ममता पर हमला बंगाल चुनाव में मुद्दा बना:ममता को हमलों का हमेशा राजनीतिक फायदा हुआ, लेकिन पहले के हमलों के वक्त वे विपक्ष में थीं, इस बार सरकार में हैं

नंदीग्राम10 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी
इस बार ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा ने यहां से शुभेंदु अधिकारी को टिकट दिया है, जो कभी ममता के करीबी थे।

16 अगस्त 1990 को CPI (M) के कार्यकर्ता लालू आलम ने ममता बनर्जी पर जानलेवा हमला किया था। तब वे यूथ कांग्रेस की लीडर थीं। उस घटना के बाद ममता कांग्रेस की फायर ब्रांड नेता के रूप में उभरीं। फिर 1993 में तत्कालीन CM ज्योति बसु के सामने ही ममता को राइटर्स बिल्डिंग के सामने घसीटकर बाहर कर दिया गया था। इससे फिर वे हर जगह चर्चा में आ गईं। 2006-07 में नंदीग्राम-सिंगूर आंदोलन के वक्त भी ममता पर हमलों की कोशिश हुई। जिसका नतीजा ये रहा कि वे 2011 में सरकार में आ गईं।

अब ममता एक बार फिर चोटिल हो गईं हैं और उन्होंने कहा है कि वे व्हीलचेयर से ही प्रचार करेंगी। पहले की घटनाएं देखें तो लगता है कि जब-जब ममता पर अटैक हुआ, तब-तब उन्हें फायदा हुआ, लेकिन पहले और अभी के हमले में सबसे बड़ा अंतर ये है कि पहले जब हमले हुए तब वे विपक्ष में थीं और इस बार सरकार में हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चार लोगों ने उन्हें जबरन धक्का दिया, जिसकी वजह से वे चोटिल हुईं।

TMC ने कहा, एक अकेली महिला पर सब हमला कर रहे

नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी बुधवार को चोटिल हो गईं। ममता ने कहा था कि कुछ लोगों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे उन्हें चोट लगी।
नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी बुधवार को चोटिल हो गईं। ममता ने कहा था कि कुछ लोगों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे उन्हें चोट लगी।

इस घटना के बाद गुरुवार को दिनभर TMC के नेता यह कहते नजर आए कि एक अकेली महिला पर सब मिलकर हमला कर रहे हैं। वे अकेली सब से लड़ रही हैं। नंदीग्राम, आसनसोल समेत तमाम जगहों पर समर्थकों ने हमले के विरोध में रैलियां भी निकालीं। खेला होबे के नारे लगाए। कई जगह ममता बनर्जी का वो फोटो भी चस्पा कर दिया गया है, जिसमें वे चोटिल दिख रही हैं और उनका चेहरा सूजा हुआ नजर आ रहा है। उधर, भाजपा आरोप लगा रही है कि ममता झूठ बोलकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही हैं।

गुरुवार को नंदीग्राम में एक ओर जहां BJP के शुभेंदु अधिकारी मंदिरों में दर्शन कर रहे थे तो वहीं दूसरी और TMC के समर्थक ममता पर हमले के विरोध में रैली निकाल रहे थे। दोनों के ही काफिलों में भीड़ खूब थी। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार श्यामलेंदु मित्रा कहते हैं, 'ममता बनर्जी पर पहले जो हमले हुए, उसमें और इस हमले में अंतर है। पहले वो विपक्ष में थीं और जो हमले हुए उनके कई गवाह थे, लेकिन इस बार वो सरकार में हैं और जिसे हमला बताया जा रहा है, उसका कोई साक्ष्य नहीं है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का ही कहना है कि यह एक एक्सीडेंट था, न कि हमला। इससे कितनी सहानुभूति मिलेगी, यह तो रिजल्ट ही बताएगा, लेकिन अभी जो वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, उन्हें सब देख रहे हैं।'

मुस्लिमों के वोट भी इस बार बंटते नजर आ रहे हैं

अस्पताल में भर्ती होने के बाद ममता की यह तस्वीर सामने आई थी। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर काफी वायरल हो रही है।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद ममता की यह तस्वीर सामने आई थी। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर काफी वायरल हो रही है।

मित्रा कहते हैं 'लेफ्ट के शासन में मुस्लिम तुष्टिकरण की जो राजनीति बंद दरवाजे के पीछे होती थी, ममता ने उसे खोल दिया। उन्होंने खुलकर मुस्लिम कार्ड खेला। उन्हें 2011 और 2016 में इसका फायदा भी मिला। लेकिन उन्होंने मुस्लिमों के लिए कुछ किया नहीं। इसी कारण इस बार मुस्लिमों की एक अलग ही पार्टी राज्य में खड़ी हो गई है और ढेरों मुस्लिम उससे जुड़ गए हैं। ममता को भी इसका अंदाजा है। भाजपा को चुनौती देने के लिए वे खुलकर हिंदू कार्ड खेल रही हैं। इसी बीच ये घटना हुई है। हॉस्पिटल से उन्होंने वीडियो भी जारी किया है। जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया तो उनकी टीम के लोगों ने बाकायदा फोटो, वीडियो सब बनाए।'

BJP नेता अर्जुन सिंह इस पूरे वाकये पर कहते हैं, 'सहानुभूति जुटाने के लिए ड्रामा किया जा रहा है। इतना भारी सुरक्षाबल होते हुए हमला कैसे हो सकता है?' वहीं मित्रा कहते हैं, 'शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम से लड़ने के चलते वहां से ममता का जीतना मुश्किल है। वे 15 से 20 हजार वोटों से हार सकती हैं, क्योंकि शुभेंदु काफी ज्यादा पॉपुलर हैं। अब ममता की चोट उन्हें कितना फायदा या नुकसान पहुंचाती है, ये रिजल्ट आने पर ही पता चलेगा।'

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