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मुंबई से घर वापसी की चार कहानियां:UP-बिहार जाने के लिए सीट नहीं मिली तो दोगुना जुर्माना भरकर जा रहे हैं लोग, बोले- शहर से मन भर गया

मुंबई2 महीने पहलेलेखक: राजेश गाबा

महज सालभर ही तो हुआ है, जब रेल से लेकर सड़क तक लोगों से अटी पड़ी थीं। बस, ट्रक, टैक्सी, ऑटो, बाइक, साइकिल से लेकर पांव-पैदल ही सही, लोग मुंबई से अपने घरों को लौट रहे थे। डर कोरोना का था, लेकिन उससे ज्यादा इस बात का कि कहीं भूखों मरने की नौबत न आ जाए। और मजबूरी सब कुछ खत्म हो जाने का।

फिर कुछ वैसा ही हाल है। शायद कुछ और बदतर। मुंबई से लोग फिर लौटने लगे हैं। वही लोग जो थोड़े समय पहले ही यूपी-बिहार के अपने-अपने गांवों-घरों से कर्ज ले-लेकर मुंबई आए थे। भास्कर ने उनसे मिलकर उनकी मुश्किलें समझने की कोशिश की। आपके लिए इसे दो हिस्सों में रखा है। पहला- जहां से लोग चल रहे हैं, यानी मुंबई। और दूसरा- जहां ये पहुंच रहे हैं। यानी लखनऊ, बनारस और पटना। तो आइये सफर करते हैं इन्हीं के साथ…

अब हम घर चलते हैं….
मुंबई में काम ढूंढने आया था, पर नहीं मिला। लॉकडाउन लगा तो वापस जा रहा हूं। पांच दिनों से ठीक से सो भी नहीं पाया हूं। ट्रेन का इंतजार करते-करते आंख लगी तो किसी ने मोबाइल तक चुरा लिया। शिकायत करने पुलिसवालों के पास गया तो उन्होंने मारकर भगा दिया। अंदर टिकट के लिए गया तो टिकट नहीं मिला। टिकट मिल जाए तो बिहार अपने घर सही-सलामत पहुंच जाऊं। ये बात बिहार के रहने वाले अरुण कह रहे हैं।
सुनील कानपुर के हैं। मुंबई की एक कंपनी में चप्पल जोड़ने का काम करते थे। लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया। अब उन्होंने भी वापस अपने शहर जाकर नया काम ढूंढने का तय किया है।

आजमगढ़ के जय प्रकाश कहते हैं कि फिल्म स्टूडियो में गार्ड का काम करता था। लॉकडाउन में स्टूडियो बंद हुआ तो मुंबई में बिना रोजी-रोटी के फंस जाने की चिंता में घर जा रहा हूं।

ये महज तीन कहानी हैं। ऐसी हजारों कहानियां मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस यानी LTT के प्लेटफॉर्म, बाहर के पार्क, आगे-पीछे की दीवारें, सामने की सड़क, उसे बांटने वाला डिवाइडर और उसके इर्दगिर्द अटी पड़ी हैं। ये सब लोग हैं, जिनकी एक ही मंजिल है- अपना घर। इनमें से ज्यादातर लोगों की एक ही शिकायत है कि टिकट नहीं मिल रहा। रेल प्रशासन मदद नहीं कर रहा और पुलिस की तो एक ही परिभाषा है- परेशान करना। और वह वही कर रही है।

टिकट नहीं मिला तो फाइन देकर चढ़ आए

कई लोग इस कदर परेशान हैं कि वो ट्रेन में बिना टिकट चढ़ने के बाद फाइन देकर भी जाने को तैयार हैं। बिहार के रहने वाले अमित कुमार को जब LTT से बिहार के जयनगर जाने वाली 01061 स्पेशल ट्रेन का टिकट नहीं मिला तो वे दो हजार रुपए फाइन देकर घर को चल पड़े। मुंबई में वे किसी कंपनी में सुपरवाइजर का काम करते थे। लॉकडाउन की वजह से काम छूट गया।

अब तो इस शहर से मन भर गया...
गाजीपुर के रहने वाले गोकुल शर्मा मुंबई में कारपेंटर का काम करते थे। काम बंद होने पर गांव वापस जाने की तैयारी कर ली। बड़ी मुश्किल से तत्काल टिकट का जुगाड़ हो पाया। गोकुल कहते हैं कि सेठ ने बस गांव जाने भर के लिए टिकट का पैसा दिया। अब तो इस शहर से ही मन भर गया है। 25 घंटे की यात्रा के लिए तत्काल में टिकट 1500 रुपए में मिला। वैसे 800 रुपए का आता।

स्टेशनों का नजारा और रेलवे की तैयारी
मुंबई से उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें LTT, कल्याण, ठाणे, दादर, पनवेल और छत्रपति शाहू जी महाराज टर्मिनस (CST) से चलती हैं। LTT और CST जैसे स्टेशनों में ट्रेन जाने के समय से कुछ घंटे पहले लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो रही है। इस भीड़ को मैनेज करने की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। टिकट मिलने में लोगों को दिक्कत हो रही थी। साथ ही स्क्रीनिंग के भी पुख्ता इंतजाम नहीं थे।

इस अव्यवस्था पर रेलवे का जवाब

अमूमन एक ट्रेन में 1800 लोग यात्रा करते हैं। लेकिन अभी की ट्रेनें ठसाठस भरी हैं और इनमें 2000 से ज्यादा लोग सफर कर रहे हैं। हालांकि सेंट्रल रेलवे के CPRO शिवाजी सुतार का कहना है कि ‘पिछले साल और इस साल की स्थिति बिल्कुल अलग है। इसलिए हम कोई भी श्रमिक ट्रेन नहीं चलाने जा रहे हैं। 13 और 14 अप्रैल को भीड़ थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य है।'

स्टेशन के बाहर नजर आने वाली भीड़ की तस्वीरों पर सुतार कहते हैं कि 'LTT से स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। एक ट्रेन में 1500 लोग रिजर्वेशन टिकट पर यात्रा कर रहे हैं। LTT स्टेशन पर कुल 5 प्लेटफार्म हैं और ऐसी स्थिति में अगर एक साथ तीन ट्रेनें यहां से रवाना होती हैं तो स्टेशन के अंदर और बाहर 4500 यात्री आ जाते हैं। इसी वजह से भीड़ नजर आ रही है और यह भीड़ सिर्फ कुछ देर ही रहती है।

नहीं चलाई जाएंगी श्रमिक ट्रेन
शिवाजी सुतार ने कहा, ‘पिछले साल और इस साल की स्थिति बिल्कुल अलग हैं। इसलिए हम कोई भी श्रमिक स्पेशल ट्रेन नहीं चलाने जा रहे हैं।' पिछले साल सरकार ने 25 मई 2020 तक देशभर में 3274 श्रमिक ट्रेन चलाई थीं। इनके जरिए करीब 44 लाख लोग अपने घरों तक पहुंचे थे। ये आंकड़े रेलवे ने ही जारी किए थे।

कुछ दिन पहले मध्य रेलवे की तरफ से बयान आया था कि गर्मी में यात्रियों की सुविधा के लिए 7 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच 76 स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ये ट्रेनें मुंबई और पुणे से उत्तर और पूर्व राज्यों के लिए होंगी। रेलवे का कहना है कि स्पेशल ट्रेनों की संख्या मई के आखिर तक बढ़ाकर 154 की जा सकती हैं।

ये फोटो 15 अप्रैल की सुबह 9 बजे की है। जब लोग घर जाने के लिए अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।
ये फोटो 15 अप्रैल की सुबह 9 बजे की है। जब लोग घर जाने के लिए अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।

स्पेशल ट्रेनों का ब्योरा

1. LTT- छपरा स्पेशल (ट्रेन नंबर-01197)
LTT से 21 अप्रैल दोपहर 02.30 बजे खुलेगी और तीसरे दिन सुबह 10.50 बजे छपरा स्टेशन पहुंचेगी।
हाल्ट: भिवंडी रोड, वसई रोड, सूरत, बडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, बयाना, आगरा फोर्ट, टुंडला, कानपुर, ऐशबाग गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, भटनी, सिवान

2. LTT- भागलपुर स्पेशल (ट्रेन नंबर-01203)
LTT से 23 और 30 अप्रैल को शाम 6 बजे ट्रेन खुलेगी और तीसरे दिन सुबह 6.30 बजे भागलपुर पहुंचेगी
हाल्ट: कल्याण, नासिक रोड, भुसावल, इटारसी, जबलपुर, सतना, प्रयागराज छिवकी, प. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम, गया, जमालपुर

3. सोलापुर-प्रयागराज स्पेशल (ट्रेन नंबर-01315)
सोलापुर से ये ट्रेन 30 अप्रैल तक सोमवार और शुक्रवार को रात 9 बजे खुलेगी। ट्रेन खुलने के तीसरे दिन सुबह 04.25 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। यानी 19 ,23, 27 और 30 अप्रैल को ट्रेन चलेगी।
हाल्ट: पुणे, पनवेल, कल्याण, नासिक रोड, भुसावल, इटारसी, जबलपुर, सतना, मानिकपुर

4. पुणे-गोरखपुर स्पेशल (ट्रेन नंबर- 01453)
ट्रेन पुणे से 23 और 30 अप्रैल को रात 8.20 बजे खुलेगी और खुलने के तीसरे दिन सुबह 9.40 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। ट्रेन में 20 सेकंड सिटिंग बोगी भी होंगी।
हाल्ट: DCL, अहमदाबाद, मनमाड, भुसावल, इटारसी, जबलपुर, सतना, बांदा, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती

(इन ट्रेनों में रिजर्वेशन विंडो यात्रा की तारीख के एक दिन पहले खुलती है।)

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