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हिजाब गर्ल मुस्कान से भास्कर की मुलाकात:मुस्लिम बच्चों की रोल मॉडल बनती जा रहीं मुस्कान ने गिफ्ट के सवाल पर छोड़ा इंटरव्यू

मांड्या (कर्नाटक)6 महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल

कर्नाटक के हिजाब विवाद की पोस्टर गर्ल बनीं मुस्कान का घर इन दिनों सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बना हुआ है। दूर-दूर से लोग मुस्कान से मिलने आ रहे हैं। उनका मकसद मुस्कान से अपने बच्चों को मिलवाना है, ताकि वे भी मुस्कान जैसा ही बनने की कोशिश करें।

मुस्कान की बातों को समझने और उन्हें करीब से जानने के लिए भास्कर भी उनके घर पहुंचा। उनसे बातचीत भी की, लेकिन वो सभी सवालों के जवाब न दे सकीं और बीच में ही इंटरव्यू छोड़ दिया।

आइए आपको विस्तार से बताते हैं। उससे पहले एक सवाल का जवाब देकर आप पोल में पार्टिसिपेट कर सकते हैं।

कर्नाटक के दो बड़े शहरों बेंगलुरु और मैसूर के बीच बसा मांड्या एक शांत शहर है। हिजाब विवाद के केंद्र उडुपी से ये शहर करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर है, लेकिन इस विवाद की तपिश यहां भी बरकरार है। यहां का सादात नगर इलाका एक सामान्य सा मुस्लिम मोहल्ला है, जो इन दिनों कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। यहां बीबी मुस्कान के घर चहल पहल ज्यादा है। महिलाओं और पुरुषों का समूह में आने जाने का सिलसिला बना हुआ है। उनके साथ हिजाब पहने हुए छोटी-छोटी बच्चियां हाथ पकड़े तेजी से आते-जाते दिखाई पड़ती हैं।

मुस्कान से मिलकर लौटने वाली लड़कियों में गजब का उत्साह दिखाई देता है। इन लड़कियों ने खुद को इस करीने से ढका है कि आंखें भी बमुश्किल ही दिखाई देती हैं।

कौन हैं मुस्कान

मुस्कान को अब किसी परिचय की जरूरत नहीं है। 8 फरवरी को मांड्या के PES कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस में B Com सेकेंड ईयर की छात्रा मुस्कान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में भगवा शॉल ओढ़े युवाओं का एक समूह उन्हें घेरते दिखाई देता है और मुस्कान ‘जय श्रीराम’ के नारों के जवाब में पूरी ताकत से ‘अल्लाह हू अकबर' कहते हुए दिखाई देती हैं।

चंद सेकेंड के वीडियो से दुनियाभर में शोहरत

चंद सेकेंड के इस वीडियो ने मुस्कान को दुनियाभर में चर्चा में ला दिया है। मुस्लिम संगठनों ने उन्हें नकद इनाम से नवाजा है। उनके पोस्टर प्रदर्शनों में दिखाई दिए हैं। घर-घर में भी लगाए जा रहे हैं।

मुस्कान के पोस्टरों से पटा उनका घर

सादात नगर में उनके तीन मंजिला घर में पिता की पुराने टीवी ठीक करने की दुकान है। छोटे भाई का जिम है, जो इन दिनों बंद है। घर के एक हिस्से में किरायेदार भी रहते हैं। मुस्कान के घर में जहां भी जगह है, वहां गुलदस्ते रखे हैं। हिजाब पहने और हाथ उठाए उनके दर्जनों पोस्टर दीवारों पर टंगे हैं। घर में कहीं भी खाली जगह नहीं छोड़ी गई है। बधाई देने वालों की भारी भीड़ है। लोग उनसे मिलने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

कोई बेंगलुरु से आया है, तो कोई मैसूर से पूरे परिवार के साथ आया है। कोई शहर के ही किसी पड़ोसी मोहल्ले का है, तो कोई दूर गांव से अपनी बेटियों को लेकर आया है। हालांकि, उनके परिवार में मीडिया को लेकर नाराजगी साफ दिखाई देती है। उनके पिता कहते हैं कि मीडिया उनकी बेटी की गलत तस्वीर पेश कर रहा है।

बहरहाल, तमाम व्यस्तताओं के बीच मुस्कान भास्कर के सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हुईं।

पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश

भास्कर: उस दिन क्या हुआ था?

मुस्कान: उस दिन मैं जब गई तो वो लड़के ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे थे। मुझसे बोले कि बुर्का काड़ (निकाल)। मैं अंदर जाने लगी। सोच रही थी कि कुछ ना करूं, सीधे क्लास में चली जाऊं, लेकिन वो मेरे सामने आ रहे थे। भगवा शॉल मेरे सामने लाकर बोल रहे थे, ‘जय श्रीराम- जय श्रीराम’, तो मैंने मेरे अल्लाह को याद किया और बोला अल्लाह-हू-अकबर।

भास्कर: जब वो लड़के आपके पीछे आ रहे थे, आपके मन में क्या चल रहा था?

मुस्कान: मेरे अल्लाह ने मेरे दिल में जज्बा डाला, मैंने अपने अल्लाह को याद किया और मेरे अल्लाह ने मुझे ताकत और हिम्मत दी।

भास्कर: आपने जो कहा उसे धार्मिक नारे के रूप में देखा जा रहा है और बहुत से लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। आगे कभी ऐसा हुआ तो क्या आप फिर ये नारा लगाएंगी?

मुस्कान: नहीं। लेकिन मैं कोई धार्मिक नारा नहीं लगा रही थी। मैं मुसीबत में थी और मैंने अल्लाह को याद किया और अल्लाह-हू-अकबर कहा। मेरा अल्लाह मुझे बहुत ताकत दे रहा है और मैं शुक्रगुजार हूं मेरे अल्लाह की।

भास्कर: आपके लिए अल्लाह-हू-अकबर के क्या मायने हैं, आपने यही नारा क्यों लगाया?

मुस्कान: मैंने अल्लाह को याद किया क्योंकि सब लोग देख रहे हैं कि वो क्या परिस्थिति थी। इतने लड़के समूह बनाकर मेरे पीछे आ रहे थे। मुझे क्या-क्या बोल रहे थे। मैंने उस वक्त बस अपने अल्लाह को याद किया।

भास्कर: आप कब से हिजाब पहन रही हैं, क्या आपको कभी लगा कि आप इसकी वजह से कभी मुसीबत में आ सकती हैं?

मुस्कान: तौबा-तौबा। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा। मुझे हिजाब डालना अच्छा लगता है।

भास्कर: अब इस तरह से प्रोटेस्ट हो रहा है। हिजाब के लिए बहस चल रही है। अगर हिजाब पर रोक लगती है तो आपने आगे क्या सोचा है?

मुस्कान: हिजाब हर मुसलमान लड़की की पाकीजगी है। जो पहनना चाहती हैं, अल्लाह का वास्ता, उन्हें इजाजत दे दो। जो नहीं पहनना चाहती हैं उन्हें मजबूर मत करो।

भास्कर: बहुत से लोग ये मानते हैं कि मुसलमान लड़कियां अपनी मर्जी से हिजाब नहीं पहनती हैं, उन पर बचपन ही एक दबाव होता है हिजाब पहनने का?

मुस्कान: ऐसा कुछ नहीं है। हम अपनी मर्जी से हिजाब पहनते हैं। किसी तरह की कोई मजबूरी नहीं है। बस हमें हिजाब पहनने की इजाजत दे दो। हमें बुर्का पहनकर अंदर क्लास में नहीं जाना है। हम सब बराबर हैं। मैं बराबरी में यकीन रखती हूं। मैं यूनीफॉर्म का सम्मान करती हूं और यूनीफॉर्म पहनकर ही क्लास में बैठती हूं। बस हिजाब पहनने की इजाजत दे दो। इतना काफी है।

हिजाब हमारा गर्व है, हमारा विश्वास है। सब अपने धर्म का पालन करते हैं। हिजाब हमारी इस्लाम की संस्कृति है। हम बुर्का पहनने की बात नहीं कर रहे हैं। मैं बुर्के के लिए नहीं खड़ी हूं। हिजाब के लिए खड़ी हूं। हम बुर्का काड़कर ही कॉलेज के अंदर सबके साथ बैठेंगे। मैं फिर से यही रही हूं कि बस हमें हिजाब पहनकर क्लास में बैठने की इजाजत दे दो।

भास्कर: एक मुस्लिम लड़की के लिए हिजाब क्यों जरूरी है? इसके क्या मायने हैं?

मुस्कान: इस्लाम में हिजाब हमारे लिए बहुत जरूरी है। एक मुस्लिम होने की पहचान है, लेकिन मैं ये नहीं कह रही हूं कि जो नहीं पहनना चाहती हैं उन्हें मजबूर करो।

भास्कर: पूरे देश से आपके पास फोन आ रहे हैं। ओवैसी ने भी आपको फोन किया। उन्होंने क्या कहा?

मुस्कान: उन्होंने मुझे मुबारकबाद दी और कहा कि हिम्मत से रहो। बस हमारी इतनी ही बात हुई थी।

भास्कर: और किन लोगों के फोन आ रहे हैं, कैसी बात कर रहे हैं?

मुस्कान: पूरे हिंदुस्तान से मुझे फोन आ रहे हैं और सब लोग मुझे हिम्मत ही दे रहे हैं। मैं गर्व से कहती हूं कि पूरा हिंदुस्तान मेरे साथ है और मुझे हिम्मत दे रहा है।

भास्कर: आप एक पोस्टर गर्ल बन गई हैं। लोग आपके पोस्टर लगा रहे हैं। जब आप अपना पोस्टर देखती हैं तो क्या लगता है?

मुस्कान: मैं सोचकर भी नहीं गई थी कि इतना बड़ा मामला हो जाएगा। मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था। जो हो रहा है मैं उसकी शुक्रगुजार हूं। मैं सबका शुक्रिया करती हूं।

भास्कर: हिजाब का मामला अब अदालत में है। अगर अदालत ने हिजाब पर रोक लगा दी तो आप क्या करेंगी?

मुस्कान: हमें भारत के संविधान पर पूरा भरोसा है। भारत के संविधान, कानून और सभी नेताओं पर बहुत भरोसा है। कोई भी हमारे धर्म के खिलाफ नहीं जाएगा।

भास्कर: लेकिन अगर ऐसा हुआ कि आपको हिजाब और अपनी एजुकेशन में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो आप क्या करेंगी?

मुस्कान: मेरी एक आंख एजुकेशन है, एक हिजाब है। इंशाअल्लाह, हम अपनी दोनों आंखों को चुनेंगे।

भास्कर: आपको बहुत गिफ्ट भी मिल रहे हैं, सभी मीडिया में भी आ रहा है?

मुस्कान:​​​​​​​ बस इतना काफी है, अभी और बातचीत नहीं।

भास्कर: जो गिफ्ट मिल रहे हैं, उनके बारे में आप क्या कहेंगी?

मुस्कान:​​​​​​​ बस थैंक यू, मैं और कोई बात नहीं करूंगी।

ये कहते हुए मुस्कान माइक निकाल देती हैं। उनके परिजन भास्कर रिपोर्टर से घर से चले जाने के लिए कहते हैं और पुलिस बुलाने की धमकी देते हैं।

तस्वीरें भी डिलीट करवाईं, हिदायत भी दी

घर की कई तस्वीरें हमने ली थीं, जिनमें घर में रखे गुलदस्ते और उन्हें मिले गिफ्ट दिखाई दे रहे थे। ये तस्वीरें मुस्कान के घरवाले डिलीट करवा देते हैं। मुस्कान के पिता उसके भाई से कहते हैं कि वो आने-जाने वाले सभी लोगों पर नजर रखें। बात- बात में वो कहते हैं कि इंटेलिजेंस विभाग की नजर उनके घर पर है।

मुस्कान से मिलने आए लोगों की बात

लखनऊ के दारुल उलूम नदवा से इस्लामी शिक्षा हासिल करने वाले वसीउल्लाह अपनी बेटियों और पत्नी के साथ मुस्कान से मिलने आए हैं। भास्कर से बात करते हुए वसीउल्लाह कहते हैं, ‘मैं बेंगलुरु से आया हूं और ये कहना चाहता हूं कि पर्दा कोई रस्म या रिवाज नहीं है बल्कि अल्लाह का कानून है।'

वसीउल्लाह की बेटियों ने सिर से पैर तक अपने आप को ढका हुआ है। मुस्कान के घर आने की वजह बताते हुए वसीमुल्लाह कहते हैं, ‘हम उस बच्ची के हौसले और हिम्मत को सलाम करने के लिए यहां आए हैं। मैं अपनी बेटियों को मुस्कान से मिलवाने लाया हूं ताकि उन्हें बता सकूं कि पर्दा अपनाने से बच्चियां और औरतें महफूज रहती हैं।’

पर्दे में रहने दें, दुनिया से बुराइयां खुद खत्म हो जाएंगी

वसीउल्लाह कहते हैं, ‘आज दुनियाभर में जो रेप के मामले हो रहे हैं, ये पर्दा ना होने की वजह से हो रहे हैं। एक मंत्री ने भी हाल में ये बयान दिया था कि पर्दा ना होने की वजह से खतरा बढ़ा है। मैं सभी से ये गुजारिश करूंगा कि पर्दे का सम्मान करें, दुनिया से बुराइयां अपने आप खत्म हो जाएंगी। ये सिर्फ औरत की सुरक्षा नहीं करता है बल्कि समाज की भी सुरक्षा करता है।’

हिजाब पर रोक का फैसला ठीक नहीं

हिजाब पहनने पर कोर्ट और प्रशासन की रोक पर वसीउल्लाह कहते हैं, ‘स्कूल में यूनीफॉर्म हो सकती है, लेकिन कॉलेज में सबको आजादी है अपनी पसंद की ड्रेस पहनने की। किसी औरत को पर्दा हटाने के लिए मजबूर करना कहां तक उचित है।’

पड़ोसियों में भी चर्चा का विषय बनीं मुस्कान

मुस्कान के पड़ोसियों में भी उनको ही लेकर चर्चा ए आम है। लोग मोबाइल पर मुस्कान से जुड़ी खबरें देख रहे हैं। यहां तक कि मुस्कान को मिले गिफ्ट पर भी कयास लगाए जा रहे हैं। एक ने तो यहां तक कहा कि महाराष्ट्र से आए एक नेता ने उन्हें महंगा फोन और स्मार्ट वॉच भी गिफ्ट की है। एक पड़ोसी दावा करते हैं कि मुस्कान के परिजनों का कहना है कि वो उन्हें मिल रहे पैसों को दान कर रहे हैं।

हालांकि मुस्कान गिफ्ट मिलने से जुड़े भास्कर के सवाल पर ही खीज गईं थीं और इंटरव्यू रोक दिया था। उन्होंने या उनके परिजनों ने ये नहीं बताया कि उन्हें अब तक किस किस से क्या-क्या मिल चुका है।

हमारी उम्र भी मुस्कान को लग जाए

बीबी जरीना अपनी बेटियों के साथ मुस्कान से मिलने आई हैं। जरीना कहती हैं कि वो कोई तोहफा तो नहीं ला सकीं, लेकिन उन्होंने उसे बहुत दुआएं दी हैं। जरीना कहती हैं, ‘हमारी भी उम्र उनको लग जाए। मेरी बेटियां उनसे मिलना चाहती थीं। उनसे मिलवाया है। वे बहुत खुश हैं। उन्होंने मुस्कान के साथ फोटो भी खिंचवाई हैं।’

कोर्ट ने अगर हिजाब पर रोक लगा दी तो क्या करेंगी? इस सवाल पर जरीना कहती हैं, ‘हमें अपनी बेटियों को पढ़ाना है और हिजाब पहनाकर ही पढ़ाना है। मुस्कान का वीडियो देखकर हमें बहुत अच्छा लगा। एक मुस्लिम लड़की ने इतनी हिम्मत दी है। हमारी बेटियां भी ऐसी बनें।’

मैं जरीना से बात कर ही रही थी कि उनकी बेटी को याद आया कि वो मुस्कान के साथ सेल्फी लेना भूल गई है। वो दौड़कर घर की तरफ गई और मुस्कान के साथ तस्वीर खिंचवाकर हंसते हुए लौटी।

मुस्कान की टीचर भी बेटी को लेकर पहुंचीं

मुस्कान को पढ़ाने वाली उनकी एक टीचर ताज भी उनसे मिलने पहुंची। उनकी पांच-छह साल की बेटी ने बुर्का नहीं पहना था। वो कहती हैं, ‘मेरी बेटी भी बुर्का पहनेगी और मुस्कान जैसी हिम्मती बनेगी।’

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