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45 चेहरे जिन्होंने PFI को खड़ा किया:इनमें प्रोफेसर, वकील और कारोबारी भी, एक साल तक जांच एजेंसियां ट्रैक करती रहीं

2 महीने पहलेलेखक: आशीष राय

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI पर बुधवार को केंद्र सरकार ने 5 साल का बैन लगा दिया। देश भर में दो छापेमारी में मिले सबूतों के आधार पर ये फैसला लिया गया। हालांकि इसकी तैयारी बीते एक साल से चल रही थी। इस दौरान जांच एजेंसियां PFI की टॉप लीडरशिप में शामिल 45 लोगों पर नजर रखे रहीं।

इनमें से ज्यादातर संगठन के फाउंडर मेंबर थे। इनमें वकील, प्रोफेसर और कारोबारी शामिल हैं। संगठन का चेयरमैन ओएमए सलाम इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड का सस्पेंड कर्मचारी है, जबकि उपाध्यक्ष ईएम अब्दुल रहमान बिजनेसमैन, पी कोया गवर्नमेंट कॉलेज में लेक्चरर और खालिद मोहम्मद एडवोकेट है।

22 सितंबर को NIA ने PFI के खिलाफ 15 राज्यों में एक्शन शुरू किया। इस छापेमारी में सबसे पहले इन्हीं 45 लोगों को अरेस्ट किया गया। इनके जिम्मे नए सदस्य भर्ती करना, उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग देना, फंड जमा करना और सोशल मीडिया के जरिए PFI की विचारधारा को फैलाने का काम था।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद PFI से जुड़े
PFI में शामिल ज्यादातर लोग पहले स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी से जुड़े थे। सरकार ने 2001 में सिमी को आतंकवादी संगठन घोषित कर बैन लगा दिया था। इस बार प्रतिबंध से पहले जांच एजेंसियों ने PFI के पदाधिकारियों और बड़े कार्यकर्ताओं पर शिकंजा कसा।

केंद्र का इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट इनके खिलाफ एक साल से सबूत जमा कर रहा था। इनमें ज्यादातर पदाधिकारी और कार्यकर्ता केरल, कर्नाटक समेत दक्षिण के राज्यों में एक्टिव थे।

मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला और टेरर लिंक मिले
सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और मुखबिरों के जरिए PFI मेंबर्स से जुड़े टेरर लिंक के सबूत जमा किए। विदेशों में मौजूद इनके कनेक्शन को ट्रैक किया। पुख्ता सबूत मिलने के बाद ऑपरेशन ऑक्टोपस की पहली ही रेड में उन्हें अरेस्ट कर लिया। इनके मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला रैकेट में शामिल होने के भी सबूत हैं।

केरल और तमिलनाडु से सबसे ज्यादा पदाधिकारी अरेस्ट...

लगातार हत्याओं के बाद सरकार ने बनाया प्लान
मेंगलुरु में BJP के यूथ विंग से जुड़े प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र के साथ मीटिंग की थी। इसी मीटिंग में PFI पर बैन लगाने पर बात हुई थी।

दिल्ली लौटने के बाद अमित शाह ने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल के साथ ऑपरेशन ऑक्टोपस की रूपरेखा तैयार की। डोभाल ने पूरा प्लान PM नरेंद्र मोदी को भी ब्रीफ किया था। उनकी हां के बाद ही इसे एग्जीक्यूट किया गया।

कार्रवाई से पहले डोभाल ने राज्यों में मीटिंग की
महाराष्ट्र ATS से जुड़े एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि अजित डोभाल ने मुंबई में उनकी टीम के साथ राजभवन में मीटिंग की थी। इसमें कैसे ऑपरेशन में NIA और ED साथ मिलकर काम करेंगी, इसकी जानकारी दी गई थी। इसमें महाराष्ट्र के पुलिस अधिकारी शामिल थे। डोभाल ने ऐसी ही मीटिंग कर्नाटक और केरल समेत PFI की मौजूदगी वाले दूसरे राज्यों के अधिकारियों के साथ भी की।

जिनके आने-जाने पर रोक नहीं, उन्हीं को भर्ती किया
PFI में शामिल ज्यादातर लोग मैकेनिक, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मजदूर, बेकरी वाले, कबाड़ी, एसी रिपेयरिंग, टीचर, टेलर, पत्रकार और वकील थे। इनकी एंट्री घरों और मोहल्लों में सीधे होती है और कोई शक भी नहीं करता। इसलिए इन्हें टारगेट करके भर्ती किया जा रहा था। PFI में इन्हें कमांडर की पोस्ट मिली थी। ये संगठन से नए लोगों को जोड़ते थे।

3 संगठनों को मिलाकर बना PFI 15 साल में 20 राज्यों में पहुंचा
PFI की जड़ें 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए खड़े हुए आंदोलनों से जुड़ती हैं। 1994 में केरल में नेशनल डेवलपमेंट फंड (NDF) की स्थापना की गई थी। कर्नाटक में कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी यानी KFD और तमिलनाडु में मनिथा नीति पसाराई (MNP) नाम के संगठन मुसलमानों के लिए काम कर रहे थे।

नवंबर 2006 में दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद NDF और ये संगठन एक होकर PFI बन गए। 2009 में PFI ने अपने राजनीतिक दल SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) और छात्र संगठन CFI (कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) का गठन किया था। 15 साल में ही ये संगठन 20 राज्यों तक फैल गया।

सरकार ने कहा- इसकी गतिविधियों से सुरक्षा को खतरा

गृह मंत्रालय ने PFI और उससे जुड़े 8 संगठनों पर को बैन करने का नोटिफिकेशन जारी किया। यह एक्शन (अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट) UAPA के तहत लिया गया है। सरकार ने कहा कि PFI और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।

ये संगठन चुपके-चुपके देश के एक तबके में यह भावना जगा रहा था कि देश में असुरक्षा है और इसके जरिए वो कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा था।
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PFI के खिलाफ एक हफ्ते में दो बार छापेमारी
22 सितंबर: NIA ने इस दिन आधी रात को 15 राज्यों में PFI के ठिकानों पर छापेमारी की थी। टेरर फंडिंग केस में की गई इस कार्रवाई में 106 लोगों को अरेस्ट किया गया। NIA और ED के 500 अफसर सर्च ऑपरेशन में शामिल रहे। यह छापेमारी उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, असम, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी और राजस्थान में चली।पढ़ें पूरी खबर...

27 सितंबर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और ED ने 27 सितंबर को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर 8 राज्यों में छापेमारी की। उसके 170 कार्यकर्ताओं को अरेस्ट कर लिया। दिल्ली के शाहीन बाग से 30 लोगों को हिरासत में लिया गया। महाराष्ट्र से 15, कर्नाटक से 6 और असम से 25 PFI कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया है। यूपी ATS ने गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर से 16 लोगों को उठाया है। मध्य प्रदेश में 8 जिलों से 22 संदिग्ध पकड़े गए हैं।
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भास्कर ने दो बार पहले ही बताया कि PFI पर एक्शन होने वाला है…
1. 9 अगस्त को बताया कि केंद्र ने बड़े एक्शन की तैयारी की

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर बड़े एक्शन की तैयारी अगस्त में ही हो गई थी। भास्कर ने इस बारे में 9 अगस्त को बता दिया था। यह प्लान 4 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह के बेंगलुरु दौरे के दौरान बना था। यहां अमित शाह ने कर्नाटक के CM बसव राज बोम्मई और राज्य के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र के बीच मीटिंग की थी। इसी मीटिंग में PFI को खत्म करने के लिए प्लान बनाने का फैसला हुआ। इसके 3 दिन बाद, यानी 7 अगस्त को प्लान पर काम करने के लिए टीम बना दी गई।
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2. 26 सितंबर को बताया कि ऑपरेशन ऑक्टोपस में दूसरी रेड जल्द होगी

ऑपरेशन ऑक्टोपस के तहत पहली कड़ी में 22 सितंबर को 106 PFI कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया गया था। ऑपरेशन में NIA, ED, 11 राज्यों की पुलिस, CRPF और ATS को शामिल किया गया। यह पहली बार था जब सभी एजेंसियों ने मिलकर PFI पर इतनी बड़ी कार्रवाई की। हमने सूत्रों के हवाले से तभी बताया था कि ऑपरेशन का दूसरा फेज भी जल्द शुरू होगा। इसकी शुरुआत जल्द ही दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में हो सकती है।
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