरुआत हुई तो जीवन अमृत योजना के तहत आयुष विभाग ने पूरे प्रदेश में काढ़ा बांटा। हमारे संस्थान ने भोपाल में 1.60 लाख लोगों को यह काढ़ा दिया। कोरोना के खिलाफ इस मिशन में हमारे डॉक्टर, पीजी स्कॉलर, इंटर्न और पैरामेडिकल स्टाफ ने प्रशासन के साथ मिलकर न केवल दवाएं बांटी बल्कि कोरोना जांच में भी अहम भूमिका निभाई।’

डॉ. शुक्ला बताते हैं, ‘सरकार के निर्देश पर एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई गई, जिसने रिकमंडेशन दी कि कोरोना मरीजों को आयुर्वेदिक दवाएं भी दी जाएं। कोविड के हाई सस्पेक्ट (यानी जिनमें किसी कोरोना मरीज के करीब होने के चलते पॉजिटिव आने की संभावना बहुत ज्यादा होती है) और कॉन्टैक्ट केसेज (यानी ऐसे लोग जो कभी न कभी कोरोना मरीजों के संपर्क में रहे थे) पर प्रदेश भर में आरोग्य कसायन का प्रयोग किया गया।

46 हजार मरीजों को दिया गया आरोग्य कसायन काढ़ा

हाई सस्पेक्ट और कॉन्टैक्ट केसेज को सात आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से तैयार इस काढ़े की दो डोज दी गईं। कुल 20 ग्राम की एक डोज में 4 ग्राम गुडुची यानी गिलोय, 4 ग्राम शुंथी, 3 ग्राम भूमिआमला, 2 ग्राम यशथीमाधु, 2 ग्राम हरीकती, 2 ग्राम पिप्पली, 3 ग्राम मरीचा होती है। इन बूटियों को 400 ग्राम पानी में 200 ग्राम रह जाने तक उबाला जाता है। इनमें स्वाद अनुसार गुड़ भी मिलाया जा सकता है। फरवरी 2021 तक 46 हजार मरीज को आरोग्य कसायन दिया जा चुका है।’

किसी भी मरीज में नहीं दिखा कोई साइड-इफेक्ट

डॉ. शुक्ला बताते हैं, ‘हमारे संस्थान में 612 कोविड पॉजिटिव मरीजों को भर्ती किया गया, यह सभी निगेटिव होकर अपने घर गए। बाद में हमने फीडबैक फॉर्म से कुछ जानकारी ली, जिसमें पता चला कि हमारे यहां से डिस्चार्ज मरीजों को कोई भी रिवर्स रिएक्शन या कोई भी साइड-इफेक्ट नजर नहीं आया।

दिसंबर 2020 में यहां का कोविड केयर सेंटर बंद कर दिया गया था। हालांकि जरूरत पड़ने पर शासन के आदेश पर इसे दोबारा शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा यहां फीवर क्लीनिक और वैक्सीनेशन सेंटर भी बना हुआ है।’

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