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आज की पॉजिटिव खबर:बिहार के निक्की की सब्जीकोठी में 30 दिन तक ताजा रहेंगी फल-सब्जियां; लाखों में कमाई

नई दिल्लीएक वर्ष पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

हमारे देश में किसानों के लिए प्रोडक्शन से ज्यादा चैलेंजिंग काम प्रोड्यूस को सुरक्षित रखना है। स्टोरेज के अभाव में अच्छी खासी मात्रा में प्रोड्यूस, यानी फल और सब्जियां खराब हो जाती हैं। इससे किसानों की कमाई बहुत हद तक प्रभावित होती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए बिहार के निक्की झा ने एक पहल की है। उन्होंने एक स्टोरेज सिस्टम तैयार किया है, जिसमें 5 दिन से लेकर 30 दिनों तक प्रोड्यूस सुरक्षित रखा जा सकता है। इसका नाम उन्होंने सब्जीकोठी रखा है। अब वे देशभर में इसकी मार्केटिंग कर रहे हैं। इससे अच्छी खासी उनकी कमाई भी हो रही है।

25 साल के निक्की झा बिहार के भागलपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। फिलहाल वे IIT कानपुर से PhD कर रहे हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गांव में ही हुई। इसके बाद वे पटना आ गए।

पढ़ाई के दौरान सोलर बेस्ड कोल्ड स्टोरेज तैयार किया

मास्टर्स की पढ़ाई के दौरान उन्हें एक प्रोजेक्ट के रूप में कोल्ड स्टोरेज डेवलप किया। यह सोलर बेस्ड था। हालांकि, तब उन्होंने बिजनेस के रूप में इसे नहीं सोचा था। निक्की कहते हैं कि यह कोल्ड स्टोरेज काम तो कर रहा था, लेकिन इसके साथ एक दिक्कत थी। यह मानसून सीजन में काम नहीं करता था। यानी, जब तक धूप रही और चार्जिंग की सुविधा मिली, तब तक ही यह काम करता था।

भागलपुर के रहने वाले 25 साल के निक्की झा फिलहाल IIT कानपुर से PhD कर रहे हैं।
भागलपुर के रहने वाले 25 साल के निक्की झा फिलहाल IIT कानपुर से PhD कर रहे हैं।

वे बताते है, 'साल 2018 में एक दिन अपने घर में इसको लेकर मैं डिस्कशन कर रहा था। इसके चैलेंजेस बता रहा था। तब मेरी बहन रश्मि झा को एक तरकीब सूझी। उन्होंने कहा कि कूलिंग तकनीक नई नहीं है और महंगी भी है। क्यों न एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए जो बिना कूलिंग ही सब्जियों और फलों खराब होने से बचा सके।'

रिसर्च और स्टडी के बाद माइक्रोक्लाइमेट पोर्टेबल सिस्टम तैयार किया

निक्की को रश्मि का आइडिया पसंद आया। उन्होंने इसको लेकर स्टडी शुरू कर दी। रश्मि जो बायोटेक्नोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने ने भी इस काम में निक्की की मदद की। इसके बाद साल 2019 में उन्होंने माइक्रोक्लाइमेट पोर्टेबल सिस्टम तैयार किया। जो कूलिंग की बजाय प्रिजर्वेटर के तौर पर काम करता था।

निक्की कहते हैं कि इसकी उपयोगिता को लेकर मुझे लगा कि इस प्रोजेक्ट को कमर्शियल लेवल शुरू करना चाहिए। किसानों को ऐसे प्रोडक्ट की जरूरत है। इसके बाद अपनी बहन रश्मि के साथ मिलकर 2019 में उन्होंने सप्तकृषि नाम से अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

उनके इस स्टार्टअप को IIT पटना, IIT कानपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जम्मू से सपोर्ट मिला है। इससे उन्हें अपने स्टार्टअप को जमाने में काफी हद तक मदद मिली है।

कैसे काम करता है सब्जीकोठी? क्या है इसकी खासियत?

निक्की ने सब्जीकोठी का मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था, लेकिन अब इसे बिजनेस में तब्दील कर लिया है।
निक्की ने सब्जीकोठी का मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था, लेकिन अब इसे बिजनेस में तब्दील कर लिया है।

निक्की के मुताबिक सब्जीकोठी एक प्रिजर्वेटर की तरह काम करता है। इसमें एक अयोनाइज्ड चैंबर लगा है। यह इथाइलीन हॉर्मोन को छोटे-छोटे मॉलिक्यूल्स में बदल देता है। इस वजह फल और सब्जियों के पकने का वक्त बढ़ जाता है। इस वजह से ज्यादा दिन तक प्रोड्यूस सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

सब्जीकोठी को ऑपरेट करने के लिए 20 वाट की जरूरत होती है। इसे एक बार चार्ज करने के बाद एक दिन तक ऑपरेट किया जा सकेगा। साथ ही यह सोलर सिस्टम से भी चार्ज किया जा सकता है। यानी जहां बिजली नहीं है, वहां भी इसे इंस्टॉल किया जा सकता है। दिनभर में एक लीटर पानी इसमें लगता है।

निक्की कहते हैं कि सबसे बड़ी इसकी खासियत है कि इसे आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। इसे देश में कहीं भी ले जाया जा सकता है और बिना किसी एक्सपर्ट के इसे इंस्टॉल भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं इसे ऑटो, कार, ई रिक्शा किसी के ऊपर भी इंस्टॉल किया जा सकता है। उसके ऊपर यह आसानी से ऑपरेट हो सकता है।

देशभर में डिमांड, 1000 से ज्यादा प्री-बुकिंग

सबसे खास बात है कि इस सब्जीकोठी को कहीं भी मूव किया जा सकता है। इसे आसानी से इंस्टॉल भी किया जा सकता है।
सबसे खास बात है कि इस सब्जीकोठी को कहीं भी मूव किया जा सकता है। इसे आसानी से इंस्टॉल भी किया जा सकता है।

निक्की बताते हैं कि हमारे पास दो तरह के सब्जीकोठी हैं। एक किसानों के लिए और दूसरा ट्रेडर्स के लिए। इसकी कीमत 10 हजार रुपए से शुरू है। किसानों के लिए जो प्रिजर्वेटर है उसकी कैपेसिटी 250 किलो तक प्रोड्यूस रखने की है। ट्रेडर्स के लिए डिजाइन सब्जीकोठी 500 किलो तक प्रोड्यूस स्टोर कर सकता है।

वे कहते हैं कि शुरुआती महीनों में ही हमें इसको लेकर ऑर्डर मिलने लगे थे। एक साल के दौरान हमें करीब 300 से ज्यादा ऑर्डर मिले। इसमें किसानों और ट्रेडर्स दोनों की डिमांड शामिल रही। अब तक हमारे पास 1 हजार से ज्यादा प्री बुकिंग है। जल्द ही हम ये ऑर्डर डिलीवर करने वाले हैं। भागलपुर में उन्होंने इसकी फैक्ट्री बनाई है। जहां हर महीने 300 सब्जीकोठी बनाई जा रही है। करीब 20 लोग वहां रोज काम कर रहे हैं। जबकि निक्की की टीम में 10 लोग काम करते हैं।

इस आइडिया के लिए मिले कई अवार्ड

निक्की बताते हैं कि हमारे इस प्रोजेक्ट को काफी पसंद किया जा रहा है। इसको लेकर उन्हें नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर कई अवार्ड मिल चुके हैं। हाल ही में इंडिया इजराइल क्रॉस बॉर्डर बिजनेस टाइअप के लिए भी उनकी कंपनी का सिलेक्शन हुआ है। इसके तहत उन्हें इजराइल जाने का मौका मिलेगा।

UN को-ऑर्डिनेटर को अपना मॉडल समझाते निक्की। इस काम के लिए निक्की झा को कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।
UN को-ऑर्डिनेटर को अपना मॉडल समझाते निक्की। इस काम के लिए निक्की झा को कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।

किसानों को रहा है फायदा, फल व्यापारी भी खुश

निक्की के इस सब्जीकोठी की मदद से किसानों का काम आसान हो गया है। उन्हें अपने प्रोड्यूस स्टोर करने के लिए इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं है। अब वे लंबे वक्त तक अपनी सब्जियों को स्टोर कर के रख सकते हैं और बाद में मार्केट में ले जाकर बेच सकते हैं। इसी तरह फल व्यापारी भी इससे खुश हैं। उन्हें प्रोड्यूस खराब होने का डर नहीं है। कई लोगों ने तो अपने फ्रूट कार्ट को ही सब्जीकोठी में तब्दील कर दिया है। इससे उन्हें अच्छा खासा प्रॉफिट हो रहा है।

इस तरह के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है तो यह खबर आपके काम की है

बिहार के मधुबनी जिले में रहने वाले विकास झा ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ऐसा सब्जी कूलर तैयार किया है, जो बिना इलेक्ट्रिक और फ्यूल के हफ्ते के सातों दिन हरी सब्जियों और फलों को सुरक्षित रख सकता है। इससे किसानों को अच्छा-खासा फायदा हो रहा है। पिछले दो सालों से विकास देशभर में इसकी मार्केटिंग कर रहे हैं। फिलहाल उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए है। (पढ़िए पूरी खबर)