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भास्कर एक्सक्लूसिवशारिक कहता था- हिंदुओं से बात मत करो:मौसी बोलीं- 72 हूरों के लिए आतंकी बना, बहन का स्कूल छुड़वाया

शिमोगा2 महीने पहलेलेखक: आशीष राय

’नमाज, इबादत...अल्लाह-अल्लाह, मेरा अल्लाह है, मेरा तो सब कुछ अल्लाह है। जन्नत में 72 हूरें मिलेंगी, वही मेरी असली दुनिया है। मेकअप नहीं करना, टीवी नहीं देखना, गाने नहीं सुनने, हिंदुओं से बात नहीं करनी है, उनसे तुम्हारा क्या लेना-देना है। खुद गाने सुनता था, फिल्में देखता था, लेकिन घर की औरतों को रोकता था। बहन का स्कूल छुड़वा दिया, उसे कॉलेज नहीं जाने दिया।’’

मंगलुरु ब्लास्ट में अरेस्ट आतंकी शारिक की मौसी ये बताते हुए मायूस हो जाती हैं, आगे कहती हैं- ‘हमें लगता था दीन (धार्मिक) में ज्यादा है, ऐसा करेगा नहीं पता था। हमें तो समाज में सबके साथ रहना है, इसने ऐसा कर दिया है कि हम किसी को मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहे। इस्लाम में किसी की जान लेने की बात कहीं नहीं है, ये गुनाह है। किसी-किसी का सुनकर उसने ये सब किया है।’

शारिक अभी मैसूर के पास मदहल्ली में किराए पर रह रहा था। पुलिस की फोरेंसिक टीम को उसके घर बम बनाने का सामान मिला है।
शारिक अभी मैसूर के पास मदहल्ली में किराए पर रह रहा था। पुलिस की फोरेंसिक टीम को उसके घर बम बनाने का सामान मिला है।

आतंकी शारिक की कहानी कहां से शुरू हुई…
अब आपको शुरू से ये कहानी बताते हैं। 19 नवंबर को कर्नाटक के मंगलुरु में शाम चार बजे एक चलते ऑटो रिक्शा में रखे कुकर में धमाका होता है। इसमें ऑटो ड्राइवर पुरुषोत्तम पुजारी और उसके पीछे बैठा 24 साल का एक युवक गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। दोनों को मंगलुरु के सरकारी हॉस्पिटल पहुंचाया जाता है। जांच टीम को युवक के पास से हुबली के रहने वाले प्रेम राज हटगी का आधार कार्ड बरामद होता है।

थोड़ी और छानबीन हुई तो एक बड़ी साजिश सामने आई। असल में यह आधार कार्ड चोरी का था और जिसने इसे चुराया था वह सितंबर में शिमोगा जिले में हुए धमाके का मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक था। धमाके की जांच NIA कर रही है। जांच एजेंसी ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मोहम्मद शारिक से पूछताछ की इजाजत मांगी है।

पुलिस का दावा है कि मोहम्मद शारिक का टारगेट मंगलुरु का भीड़-भाड़ वाला इलाका था, लेकिन बम ऑटो में ही फट गया। ब्लास्ट की वजह से शारिक 40% तक जल गया।
पुलिस का दावा है कि मोहम्मद शारिक का टारगेट मंगलुरु का भीड़-भाड़ वाला इलाका था, लेकिन बम ऑटो में ही फट गया। ब्लास्ट की वजह से शारिक 40% तक जल गया।

इस घटना के अगले दिन राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सामने आते हैं और कुकर ब्लास्ट को आतंकी साजिश करार देते हैं। ऑटो रिक्शा से बरामद ब्लास्ट हुआ कुकर भी उनके दावे की पुष्टि करता है। इसमें डेटोनेटर, वायर और टाइमर लगे हुए थे।

पड़ताल आगे बढ़ती है और पता चलता है कि शारिक शिमोगा जिले के तिर्थाली कस्बे के शोपूगुड्डे का रहने वाला है। वह मंगलुरु में आतंकी हमला करने जा रहा था। वह ISIS की मदद से देश में खलीफा (शरिया कानून) का शासन स्थापित करने के मिशन में लगा है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे तो यह भी दावा करती हैं कि शारिक ने अपने जैसे 40 और युवाओं को आतंकी हमला करने के लिए ट्रेंड किया था।

शोपूगुड्डे कैसे बनता गया आतंकियों का अड्डा
सुरक्षा एजेंसीज का दावा है कि बाहर से शांत नजर आने वाला शोपूगुड्डे ISIS के एक दो नहीं बल्कि पांच आतंकियों का ठिकाना है। इस गांव में कैसे दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी संगठन घुसपैठ करने में कामयाब रहा, ये जांच एजेंसियों के लिए भी बड़ा सवाल है।

पुलिस को शारिक के घर से दो फर्जी आधार कार्ड, एक फर्जी PAN कार्ड और एक FINO डेबिट कार्ड मिला है। उसने मकान मालिक को बताया था कि वह मोबाइल रिपेयरिंग की ट्रेनिंग लेने शहर में आया है।
पुलिस को शारिक के घर से दो फर्जी आधार कार्ड, एक फर्जी PAN कार्ड और एक FINO डेबिट कार्ड मिला है। उसने मकान मालिक को बताया था कि वह मोबाइल रिपेयरिंग की ट्रेनिंग लेने शहर में आया है।

जब मैं यहां पहुंचा तो ये एक बेहद शांत और छोटा सा सामान्य गांव नजर आता है। मंगलुरु के रास्ते में पड़ने वाले शोपूगुड्डे की दूरी जिला मुख्यालय से तकरीबन 60 किलोमीटर है। यहां 100 से ज्यादा घर हैं। एक घने जंगल को क्रॉस करते हुए मैं शिमोगा से आगे बढ़ा तो रास्ते में कई बार मोबाइल का सिग्नल गायब हो गया।

तकरीबन एक घंटे बाद मैं शिमोगा से शोपूगुड्डे पहुंच गया और शारिक का घर ढूंढने लगा। मुझे मालूम चला कि उसका पुश्तैनी मकान बिक चुका है और परिवार के नाम पर उसकी दो मौसी और एक नानी पास ही रहती हैं। मैं दोनों को खोजते हुए उनके घर पहुंचा और यहां मेरी मुलाकात शारिक की मौसी से हुई।

उडुपी और बेंगलुरु जाकर बदल गया शारिक
शरीक के पिता का तीन महीने पहले इंतकाल हो गया था। उसके बाद से उनके कपड़े की दुकान उसकी मौसी ही संभाल रही हैं। शारिक के आतंकी संगठन में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने बताया कि फरवरी 2020 में शिमोगा की दीवारों पर लश्कर और ISIS के समर्थन में जो नारे और संदेश लिखे गए थे, उसमें शारिक और उसके साथियों का हाथ था। वह अरेस्ट हुआ और बाद में उसके पिता ने किसी तरह जमानत पर उसे बाहर निकलवाया था। उडुपी और बेंगलुरु जाने के बाद वो बदल गया था। जब से लौटा तो नमाज, इबादत और अल्लाह की ही बातें करता था।

शारिक के पिता ने कपड़े की ये दुकान खोली थी, जिसे बाद में उसकी मौसी ने खरीद ली थी। अब वही इसे संभाल रही हैं।
शारिक के पिता ने कपड़े की ये दुकान खोली थी, जिसे बाद में उसकी मौसी ने खरीद ली थी। अब वही इसे संभाल रही हैं।

शारिक कहता था- जल्द ऐसा करने वाला हूं कि जन्नत जाऊंगा
मौसी आगे बताती हैं- शारिक हमेशा इस्लाम, दीन, नमाज और इबादत की बात करता था। पांचों वक्त पाबंदी से नमाज पढ़ता था। पहले उसके बाल छोटे-छोटे थे, फिर उसने दाढ़ी बढ़ाना शुरू कर दिया। जब हम उसे शादी करने के कहते तो वो जवाब देता- ’मैं जल्द ही कुछ ऐसा करने वाला हूं कि जन्नत जाऊंगा और वहां मुझे हूरें (परी) मिलेंगी। वह कहता कि वही मेरी दुनिया है और यहां मेरा कुछ भी नहीं है।’

मैं फिर पूछता हूं कि शारिक जब आपको रोकता था तो क्या करती थीं? वे बताती हैं- ’गोभी मंचूरियन और पानीपूरी खाता तो मैं पूछती थी कि ये हिंदुओं का खाना है, इसे क्यों खाते हो? उनसे बिजनेस चाहिए, लेकिन उनसे बात करने में दिक्कत है? तेरे घर में उन्हीं के पैसों से रोजी-रोटी आती है।’

परिवार मानता है शारिक आतंकी है, पुलिस ने तो उसकी जान बचाई
शारिक की मौसी से मैंने पूछा कि क्या पुलिस ने उसे फंसाया है? जवाब मिला- ’पुलिस ने हमें CCTV फुटेज दिखाई है, उसमें वो नजर आ रहा है। पुलिस चाहती तो उसे वहीं मार देते, उन्होंने तो इसकी जान बचाई है।’

वे आगे बताती हैं- ‘परिवार को पहले ही पता था कि शारिक और ISIS का घोषित आतंकी अब्दुल मतीन एक दूसरे को जानते थे। मुझे यह पता था कि दोनों एक दूसरे के साथ थे, लेकिन क्या कर रहे थे यह नहीं पता था। हम चाहते हैं कि कानून इस मामले में अपने हिसाब से कार्रवाई करे।’ कहते-कहते कुछ उदास हो जाती हैं।

आगे कहती हैं- ’हमें तो समाज में सबके साथ रहना है, इसने ऐसा कर दिया है कि हम किसी को मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहे। इस्लाम में किसी की जान लेने की बात कहीं नहीं है, ये गुनाह है। किसी-किसी का सुनकर उसने ये सब किया है, धर्म को बदनाम कर रहे हैं।’

फोटो में दिख रही हरे रंग की इमारत शारिक का पुश्तैनी मकान है। उसके पिता ने शोपूगुड्डे का ये घर 40 लाख रुपए में बेच दिया था।
फोटो में दिख रही हरे रंग की इमारत शारिक का पुश्तैनी मकान है। उसके पिता ने शोपूगुड्डे का ये घर 40 लाख रुपए में बेच दिया था।

100 मीटर के दायरे में पांचों आतंकियों का घर
इसके बाद मैंने अब्दुल मतीन को लेकर पड़ताल शुरू की और पता चला कि शारिक और मतीन दोनों 50 मीटर की दूरी पर रहते हैं। पुलिस दावा करती है कि शारिक शिमोगा में सितंबर में हुए ब्लास्ट के भगोड़े आतंकी अराफात अली का करीबी भी है।

अराफात भी मतीन के पड़ोस में रहता था और दोनों के बीच अच्छी दोस्ती थी। अराफात, शारिक के संबंध शिमोगा ब्लास्ट में गिरफ्तार माज मुनीर और सैयद यासीन संग थे। यह दोनों भी शारिक के घर से 100 मीटर की दूरी पर रहते थे। माज की गिरफ्तारी के तीसरे दिन उसके पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।

अब्दुल मतीन अभी दुबई में, अल हिंद का एक्टिव मेंबर
NIA मतीन को साल 2019 से तलाश रही है। NIA सूत्रों के मुताबिक वह अभी दुबई में है और ISIS के भारतीय मॉड्यूल ‘अल-हिंद’ का एक्टिव मेंबर है। वह ISIS के आतंकियों के लगातार संपर्क में है।

मतीन पर शारिक और उसके पड़ोस में रहने वाले तीन और लड़कों को उकसाने और आतंकी हमले के लिए फंड मुहैया करवाने का भी आरोप है। जांच एजेंसीज का मानना है कि मतीन अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म से इनके संपर्क में था। मतीन को NIA एक खतरनाक आतंकी मानती है और उसके खिलाफ तीन लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया है।

मंगलुरु ब्लास्ट के बाद मतीन का परिवार घर में कैद
मैं अब्दुल मतीन के घर पहुंचा। यहां मेरी मुलाकात उसके पिता मंजूर अहमद से हुई। 60 साल के मंजूर आर्मी से रिटायर्ड हैं। घर पर एक छोटा भाई भी मिला, जो पिछले 8 दिनों से घर से बाहर नहीं निकला है। मतीन की मां भी घर पर थीं।

मंजूर अहमद ने बताया कि पुलिस 8 दिन पहले पूरे परिवार के मोबाइल फोन ले गई थी और अभी तक वापस नहीं दिए हैं। मंगलुरु वाली घटना के बाद से पूरा परिवार घर में कैद है। पुलिसवालों ने उन्हें कहीं भी आने-जाने से मना किया है। यही वजह है कि दिल के मरीज पिता हॉस्पिटल भी नहीं जा पा रहे हैं।

पिता बोले- मतीन तीन साल पहले ही घर छोड़ चुका
मंजूर अहमद ने बताया अब्दुल मतीन इंजीनियरिंग करने के लिए बेंगलुरु गया था। उसके बाद वह वहीं कुछ प्राइवेट जॉब कर रहा था। ‌BTech पूरा करने से पहले ही एक ब्लास्ट केस में उसका नाम आ गया। अब्दुल कहता था कि शोपूगुड्डे में रहकर मैं क्या करूंगा? वहीं रहकर कोई प्राइवेट जॉब कर लूंगा और अपनी पढ़ाई भी कंप्लीट कर लूंगा।

अब्दुल मतीन के आतंकी होने के सवाल पर उसका बचाव करते हुए पिता ने कहा- ’जैसे ही उसका नाम एक केस में आया, उसके बाद से वह बेहद डरा हुआ था। हमसे भी पिछले 3 साल से छिपकर रहा है। वो अब हमारे भी संपर्क में नहीं हैं। हम भी अपने बच्चे के लिए बेहद परेशान हैं। हकीकत क्या है इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है।’

मां के निधन के बाद बदल गया शारिक
अब्दुल मतीन के घर से हम जैसे ही बाहर निकले हमारी मुलाकात फ्रूट सप्लाई का बिजनेस करने वाले शारिक के पड़ोसी अफसान से हुई। 30 साल के अफसान ने बताया कि शारिक को वे बचपन से देखते आ रहे हैं। वह ऐसा कुछ कर सकता है यह किसी को यकीन नही हो रहा। मां के निधन और पिता को कैंसर होने की जानकारी मिलने के बाद शारिक बदल गया था।

अफसान ने आगे बताया कि हमारा छोटा सा गांव पूरे कर्नाटक में बहुत फेमस था। यहां कई फिल्मों की शूटिंग हुई और यहां से कई प्रोड्यूसर भी हैं। इसके बावजूद अब इसकी पहचान आतंक से हो रही है। आलम यह है कि यहां के लोगों को कोई अपने होटल में भी कमरा किराए पर नही देता है। हमें शक की निगाह से देखा जाता है। मैं अपना बिजनेस नही कर पा रहा हूं। पहले मैं आसपास के पांच गांव में फ्रूट सप्लाई करता था, लेकिन अब वे लोग भी हमसे कतराने लगे हैं।

इसके बाद मेरी मुलाकात शारिक के घर के ठीक सामने रहने वाले राकेश से हुई। राकेश ने बताया कि हम उसके पिता को अच्छी तरह जानते थे, लेकिन वह ऐसी हरकत करेगा, इसकी उम्मीद नहीं थी।

10वीं से 12वीं तक गांव में पढ़े, फिर दूसरे शहरों में चले गए
शारिक के पुश्तैनी मकान के ठीक सामने 10 साल से हार्डवेयर की दुकान चला रहे नौशाद ने बताया कि जिन युवाओं के नाम आतंकी घटनाओं में सामने आए हैं, इन सभी ने यहां 10-12वीं तक पढ़ाई की है।

इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए मंगलुरु, उडुपी और बेंगलुरु चले गए। वहां जाकर वे किसके संपर्क में आए, इस बारे में कहना मुश्किल है। ये सभी लड़के बहुत अच्छे थे और इनका फैमिली बैकग्राउंड भी बहुत अच्छा है। माज पढ़ने में बहुत अच्छा था और टेंशन में उसके पिता को हार्टअटैक आया। बेंगलुरु से लौटने के बाद माज चुप-चुप रहने लगा था।

ISIS जैसे ग्रुप गांव और छोटे शहरों में पैठ बना रहे हैं। इसी पर एक सवाल...

शारिक के घर से मिले थे मंदिरों के नक्शे
मंगलुरु ब्लास्ट के बाद शारिक और उसके पड़ोस में रहने वाले सभी साथियों के घरों पर तिर्थाली पुलिस स्टेशन की चार टीमों ने छापेमारी की थी। इस छापेमारी में क्या बरामदगी हुई इस सवाल का जवाब जानने हम पुलिस स्टेशन पहुंचे तो यहां के इंचार्ज इंस्पेक्टर अस्वथ गौड़ा ने इसे इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा बताते हुए कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

हालांकि, राज्य के ADGP आलोक कुमार ने बताया कि शारिक के घर से मंगलुरु और उसके आसपास के इलाकों में स्थित कई मंदिरों के नक्शे मिले हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने इसके लिए पुख्ता प्लान तैयार कर रखा था।

कुकर में इतना विस्फोटक था कि बस उड़ाई जा सकती थी
शारिक को लेकर केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि शारिक के फोन से संदिग्ध भगोड़े इस्लामिक स्पीकर जाकिर नाइक के कुछ वीडियो भी बरामद हुए हैं। ब्लास्ट के इस केस को कर्नाटक सरकार ने NIA को सौंप दिया है।

मंगलुरु में जो ब्लास्ट हुआ है, उसको लेकर यह भी दावा किया गया कि उसमें प्रतिबंधित संगठन इस्लामिक रिसर्च काउंसिल भी शामिल है। उसने एक लेटर जारी कर इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। राज्य के ADGP आलोक कुमार बताते हैं कि शारिक का इस संस्था संग संबंध है या नहीं यह इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा है।

शुरुआती जांच में यह पता चला है कि कुकर में इतना विस्फोटक था कि उससे एक पूरी बस को उड़ाया जा सकता था। जांच में यह भी सामने आया है कि शारिक ने इस धमाके से पहले कोयंबटूर में हुए धमाकों के आरोपियों से मुलाकात की थी।

कुकर ब्लास्ट के बाद तमिलनाडु में भी कई ठिकानों पर रेड हुई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि शारिक को बिटकॉइन के जरिए पैसे मिले थे। सूत्रों की माने तो वह राज्य में कई हिन्दू मंदिरों समेत एक चिल्ड्रन फेस्टिवल को निशाना बना रहा था।

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17 नवंबर को दिल्ली के बदरपुर में एक पिता ने अपनी बेटी को गोली मार दी। इसके बाद बेटी का शव 150 किलोमीटर दूर मथुरा जिले के राया इलाके में फेंक आया। बेटी आयुषी ने पिता से कह दिया था कि उसने दूसरी जाति के लड़के से शादी कर ली है। वो पेट से भी है। ये सुनकर पिता नीतेश यादव का गुस्सा भड़क गया। पड़ोसियों के मुताबिक, बेटी को मारने के बाद नीतेश शराब पीकर घूमते दिखा था। वह अपने बूढ़े माता-पिता को भी पीटता था।
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