नोएडा के ट्विन टावर जमींदोज:3700 किलो बारूद से दोनों टावर 80 हजार टन मलबे में बदले, सुपरटेक ने कहा- 500 करोड़ का नुकसान हुआ

नोएडा3 महीने पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

नोएडा के सेक्टर 93 में बने सुपरटेक के अवैध ट्विन टावर रविवार दोपहर ढाई बजे ढहा दिए गए। 100 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले दोनों टावर गिरने में सिर्फ 12 सेकेंड का वक्त लगा। इन्हें गिराने के लिए 3700 किलो बारूद का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद दोनों टावर करीब 80 हजार टन मलबे में तब्दील हो गए। इस मलबे में कंक्रीट और स्टील शामिल हैं, जिनकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए आंकी गई है।

ट्विन टावर गिरने के बाद इन्हें बनाने वाली कंपनी सुपरटेक लिमिटेड ने 500 करोड़ रुपए के नुकसान की बात कही है। कंपनी के चेयरमैन आरके अरोरा ने रविवार को कहा, 'हमारा कुल नुकसान करीब 500 करोड़ रुपए का है। इसमें जमीन की खरीद, कंसट्रक्शन और ब्याज पर खर्च हुई रकम शामिल है।'

देश में इम्प्लोसिव तकनीक से अब तक के सबसे बड़े डिमोलेशन के बारे में पढ़ने से पहले देखिए ट्विन टावर गिरते वक्त नजारा कैसा था...

ट्विन टावर गिरने में उतना ही वक्त लगा, जितना एक्सपर्ट्स ने बताया था। यानी करीब 12 सेकेंड में ही दोनों इमारतें ढह गईं।
ट्विन टावर गिरने में उतना ही वक्त लगा, जितना एक्सपर्ट्स ने बताया था। यानी करीब 12 सेकेंड में ही दोनों इमारतें ढह गईं।

ट्विन टावर गिरने के बाद 5 मंजिलों के बराबर मलबा
ब्लास्ट के बाद दोनों टावर्स का मलबा साइट पर जमा हो गया है। भास्कर रिपोर्टर ने जब मौके का जायजा लिया, तो गिरी हुई इमारत के मलबे का ढेर करीब 50 से 60 फीट की ऊंचाई तक फैला नजर आया। यह ऊंचाई 5 मंजिला इमारत के बराबर है। पेड़ों और इमारतों से धूल हटाने के लिए 50 से ज्यादा फायर टेंडर्स को लगाया गया है। इलाके में पॉल्यूशन लेवल मॉनिटर करने के लिए स्पेशल डस्ट मशीनें लगाई गई हैं।

ट्विन टावर गिरने के तुरंत बाद धूल का बड़ा गुबार उठा, जिसके बाद आसपास की इमारतें दिखनी ही बंद हो गईं।
ट्विन टावर गिरने के तुरंत बाद धूल का बड़ा गुबार उठा, जिसके बाद आसपास की इमारतें दिखनी ही बंद हो गईं।

नजदीकी इमारतों में रहने वाले लोगों को लौटने की इजाजत
ट्विन टावर को गिराने का काम पूरा होने के बाद आसपास की उन सोसायटीज के लोगों को वापस आने की इजाजत मिल गई है, जिन्हें एहतियातन हटाया गया था। नोएडा प्रशासन ने पूरे इलाके का निरीक्षण करने के बाद रहवासियों को वापस लौटने के लिए कहा है।

ट्विन टावर को गिराने के लिए विस्फोट की जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, उसके चलते घनी आबादी के बीच बने दोनों टावर अपनी जगह पर जमींदोज हो गए। आसपास की किसी इमारत को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। कुछ बिल्डिंग्स के शीशे टूटने और एक सोसाइटी की बाउंड्री वॉल में दरार आने की बात कही गई है।

धमाके के दौरान बनाए गए वीडियो में दोनों टावर ब्लास्ट से गिरते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन आसपास की इमारतें सुरक्षित हैं।
धमाके के दौरान बनाए गए वीडियो में दोनों टावर ब्लास्ट से गिरते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन आसपास की इमारतें सुरक्षित हैं।

अपडेट्स...

  • ब्लास्ट से पहले ट्विन टावर के पास की दो सोसाइटी में गैस और बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी।
  • नोएडा पुलिस ने एहतियातन ग्रीन कॉरिडोर बनाए थे। 6 अस्पताल भी स्टैंडबाई पर थे।
  • दोपहर 2.15 बजे एक्सप्रेस-वे को बंद किया गया। धूल हटने के बाद करीब 3.40 बजे इसे खोला गया।
  • एक्स्प्रेस-वे के अलावा 5 और रूट भी बंद किए गए थे। इन्हें भी ब्लास्ट के आधे घंटे बाद खोल दिया गया।
  • ट्रैफिक डायवर्जन के लिए नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर 99710 09001 जारी किया था।

ब्लास्ट के 5 मिनट पहले जहां टावर थे, 35 मिनट बाद खाली जगह दिखी
नोएडा के सेक्टर 93 में जिस जगह सुपरटेक के अवैध टावर खड़े थे, वहां ब्लास्ट के 30 मिनट बाद धूल का गुबार हटने पर खाली जगह नजर आई। इसके साथ ही टावर के पीछे बनीं इमारतें भी दिखाई देने लगीं। टावर मलबे में बदले, तो करीब आधा किलोमीटर के इलाके में धूल फैल गई। आधे घंटे के बाद नोएडा अथॉरिटी के अमले ने एक्सप्लोजन साइट पर मोर्चा संभाल लिया। मलबा पूरी तरह हटाने में करीब तीन महीने का समय लगेगा।

अब पांच पॉइंट्स में जानिए ट्विन टावर कैसे बने, क्यों और किस तरह टूटे

1. 10 मंजिल की इजाजत, 40 मंजिल के दो नए टावर बना दिए
2004 में नोएडा अथॉरिटी ने सुपरटेक को हाउसिंग सोसाइटी बनाने के लिए प्लॉट अलॉट किया था। 2005 में बिल्डिंग प्लान मंजूर हुआ। इसमें 10 मंजिल के 14 टावर बनाने की इजाजत थी। 2006 में सुपरटेक ने प्लान में बदलाव कर 11 मंजिल के 15 टावर बना लिए। नवंबर 2009 में प्लान फिर बदलकर 24 मंजिल के दो टावर शामिल कर लिए गए। मार्च 2012 में 24 मंजिल को बढ़ाकर 40 कर लिया। जब रोक लगी, तब तक इनमें 633 फ्लैट बुक हो चुके थे।

2. हाईकोर्ट ने 8 साल पहले ट्विन टावर गिराने का आदेश दिया था
टावर से सटी एमराल्ड कोर्ट सोसाइटी के रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन प्रेसिडेंट उदयभान सिंह तेवतिया ट्विन टावर का मामला कोर्ट में ले गए थे। उन्होंने 2012 में अवैध निर्माण के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने 2014 में ट्विन टावर को अवैध घोषित कर गिराने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों ने यहां फ्लैट बुक किए हैं, उन्हें 14% ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाया जाए।

3. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2021 में टावर गिराने का आदेश दिया, गिरे अब
सुपरटेक बिल्डर ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और 31 अगस्त 2021 को आदेश दिया कि तीन महीने के अंदर, यानी नवंबर 2021 को टावर गिरा दिए जाएं। नोएडा अथॉरिटी ने कोर्ट में कहा कि 22 मई 2022 तक ये काम कर लिया जाएगा। आखिर में इसकी तारीख 28 अगस्त 2022 तय हुई। याचिका लगाने वाले तेवतिया के मुताबिक, टावर टूटने के के फायदे 3 महीने बाद दिखने लगेंगे।

4. गिराने के लिए दो कंपनियों से करार, इनमें एक साउथ अफ्रीका की
टावर गिराने का काम भारत की एडिफाइस और साउथ अफ्रीका की कंपनी जेट डिमोलिशन को मिला। जेट कंपनी को मुश्किल डिमोलिशन के 5 अवॉर्ड मिल चुके हैं। वह जोहान्सबर्ग में 108 मीटर ऊंची बैंक ऑफ लिस्बन की बिल्डिंग, साउथ अफ्रीका में ही एक पावर स्टेशन और राजधानी प्रिटोरिया में घनी आबादी में बने 14 मंजिला ट्विन टावर गिरा चुकी है। एडिफाइस भी गुजरात का ओल्ड मोटेरा स्टेडियम गिरा चुकी है।

5. टावर में 9800 छेद किए, हर छेद में करीब 1400 ग्राम बारूद भरा गया
एडिफाइस के डायरेक्टर उत्कर्ष माहेश्वरी के मुताबिक सुपरटेक का एक टावर 29 और दूसरा 32 मंजिला है। दोनों टावरों में 9800 छेद किए गए। हर छेद में करीब 1400 ग्राम बारूद डाला गया। कुल 3700 किलो बारूद इस्तेमाल हुआ। इसमें 325 किलो सुपर पावर जेल, 63,300 मीटर सोलर कार्ड, सॉफ्ट टयूब, जिलेटिन रॉड, 10,900 डेटोनेटर और 6 IED शामिल हैं। इस पर करीब 17.55 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह खर्च भी सुपरटेक से ही लिया जाएगा।

इमारतें गिराने से पहले 7 हजार लोगों को सुरक्षित जगह भेजा
ब्लास्ट से पहले ट्विन टावर की पास की इमारतों में रहने वाले करीब 7 हजार लोगों को सुरक्षित जगह भेजा गया। एक्सप्लोजन जोन से डेढ़ किलोमीटर तक का एरिया खाली कराया गया था। विस्फोट से टावर के पास मौजूद एक सोसाइटी की बाउंड्री वॉल को नुकसान पहुंचने और शीशे टूटने की जानकारी मिली है। हालांकि प्लानिंग के मुताबिक टावर एमराल्ड कोर्ट की तरफ नहीं, ATS की तरफ गिरे, जो सुरक्षित फॉल है।

जैसा हमने आपको बताया कि भारत में इससे पहले इम्प्लोसिव टेक्नीक से इतना बड़ा डिमोलिशन कभी नहीं हुआ। ट्विन टावर के बनने से लेकर डिमोलिशन तक की पूरी कहानी ग्राफिक्स में जानने के लिए क्लिक करें...

नोएडा के ट्विन टावर से संबंधित दैनिक भास्कर की ये स्पेशल स्टोरीज भी पढ़ें...

खबरें और भी हैं...