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अर्पिता के पास सोने के आधा किलो के कंगन:ED को 31 इंश्योरेंस पॉलिसी, 60 बैंक अकाउंट मिले; सोना और पैसा खजाने में जमा

2 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

ममता बनर्जी की पार्टी में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी 31 अगस्त तक जेल में रहेंगे। गुरुवार को हाईकोर्ट ने उनकी कस्टडी 14 दिन बढ़ा दी है। इस दौरान पार्थ चटर्जी के वकील ने कहा कि पार्थ को गंभीर बीमारियां हैं। उनका हीमोग्लोबिन कम हो गया है। वे कोलकाता में ही रहते हैं, इसलिए उनके फरार होने की आशंका नहीं है। कोर्ट ने तमाम दलीलें खारिज कर पार्थ को जमानत नहीं दी।

ये तो हुई कस्टडी पर सुनवाई की बात। अब इसका सबसे दिलचस्प हिस्सा जान लीजिए। ED ने कोर्ट में बताया कि केस दर्ज होने के बाद पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापे मारे गए। पता चला कि अर्पिता के नाम से कई अचल संपत्तियां हैं। पहले दिन 23 जुलाई को उनके फ्लैट से 21 करोड़ 90 लाख रुपए मिले।

दोनों से पूछताछ के बाद 27 जुलाई को दोबारा छापा मारा गया। इस बार अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया वाले फ्लैट से 27 करोड़ 90 लाख रुपए मिले। इसी फ्लैट से लगभग 5 करोड़ का सोना बरामद हुआ। ये बिस्किट और गहनों में था। यहां मिले हर कंगन का वजन 500 ग्राम तक है। इसके अलावा सोने के पेन भी मिले।

60 से ज्यादा बैंक अकाउंट, 31 इंश्योरेंस पॉलिसी
अर्पिता के नाम से 31 इंश्योरेंस पॉलिसी मिली हैं। इनके नॉमिनी में पार्थ चटर्जी का नाम है। 60 से ज्यादा बैंक अकाउंट भी हैं, जिनमें करोड़ों रुपए जमा किए गए। ये रुपए फर्जी कंपनियां बनाकर ट्रांसफर किए गए थे। सभी कंपनियां कागजों में तो हैं, जमीन पर नहीं। इनकी भी जांच चल रही है।

पार्थ और अर्पिता के नाम से एक पार्टनरशिप डीड है, जो 1 नवंबर 2012 की है। ED जांच कर रही है कि क्या ट्रस्ट के जरिए भी कोई घपला किया गया है। ED का कहना है कि पार्थ चटर्जी प्रभावशाली व्यक्ति हैं, विधायक हैं। वे गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

70 साल के पार्थ चटर्जी को 23 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। वे बीते 27 दिन से हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि पार्थ के कस्टडी में रहते हुए ही करोड़ों रुपए, सोना, ज्वेलरी, प्रॉपर्टी, बैंक अकाउंट रिकवर और सीज किए गए। अभी उन्हें जमानत देने की कोई वजह नहीं बनती। ED के वकील फिरोज इडुल्जी और अनामिका पांडे ने बताया कि दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 31 अगस्त तक पार्थ और अर्पिता की कस्टडी दे दी।

रिश्वत लेकर टीचर रिक्रूट किए
छापेमारी में रिश्वत लेकर टीचर्स का रिक्रूटमेंट करने के सबूत मिले हैं। असिस्टेंट टीचर्स के साथ प्राइमरी टीचर्स की भर्ती में भी पैसों के लेनदेन का पता चला है। इसमें पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी न सिर्फ शामिल रहे, बल्कि उन्होंने पूरी मदद भी की।

कई ऐसे डॉक्युमेंट्स भी मिले, जो मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करते हैं। अर्पिता के नाम से अनंता टैक्सफेब प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी था।

कैश और सोना RBI के खजाने में जमा
पार्थ और अर्पिता के पास से मिले 50 करोड़ रुपए और ज्वेलरी को RBI के खजाने में जमा कर दिया गया है। यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो यह सब उन्हें लौटा दिया जाएगा। आरोप सही हुए तो पूरा पैसा सरकार के खजाने में जाएगा। साथ ही दोनों को 7 साल तक की जेल हो सकती है।

अर्पिता मुखर्जी के घर छापे के दौरान 23 जुलाई को 21 करोड़ 90 लाख और 27 जुलाई को 27 करोड़ 90 लाख रुपए मिले थे।
अर्पिता मुखर्जी के घर छापे के दौरान 23 जुलाई को 21 करोड़ 90 लाख और 27 जुलाई को 27 करोड़ 90 लाख रुपए मिले थे।

जांच के लिए ED को छापा मारने का अधिकार
ED, CBI, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को मनी लॉन्ड्रिंग या इनकम टैक्स फ्रॉड में जांच, पूछताछ, छापेमारी करने और प्रॉपर्टी जब्त करने का अधिकार होता है। ये एजेंसियां जब्त पैसे को अपनी कस्टडी में लेती हैं। फिर अदालत के आदेश से या तो पैसा आरोपी को वापस कर दिया जाता है या फिर वह सरकार की संपत्ति बन जाता है।

पूरी प्रक्रिया इतनी आसान नहीं, इसमें कई स्टेप होते हैं
इस बारे में भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से बात की। उन्होंने बताया कि ED, CBI और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को जांच करने का जो अधिकार होता है, उसके दो हिस्से हैं- एक गिरफ्तारी और पूछताछ, दूसरा उससे जुड़े सबूत इकट्ठा करने के लिए छापेमारी।

जांच एजेंसियां अलग-अलग सूचनाओं के आधार पर छापे मारती हैं। इसलिए जरूरी नहीं कि एक आरोपी के यहां एक ही बार छापा मारा जाए।

ED को PMLA के तहत संपत्ति जब्त करने का अधिकार
विराग गुप्ता कहते हैं कि ED को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002, यानी PMLA 2002 के तहत, कस्टम डिपार्टमेंट को कस्टम एक्ट के तहत और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इनकम टैक्स एक्ट के तहत संपत्ति जब्त करने का अधिकार होता है।

जांच एजेंसी जिस कानून के तहत काम करती है, उसी के मुताबिक उसे छापा मारने, जब्त करने और जब्त सामान को मालखाने में जमा करने का अधिकार होता है।

ED जब्त सामान का पंचनामा बनाती है
छापे में कई चीजें बरामद हो सकती हैं- इनमें डॉक्युमेंट, कैश और सोने-चांदी के गहने जैसे कीमती सामान हो सकते हैं।

विराग ने बताया कि छापेमारी में जब्त चीजों का पंचनामा बनता है। इसे जांच एजेंसी का जांच अधिकारी बनाता है। पंचनामे पर दो गवाहों के दस्तखत होते हैं। साथ ही जिसका सामान है, उसके भी साइन होते हैं। पंचनामा बनने के बाद जब्ती का सामान केस प्रॉपर्टी बन जाता है।

अब जानते हैं कि जब्त रुपए, गहने और संपत्ति का क्या होता है?
रुपए: सबसे पहले जब्त किए गए पैसे का पंचनामा बनता है। पंचनामे में जिक्र होता है कि कुल कितने पैसे मिले, कितनी गड्डियां हैं, कितने रुपए के कितने नोट हैं। अगर नोट पर कोई निशान हों या कुछ लिखा हो या लिफाफे में हो तो उसे जांच एजेंसी अपने पास जमा कर लेती है। इसे कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाता है। बाकी पैसा RBI या SBI में केंद्र सरकार के खाते में जमा किया जाता है।

कई बार कुछ पैसा रखने की जरूरत होती है। उसे जांच एजेंसी इंटरनल ऑर्डर से केस की सुनवाई पूरी होने तक अपने पास रखती है।

प्रॉपर्टी: ED के पास PMLA के सेक्शन 5 (1) के तहत संपत्ति को अटैच करने का अधिकार है। अदालत में संपत्ति की जब्ती साबित होने पर इस संपत्ति को PMLA के सेक्शन 9 के तहत सरकार कब्जे में ले लेती है। विराग गुप्ता के मुताबिक जब ED किसी की प्रॉपर्टी अटैच करती है, तो उस पर बोर्ड लगाया जाता है कि इस संपत्ति की खरीद-बिक्री या इस्तेमाल नहीं हो सकता है। कई मामलों में घर और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को अटैच किए जाने पर उनके इस्तेमाल की छूट भी है।

ED 180 दिनों के लिए अटैच कर सकती है प्रॉपर्टी

इस महीने की शुरुआत में ED ने नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली में यंग इंडिया का ऑफिस सील कर दिया था।
इस महीने की शुरुआत में ED ने नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली में यंग इंडिया का ऑफिस सील कर दिया था।

PMLA के तहत ED ज्यादा से ज्यादा 180 दिन यानी 6 महीने के लिए किसी संपत्ति को अटैच कर सकती है। अगर ED अपनी कार्रवाई को अदालत में सही नहीं ठहरा पाती, तो 180 दिन बाद संपत्ति खुद रिलीज हो जाएगी, यानी वह अटैच नहीं रह जाएगी। ED प्रॉपर्टी अटैच करने को अदालत में सही साबित कर देती है तो संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो जाता है। इसके बाद आरोपी को ED की कार्रवाई के खिलाफ बड़ी अदालत में अपील के लिए 45 दिन का वक्त मिलता है।

गहने: जांच एजेंसी सोना-चांदी, गहने और दूसरा कीमती सामान बरामद करती हैं, तो उसका भी पंचनामा बनता है। पंचनामे में इस बात की जानकारी होती है कि सोना, गहने या कीमती सामान कितना है। विराग बताते हैं कि सोने-चांदी के गहने और कीमती सामान जब्त करके सरकारी मालखाने में जमा कराया जाता है।

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