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आज की पॉजिटिव खबर:रोड एक्सीडेंट रोकने के लिए 3 दोस्तों ने तैयार किया AI डिवाइस; ड्राइविंग के वक्त झपकी आने पर करेगा अलर्ट

एक वर्ष पहलेलेखक: सुनीता सिंह

वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल भारत में करीब साढ़े चार लाख रोड एक्सीडेंट होते हैं। इनमें तकरीबन डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। इस तरह हर घंटे 53 रोड एक्सीडेंट और हर चार मिनट में एक मौत होती है। 70% से ज्यादा एक्सीडेंट, शराब पीकर गाड़ी चलाने, गाड़ी चलाते समय फोन का इस्तेमाल करने, झपकी के कारण या किसी भी तरह की असावधानी के कारण होता है।

एक ऐसे ही एक्सीडेंट से दुखी विशाखापट्नम के तीन दोस्तों ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पावर्ड डिवाइस तैयार की है। जो गाड़ी चलाते वक्त ड्राइवर को अलर्ट करके एक्सीडेंट होने से बचाएगा। इन तीन दोस्तों से दो साल लगातार रिसर्च करने के बाद डिवाइस ‘K-Shield’ बनाया। ये डिवाइस गाड़ी की लोकेशन, ड्राइविंग पैटर्न और स्पीड लाइव मॉनिटर करेगा और अलर्ट करेगा।

आज की पॉजिटिव खबर में जानते हैं विशाखापट्नम के तीन दोस्तों और उनके इनोवेशन के बारे में …

बसों के एक्सीडेंट से दुखी दोस्तों ने बनाया अनोखा डिवाइस

के.प्रदीप वर्मा ने अपने स्टार्टअप को 'Kshemin Labs' नाम से शुरू किया है। जनवरी 2022 से इनके प्रोडक्ट मार्केट में मिलने लगेंगे।
के.प्रदीप वर्मा ने अपने स्टार्टअप को 'Kshemin Labs' नाम से शुरू किया है। जनवरी 2022 से इनके प्रोडक्ट मार्केट में मिलने लगेंगे।

2017 में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम में गाड़ी चलाते समय ड्राइवर को नींद आ जाने की वजह से दो बसों के बीच गंभीर हादसा हुआ। जिसमें एक बस में टूरिस्ट सवार थे तो दूसरी बस में स्कूली बच्चें और टीचर। इस हादसे में कई लोगों की जान गयी। इस हादसे ने विशाखापट्नम के गायत्री विद्या परिषद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में पढ़ रहे तीन छात्रों को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद तीनों ने तय किया कि वो इसका कोई समाधान जरूर निकालेंगे।

22 साल के के. प्रदीप वर्मा, के. रतन रोहित (23) और के. ज्ञान साईं (23) तीनों तब कॉलेज में सेकंड ईयर में पढ़ाई कर रहे थे।

के. प्रदीप बताते हैं, इस तरह के एक्सीडेंट को रोकने, इसका समाधान निकलने के लिए हमने कई रिसर्च किए। रिसर्च से पता चला ज्यादातर एक्सीडेंट का कारण ड्राइवर का गाड़ी चलाते समय असावधान होना है। करीब 70% से ज्यादा एक्सीडेंट ड्राइविंग के समय नींद आने, मोबाइल के इस्तेमाल करने या कई बार शराब पीकर गाड़ी चलाने से होता है। हमने इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए ‘के.शील्ड’ बनाया।

दो साल रिसर्च करने के बाद के. शील्ड बनाया

के.शील्ड एक तरह का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड डिवाइस है। जिसमें इंडस्ट्रियल ग्रेड कैमरे लगाए गए हैं, ताकि ड्राइवर के साथ-साथ सड़क पर भी नजर रखी जा सके।
के.शील्ड एक तरह का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड डिवाइस है। जिसमें इंडस्ट्रियल ग्रेड कैमरे लगाए गए हैं, ताकि ड्राइवर के साथ-साथ सड़क पर भी नजर रखी जा सके।

प्रदीप के अनुसार के. शील्ड एक ऐसा सिस्टम है जो ड्राइवर और सड़क, दोनों की निगरानी एक साथ करेगा। यह एक तरह का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड डिवाइस है, जिसमें इंडस्ट्रियल ग्रेड कैमरे लगाए गए हैं, ताकि ड्राइवर के साथ-साथ सड़क पर भी नजर रखी जा सके।

भास्कर से बात करते हुए के. प्रदीप बताते हैं, “कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही हमने रिसर्च करना शुरू कर दिया था। रिसर्च के लिए हम तीनों ने कुछ फंड जमा किया, इसके साथ कॉलेज की भी सुविधाओं की मदद ली। तकरीबन दो साल तक रिसर्च के बाद हमने फाइनल डिवाइस तैयार किया।”

के. प्रदीप बताते हैं, “हमने अपने डिवाइस का नाम ‘के. शील्ड’,में ‘के’ तीनों दोस्तों के नाम के पहले अक्षर पर रखा है। जबकि ‘शील्ड’ ड्राइवर के लिए एक कवच का काम करेगा इसलिए शील्ड रखा है।

हेड मूवमेंट पर काम करता है ये डिवाइस

इस डिवाइस का सारा डेटा, क्लाउड पर अपलोड किया जाता है और फिर इसकी सारी जानकारी को ऐप के जरिए एक्सेस की जा सकती है।
इस डिवाइस का सारा डेटा, क्लाउड पर अपलोड किया जाता है और फिर इसकी सारी जानकारी को ऐप के जरिए एक्सेस की जा सकती है।

प्रदीप बताते हैं के.शील्ड में AI पावर्ड कैमरे हैं, जिसे ड्राइवर के पलक झपकने और हेड मूवमेंट की स्पीड पर निगरानी रखने के लिए प्रोग्राम किया गया है। वे कहते हैं, “ये डिवाइस ड्राइवर की स्लीप पैटर्न को ट्रेस करता है। अगर पलक झपकने की स्पीड धीमी पड़ती है, तो इसका सीधा सा मतलब है ड्राइवर सोने वाला है। ऐसी स्थिति में ड्राइवर को अलर्ट करने के लिए डिवाइस अलार्म बजेगा। ड्राइवर के माइक्रो स्लीप पैटर्न को भी ट्रेस करने के लिए भी इसे प्रोग्राम किया गया है।

माइक्रो स्लीप पैटर्न, यह निर्धारित करता है कि कोई व्यक्ति कितने सेकंड के लिए बिना रियलाइजेशन के सो रहा है। यह सिस्टम पूरी तरह से इंटरनेट से जुड़ा हुआ है। इसमें लोकेशन ट्रैक करने के लिए GPS भी लगाया गया है।”

प्रदीप आगे बताते हैं इस डिवाइस का सारा डेटा, क्लाउड पर अपलोड किया जाता है और फिर इसकी सारी जानकारी को ऐप के जरिए एक्सेस की जा सकती है। इसके अलावा, ड्राइवर सुरक्षित तरीके से गाड़ी चला रहा है या नहीं, गाड़ी के इंजन की स्थिति, गाड़ी का लोकेशन और स्पीड की जानकारी भी ऐप देता है। साथ ही यह ड्राइविंग को बेहतर बनाने के तरीके भी बताता है।

गाड़ियों के मालिक भी रख पाएंगे चलती गाड़ियों पर निगरानी

अगर किसी के पास एक से ज्यादा गाड़ियां हैं, या उसकी गाड़ी कोई और चला रहा है तो घर बैठे गाड़ी की जानकारी ले सकेगा।
अगर किसी के पास एक से ज्यादा गाड़ियां हैं, या उसकी गाड़ी कोई और चला रहा है तो घर बैठे गाड़ी की जानकारी ले सकेगा।

प्रदीप के अनुसार इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिवाइस में जीपीएस लगे हैं जो नॉर्मल GPS से कहीं ज्यादा एडवांस है।

इस डिवाइस को ऐप के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। अगर किसी के पास एक से ज्यादा गाड़ियां हैं या उसकी गाड़ी कोई और चला रहा है तो घर बैठे गाड़ी की जानकारी ले सकेगा। ऐप में गाड़ी की लोकेशन और ड्राइवर का लाइव वीडियो देखा जा सकता है। इसके अलावा ड्राइवर की स्पीड और गाड़ी के इंजन की भी जानकारी मिल सकेगी।

2010 के बाद बनाने वाली सभी गाड़ियों में OBD (On-Board Diagnostics) ट्रैकर लगा होता है। जो गाड़ियों के परफॉरमेंस को ट्रैक और रेगुलेट दोनों करता है। के शील्ड में ब्लूटूथ लगा है जो OBD से कनेक्ट हो जाता है। जिससे इंजन का तापमान, इंजन लोड और इंजन का RPM सहित तकरीबन 30 तरह के पैरामीटर की जानकारी देता है। और इन सभी जानकारी को ऐप पर देखा जा सकता है।”

सराहना और समर्थन दोनों मिल रहा है

के. रतन रोहित (L) और के. ज्ञान साईं (R) के डिवाइस को पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने काफी सराहा है।
के. रतन रोहित (L) और के. ज्ञान साईं (R) के डिवाइस को पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने काफी सराहा है।

प्रदीप के अनुसार उनके डिवाइस को कई जगहों से सराहना और समर्थन दोनों मिल रहा है। प्रदीप बताते हैं, “हमें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पुणे से सपोर्ट मिल रहा है। जो हमारे स्टार्टअप को बिल्ड करने में मदद करेंगे। इसके अलावा टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी हमारे डिवाइस को डेवलप करने में हमारी मदद करेंगे। डिवाइस की टेस्टिंग के लिए फिलहाल इंटरनेशनल स्कूल और राज्य परिवहन के साथ बातचीत चल रही है

2018 में हमने इंटरनेशनल इनोवेशन फेयर में गोल्ड मेडल जीता था। और हमारे इनोवेशन को पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने काफी सराहा था। हमें इनोवेशन और इसके कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए बहुत सपोर्ट मिला है।”

के शील्ड को लेकर कई लोगों की डिमांड आ रही है। जनवरी 2022 से ये मार्केट में मिलना शुरू हो जाएगा।