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कोरोना पर बने PM केयर्स फंड की कहानी:2 महीने में ही आ गए थे 9690 करोड़ रु; अब तक खर्च कर पाए केवल 5300 करोड़, ऐसा फंड जिस पर सवाल भी नहीं कर सकते

भोपाल2 महीने पहले

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल में एक ट्वीट में PM केयर्स फंड पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, 'ना टेस्ट हैं, ना हॉस्पिटल में बेड, ना वेंटिलेटर हैं, ना ऑक्सीजन, वैक्सीन भी नहीं है, बस एक उत्सव का ढोंग है। PMCares?' इसके बाद ट्विटर पर #PMCares टॉप ट्रेंड में आ गया। इसमें सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे और जमकर बहस की। उन बहसों से इतर हम यहां अब तक PM केयर्स फंड को लेकर जो पुख्ता आंकड़े सामने आए हैं, उन्हें बता रहे हैं-

क्यों बना था PM केयर्स फंड?
27 मार्च 2020 को भारत सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए PM केयर्स फंड बनाया था। इसमें आम लोग अपनी इच्छा के मुताबिक डोनेट कर सकते हैं। इसमें चार सदस्य हैं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। इस फंड को खर्च करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है।

कितना पैसा आया?
PM केयर्स फंड में अब भी डोनेट किया जा सकता है। इसको लेकर सरकार ने कोई आंकड़ा अब तक जारी नहीं किया है। यह फंड सूचना के अधिकार यानी RTI के दायरे में भी नहीं आता। लेकिन 28 मार्च को PM मोदी की ओर से ट्वीट के बाद डोनेट करने वालों ने इसका सार्वजनिक ऐलान करना शुरू कर दिया था।

4 जून तक जिन लोगों ने अपने डोनेशन सार्वजनिक किए, वे पैसे कुल 9,690 करोड़ रुपए थे। इसका विवरण हमने नीचे ग्राफिक में दिया है-

कहां-कहां खर्च हो रहे हैं PM केयर्स के पैसे
खर्च 1:
PMO ने 13 मई 2020 को 3100 करोड़ रुपए के खर्च की जानकारी दी थी। इसके अनुसार, 2 हजार करोड़ रुपए से 50 हजार मेड इन इंडिया वेंटिलेटर खरीदने की बात हुई। उस वक्त देश में सबसे ज्यादा वेंटिलेटर की कमी थी। महामारी से पहले तक हर साल महज 3360 वेंटिलेटर बन रहे थे।

खर्च 2: महामारी की दूसरी सबसे बड़ी समस्या प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचने को लेकर हुई। इसलिए एक हजार करोड़ रुपए प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए तय किए गए।

खर्च 3: सबसे बड़ी चुनौती वैक्सीन थी। तब 100 करोड़ रुपए वैक्सीन की रिसर्च पर खर्च करने की बात की गई।

खर्च 4: 2 फरवरी 2021 को PM केयर्स फंड के खर्चों के सचिव टीवी सोमनाथन ने बताया कि PM केयर्स फंड से कोरोना वैक्सीन लगाने के पहले चरण का 80% खर्च निर्वहन किया जा रहा है। इसके तहत 2,200 करोड़ खर्च होने का अनुमान था। असल में साल 2020 के बजट में कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए कोई बजट नहीं आवंटित नहीं किया गया था। इसलिए जनवरी से लेकर मार्च 2021 के बीच कोरोना वैक्सीन लगाने का जो खर्च आया उसे PM केयर्स फंड से दिया गया।

खर्च 5: कोरोना की दूसरी लहर आने पर सबसे ज्यादा परेशनी की खबरें ऑक्सीजन की कमी की आईं। अब PM केयर्स फंड से 12 राज्यों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के 100 अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएंगे और 50 हजार मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का आयात भी किया जाएगा।

वेंटिलेटर पर हुए खर्च पर उठ रहा है सवाल
अगस्त 2020 में एक RTI के जवाब में हेल्थ मिनिस्ट्री ने बताया कि आंध्र सरकार की कंपनी AMTZ और गुजरात की निजी कंपनी ज्योति CNC के बनाए वेंटिलेटर्स क्लिनिकल ट्रायल में फेल हो गए हैं। ये वहीं कंपनियां हैं, जिन्हें PM केयरर्स फंड के पैसे पर वेंटिलेटर्स बनाने का कॉण्ट्रैक्‍ट दिया गया था।

ज्योति CNC को 121 करोड़ में 5000 वेंटिलेटर और AMTZ को 500 करोड़ रुपए में 13,500 वेंटिलेटर बनाने थे। इससे पहले PM केयर्स फंड से नोएडा की AgVa को 10,000 वेंटिलेटर बनाने का कॉण्ट्रैक्ट दिए जाने और इसके दो क्लिनिकल ट्रायल फेल होने की खबरें भी आई थीं। बाद में काम जारी रहा।

हाल ही में AgVa के CEO दिवाकर वैश ने कहा था, 'सरकार के ऑर्डर पर हमने 10 हजार वेंटिलेटर बना दिए हैं। लेकिन एक साल बाद भी सरकार पांच हजार डिवाइस ही उठा पाई है। पांच हजार अब भी हमारे गोदाम में पड़े हैं।'

बाद में सरकारी कम्पनी HLL के 13,500 वेंटिलेटर के कॉण्ट्रैक्ट को घटाकर 10,000 किया गया। और चेन्नई की कंपनी Trivitron को 3000 एडवांस और 7000 बेसिक वेंटिलेटर बनाने का काम दिया गया। इसके लिए 373 करोड़ रुपए देने की बात तय हुई।

जानकारी के अनुसार Trivitron ने वेंटिलेटर बनाए। लेकिन AMTZ और HLL के बीच टेंडर वापिस लेने को लेकर बात उलझ गई और एक भी वेंटिलेटर सप्लाई नहीं हुआ।

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