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OYO के ब्रांड बनने की कहानी:सिर्फ 30 रुपए बचे थे, उससे भारत के एक लड़के ने 8 साल में खड़ी की 75 हजार करोड़ की कंपनी; अब 2021 के अंत तक आएगा IPO

2 महीने पहलेलेखक: आदित्य द्विवेदी

2012 के सर्दियों की एक शाम थी। 18 साल के रितेश अग्रवाल दिल्ली की मस्जिद मोठ मार्केट में बैठे थे। पास में सिर्फ 30 रुपए थे। जिंदगी में पीछे के बारे में सोचते तो ओरावेल स्टेज नाम का एक असफल स्टार्टअप था। आगे के बारे में सोचते तो करियर का कुछ पता नहीं था।

अब आते हैं 2021 में। वही रितेश अग्रवाल आज दुनिया के दूसरे सबसे युवा सेल्फ मेड बिलेनियर बन गए हैं। पहले नंबर पर अमेरिकन मॉडल काइली जेनर हैं। 2013 में शुरू किया रितेश का स्टार्टअप OYO रूम्स महज 8 साल में 75 हजार करोड़ की कंपनी बन चुका है। ये 80 देशों के 800 शहरों तक फैल चुका है। सस्ते में स्टैंडर्ड रूम्स और कपल फ्रेंडली होने की वजह से OYO रूम्स अक्सर चर्चा में रहता है।

फिलहाल इसकी चर्चा की बड़ी वजह IPO है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले हफ्ते कंपनी IPO के लिए आवेदन करने जा रही है। इसीलिए आज हम लेकर आए हैं OYO Rooms के ब्रांड बनने की पूरी कहानी...

शुरुआतः छोटा शहर-बड़े सपने

रितेश अग्रवाल ओडिशा के रायगढ़ जिले के भीषमकटक में पैदा हुए। स्कूली दिनों से ही एंटरप्रेन्योर बनना चाहते थे। घरवालों ने IIT एंट्रेंस की तैयारी के लिए कोटा भेजा, लेकिन रितेश का मन वहां नहीं लगता था। उन्होंने ट्रैवल करना शुरू किया।

वो होटल वालों से रिक्वेस्ट करते कि मुझे अपने यहां रुकने दें। मैं होटल इंडस्ट्री की एक बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व करना चाहता हूं। कई लोग उन्हें डिस्काउंट दे देते और कई दुत्कार देते। इस दौरान उन्होंने करीब 100 जगहों के 200 होटल्स में स्टे किया।

हुरुन रिच लिस्ट 2020 के मुताबिक OYO रूम्स के फाउंडर रितेश अग्रवाल की नेटवर्थ करीब 7 हजार करोड़ रुपए है।
हुरुन रिच लिस्ट 2020 के मुताबिक OYO रूम्स के फाउंडर रितेश अग्रवाल की नेटवर्थ करीब 7 हजार करोड़ रुपए है।

आइडियाः प्रॉब्लम देखी तो जली दिमाग की बत्ती

ट्रैवल करने और होटल्स में रुकने के दौरान उन्होंने इंडस्ट्री की एक बड़ी प्रॉब्लम्स को पकड़ लिया था। उनके दिमाग में एक आइडिया आया और उन्होंने 2012 में ओरावेल स्टेज नाम का स्टार्टअप शुरू कर दिया। इसमें वो सस्ते होटल वालों से जाकर मिलते थे। उनके कमरे का लुक एंड फील ठीक करते थे। उसके बाद उसके लिए कस्टमर खोजते थे। काम चला नहीं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। उसी दौरान महज 30 रुपए लेकर वो दिल्ली की मोठ मार्केट में बैठे भविष्य के बारे में सोच रहे थे।

फंडिंगः एक फेलोशिप से हुई शुरुआत, और कारवां चल पड़ा

2013 में रितेश थिएल फेलोशिप के लिए चुने गए। ये दो साल का प्रोग्राम था जिसमें फेलो को 1 लाख डॉलर यानी करीब 75 लाख रुपए मिलने थे। 2013 में ही रितेश ने OYO रूम्स लॉन्च कर दिया।

OYO रूम्स ने सस्ते होटल्स को टारगेट किया। ये होटल वालों के पास जाते थे और उन्हें अपने साथ जोड़ते थे। इसके बाद वो होटल की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी सपोर्ट, कस्टमर मैनेजमेंट और उसके लुक एंड फील पर काम करते थे। इससे होटल का बिजनेस 2 गुना तक बढ़ जाता था। धीरे-धीरे कॉन्सेप्ट पॉपुलर होने लगा और फंडिंग की झड़ी लग गई।

स्ट्रैटजीः किफायती स्टैंडर्ड रूम और कपल फ्रेंडली माहौल

  • OYO ने लोकेशन, क्वालिटी और प्राइस पर फोकस किया। एक एग्रीगेटर बिजनेस मॉडल खड़ा किया यानी नया होटल न बनाकर पहले से मौजूद होटल के साथ पार्टनरशिप की।
  • होटल सर्च से लेकर आसान बुकिंग, बिना रुकावट के चेक-इन और चेक-आउट और कस्टमर सेटिस्फैक्शन पर पूरा ध्यान दिया।
  • टेक्नोलॉजी के जरिए कस्टमर और पार्टनर दोनों की जिंदगी आसान बनाई। तीन क्लिक और पांच सेकेंड में कमरा बुक कर सकते हैं।
  • मौजूदा स्टाफ से ही उम्दा काम के लिए स्टाफ की ट्रेनिंग पर भारी पैसा खर्च किया।
  • जरूरत के हिसाब से अपनी स्ट्रैटजी प्लान की। मसलन भारत में कपल्स को रूम मिलने में कठिनाई होती है। इसे देखते हुए OYO को कपल्स फ्रेंडली होटल की तरह प्रमोट किया।

फ्यूचर: IPO लॉन्चिंग से लेकर मल्टी बिजनेस तक

OYO रूम्स फिलहाल 68% मार्केट शेयर के साथ भारत की सबसे बड़ी होटल चेन है। इसके कंपटीटर्स में एयर बीएनबी, यात्रा, फैब होटल्स, क्लियर ट्रिप, बुकिंग.कॉम, ट्रीबो और मेक माय ट्रिप शामिल हैं।

भविष्य के लिए OYO ने मल्टी बिजनेस विस्तार किया है। जैसे- ओयो टाउनहॉल, ओयो वेडिंग्स, ओयो वर्कस्पेस। रितेश अग्रवाल का मानना है कि ये सभी हॉस्पिटैलिटी से जुड़े बिजनेस हैं।

इसके अलावा अगले हफ्ते OYO IPO लॉन्च के लिए भी आवेदन कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2021 के अंत तक कंपनी करीब 8 हजार करोड़ रुपए के IPO जारी कर सकती है।

हाल ही में एक इंटरव्यू में रितेश अग्रवाल ने बताया, 'मेरी मां को OYO रूम्स की सफलता पर बहुत वक्त तक भरोसा ही नहीं था, जब तक नरेंद्र मोदी ने मन की बात में इसका जिक्र नहीं किया। उन्हें यही लगता था कि मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करके कोई अच्छी नौकरी कर लेनी चाहिए।'