करिअर फंडाइंफोसिस की सफलता में छिपे 5 टिप्स:नारायण मूर्ति का मंत्र...नया सोचिए, अच्छे लोगों को जोड़िए; दुश्मन से भी सीखिए

3 महीने पहले

'मेरा मानना है कि हम सभी ने कभी न कभी उन पेड़ों के फल खाए हैं जो हमने नहीं लगाए। जब देने की हमारी बारी होती है, तो बदले में हमें बाग लगाना पड़ता है, जिसका फल हम कभी नहीं खा सकते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा।'
- एनआर नारायण मूर्ति

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क्या आप एक ऐसे भारत की कल्पना कर सकते हैं जिसमें IT सेक्टर ही नहीं हो? जी हां, मैंने तो वो इंडिया देखा है, जहां लोगों को न IT पता था, न आउटसोर्सिंग, न BPO और न ही सॉफ्टवेयर सर्विसेज।

ये क्रांति तो 1990 के दशक में पहले धीरे-धीरे, और फिर अचानक से आई, और चारों तरफ IT की धूम मच गई।

इस क्रांति में बड़ा योगदान था नारायण मूर्ति का, जिन्होंने इंफोसिस का GDM अर्थात ग्लोबल डिलीवरी मॉडल बनाया। आज के प्रोफेशनल्स इस सफलता से बड़े सबक ले सकते हैं।

क्या था ग्लोबल डिलीवरी मॉडल

1) इंफोसिस कंपनी ने ग्लोबल मार्केट्स जैसे कि अमेरिका और ब्रिटेन पर फोकस किया। ग्लोबल डिलीवरी मॉडल (GDM) में इसने डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और मल्टी-लोकेशन इंगेजमेंट टीम्स बनाईं।

2) इसमें नारायण मूर्ति ने डेवलप्ड वर्ल्ड में ग्राहकों की सेवा के लिए भारत के प्रतिभाशाली, लेकिन कम वेतन वाले इंजीनियरों को नियुक्त करके कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली IT सेवाएं प्रदान करने का अवसर देखा।

3) मेन प्रिंसिपल ये है कि काम को वहां किया जाए जहां इसे सबसे कम रिस्क के साथ सबसे सस्ते में किया जा सके। काम को दो पार्ट्स में बांट दिया – (i) पहले जिनमें क्लाइंट्स से इंटरैक्शन की जरूरत पड़ती थी, (ii) दूसरे वह काम जिनमें क्लाइंट्स से इंटरैक्शन की जरूरत नहीं पड़ती थी।

4) पहले के लिए अमेरिका और यूरोप में हाई डिलीवरी इंगेजमेंट सेंटर्स बनाए गए जबकि बाकि काम को भारत जैसे देशों में किफायती तरीके से अंजाम दिया जाता।

लेखक थॉमस फ्रीडमैन ने 2005 में अपनी किताब 'द वर्ल्ड इस फ्लैट' में इंफोसिस की इस क्रांति पर लिखा।

आइए, पांच सबक देखें, लेकिन पहले, नारायण मूर्ति की जीवन रेखा

इंफोसिस संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति का जन्म 20 अगस्त 1946 को कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के शिदलाघट्टा शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। मूर्ति ने 1967 में मैसूर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की और 1969 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर से प्रौद्योगिकी में मास्टर डिग्री हासिल की। 1970 के दशक में उन्होंने पेरिस में काम किया, जहां अन्य परियोजनाओं के साथ, उन्होंने चार्ल्स डी गॉल हवाई अड्डे पर एयर कार्गो को संभालने के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम डिजाइन में मदद की।

भारत लौटकर, उन्होंने पुणे में एक कंप्यूटर सिस्टम कंपनी में एक पद स्वीकार किया, लेकिन अंततः उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने 1981 में अपने परिवार से लिए गए केवल 10,000 रुपए के और साथ छह साथी कंप्यूटर प्रोफेशनल्स के साथ इंफोसिस की स्थापना की।

शुरुआती वर्षों में मूर्ति को कठिन बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन 1999 तक इन्फोसिस NASDAQ में शामिल हो गई थी, जो अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी थी।

मूर्ति को उनकी सादगी, जमीन से जुड़े स्वभाव व मजबूत लीडरशिप स्किल्स के लिए काफी सराहा जाता है। उन्हें पद्म विभूषण और पद्म श्री पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

ग्लोबल डिलीवरी मॉडल और नारायण मूर्ति के जीवन से 5 बड़ी सीख

1) डरो मत, नया सोचो: ग्लोबल डिलीवरी मॉडल पर लोग बड़ा हंसे होंगे कि एक गरीब देश भारत में 1990 के दशक में, कोई सोच रहा है हजारों फ्रेश इंजीनियर्स से डॉलर-अर्निंग करवाई जा सकती है। लेकिन इंफोसिस ने अपनी खुद की ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी बनाई, बड़ी मात्रा में लोग तैयार किए और कमाल कर दिया।

2) पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी): मूर्ति कहते हैं, 'जब संदेह हो तो खुलासा करें।' उनके अनुसार, ‘नेता को एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां प्रत्येक व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करने में डरे नहीं, बल्कि खुद को सुधारने की बात करे।'

3) उदारता (बेनेवोलेंस): IPO के बाद, इंफोसिस ने अपनी इक्विटी का एक हिस्सा कर्मचारियों के साथ साझा करने का फैसला किया। इससे उन्हें टैलेंटेड लोगों को जोड़े रखने में मदद मिली और कर्मचारियों को ओनरशिप की भावना मिली। मूर्ति को कर्मचारियों को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के स्टॉक देने पर गर्व है।

4) सादगी (सिम्प्लिसिटी): मूर्ति अपने निजी जीवन और अपने पेशेवर जीवन दोनों को सरल रखने की क्षमता रखते हैं। मतलब यह नहीं है कि वह महत्वाकांक्षी नहीं थे। उनकी सेल्फ-इम्पोस्ड मितव्ययी जीवन शैली की चर्चा हर जगह होती है।

5) लगातार सतर्कता: एक आंत्रप्रेन्योर को लगातार संकेतों को स्कैन करना पड़ता है कि उसके बिजनेस को एक स्ट्रक्चरल समस्या का सामना करना पड़ सकता है। मूर्ति कहते हैं, कभी भी अपने कॉम्पिटीटर्स को कम मत समझो। मूर्ति उनका सम्मान करने और उनसे वह सभी कुछ सीखने को कहते हैं जो सीखा जा सकता है।

तो आज का करिअर फंडा ये है कि आप कहीं से भी, सही बिजनेस मॉडल बना कर, कहीं की भी जरूरत पूरी कर सकते हैं, बशर्ते आपमें विजन हो, ईमानदारी हो और आप प्रॉफिटेबिलिटी समझते हों।

कर के दिखाएंगे!

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