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दिल्ली में RSS का नया आर्ट अड्डा:कला-संस्कृति में भी दबदबा बढ़ाने की तैयारी में संघ, छोटे से केबिन में चलने वाला संस्कार भारती का कला केंद्र चार मंजिला इमारत में बदला

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: रवि यादव
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केंद्र में भाजपा सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में है और लगभग पूरे देश में इसने अपना राजनीतिक प्रभाव कायम कर लिया है, लेकिन अब संघ देश के बौद्धिक और कला जगत में भी अपना दखल बढ़ाने की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली के दीनदयाल मार्ग पर भाजपा के आलीशान ऑफिस के बाद, संस्कार भारती की चार मंजिला नई बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है। यह इमारत संस्कार भारती के कला केंद्र की है। संस्कार भारती से जुड़े एक पदाधिकारी बताते हैं कि दो साल के लगातार काम के बाद यह इमारत अब कला प्रेमियों के इंतजार में है। इस इमारत की संघ परिवार के लिए कितनी अहमियत है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि इसका उद्घाटन खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया।

कुछ दिनों पहले तक संस्कार भारती का यह कला केंद्र एक छोटे से केबिन में चला करता था, लेकिन अब इसकी शानदार इमारत है और यह दिल्ली के कई कला केंद्रों से बेहतर हो चुका है। पांच करोड़ की लागत से बने इस भवन को संस्कृति केंद्र के लिए केंद्र के संस्कृति मंत्रालय से पांच करोड़ का अनुदान मिला है। इमारत की लागत पांच करोड़ बताई जा रही है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे कहीं ज्यादा रकम इसके बनने में लगी है।

इंटलेक्चुअल और कल्चर से जुड़े लोगों को अपनी तरफ करने की कोशिश

संस्कार भारती के नए परिसर का उद्घाटन करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत।
संस्कार भारती के नए परिसर का उद्घाटन करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत।

इमारत के बेसमेंट में एक मॉडर्न पार्किंग है। ग्राउंड और पहले फ्लोर को साउंड प्रूफ बनाया गया है ताकि यहां होने वाले प्रोग्राम्स में कोई अड़चन न पड़े। कला केंद्र की नई इमारत में शास्त्रीय संगीत और नृत्य से जुड़े दस्तावेजों का एक शानदार म्यूजियम भी बनवाया गया है। एक संस्कृति कर्मी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि अब यह सेंटर दिल्ली के कला जगत के लिए नया आकर्षण होगा और संघ इसके जरिए इंटलेक्चुअल और कल्चर से जुड़े लोगों को अपनी ओर खींचेगा।

संस्कार भारती से जुड़े एक रंगकर्मी कहते हैं कि 'आर्ट और कल्चर की सभी संस्थाओं पर लेफ्ट ने कब्जा जमा रखा है, अगर आप उनकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं तो उन इदारों में आपको जगह नहीं मिलती है। ऐसे में यह कला संकुल उन लोगों को मौका देगा जो वामपंथी दबदबे के कारण उपेक्षित रह जाते हैं।

संस्कार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री अमीरचंद भी इससे इनकार नहीं करते हैं। वे कहते हैं, ' देश के सामने सांस्कृतिक चुनौतियां खड़ी की जा रही हैं। इसलिए ऐसे केंद्र-संस्थान बहुत जरूरी हैं।' अमीरचंद आगे कहते हैं, 'पिछले 36 साल से शास्त्रीय नृत्य, संगीत व साहित्य, नाटक और चित्रकला से जुड़े देश भर के कलाकारों को हम मंच प्रदान करते आ रहे है। संस्कार भारती की देश भर में 2000 से अधिक शाखाएं हैं। जो कला से जुड़ी सभी जानकारियों व संस्थाओं को कलाकारों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।'

कांग्रेस सरकार ने आवंटन रद्द कर दिया था

संस्कार भारती के नए परिसर के उद्घाटन के मौके पर मोहन भागवत के साथ नए सरकार्यवाह दतात्रेय होसाबाले।
संस्कार भारती के नए परिसर के उद्घाटन के मौके पर मोहन भागवत के साथ नए सरकार्यवाह दतात्रेय होसाबाले।

कुछ लोग कला संकुल के लिए जमीन और अनुदान से जुड़े सवालों को भी उठाते हैं। दरअसल, कला संकुल के लिए आवंटित जमीन का मामला खासे राजनीतिक दांव-पेच में भी उलझा रहा है। 2003 की वाजपेयी सरकार के समय संस्कार भारती को यह जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन 2004 में कांग्रेस सरकार के आते ही यह आवंटन रद्द कर दिया गया। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक कोर्ट में अटका रहा। बाद में 2014 में भाजपा सरकार के आने के बाद यह जमीन संस्कार भारती को मिली, लेकिन इसके लिए उसे शहरी विकास मंत्रालय को 2014 के रेट के हिसाब से 22 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ा।

भाजपा के जरिये लगातार अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ा रहे संघ की चिंता हमेशा बौद्धिक-सांस्कृतिक जगत में अपनी स्वीकार्यता की रही है। इसके लिए संघ परिवार की ओर से लगातार कोशिशें की जा रही हैं। जाने-माने फिल्म अभिनेता परेश रावल और प्रसिद्ध नृत्यांगना सोनल मान सिंह को संस्कार भारती से जोड़ा गया है ताकि युवा कलाकारों को वे संस्था से जोड़ सकें।

संस्कार भारती आर्ट-कल्चर को बढ़ाने की बात करती है, लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात कहती हैं, 'RSS का पूरा कल्चर ही भारतीय संविधान के खिलाफ है। उनकी विचारधारा सबसे भिन्न है, वे कभी भी कला-संस्कृति को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।' वृंदा यह आरोप भी लगाती हैं कि संस्कार भारती की इमारत के लिए जमीन का आवंटन गलत तरीके से किया गया है। वे संस्कृति मंत्रालय द्वारा संस्कार भारती को दिए गए पांच करोड़ के अनुदान को भी गलत बताती हैं। आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन संस्कार भारती की इस नई इमारत के बहाने अब कला के इदारों में संघ के प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों की चर्चा गर्म है।

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