PFI पर एक छापा और फिर दि एंड:सरकार दिसंबर तक संगठन पर बैन लगा सकती है, इससे पहले सबूत जुटा रहीं एजेंसियां

2 महीने पहलेलेखक: आशीष राय

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। जांच एजेंसियां तो उसके खिलाफ ऑपरेशन ऑक्टोपस चला ही रही हैं, सरकार ने भी संगठन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है। यह फैसला पार्लियामेंट के विंटर सेशन तक लिया जा सकता है। संसद सत्र नवंबर या दिसंबर में शुरू होगा।

PFI पर टेरर फंडिंग से देश के कई शहरों में दंगे फैलाने और हत्याओं का आरोप है। केंद्र सरकार इसे प्रतिबंधित करने से पहले संगठन के बड़े पदाधिकारियों पर शिकंजा कसना चाह रही है। वह उनके फाइनेंशियल सोर्स ब्लॉक करना चाहती है। यही वजह है कि NIA के साथ ED भी ऑपरेशन में शामिल है। अब तक पदाधिकारियों पर दो रेड हो चुकी हैं। अगली और आखिरी बड़ी रेड कार्यकर्ताओं पर होगी।

केंद्रीय जांच एजेंसी से जुड़े सूत्र ने बताया कि सिर्फ देश ही नहीं, मिडिल ईस्ट देशों में भी सुरक्षा एजेंसी एक्टिव हैं। आने वाले वक्त में ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत विदेशों से भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सभी जांच एजेंसियां कई महीने से एक्शन प्लान पर तैयारी कर रही थीं।

PFI पर दो तरीके से लग सकता है प्रतिबंध

  • PFI को सरकार दो तरीके से प्रतिबंधित कर सकती है। पहला तरीका है गृह मंत्रालय सीधे इसे कुछ साल के लिए प्रतिबंधित घोषित कर दे और फिर बैन धीरे-धीरे बढ़ाया जाए। दूसरा तरीका यह है कि अदालत से इसे प्रतिबंधित घोषित करवाया जाए।
  • बैन लगाने के बाद कोर्ट में सबूतों की कमी से PFI फायदा न उठा ले, इसलिए जांच एजेंसियां पहले से पुख्ता सबूत जुटा लेना चाहती हैं। यही वजह है कि पकड़े गए ज्यादातर लोगों के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फोरेंसिक जांच करवाई जा रही है।

आगे बढ़ने से पहले आपके लिए एक सवाल...

PFI ने कहा- हमें निशाना बनाया जा रहा
अपने खिलाफ एक्शन के बाद PFI ने सोशल मीडिया पर पक्ष रखा। उसने कहा कि प्रिवेंटिव कस्टडी के नाम पर BJP शासित राज्यों में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हो रही हैं। यह और कुछ नहीं, बल्कि PFI को निशाना बनाने की केंद्र सरकार की कोशिश है। इस तरीके से लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को रोका जा रहा है।

प्रिवेंटिव कस्टडी का मतलब किसी व्यक्ति को इसलिए गिरफ्तार करना कि भविष्य में वह कोई बड़ी वारदात कर सकता है।

सेंट्रल एजेंसियों के साथ स्टेट पुलिस भी PFI के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल है। छोटे शहरों से भी संगठन के कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया गया है।
सेंट्रल एजेंसियों के साथ स्टेट पुलिस भी PFI के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल है। छोटे शहरों से भी संगठन के कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया गया है।

PFI के खिलाफ एक हफ्ते में दूसरी बार छापेमारी
22 सितंबर: NIA ने बीते गुरुवार आधी रात को 15 राज्यों में PFI के ठिकानों पर छापेमारी की थी। टेरर फंडिंग केस में की गई इस कार्रवाई में 106 लोगों को अरेस्ट किया गया। NIA और ED के 500 अफसर सर्च ऑपरेशन में शामिल रहे। यह छापेमारी उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, असम, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी और राजस्थान में चली।
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27 सितंबर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और ED ने मंगलवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर 8 राज्यों में छापेमारी की। उसके 170 कार्यकर्ताओं को अरेस्ट कर लिया। दिल्ली के शाहीन बाग से 30 लोगों को हिरासत में लिया गया है। महाराष्ट्र से 15, कर्नाटक से 6 और असम से 25 PFI कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया है। यूपी ATS ने गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर से 16 लोगों को उठाया है। मध्य प्रदेश में 8 जिलों से 22 संदिग्ध पकड़े गए हैं।
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भास्कर ने दो बार पहले भी बताया कि PFI पर एक्शन होने वाला है…
1. 9 अगस्त को बताया कि केंद्र ने बड़े एक्शन की तैयारी की

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर बड़े एक्शन की तैयारी अगस्त में ही हो गई थी। भास्कर ने इस बारे में 9 अगस्त को बता दिया था। यह प्लान 4 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह के बेंगलुरु दौरे के दौरान बना था। यहां अमित शाह ने कर्नाटक के CM बसव राज बोम्मई और राज्य के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र के बीच मीटिंग की थी। इसी मीटिंग में PFI को खत्म करने के लिए प्लान बनाने का फैसला हुआ। इसके 3 दिन बाद, यानी 7 अगस्त को प्लान पर काम करने के लिए टीम बना दी गई।
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2. 26 सितंबर को बताया कि ऑपरेशन ऑक्टोपस में दूसरी रेड जल्द होगी

ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत पहली कड़ी में 22 सितंबर को 106 PFI कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया गया था। ऑपरेशन में NIA, ED, 11 राज्यों की पुलिस, CRPF और ATS को शामिल किया गया। यह पहली बार था जब सभी एजेंसियों ने मिलकर PFI पर इतनी बड़ी कार्रवाई की है। हमने सूत्रों के हवाले से तभी बताया था कि ऑपरेशन का दूसरा फेज भी जल्द शुरू होगा। इसकी शुरुआत जल्द ही दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में हो सकती है।
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