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मुंबई से आंखों-देखी:लॉकडाउन में रमजान की रात में सड़कों पर भीड़; राहगीर बोले- कोरोना कोई बीमारी नहीं, वो तो सेठ बोलता है इसलिए मास्क लगा लेता हूं

मुंबईएक महीने पहलेलेखक: राजेश गाबा

कोरोना की दूसरी लहर ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को एक बार फिर ठप कर दिया है। बेकाबू कोरोना को थामने के लिए लॉकडाउन जैसे सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं। यह रमजान का भी वक्त है। ऐसे में देश के अलग-अलग इलाकों में मुस्लिम बहुल इलाकों का क्या हाल है? इसी सवाल के जवाब खोजने के लिए दैनिक भास्कर ये सीरीज लेकर आई है। सीरीज के पहले हिस्से में हमने ये जानने की कोशिश की है कि मुंबई में रात की चहल-पहल के बीच लॉकडाउन और कोरोना गाइडलाइन का पालन कैसे हो रहा है?

भास्कर के रिपोर्टर राजेश गाबा ने मुंबई के भिंडी बाजार और डोंगरी में रात 8:30 से सुबह 8:30 तक 12 घंटे गुजारे। पढ़िए वहां के 12 घंटों की आंखों-देखी...

भिंडी बाजार: मास्क के सवाल को हंसकर टाल देते हैं लोग

हम मुंबई सेंट्रल स्टेशन से टैक्सी पकड़ मुस्लिम बहुल इलाके भिंडी बाजार पहुंचते हैं। रात के कोई 8:30 बज रहे हैं। मुख्य सड़क पर लॉकडाउन जैसा नजारा दिखता है। सन्नाटा है और पुलिस की वैन खड़ी है। जो इक्का-दुक्का लोग आ-जा रहे हैं, उनसे बाहर निकलने की वजह पूछी जा रही है।

लेकिन जैसे ही मेन सड़क से हम भिंडी बाजार की गलियों का रुख करते हैं, नजारा बिल्कुल बदला हुआ दिखता है। गलियों और मस्जिदों के आस-पास मेले जैसा माहौल है। रात के 9:15 बजने को हैं, लेकिन चहल-पहल दिन जैसी नजर आ रही है। खाने-पीने की दुकानें खुली हुई हैं और चौराहों पर लोग बिना मास्क के ग्रुप बनाकर खड़े हैं।

मुंबई की भिंडी बाजार की यह तस्वीर रात 10 बजे की है। बाजारों में भारी भीड़ है और किसी के चेहरे पर मास्क नहीं दिख रहा है।
मुंबई की भिंडी बाजार की यह तस्वीर रात 10 बजे की है। बाजारों में भारी भीड़ है और किसी के चेहरे पर मास्क नहीं दिख रहा है।

एक तंग गली में कुछ लड़के बैडमिंटन खेल रहे थे। यहां भी काफी भीड़ जुटी हुई थी। किसी के भी चेहरे पर मास्क नहीं था। हम कुछ लोगों से बात करने की कोशिश करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग कैमरा देख बचने की कोशिश करते हैं। फारुख नाम के एक नौजवान से हमने मास्क न लगाने के बारे में पूछा तो उसका कहना था कि ‘मास्क से क्या होता है? कोई नहीं लगा रहा है।’

आपका नाम क्या है, मास्क क्यों नहीं लगा रखा है? जवाब आता है, ‘मेरा नाम नसीम है। होटल में काम करता हूं। उधर, सेठ बोलता है तो लगा लेता हूं। यहां अपने इलाके में भिंडी बाजार, डोंगरी और नाला सोपारा में कभी नहीं लगाता। उससे मेरा दम घुटता है। कोरोना कोई बीमारी नहीं है। टेंशन से लोग मर रहे हैं। मैं अल्लाह वाला हूं, मुझे कुछ नहीं होगा।’

भिंडी बाजार की सभी गलियों में कमोबेश ऐसे ही हालात थे। छोटे चौराहों पर मेला जैसे माहौल था। रोजेदार पठानी सूट, टोपी में नजर आ रहे थे। लेकिन, मास्क सैकड़ों की भीड़ में ढूंढ़ने पर एकाध चेहरे पर ही नजर आता था। मास्क का सवाल लोग यूं हंसकर टाल रहे थे, जैसा यह कोई चुटकुला हो।

मुंबई के कई इलाकों में BMC और पुलिस मास्क न पहनने पर चालान काट रही है, लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नजर नहीं आता है। सरकारी टीमों के बारे में पूछने पर लोग कहते हैं कि यहां कोई नहीं आता।

हमें भी इन इलाकों की रिपोर्टिंग के दौरान भीड़ इकट्‌ठा होने से रोकने या मास्क को लेकर सख्ती करने वाला कोई नहीं दिखा। गलियों में एकाध पुलिस वाले दिखे भी तो वे बस अपनी ड्यूटी भर निभा रहे थे।

बढ़ते कोरोना केसेज के कारण मुंबई में लॉकडाउन लगा है, लेकिन भिंडी बाजार और डोंगरी समेत कई इलाकों में इस समय मेले जैसा माहौल नजर आ रहा है।
बढ़ते कोरोना केसेज के कारण मुंबई में लॉकडाउन लगा है, लेकिन भिंडी बाजार और डोंगरी समेत कई इलाकों में इस समय मेले जैसा माहौल नजर आ रहा है।

डोंगरी: रतजगे सा माहौल, गलियों में चौपाल

भिंडी बाजार से निकल हम डोंगरी पहुंचते हैं। यहां मुंबई के लॉकडाउन की अलग तस्वीर दिखती है। रात के 12:35 हो रहे हैं। इमाम हुसैन चौराहे की पुलिस चौकी के ठीक सामने लोग ग्रुप बनाकर चाय पी रहे हैं। थोड़ी दूर पर स्थित एक मस्जिद के पास भी खूब भीड़-भाड़ है। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क जैसे कोरोना प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ रही हैं। इक्का-दुक्का पुलिस वाले नजर आते हैं, लेकिन वे किसी को रोक-टोक नहीं रहे हैं। कई जगह तो खुद पुलिसकर्मी ही बिना मास्क के दिखे।

बतौर रिपोर्टर दादर, अंधेरी, बांद्रा में घूमते हुए पुलिस ने मुझे कई बार रोका-टोका और आईकार्ड देखने के बाद ही जाने दिया, लेकिन भिंड़ी बाजार और डोंगरी में पिछले तीन-चार घंटों के दौरान एक बार भी किसी पुलिसकर्मी ने कुछ भी नहीं पूछा। रमजान के दिनों में मुस्लिम इलाकों में रतजगा सा माहौल रहता है। यहां भी गलियों में चौपालें लगी थीं। मास्क की किसी को कोई फ्रिक नजर नहीं आ रही थी।

.यह तस्वीर डोंगरी स्थित सैय्यद हाजी अब्दुर रहमान शाह बाबा की दरगाह की है। रात 12 बजे भी यहां काफी भीड़ थी और कहीं भी कोरोना गाइडलाइन का पालन नजर नहीं आ रहा था।
.यह तस्वीर डोंगरी स्थित सैय्यद हाजी अब्दुर रहमान शाह बाबा की दरगाह की है। रात 12 बजे भी यहां काफी भीड़ थी और कहीं भी कोरोना गाइडलाइन का पालन नजर नहीं आ रहा था।

फिर हम सैय्यद हाजी अब्दुर रहमान शाह बाबा की दरगाह पर पहुंचते हैं। यहां लोबान का धुआं और उसकी मीठी महक चारों तरफ फैल रही थी। रोजेदार और तमाम लोग दुआ मांगने और माथा टेकने आए थे। दरगाह के सामने चाय के होटल खुले हुए थे और वहां भीड़ लग रही थी।

स्कूटर पर बैग में सिगरेट, बीड़ी और गुटखा बेच रहे एक व्यक्ति के पास ग्राहकों की लाइन लगी हुई थी। मैंने पूछा कि ‘अभी लॉकडाउन चल रहा है, आप लोगों को पुलिस का डर नहीं लगता।’ उधर से बेफिक्री से जवाब आया कि ‘इधर पुलिस नहीं आती है। आती भी है तो घूम कर चली जाती है। उसे चाय-पानी पिला देते हैं।’ लेकिन, खुद की हिफाजत के लिए तो आपको मास्क लगाना चाहिए? इस पर उसने हंसते हुए कहा कि‘ कोरोना- वोरोना कुछ नहीं है। बस वहम है। आप जबरन मास्क लगाए हुए हैं।’

डोंगरी की गलियों का जायजा लेते-लेते अब सुबह के चार बज चुके थे। भीड़ रात से भी ज्यादा बढ़ने लगी थी। लोग दूध-ब्रेड और किराने की खरीदारी के लिए निकलने लगे थे। मस्जिद के लाउडस्पीकर पर गूंज रहा था कि 'सहरी का वक्त खत्म होने में सिर्फ 10 मिनट बचे हैं। जल्द खाना-पीना खत्म कर रोजे की नीयत कर लें।’ जमा भीड़ में कुछ हरकत सी आई और लोग खाना-पीना छोड़ जल्द कुल्ला करने लगे।

डोंगरी की दरगाह के पास ही पुलिस चौकी है। इस इलाके में लोग बड़ी संख्या में ग्रुप बनाकर बिना मास्क के टहल रहे थे, लेकिन पुलिस किसी को रोकने-टोकने की जहमत नहीं उठा रही थी।
डोंगरी की दरगाह के पास ही पुलिस चौकी है। इस इलाके में लोग बड़ी संख्या में ग्रुप बनाकर बिना मास्क के टहल रहे थे, लेकिन पुलिस किसी को रोकने-टोकने की जहमत नहीं उठा रही थी।

सुबह 8:30 बजे तक हम कई इलाकों में घूमते हैं। यहां निचले तबके के कामगार बड़ी संख्या में रहते हैं। जिनमें कोरोना को लेकर अवेयरनेस का स्तर बहुत नीचे है। टेस्टिंग और अवेयरनेस फैलाने वाली सरकारी टीमों का भी इन इलाकों में कम आना-जाना है, लेकिन अगर कोरोना की चेन तोड़नी है तो इन इलाकों में भी मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और टेस्टिंग, ट्रैकिंग, ट्रेसिंग पर भी ध्यान देना होगा।

भीड़-भाड़ में कई गुना तेजी से फैलता है कोरोना, कुंभ इसका उदाहरण

भीड़ और मास्क न लगाने से कोरोना कितनी तेजी से फैलता है, यह कुंभ के उदाहरण से समझा जा सकता है। कुंभ के दौरान उत्तराखंड में एक महीने के अंदर कोरोना मरीजों के मिलने की रफ्तार में 8814% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। 14 फरवरी से 28 फरवरी तक उत्तराखंड में महज 172 लोग संक्रमित पाए गए थे। फिर 1 से 15 अप्रैल के बीच 15,333 लोग कोरोना की चपेट में आए। 14 फरवरी से 14 अप्रैल के बीच का ग्रोथ रेट 8814% आता है। महाराष्ट्र देश में कोरोना का सबसे ज्यादा प्रकोप झेलने वाला राज्य है। इस समय राज्य में 6.76 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। अकेले मुंबई में इस समय कोरोना के 85321 एक्टिव केस हैं। मुंबई से सटे वसई में पॉजिटिविटी रेट 60% पहुंच गई है। यानी टेस्ट कराने वाले 100 लोगों में से 60 पॉजिटिव निकल रहे हैं।

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