पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कब भारत वापस आएगा PNB घोटाले का आरोपी:डोमिनिका से मेहुल चौकसी को भारत लाना आसान नहीं क्योंकि इस देश के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि भी नहीं है

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
  • कॉपी लिंक

PNB घोटाले का आरोपी मेहुल चौकसी भारत से भागकर एंटीगुआ चला गया। 2017 में उसने नागरिकता भी ले ली, लेकिन जब एंटीगुआ के साथ भारत ने प्रत्यर्पण संधि के नियम से बात आगे बढ़ाई तो वह वहां से भागकर तकरीबन 72,000 लोगों की आबादी वाले एक छोटे से आइसलैंड 'डोमिनिका' चला गया। खबरों के मुताबिक भगोड़ा चौकसी डोमिनिका से भागकर क्यूबा जाने का प्लान बना रहा था,लेकिन इसी बीच डोमिनिका की पुलिस ने उसे धर दबोचा। अब वहां वह जेल में बंद है।

लेकिन, सवाल यह है कि क्या डोमिनिका से उसे वापस भारत लाया जा सकेगा? क्या भारत के कानूनी सिस्टम में कोई बड़ी कमी है? या छानबीन करने वाली एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी है? इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने 'एस्केप्डः ट्रू स्टोरीज ऑफ इंडियन फ्यूजिटिव इन लंदन' के लेखक और लंदन में जर्नलिस्ट दानिश खान से बात की।

दानिश की इस नई किताब में मेहुल चौकसी, विजय माल्या, नीरव मोदी, क्रिकेट बुकी संजीव चावला, म्यूजिक डायरेक्टर नदीम सैफी, उद्योगपति धर्मा जयंती तेजा समेत कई भगोड़े अपराधियों के किस्से दर्ज हैं। आइए जानते हैं हमारे सवालों पर दानिश के जवाब...

आर्थिक अपराध करने के बाद उद्योगपति भारत से 'नौ दो ग्यारह' कैसे हो जाते हैं?
देखिए, ऐसे मामलों की छानबीन करने वाली एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर होना चाहिए। इमिग्रेशन, ईडी, पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी। एक भी एजेंसी का एक अदना-सा मुलाजिम भी अगर चूक करता है तो फिर अपराधी भाग निकलने में सफल होता है। तो कहीं न कहीं एजेंसियों के बीच ठीक से तालमेल न होना इस तरह के मामलों के लिए जिम्मेदार होता है।

गिरफ्तारी के बाद डोमिनिका के जेल से मेहुल की यह तस्वीर सामने आई है। सलाखों के पीछे कैद चौकसी स्काई कलर की टी-शर्ट में दिख रहा है।
गिरफ्तारी के बाद डोमिनिका के जेल से मेहुल की यह तस्वीर सामने आई है। सलाखों के पीछे कैद चौकसी स्काई कलर की टी-शर्ट में दिख रहा है।

इसका एक उदाहरण मैं आपको देता हूं। विदेशी निवेश की जांच के घेरे में आए जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल 25 मई 2019 को मुंबई एयरपोर्ट से लंदन जाने के लिए फ्लाइट में सवार हो गए थे, लेकिन ऐन वक्त पर फ्लाइट में अनाउंसमेंट हुआ। फ्लाइट को रोका गया और नरेश गोयल और उनकी पत्नी को उतारा गया। पर आप सोचिए इस मामले में तो ऐन वक्त पर किसी एजेंसी ने सक्रियता दिखाई।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने भी तुरंत फैसला लिया। हालांकि गोयल और उनकी पत्नी फ्लाइट में सवार तो हो ही गए थे। कुछ मिनट तक और इसका संज्ञान नहीं लिया जाता तो वह भी रवाना हो जाते। फिर यहां की कोर्ट ने भी इतनी बड़ी रकम विदेश जाने के एवज में जमा करने के लिए कही, ताकि वे भाग नहीं पाए। दरअसल, कंपनी के खातों की जांच इन्वेस्टिगेशन एजेंसियां कर रही थीं।

तो मुझे लगता है कि मामले की छानबीन करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। पासपोर्ट अथॉरिटी के पास ऐसे लोगों के पासपोर्ट नंबर होने चाहिए जिनकी छानबीन चल रही है। पासपोर्ट चेक करने वाले विभाग के पास ये नंबर अपडेट होते रहने चाहिए।

क्या मेहुल चौकसी डोमिनिका से भारत आ पाएगा, आखिर पेच क्या हैं?
डोमिनिका के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि नहीं है। तो अब यह इस पर निर्भर करेगा कि इस देश के साथ हमारा मौजूदा तालमेल कैसा है और पहले के संबंध कैसे रहे हैं? अभी तो पेंच ही पेंच हैं। इससे पहले मेहुल चौकसी कई साल एंटीगुआ में रहा। उसने वहां की नागरिकता भी ले रखी थी। ऐसी खबरें कई बार आईं कि बस एंटीगुआ चौकसी को इंडिया को सौंपने ही वाला है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दरअसल, इस तरह के देशों की अपनी सीमाएं हैं। इनकी इकोनाॅमी बड़े-बड़े बिजनेसमैन के इन्वेस्टमेंट से चलती है। अगर कोई बड़ा बिजनेसमैन उनके देश की नागरिकता लेता है तो उनका इसमें हित छिपा होता है। लिहाजा कहीं न कहीं ये देश भी तत्काल ऐसे लोगों को सौंपने से बचते हैं।

हाथ पर चोट के निशान दिखाता मेहुल चौकसी। उसके वकीलों ने दावा किया है कि चौकसी के साथ मारपीट की गई है।
हाथ पर चोट के निशान दिखाता मेहुल चौकसी। उसके वकीलों ने दावा किया है कि चौकसी के साथ मारपीट की गई है।

आप देखिए एंटीगुआ ने डोमनिका से कहा कि आप इन्हें अब हमारे यहां भेजने की जगह सीधे भारत भेजें। जबकि एंटीगुआ से चौकसी को भारत लाना आसान होता क्योंकि वहां से हमारी प्रत्यर्पण संधि है। सब कुछ कैसे होना है यह फिक्स है। अब भारत को डोमिनिका के साथ डील करना होगा। इससे केस डिले होता जाएगा। चौकसी को टाइम मिलेगा तो उसके वकील कोई और रास्ता निकाल लेंगे। अब यह डोमिनिका और भारत के बीच के तालमेल और रिश्तों पर निर्भर करेगा कि वह चौकसी को लेकर क्या फैसला करता है।

आपको क्या लगता है कि भारत में मेहुल चौकसी की कोई मदद कर रहा है?
चौकसी या उनके जैसे अन्य लोगों को भारत लाने के लिए लॉ सिस्टम काम करता है। हर वकील अपनी तरह से कानूनी किताब में लिखी हुई बातों का इंटरप्रिटेशन करता है। रही बात चौकसी की मदद की तो मैं साफ तौर तो कुछ नहीं कह सकता, लेकिन बड़े-बड़े उद्योगपतियों के कनेक्शन तो होते ही हैं। उद्योगपति धर्मा जयंती तेजा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने इंदिरा गांधी को एक बहुत महंगा कोट गिफ्ट किया था। मोरारजी देसाई के बेटे उन्हें खुद एयरपोर्ट तक छोड़ने गए थे।

विजय माल्या ने भी यह कहा कि अरुण जेटली को यह पता था कि मैं निकल रहा हूं। हालांकि अरुण जेटली ने इससे इनकार कर दिया। तो बिना कनेक्शन इतना बड़ा फ्रॉड करके भाग निकलना मुझे नहीं लगता संभव है, लेकिन मेहुल चौकसी की मदद कौन कर रहा है, बिना किसी सटीक प्रमाण के कुछ भी कहना ठीक नहीं।

आपको क्या लगता है, कितना वक्त लगेगा मेहुल चौकसी को भारत लाने में?
मुझे नहीं लगता कि फिलहाल मेहुल चौकसी को भारत लाया जा सकेगा। एंटीगुआ से हम लंबे समय से बात कर रहे थे। भारत की एंटीगुआ के साथ प्रत्यर्पण संधि भी है। चौकसी यहां तकरीबन 3 साल से रह रहा है। प्रत्यर्पण संधि के होते हुए भी एंटीगुआ से चौकसी को भारत लाने में इतना वक्त लग रहा था तो डोमिनिका से चौकसी को भारत लाने में सोचिए कितना वक्त लगेगा। डोमिनिका भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि वाले देशों की सूची में नहीं है। मुझे लगता है कि चौकसी को भारत लाने में अभी कुछ और साल लगेंगे।