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आज की पॉजिटिव खबर:PCS क्रैक किया, लेकिन नौकरी नहीं की; अब बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर खेती से सालाना 20 लाख रुपए कमा रहे

बांदा, यूपी3 महीने पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव
यूपी के बांदा जिले के रहने वाले प्रेम प्रकाश सिंह पिछले 30 साल से खेती और बागवानी कर रहे हैं।

बुंदेलखंड का एक जिला बांदा। वही बुंदेलखंड जिसकी बंजर जमीनों की तस्वीरें आप अक्सर अखबारों में या टीवी पर देखते हैं। जहां पीने का पानी भी मालगाड़ी से आता है। जहां के किसान अपनी जमीनों को दूसरों के हवाले कर बड़े शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं, उसी बांदा के बड़ोखर गांव के किसान प्रेम सिंह पिछले 30 साल से खेती कर रहे हैं। और इससे हर साल 20 लाख रुपए कमा रहे हैं। आज उनसे खेती की ट्रेनिंग के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं।

PCS क्रैक किया, लेकिन नौकरी का मन नहीं किया, तो खेती शुरू की

किसानों को खेती के बारे में जानकारी देते हुए प्रेम सिंह। देशभर के 3 हजार से ज्यादा किसान हर साल उनके पास ट्रेनिंग के लिए आते हैं।
किसानों को खेती के बारे में जानकारी देते हुए प्रेम सिंह। देशभर के 3 हजार से ज्यादा किसान हर साल उनके पास ट्रेनिंग के लिए आते हैं।

बांदा से लगभग 15 किमी दूर प्रयागराज रोड पर बड़ोखर गांव है। गांव में लगभग 150 मीटर दूर चलते ही दाहिने हाथ पर एक बड़ा-सा घर है। छोटे से गेट से अंदर घुसते ही एक झोपड़ी के नीचे तख्त पर बैठकर प्रेम सिंह कुछ लोगों को खेती के बारे में जानकारी दे रहे हैं। भास्कर से बातचीत में प्रेम सिंह कहते हैं कि 1987 में मेरी पढ़ाई पूरी हुई। इसके बाद PCS क्रैक किया। उस समय सालाना कमाई 2 से ढाई लाख ही थी। तब नौकरी को बहुत अच्छी नजरों से समाज में देखा भी नहीं जाता था। इसलिए मैं घर लौट आया।

गांव आकर पिता जी से कहा कि मैं खेती करना चाहता हूं, तो उन्होंने कहा ठीक है खेत अब तुम संभालो। 1988 से 1992 तक मैंने खूब मेहनत की। हालांकि आमदनी उतनी नहीं हो रही थी। जब सालाना कमाई जोड़ता तो कुछ नहीं बचता था। सारा पैसा ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और खाद में खर्च हो जाता था। उस वक्त मुझे ये समझ आ रहा था कि कहीं कुछ तो गड़बड़ हो रही है, लेकिन क्या और कहां गड़बड़ हो रही है, यह समझ नहीं आ रहा था।

प्रेम सिंह अभी 25 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। उन्होंने एक हिस्से में बागवानी की है, दूसरे हिस्से में धान और गेहूं जबकि तीसरे हिस्से में सब्जियां लगाई हैं।
प्रेम सिंह अभी 25 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। उन्होंने एक हिस्से में बागवानी की है, दूसरे हिस्से में धान और गेहूं जबकि तीसरे हिस्से में सब्जियां लगाई हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग का फॉर्मूला अपनाया तो बदली किस्मत

प्रेम सिंह बताते है कि 1992 के बाद मैंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर दिया। मैंने अपने 25 एकड़ की जमीन को तीन हिस्से में बांटा। एक हिस्से में बाग लगाया, तालाब बनाया, दूसरे हिस्से में आनाज और तीसरे हिस्से में ऑर्गेनिक सब्जियों की खेती शुरू की। आज उनके बाग में आम, अमरूद, नींबू, आंवला जैसे प्लांट हैं। इससे वे प्रोसेसिंग के बाद आचार वगैरह तैयार करते हैं। जिस हिस्से में वे अनाज की खेती कर रहे हैं उसमें धान, गेहूं और दलहन फसलें उगाते हैं। साथ ही इससे वे मल्टी ग्रेन आटा, दलिया जैसे प्रोडक्ट भी तैयार करते हैं। इतना ही नहीं तालाब में उन्होंने मछली भी पाल रखी हैं। वे कहते हैं कि जब तक आप एक साथ एक से ज्यादा फसल नहीं लेंगे, तब तक अच्छी आमदनी नहीं हो सकती है। इसका एक बड़ा फायदा ये भी होता है कि अगर कोई फसल किसी साल खराब हो जाती है तो उसके नुकसान की भरपाई दूसरे फसल से हो जाती है।

​​​​​​18 देशों से किसान खेती के गुर सीखने आ चुके हैं

प्रेम सिंह की खेती को देखने के लिए विदेश से भी लोग आते हैं और उनसे फार्मिंग की ट्रेनिंग लेते हैं।
प्रेम सिंह की खेती को देखने के लिए विदेश से भी लोग आते हैं और उनसे फार्मिंग की ट्रेनिंग लेते हैं।

प्रेम सिंह बताते है कि देशभर से हर साल करीब 3 हजार से ज्यादा किसान उनके पास खेती की ट्रेनिंग के लिए आते हैं। इसके साथ ही अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया समेत करीब 18 देशों से लोग खेती के गुर सीखने के लिए उनके पास आते हैं। 59 साल की उम्र में भी प्रेम सिंह के चेहरे पर खेती की बात होते ही जो चमक आती है, वो उनकी सफलता का राज है। प्रेम सिंह ने अपने बगीचे में छोटे-छोटे डिजाइनर मिट्टी के घर बना रखे हैं। जहां उनके विदेशी मेहमान ठहरते हैं। साथ ही उन्होंने गाय, भैंस और बकरी भी पाल रखी है। वे कहते हैं कि खेती करते वक्त किसी एक पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

घर में ही बना रखा है फार्मर म्यूजियम

झोपड़ी के बगल में ही प्रेम सिंह ने एक बड़ा सा हॉल बना रखा है। उसमें किसानों से संबंधित इतिहास रखा गया है। प्रेम सिंह कहते है कि इस देश को सोने की चिड़िया बनाने का काम किसानों ने किया, लेकिन उनका कहीं कोई इतिहास नही है। मेरा सपना है कि मैं किसानों के इतिहास को दुनिया को बताऊं। इसलिए मैंने छोटा सा फार्मर म्यूजियम बनाया है। इसे एक दिन बहुत बड़ा करूंगा।

प्रेम सिंह ने अपने बगीचे में मिट्टी के कुछ घर बना रखे हैं, जहां उनके विदेशी मेहमान ठहरते हैं।
प्रेम सिंह ने अपने बगीचे में मिट्टी के कुछ घर बना रखे हैं, जहां उनके विदेशी मेहमान ठहरते हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग कैसे करें?

इंटीग्रेटेड फार्मिंग का मतलब है-एक समय में एक ही खेत में कई फसलों को उगाना। इसमें एक घटक को दूसरे घटक के उपयोग में लाया जा सकता है। जैसे अगर आप फलों और सब्जियों की खेती करते हैं तो आप गाय और भैंस भी पाल सकते हैं। आपको चारे की कमी नहीं होगी। दूसरी तरफ इन मवेशियों के गोबर का उपयोग ऑर्गेनिक खाद के रूप में किया जा सकता है। इससे कम लागत में अधिक कमाई होती है। साथ ही समय की भी बचत होती है।

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