पॉजिटिव स्टोरीभांग से बनाता हूं पिज्जा-बर्गर:कैंसर से पापा की मौत हुई तो रिसर्च के दौरान आइडिया मिला, 25 लाख टर्नओवर

2 महीने पहलेलेखक: नीरज झा

भांग… ये पढ़ने-सुनने-देखने के बाद सबसे पहले आपके दिमाग में क्या आता है? भांग, मतलब नशा। खा लिया तो, होशो-हवास खो बैठेंगे। किसी ने देख लिया, तो कानूनी पंगा। बचपन से आपको यही पता होगा कि ये जानलेवा भी है! है न…?

जानलेवा है भी, लेकिन मैं यदि आपको कहूं कि भांग से पिज्जा, बर्गर, पास्ता जैसे फास्ट फूड बनते हैं, इसमें तनिक भी नशा नहीं होता और यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। इससे लाखों का कारोबार हो रहा है। फिर…

चौक गए न आप!

इसी पूरे प्रोसेस को जानने के लिए मैं मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके स्थित ‘द हैंप फैक्ट्री’ पहुंचा। भांग को अंग्रेजी में हैंप कहते हैं।

अपने क्लाउड किचन में ‘द हैंप फैक्ट्री’ के को-फाउंडर धवल पंचाल 3 स्टाफ के साथ भांग के आटे (भांग का पाउडर) से पिज्जा बना रहे हैं। जिस तरह हम ब्रेड या रोटी बनाने के लिए आटे को गूंथते हैं, उसी तरह से धवल की टीम भांग के आटे को गूंथ रही है।

धवल का स्टाफ पिज्जा बनाने में इस्तेमाल होने वाले इंग्रेडिएंट्स को तैयार कर रहा है।
धवल का स्टाफ पिज्जा बनाने में इस्तेमाल होने वाले इंग्रेडिएंट्स को तैयार कर रहा है।

धवल कहते हैं, “इसमें 60% मैदा और 40% भांग का आटा है। यदि हम 100% भांग का आटा यूज करेंगे, तो यह नीम के पत्ता से भी ज्यादा कड़वा हो जाए।”

लेकिन इसमें तो नशा होता होगा न?

मेरा पहला सवाल यही होता है।

धवल मुस्कुराने लगते हैं। कहते हैं, “अभी बन ही रहा है, आपको टेस्ट कराते हैं। लोगों को यही पता है कि पूरे भांग के पेड़ में नशा होता है, लेकिन नशा सिर्फ भांग की पत्ती और फूल में होता है। भांग का आटा इसके सीड यानी बीज से तैयार होता है, जिसमें नशा बिल्कुल नहीं है।”

धवल की टीम पिज्जा बनाने के आगे के प्रोसेस को करने में लग जाती है और धवल मेरे साथ अपने पुराने दिनों में लौटते हैं।

वो कहते हैं, “2014 की बात है, पापा कैंसर से जूझ रहे थे। आज भी हमारे यहां कैंसर के लिए सिर्फ दो ही इलाज है, एक कीमोथेरेपी और दूसरा रेडिएशन थेरेपी। इंटरनेट पर रिसर्च करना शुरू किया कि कैंसर का और क्या दूसरा इलाज है।

ये धवल की फैमिली फोटो है। इसमें वो अपनी मम्मी, पापा और भाई के साथ हैं।
ये धवल की फैमिली फोटो है। इसमें वो अपनी मम्मी, पापा और भाई के साथ हैं।

इसी दौरान कैनाबिस ऑयल (भांग के ऑयल) के बारे में पता चला, जिसका कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होता है। इंडिया में वैसे ये गैर-कानूनी है। हालांकि मेडिकली इस्तेमाल करने की अनुमति है।

फेसबुक पर एक पोस्ट में दिखा कि कैनाबिस ऑयल के इस्तेमाल से एक व्यक्ति ने अपनी बहन को ब्रेस्ट कैंसर से बचा लिया। मैंने भी उस व्यक्ति से कॉन्टैक्ट किया। कहावत है न- मरता क्या नहीं करता। 3 महीने बाद उस व्यक्ति का रिप्लाई आया। पापा के इलाज के लिए ऑयल खरीदा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पापा इस दुनिया में नहीं रहे।

उसके बाद मुझे लगा कि भांग से रिलेटेड प्रोडक्ट पर काम करने की जरूरत है। मैंने उस व्यक्ति के साथ काम करना शुरू किया। फिर 2016-17 में मुंबई स्थित ‘बॉम्बे हैंप’ कंपनी जॉइन कर लिया। यह कंपनी भांग से रिलेटेड मेडिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। करीब 4 साल काम करने के दौरान कई मेडिकल कैनाबिस प्रोडक्ट्स बनाए, लेकिन भांग से खाने-पीने की चीज बनाने वाली कोई कंपनी मार्केट में नहीं थी।”

हमारी बातचीत के बीच ही धवल के स्टाफ भांग के आटे से बना पिज्जा लेकर आते हैं। खाने में यह डोमिनोज, पिज्जा हट जैसा ही लगता है।

धवल कहते हैं, “जो पिज्जा हम नॉर्मल खाते हैं, उसका ब्रेड मैदा से बना होता है और यह हेल्थ के लिए कितना खतरनाक है, हम सभी को पता है, लेकिन लोग फास्ट फूड खाना पसंद करते हैं, यही देखकर मैंने एक ऑप्शन के रूप में भांग से बना फास्ट फूड मार्केट में लॉन्च किया।

भांग के आटे में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड यानी ओमेगा-2,3, 6 के अलावा प्रोटीन, कैनाबिनोइड, विटामिन-ई समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।”

तो भांग इंडिया में लीगल है?

धवल भांग के आटे का बॉक्स खोलकर दिखाते हैं। कहते हैं, “आपने अभी इससे बना पिज्जा खाया, कोई नशा महसूस हुआ क्या? नहीं न… 2021 में फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने भांग के सीड से बने फूड प्रोडक्ट्स को लीगल कर दिया, क्योंकि इसमें नशा नहीं होता है। ये हेल्दी है। हमने अपॉर्चुनिटी को देखकर क्लाउड किचन शुरू किया है।”

आपने इन सारी चीजों को बनाना सीखा कैसे?

मेरे इस सवाल पर धवल की ओर उनके बाकी स्टाफ देखने लगते हैं। उनमें से एक स्टाफ बोल पड़ता है, हम लोग अभी भी इन्हें सिखा रहे हैं।

धवल के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ जाती है। वो कहते हैं- इवेंट मैनेजमेंट में डिप्लोमा करने के बाद 'बॉम्बे हैंप' कंपनी में काम करने से भांग की बुआई से लेकर कटाई और फिर उसके आगे के इस्तेमाल को लेकर पूरी जानकारी हो गई थी।

सबसे ज्यादा इसकी खेती उत्तराखंड में होती है। अब मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी इसकी खेती को लीगल करने की तैयारी है।

ये भांग के आटे से बना हुआ पिज्जा, चॉकलेट और सेक है।
ये भांग के आटे से बना हुआ पिज्जा, चॉकलेट और सेक है।

धवल बताते हैं, एक दोस्त फाइव स्टार होटल में शेफ है। उससे जब मैंने आइडिया शेयर किया, तो उसे भी काफी पसंद और यूनीक लगा। मैंने उसे भांग से रिलेटेड रॉ मटेरियल दिया और उसने अपने किचन में इसका प्रयोग करना शुरू किया।

करीब 6 महीने के बाद उसने एक रेसिपी तैयार करके मुझे दी, जिसमें अलग-अलग फास्ट फूड के लिए भांग के आटे और सीड की क्वांटिटी के बारे में लिखा हुआ था। फिर मैंने अपने दूसरे दोस्त और पत्नी के साथ मिलकर कंपनी की शुरुआत की।

जो स्टाफ दूसरी जगहों पर काम कर रहे थे, उन्हें लाइन-अप किया और उन्हें एक महीने की ट्रेनिंग दी। इसमें ज्यादा कुछ नहीं है, जैसे हम नॉर्मल फास्ट फूड तैयार करते हैं, वैसे ही इसे भी। बस मैदा की जगह भांग का आटा होता है। टेस्ट के लिए बारीक कटे हुए सीड का ऊपर से इस्तेमाल करते हैं।

जैसे ये बर्गर देखिए। ये आपको हल्का काला दिख रहा होगा। इसमें भांग का आटा मिला हुआ है, मैदा का परसेंटेज कम है। ये प्रोसेस हम अपने किचन में ही करते हैं।

बातचीत के बीच ही धवल थोड़े मायूस हो जाते हैं। बताते हैं, पापा के गुजर जाने के बाद घर की स्थिति खराब हो गई थी। जैसे-तैसे काम करना शुरू किया, लेकिन तब तक मुझे भांग रिलेटेड प्रोडक्ट के बिजनेस में इंटरेस्ट आ चुका था।

इसमें पत्नी और एक दोस्त का सबसे ज्यादा सपोर्ट रहा। इसीलिए हम तीनों ने मिलकर बिजनेस को शुरू किया। कम पैसों की वजह से शुरुआत क्लाउड किचन के साथ किया, क्योंकि ऑफलाइन आउटलेट के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत थी।

धवल के काउंटर पर टेलीफोन की घंटी जैसी एक आवाज बजनी शुरू होती है। पूछने पर वो कहते हैं, ऑर्डर आया है। इसका टाइम लिमिट होता है, इसी में हमें इसे एक्सेप्ट और फिर प्रिपरेशन शुरू कर देना पड़ता है।

अभी तो महीने में 500 से ज्यादा ऑर्डर आ जाते हैं। शुरुआत में तो कुछ महीने मुश्किल से 50 ऑर्डर ही महीने के आ पाते थे। सोचता था, जो कर रहा हूं सही तो कर रहा हूं न।

धवन मार्केट स्ट्रैटजी को लेकर बताते हैं, हमने पिज्जा पैक करने वाले डिब्बे और बैग पर हैंप यानी भांग से रिलेटेड पूरी डिटेल्स प्रिंट करना शुरू किया।

दरअसल, लोगों को पता नहीं है कि भांग से भी फास्ट फूड बनाया जा सकता है। शुरुआत में हमने इसे सोशल मीडिया पर प्रमोट करना शुरू किया। आज हमारे 70% से अधिक रिपीटेड कस्टमर हैं।

धवल अपने कप्यूटर को स्क्रॉल करते हुए कहते हैं, अभी हम पास्ता, बर्गर, पिज्जा, सेक, चॉकलेट जैसे प्रोडक्ट्स को बनाकर ऑनलाइन डिलीवरी कर रहे हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि ऐड देने के बावजूद भी ई-कॉमर्स फूड डिलीवरी कंपनियां हमारे प्लेटफॉर्म को प्रमोट नहीं करती हैं।

महंगे रॉ मटेरियल की वजह से भांग से बने फास्ट फूड की कीमत अभी 300 से 500 रुपए है।

धवल कहते हैं, भांग के सीड को हम उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से मंगवाते हैं। इंडिया में अधिकांश जगहों पर इसकी खेती गैर-कानूनी है, इसलिए एक किलोग्राम सीड की कीमत थोक में करीब 600 रुपए होती है। जबकि आटे का कॉस्ट 800 रुपए प्रति किलो होता है।

यदि केंद्र सरकार इसे पूरी तरह से लीगल कर देगी, तो ज्यादा खेती होगी और इससे बने प्रोडक्ट की कॉस्ट कम हो जाएगी। भांग के एक हिस्से में नशा तो होता है, लेकिन इसके दूसरे हिस्से को यदि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह वरदान से कम नहीं है।

अब इस ग्राफिक्स के जरिए भांग और गांजा को लेकर कुछ डाउट क्लियर कर लीजिए।

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