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यूक्रेन में धड़धड़ाते रूसी टैंकों से लोगों की धड़कनें तेज:रूसी बॉर्डर से सटे शहरों से भाग रहे लोग, सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो से बढ़ा खौफ

9 महीने पहले

रूस और यूक्रेन के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है। इस बीच रूसी टैंकों के यूक्रेन में घुसने से लोगों की घबराहट और बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लगातार शेयर हो रहे वीडियो में खौफ का माहौल साफ दिख रहा है। बॉर्डर से सटे इलाकों से लोग यूक्रेन में अंदर की तरफ भाग रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने आज एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति पर फोकस किया जाएगा। रूस के रवैये से लोगों में ये भावना भी बढ़ रही है कि अब यूक्रेन को NATO से जुड़ ही जाना चाहिए।

आइए बताते हैं यूक्रेन में मौजूदा जमीनी हालात किस तरह पल पल बदल रहे हैं। उससे पहले आप पोल में शामिल होकर अपनी राय भी दे सकते हैं...

पुतिन के भाषण पर थीं यूक्रेनी जनता की भी निगाह
यूक्रेन के लोगों की नजरें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के भाषण पर गड़ी थीं और उनकी धड़कन भी तेज हो रहीं थीं। खौफ का ऐसा माहौल है कि लोग सो नहीं पा रहे हैं। एक तरफ रूस के टैंक और भारी सैन्य साजो सामान धड़धड़ाते हुए यूक्रेन की सीमा में घुस रहे हैं और दूसरी तरफ अब तक धैर्य रखे यूक्रेन के लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि आगे क्या होगा।

राजधानी कीव में मौजूद एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकार बताते हैं, "घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला है। आम लोग अब परेशान नजर आ रहे हैं। सड़कें खाली हैं और लोगों की नजरें टीवी चैनलों पर टिकी हैं।

रूस की सीमा से सटे खार्कीव और दूसरे शहरों में अफरातफरी का माहौल है। लोग पश्चिम की तरफ पलायन कर रहे हैं। मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले विदेशी छात्र देश लौट रहे हैं। खार्कीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने भास्कर को बताया, "यह स्थिति गंभीर है और अब हम सब लौट रहे हैं।" मंगलवार देर रात एयर इंडिया की एक फ्लाइट खार्कीव से करीब 242 भारतीय छात्रों को लेकर दिल्ली पहुंची है।

पूर्वी यूक्रेन के रूसी बॉर्डर से सटे शहरों के लोगों का पश्चिम की तरफ पलायन तेज हो गया है।
पूर्वी यूक्रेन के रूसी बॉर्डर से सटे शहरों के लोगों का पश्चिम की तरफ पलायन तेज हो गया है।

यूक्रेन सरकार ने तेज किया एक्शन प्लान
रूस ने यूक्रेन के दो अलगाववादी इलाकों लुहांस्क और डोनेट्स्क को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दे दी है और अपनी सेनाओं को संसद की मंजूरी से 'विदेशी धरती' पर भेज दिया है। इन हालात में यूक्रेन के लोगों को लग रहा है कि यूक्रेन के पास अब NATO की तरफ जाने के अलावा कोई दूसरा व्यवहारिक विकल्प नहीं बचा है।

मंगलवार देर रात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने देश को संबोधित किया और कहा कि इस संकट में यूक्रेन के सभी राजनीतिक दल एक हैं और उनका रंग पीला और नीला है। जेलेंस्की आज यूक्रेन के शीर्ष 50 कारोबारियों के साथ बैठक करेंगे और तय करेंगे कि मौजूदा संकट से कैसे निपटा जाए। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कारोबारियों को मुश्किल हालात में टैक्स में छूट देने की घोषणा भी की है, ताकि इस संकट के कारण इकोनॉमी संकट पैदा न हो।

विपक्षी नेताओं ने दिखाई सरकार के साथ एकजुटता
संकट के समय यूक्रेन के विपक्षी नेताओं ने सरकार के साथ एकजुटता दिखाई है। यूक्रेन के बड़े कारोबारी व विपक्षी नेतारिनात एखमेतोव ने अपना टैक्स एडवांस में ही जमा करा दिया है, ताकि इकोनॉमी को मदद मिले। बता दें कि एखमेतोव पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानूकोविच के समर्थक हैं।

यूक्रेन की पत्रकार नतालिया गुमेनयुक बता रही हैं कि तीन महीने पहले यूक्रेन की राजनीति गंदी थी, लेकिन अब सब एकजुट हैं। पूर्व में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों का विरोध करने वाले उद्योगपतियों ने भी अब यूक्रेन का समर्थन कर दिया है। हमेशा की तरह राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन को बांटना चाहा, लेकिन यूक्रेनी नागरिक अब मजबूती से एकजुट हो रहे हैं।"

यूक्रेन बॉर्डर पर रूसी टैंकों के हमले तेज हो गए हैं।
यूक्रेन बॉर्डर पर रूसी टैंकों के हमले तेज हो गए हैं।

दिसंबर में जब से यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ा, यूक्रेन की सरकार की तरफ से लोगों को यही कहा गया कि शांत रहें और अपना काम करते रहें। रूस के हमले की आशंका तो जाहिर की जा रही थी, लेकिन ये अंदाजा किसी को नहीं था कि घटनाक्रम इतनी तेजी से बदलेगा।

रूस समर्थित अलगाववादी लंबे समय से पूर्वी इलाकों को यूक्रेन से अलग करने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन की इन इलाकों को अलग देश की मान्यता देने की घोषणा के बाद अलगाववादी जश्न मनाने लगे। उनका जश्न लंबा नहीं चला है, क्योंकि इस एरिया में हिंसा शुरू हो गई है।

डोनेट्स्क में कभी भी छिड़ सकता है गृह युद्ध
डोनेट्स्क में अफरा-तफरी का माहौल है। वहां से सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे वीडियो में रूसी सेना तेजी से कब्जा किए गए इलाकों की तरफ बढ़ती दिख रही है। नतालिया कहती हैं, "पूर्वी यूक्रेन में बड़ी तादाद में जान-माल के नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।"

रूस ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वो स्वतंत्र घोषित प्रांतों के उन इलाकों पर भी नियंत्रण करेगा, जो विद्रोहियों के कब्जे में नहीं हैं। अभी रूस समर्थक अलगाववादियों के नियंत्रण में इन प्रांतों का एक तिहाई इलाका ही है। ऐसे में यहां भीषण संघर्ष होने की आशंका पैदा हो गई है।

नतालिया गुमेनयुक बताती हैं, "भारी ताकत के दम पर रूस कब्जा मुक्त इलाकों पर नियंत्रण कर सकता है। हालांकि 451 किलोमीटर लंबी संपर्क रेखा पर बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं और भारी किलेबंदी की गई है, बावजूद इसके रूस वायु सेना और नौसेना का इस्तेमाल तो कर ही सकता है।"

पूर्वी यूक्रेन में एक लंबे और विनाशकारी युद्ध की आशंका जाहिर करते हुए नतालिया कहती हैं, "रूस यूक्रेन को एक लंबे युद्ध में घसीट सकता है। जो कब खत्म होगा, अभी कहा नहीं जा सकता है।"

जैमर से ठप कर दी है इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं
अलगाववादियों के कब्जे वाले इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। अलगाववादी जैमर तकनीक का इस्तेमाल कर रह हैं, जिससे संपर्क कट रहा है। रूस की सेना की मौजूदगी पर नजर रख रहे एक थिंक टैंक से जुड़ी मार्गो गोंटार के मुताबिक, "सोमवार को तथाकथित लुहांस्क डोनेट्स्क पीपुल्ज रिपब्लिक से सटे यूक्रेन के नियंत्रण वाले इलाकों में मोबाइल सेवाएं प्रभावित हुईं थीं। सेना के सूत्रों के मुताबिक, अब मोबाइल नेटवर्क बहाल हो गए हैं और डोनेट्स्क में इंटरनेट शुरू हो गया है।"

वहीं, डोनेट्स्क के प्रमुख और ऐतिहासिक शहर मारियोपोल में स्वतंत्रता के समर्थन में लोग एकजुट हुए हैं और जश्न मनाया है।

यूक्रेन की जनता को याद आ रही 2013 की कार्रवाई
रूस के सैन्य बलों को लुहांस्क डोनेट्स्क पीपुल्ज रिपब्लिक में दाखिल होने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर हैं। यूक्रेन में लोग इन्हें टेलीग्राम, टिकटॉक और दूसरे सोशल नेटवर्क पर शेयर कर रहे हैं और इससे डर का माहौल पैदा हो रहा है।

मार्गो गोंटार कहती हैं, "यूक्रेन के बाहर रह रहे लोग ये नहीं समझ पाएंगे कि इन तस्वीरों को देखना कितना डरावना है। रूस ने इसी तरह 2013 में क्रीमिया को यूक्रेन से छीन लिया था और फिर पूर्वी यूक्रेन में भीषण गृहयुद्ध छिड़ गया था।"

पूरी दुनिया में रूस के खिलाफ और यूक्रेन के सपोर्ट में प्रोटेस्ट हो रहे हैं।
पूरी दुनिया में रूस के खिलाफ और यूक्रेन के सपोर्ट में प्रोटेस्ट हो रहे हैं।

बेलारूस और रूसी सेना के युद्धाभ्यास से भी चिंता
इसी बीच बेलारूस और रूसी सेनाओं का युद्धाभ्यास जारी है और इसे लेकर भी यूक्रेन में चिंता बढ़ रही है। यूक्रेन से सटे बेलारूस में रूस की सेनाओं की भारी मौजूदगी है। एक तरह से रूसी सैन्यबलों ने यूक्रेन को तीन तरफ से घेर रखा है। मंगलवार को यूक्रेन सीमा के नजदीक भारी तैनाती नजर आई है। सैटेलाइट कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजी ने तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें पश्चिमी रूस में, यूक्रेन की सीमा के निकट भारी तदाद में सैन्य साजो सामान नजर आ रहा है।

वहीं रूस स्थित हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के डिप्टी हेड ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस दिमित्रि नोविकोव कहते हैं, "डोनेट्स्क और लुहांस्क रिपब्लिक को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अधिकारिक तौर पर मान्यता मिलना दिसंबर में शुरू हुए मौजूदा संकट का एक संभावित नतीजा हो सकता है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने यूरोप में सुरक्षा की स्थिति को लेकर रूस की तरफ से पेश किए गए सुधारों को स्वीकार नहीं किया है। इससे ही मौजूदा संकट पैदा हुआ है।"

पुतिन के यूक्रेन पर आक्रामक रवैया अपनाने के बाद पश्चिमी देशों और अमेरिका ने रूस पर कई सख्त प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार भेजने का भरोसा भी दिया है। इसी बीच पेंटागन ने कहा है कि वह यूक्रेन के नजदीक अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगा। हालांकि, यूक्रेन ने कहा है कि उसने अभी अमेरिका से अपने सैनिक भेजने के लिए नहीं कहा है।

वहीं, दिमित्री का मानना है कि रूस मजबूरी में आक्रामक हो रहा है। वो कहते हैं, "रूस को मजबूर होकर हालात को एक नए स्तर पर ले जाना पड़ा है। इसके रूस के लिए बहुत अलग नतीजे हो सकते हैं। रूस को प्रतिबंधों की नई लहर का सामना करना पड़ सकता है।"

दिमित्री मानते हैं कि अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों का रूस पर गंभीर असर हो सकता है। वो कहते हैं, "ये प्रतिबंध रूस की अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।"

हालांकि अगर रणनीतिक नजरिए से देखा जाए तो इसका मतलब ये भी है कि यूक्रेन बहुत लंबे समय तक एक स्वतंत्र और अलग राष्ट्र बना रहेगा। रूस डोनेट्स्क और लुहांस्क के इलाकों में अपने सैनिक भेज रहा है। रह-रहकर यहां से झड़पों की रिपोर्ट आ रही हैं।

यूक्रेन के जमीनी हालात पर भास्कर संवाददाता पूनम कौशल ने पत्रकार नतालिया गुमेनयुक, थिंक टैंक से जुड़ी मार्गो गोंटार और रूस को लेकर रशियन एक्सपर्ट दिमित्रि नोविकोव से बात की है।