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जैसलमेर से 140 किलोमीटर दूर बॉर्डर टूरिज्म का रोमांच:यहां से पाकिस्तान महज 150 मीटर दूर, पढ़ें लाइव रिपोर्ट

जैसलमेर3 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

जैसलमेर से 140 किमी दूर बॉर्डर पॉइंट 609 पर नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन तैयार हो चुका है। यहां से पाकिस्तान की दूरी महज 150 मीटर है। गर्मी खत्म होते ही इसे टूरिस्ट के लिए खोल दिया जाएगा। सिर्फ 50 रुपए एंट्री फीस देकर टूरिस्ट भारत-पाक बॉर्डर घूम सकेंगे साथ ही पाकिस्तान का नजारा भी देख सकेंगे।

बॉर्डर के पास ही एक टॉवर बनाया गया है, जहां टूरिस्ट को जाने की परमीशन होगी। भास्कर रिपोर्टर ने BSF जवानों के साथ यहां एक दिन बिताया। पढ़िए और देखिए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

भास्कर रिपोर्टर के साथ पढ़िए बॉर्डर की लाइव रिपोर्ट...

BSF कमांडेंट कुलवंत राय शर्मा और डिप्टी कमांडेंट अनिल शर्मा के साथ मैं शाम 5 बजे तनोट माता मंदिर पहुंचा। यह वही मंदिर है, जहां 1971 में भारत-पाक युद्ध में चमत्कार हुआ था। पाकिस्तानी सेना ने हजारों बम गिराए थे, लेकिन एक भी बम मंदिर पर नहीं गिरा था।

इस चमत्कार के बाद से ही BSF जवानों में तनोट माता को लेकर बहुत विश्वास और श्रद्धा है। जो बम गिराए गए थे, वो मंदिर के संग्रहालय में आज भी भक्तों के देखने के लिए रखे गए हैं।

इस मंदिर में पूजा-पाठ से लेकर मेंटेनेन्स तक का पूरा जिम्मा BSF के ही हाथों में है। मंदिर से सटी हुई BSF की बॉर्डर आउटपोस्ट है। यहां से करीब 18 किमी दूर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर है।

हम 6 बजे के करीब बॉर्डर पर पहुंचे। बॉर्डर पर पहुंचते ही ऐसा लगा जैसे किसी टूरिस्ट प्लेस पर आ गए हों। बॉर्डर से कुछ दूरी पहले एक बड़ा एंंट्री गेट मिला। अंदर एंट्री करते ही ओपन स्टेडियम दिखा। इसी स्टेडियम में अब हर रोज रिट्रीट सेरेमनी होगी। यानी शाम को राष्ट्रध्वज उतारने का जो काम होता है, उसे भव्य तरीके से किया जाएगा।

कैफेटेरिया, ऑफिसर लाउंज, पार्किंग स्पेस और ऑब्जर्वेशन पॉइंट भी यहां बनकर तैयार हो चुके हैं। कमांडेंट शर्मा ने बताया, ऑब्जर्वेशन पॉइंट यानी ओपी पर टूरिस्ट चढ़ सकेंगे और पाकिस्तानी सरहद का नजारा ले सकेंगे। उन्हें पाकिस्तान के सैनिक भी नजर आएंगे। वहां की पोस्ट भी दिखेगी।

बॉर्डर पर कभी राइफल नहीं चल सकती...

जब हम इन जगहों का मौका मुआयना कर रहे थे, उसी वक्त BSF के जवान सरहद पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसमें पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं। BSF जवान 6-6 घंटे की दो शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं।

दिन में इनके हाथों में राइफल, पानी की बोतल के साथ ही बाइनाकुलर होता है तो रात में एक बड़ी टॉर्च। हालांकि बॉर्डर के तारों के पास बड़ी-बड़ी लाइट भी लगाई गई हैं, ताकि सरहद पार से होने वाली हर एक हलचल को पकड़ा जा सके।

बॉर्डर के तारों के बीच-बीच में BSF ने कई ऐसी चीजें लगा रखी हैं कि जरा सा भी इनके हिलने पर वे अलर्ट हो जाते हैं। कमांडेंट शर्मा कहते हैं, इस बॉर्डर पर कभी राइफल नहीं चल सकती। यदि चली तो समझ लीजिए कि जंग शुरू हो चुकी है।

4 हजार टूरिस्ट हर रोज आ सकेंगे...

मैंने कमांडेंट से पूछा आप बॉर्डर टूरिज्म क्यों शुरू करना चाहते हैं? तो वे बोले, इसके दो मकसद हैं। पहला, हम पीपल कनेक्ट चाहते हैं। लोगों को से जुड़ना चाहते हैं। उन्हें BSF के रोल के बारे में बताना चाहते हैं और बॉर्डर के बारे में सही जानकारी देना चाहते हैं।

दूसरा मकसद इकोनॉमी से जुड़ा है। टूरिस्ट के आने से इस क्षेत्र की इकोनॉमी बदलेगी। हमारा अनुमान है कि, हर रोज करीब 4 हजार टूरिस्ट यहां आएंगे। 50 रुपए फीस एक व्यक्ति से ली जाएगी। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं, कितना पैसा लोकल मार्केट में आएगा। गाड़ियों और होटलों की भी बुकिंग होगी। जिससे लोकल लोगों को फायदा होगा।

बॉर्डर से हम रात में करीब 8 बजे वापिस आ गए। फिर BSF जवानों के हाथों से बना खाना खाया। अगले दिन सुबह 5 बजे उठ गए, क्योंकि तनोट माता मंदिर में सुबह 6 बजे से आरती शुरू हो जाती है। कोई आए, चाहे न आए, पूजा-पाठ अपने तय समय पर ही होता है।

आरती में शामिल होने के बाद हम दोबारा बॉर्डर पर पहुंचे। तब हमें सुबह 6 बजे वाली शिफ्ट में आए जवान ड्यूटी करते मिले। कुछ ऊंटों पर थे, कुछ पैदल थे। सभी हाथों में राइफल लेकर मुस्तैदी के साथ घूम रहे थे।

हमारे पहुंचते ही कुछ टूरिस्ट भी पहुंचे। वे बॉर्डर देखने के लिए काफी रोमांचित थे। BSF के अफसरों ने उन्हें बॉर्डर के बारे में बताया। जवान कैसे सरहद की रक्षा करते हैं, ये भी बताया।

अभी तक 2 करोड़ रुपए खर्च हुए

बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में 2 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसे राज्य सरकार और BSF ने मिलकर खर्च किया है। तनोट माता मंदिर तक आने के लिए गाड़ियां अवेलेबल हैं, लेकिन तनोट माता मंदिर से बॉर्डर तक पहुंचने के लिए अभी पब्लिक व्हीकल अवेलेबल नहीं है।

राज्य सरकार यहां पब्लिक व्हीकल अवेलेबल करवाने पर काम कर रही है। हालांकि, प्राइवेट व्हीकल या बस बुक करके बॉर्डर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

लोंगेवाला, तनोट माता मंदिर, और भारत-पाक बॉर्डर

आपने बॉर्डर मूवी देखी है तो आपको लोंगेवाला का नाम याद होगा। 1971 में पाकिस्तान ने 2 हजार जवानों के साथ लोंगेवाला पोस्ट के जरिए भारत में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन पंजाब रेजिमेंट की 23वीं बटालियन की ए कंपनी के महज 120 जवानों ने पाकिस्तानियों को धूल चटा दी थी।

इसके बाद से ही लोंगेवाला पोस्ट फेमस है और यहां हजारों टूरिस्ट हर साल आते हैं। इससे कुछ ही दूर पर तनोट माता का मंदिर है। इसलिए लोंगेवाला, तनोट माता मंदिर और भारत-पाक बॉर्डर को मिलाकर टूरिज्म सर्किट तैयार किया गया है। कमांडेंट शर्मा ने ही इस प्रपोजल को सबसे पहले तैयार किया था।

अटारी-वाघा की तरह बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी नहीं होगी

BSF के टॉप सोर्सेज ने भास्कर को कंफर्म किया कि यहां अटारी-वाघा बॉर्डर की तरह बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी नहीं होगी, क्योंकि इस बारे में पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं हुई है। यहां सिर्फ रिट्रीट सेरेमनी होगी, जिसमें शाम को राष्ट्रध्वज नीचे उतारा जाएगा।

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