लोन वुल्फ अटैक की प्लानिंग कर रहा था PFI:निशाने पर RSS-BJP के नेता, दशहरे पर होने वाले पथ संचलन की जानकारी जुटाई

4 महीने पहलेलेखक: आशीष राय

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI भारत में RSS और BJP नेताओं पर लोन वुल्फ अटैक की प्लानिंग कर रहा था। लोन वुल्फ अटैक यानी ऐसा हमला जिसमें एक ही शख्स शामिल हो। इस तरह के हमले का मकसद ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना होता है।

महाराष्ट्र ATS के सूत्रों ने बताया कि नेताओं के अलावा PFI के निशाने पर नागपुर का संघ मुख्यालय भी है । PFI के सदस्यों ने दशहरा पर होने वाले RSS के पथ संचलन की जानकारी जुटाई थी ।

लोन वुल्फ अटैक का पता लगाना मुश्किल
लोन वुल्फ अटैक में हमलावर का पता लगाना पुलिस के लिए मुश्किल होता है। इस हमले में फंडिंग, प्लान और बड़ी टीम की जरूरत नहीं होती। इसलिए ऐसे हमलों का पता लगाना और उसे नाकाम करना आसान नहीं होता। ज्यादातर ISIS के आतंकी इस तरह के हमले करते हैं। हमलावर इंटरनेट या किसी दूसरे जरिए से आतंकी संगठनों से जुड़े रहते हैं।

पिछड़े हिंदू PFI के टारगेट पर, जांच एजेंसियों ने शुरू किया ऑपरेशन ऑक्टोपस​​​​​​

टेरर फंडिंग और युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग देने के इनपुट मिलने के बाद NIA ने छापेमारी की थी। इसमें 100 से ज्यादा PFI मेंबर अरेस्ट किए गए थे।
टेरर फंडिंग और युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग देने के इनपुट मिलने के बाद NIA ने छापेमारी की थी। इसमें 100 से ज्यादा PFI मेंबर अरेस्ट किए गए थे।

PFI ने 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का प्लान तैयार किया है। उसका मानना है कि पढ़े-लिखे और संपन्न मुसलमान कभी साथ खड़े नहीं होंगे, इसलिए उसके टारगेट पर पसमांदा या आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम और सामाजिक तौर पर पिछड़े हिंदू हैं। ये दावा गृह मंत्रालय की खुफिया रिपोर्ट में किया गया है।

ये रिपोर्ट सभी सेंट्रल एजेंसियों से शेयर की गई है। इसी के बाद PFI पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने एजेंसियों के साथ मिलकर ऑपरेशन ऑक्टोपस शुरू किया। ऑपरेशन में NIA, ED, 11 राज्यों की पुलिस, CRPF और ATS को शामिल किया गया।

पहली कड़ी में 22 सितंबर को 11 राज्यों में 96 जगहों पर रेड हुई और 106 से ज्यादा PFI कार्यकर्ताओं को अरेस्ट किया गया। यह पहली बार है जब सभी एजेंसियों ने मिलकर PFI पर इतनी बड़ी कार्रवाई की है। दूसरी कड़ी की शुरुआत जल्द ही दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में हो सकती है।

एक अधिकारी ने हमें बताया PFI का प्लान
भास्कर को गृह मंत्रालय की ये खुफिया रिपोर्ट मिली है। इसमें मिशन-2047 का डिटेल प्लान और इसे कैसे पूरा किया जाना है, इसकी जानकारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, PFI का प्लान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छवि खराब कर देश की 60% आबादी को उसके खिलाफ करना है। इस 60% में से 50% SC/ST और OBC समुदाय के लोग और 10% मुस्लिम हैं।

विदेशों से NRI अकाउंट में भेजा जा रहा पैसा
ऑपरेशन ऑक्टोपस की पहली रेड में खुलासा हुआ है कि PFI के पास बड़े पैमाने पर विदेशों से पैसा आ रहा है। ED ने भी कोर्ट में कहा है कि भारत से बाहर रह रहे PFI के सदस्य भारत में अपने NRI अकाउंट्स में पैसे भेज रहे थे। फॉरेन फंडिंग रेगुलेशन लॉ से बचने के लिए उन्हें संगठन के नेताओं को ट्रांसफर किया गया।

अक्सर UAE जाते हैं PFI के नेता
NIA ने कोर्ट में दी रिमांड एप्लिकेशन में बताया है कि केरल के जमात-ए-इस्लामी, PFI, उसके सहयोगी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के नेता अक्सर संयुक्त अरब अमीरात जाते हैं। वे ज्यादातर अबू धाबी और दुबई का टूर करते हैं। अमीरात इंडिया फ्रेटरनिटी फोरम (EIFF) और इंडियन कल्चरल सोसाइटी (ICS) के कर्नाटक चैप्टर दुबई में PFI के फ्रंट के तौर पर काम कर रहे हैं।

रियल एस्टेट और मनी लॉन्ड्रिंग फंडिंग का जरिया
PFI कथित तौर पर हवाला के जरिए भारत में पैसे मंगवा रहा है। संगठन के लोग रियल एस्टेट में भी बड़ी मात्रा में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, केरल के चावाकाडु जिले में PFI से जुड़ा एक बिल्डर अबु धाबी में रियल एस्टेट में इन्वेस्ट कर रहा है। इसके अलावा PFI से जुड़े लोग ‘कार रेंट’ के बिजनेस में भी हैं। केरल में इनका बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

हज के नाम पर भी जमा होती है फंडिंग
सऊदी अरब में PFI, ISF और IFF के नाम से एक्टिव है। हज के वक्त भारतीयों की मदद के नाम पर संगठन बड़ी रकम जुटाता है। यही पैसा हवाला और गोल्ड स्मगलिंग के जरिए भारत लाया जाता है। PFI यहां कानूनी मदद और कम्युनिटी सर्विस के नाम पर ई-वॉलेट के जरिए भी फंड भेजता है।

ओमान में सोशल फोरम नाम से संगठन
PFI, ISF और IFF के साथ मिलकर ओमान में सोशल फोरम नाम से काम करता है। PFI की केरल शाखा, नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) भी ओमान में एक्टिव है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि इसने हवाला के जरिए PFI को 44 लाख रुपए भेजे हैं। ओमान में NDF और PFI के लीडर अशफाख चैकीनाकथ पुयिल को फंड जमा करने का जिम्मा सौंपा गया है। ये पैसे ‘रिहैब इंडिया फाउंडेशन’ नाम की संस्था के जरिए PFI तक पहुंचाए जाते है।

स्टूडेंट के जरिए तुर्की में जड़ें जमाईं
खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय छात्रों की मदद से PFI ने तुर्की में जड़ें जमा ली हैं। उसने नौशाद नाम के एक स्टूडेंट को सबाहैतिन जैम यूनिवर्सिटी में PHD करने के लिए तुर्की भेजा। वह वहां PFI के लिए फंडिंग जुटा रहा था।

कुवैत में KISF के नाम से एक्टिव
कुवैत इंडियन सोशल फोरम (KISF), PFI का शेल ऑर्गेनाइजेशन है। यह सालाना सदस्यता के नाम पर लोगों से पैसे लेता है। उसका दावा है कि पैसे जुटाने का मकसद मुस्लिम हितों की मदद करना है। यह ग्रुप कुवैत के अमीर कर्मचारियों और कारोबारियों को टारगेट करता है। उन्हें बाद में हिंसा और बाबरी मस्जिद तोड़ने के वीडियो दिखाकर कट्टरपंथी बना दिया जाता है।

ओमान में CF के नाम से काम कर रहा PFI
ओमान में PFI, कल्चरल फोरम नाम से चलता है। इससे मलयाली समुदाय के लोग जुड़े हैं। ये संगठन सीरिया में इस्लामिक स्टेट के समर्थक थे। इनमें से एक मुहम्मद फहीमी, सीरिया में ISIS नेटवर्क को गाड़ियां बेचता था। ISF, IFF और CF कतर में बसे भारतीयों से PFI और SDPI के नाम पर पैसे जुटाता है।

PFI अपने सदस्यों का रिकॉर्ड नहीं रखता
PFI अपने सदस्यों का रिकॉर्ड नहीं रखता। इसलिए एजेंसियों को कार्रवाई करने में दिक्कत आती है। हाल में हुई कार्रवाई के बाद हमने PFI के कई पदाधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन ज्यादातर के नंबर बंद आए। संगठन की आधिकारिक वेबसाइट http://www.popularfrontindia.org/ भी ओपन नहीं हो रही है। इनके सभी सोशल मीडिया अकाउंट 23 सितंबर के बाद से इनएक्टिव हैं।

हमने PFI का पक्ष जानने के लिए संगठन के पुणे सेक्रेटरी मोहम्मद आबिद से बात की और तीन सवाल पूछे…

1. क्या PFI का प्लान भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का है?
जवाब : संगठन पहले ही साफ कर चुका है कि इस्लामिक राष्ट्र की बात हमने सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लेकर कही थी। हम देश को मजबूत करने की बात कह रहे थे। उसके लिए एक रोडमैप बनाया गया था। मुस्लिम राष्ट्र बनाने की बात को गलत ढंग से मीडिया ने पेश किया है। 14% का समुदाय कैसे एक देश को मुस्लिम राष्ट्र बना सकता है।

2. आरोप लगते हैं कि आपका संगठन युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दे रहा है?
जवाब: यह बिल्कुल गलत बात है। PFI सिर्फ सामाजिक कामों से जुड़ा है। हमने कभी हिंसा को सपोर्ट नहीं किया। न कभी सुना कि हमारे यहां किसी को हथियारों की ट्रेनिंग दी गई हो। यह सिर्फ अफवाह है।

3. क्या PFI को विदेशों से फंडिंग हो रही है?
जवाब: हमारी एक सामाजिक संस्था है, जिसने कोरोना काल में बहुत काम किया था। हमने लोगों के घरों तक PPE किट और दवाएं भेंजी। इसके लिए लोगों ने चंदा देकर मदद की। इनमें कई विदेशों में रहते हैं। हमारे पास हर चंदे का हिसाब है। अगर कुछ गलत करेंगे, तो हम पर कार्रवाई होगी।

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1. भास्कर ने बताया था PFI पर एक्शन का प्लान, केंद्र ने 4 अगस्त को लिया था कार्रवाई का फैसला

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने गुरुवार आधी रात के बाद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ठिकानों पर छापा मारा था। केंद्र सरकार PFI पर एक्शन की तैयारी कर रही है, भास्कर ने इस बारे में 9 अगस्त को ही बता दिया था। यह प्लान 4 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह के बेंगलुरु दौरे के दौरान बना था। यहां अमित शाह, कर्नाटक के CM बसव राज बोम्मई और राज्य के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र के बीच मीटिंग हुई थी।
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2. दंगों से हत्या तक में PFI का नाम, रडार पर होने के बावजूद बैन नहीं

देश भर में PFI पर रेड और केरल में हिंसक प्रदर्शन के बाद संगठन फिर चर्चा में हैं। देश के कई शहरों में सांप्रदायिक हिंसा और हत्याओं में PFI का नाम आया था। केरल हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में PFI को ‘चरमपंथी संगठन’ बताया था। हिंदूवादी संगठन पहले से PFI पर बैन लगाने की मांग करते रहे हैं। जांच एजेंसियों की रडार पर होने के बावजूद अब तक झारखंड के अलावा कहीं भी PFI पर बैन नहीं लगा है।
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