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आज की पॉजिटिव खबर:बिहार के प्रितेश ने दो साल पहले स्टार्टअप कम्युनिटी मॉडल पर काम करना शुरू किया, अब इयरली रेवेन्यू है 75 लाख रुपए

पटनाएक महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले प्रितेश आनंद बचपन से ही खुद का कुछ करना चाहते थे। कॉलेज के दौरान अक्सर वे स्टार्टअप्स को लेकर स्टोरीज पढ़ते रहते थे, लेकिन कुछ तय नहीं कर पा रहे थे कि क्या शुरू किया जाए। 2011 में नोएडा से MBA करने के बाद उनकी जॉब लग गई। फाइनेंस और हाउसिंग सेक्टर में उन्होंने करीब 3 साल तक काम किया, लेकिन उनका मन नहीं लगा। आखिरकार 2014 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पटना में खुद का बिजनेस शुरू किया।

पहले वे नए स्टार्टअप्स के लिए बिजनेस आइडिया और डिजिटल सर्विस उपलब्ध कराने का काम करते थे। 2019 में उन्होंने स्टार्टअप कम्युनिटी मॉडल यानी नए स्टार्टअप के लिए वर्कस्पेस प्रोवाइड कराने के साथ-साथ नेटवर्क और मार्केट बिल्डिंग का भी काम शुरू कर दिया। अभी 100 के करीब उनके क्लाइंट्स हैं और उनकी कंपनी का रेवेन्यू 75 लाख रुपए सालाना है।

31 साल के प्रितेश कहते हैं कि मुझे बिहार के लिए कुछ करना था। हमेशा मन में ये चीज खटकती रहती थी कि बड़े शहरों में ही स्टार्टअप क्यों हैं? हम अपने यहां और अपने लोगों के लिए कुछ क्यों नहीं कर सकते? बस इसी सोच के साथ मैंने अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

31 साल के प्रितेश स्टार्टअप की शुरुआत करने से पहले तीन साल तक फाइनेंस सेक्टर में नौकरी कर चुके हैं।
31 साल के प्रितेश स्टार्टअप की शुरुआत करने से पहले तीन साल तक फाइनेंस सेक्टर में नौकरी कर चुके हैं।

आसान नहीं रहा स्टार्टअप का सफर

प्रितेश कहते हैं कि शुरुआत में हमें काफी संघर्ष करना पड़ा। यहां बहुत कम लोग स्टार्टअप के बारे में जानते थे और उससे भी कम लोग दिलचस्पी रखते थे। इसलिए पहले स्टार्टअप का इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी था। इसके लिए मैं घंटों काम करता था। स्कूल और कॉलेजों में जाकर स्टूडेंट्स को स्टार्टअप के लिए मोटिवेट करता था, उन्हें गाइड करता था। लोगों को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट (IPR) और कंपनी रजिस्टर करने की प्रॉसेस के बारे में समझाता था। कई लोग बिना कंपनी रजिस्टर किए और बिना लाइसेंस के ही काम शुरू कर देते थे। जो ठीक नहीं है। ऐसे लोगों को गाइड करता था।

बाद में दो और दोस्त हमारे साथ जुड़ गए। इसके बाद हमारे काम की रफ्तार बढ़ गई। हम मार्केट को समझ गए। तो हमने 2018 में बिहार के वैशाली में एक इन्क्यूबेशन सेंटर लॉन्च किया। जिसके जरिए कई लोगों को स्टार्टअप से जोड़ा। कइयों को फंड उपलब्ध कराया तो कई लोगों के लिए मार्केट और नेटवर्क बिल्डिंग का काम किया।

नए स्टार्टअप के लिए वर्कस्पेस सबसे बड़ा चैलेंज है

प्रितेश कहते हैं कि आज के दौर में नए स्टार्टअप के लिए सबसे बड़ा चैलेंज जगह की कमी है। उन्हें काम करने के लिए ऑफिस नहीं मिल पाता। ज्यादातर स्टार्टअप शुरुआती दौर में खुद के बल पर अपने लिए ऑफिस की व्यवस्था करने में भी सक्षम नहीं होते हैं। इसलिए हमने तय किया कि ऐसे नए स्टार्टअप्स की हम मदद करेंगे। उनके काम करने के लिए एक बेहतर वर्कस्पेस प्रोवाइड कराएंगे। फिर 2019 में हमने OPlus Cowork नाम से अपना नया स्टार्टअप शुरू किया।

प्रितेश ने पटना में 5 हजार स्क्वायर फिट में अपना ऑफिस खोला है। जिसमें 100 स्टार्टअप्स के लिए वर्कस्पेस है।
प्रितेश ने पटना में 5 हजार स्क्वायर फिट में अपना ऑफिस खोला है। जिसमें 100 स्टार्टअप्स के लिए वर्कस्पेस है।

क्या काम करता है प्रितेश का स्टार्टअप?

  • नए स्टार्टअप के लिए वर्कस्पेस और ऑफिस की सुविधा उपलब्ध कराना।
  • छोटे स्टार्टअप के लिए फंड मुहैया कराना।
  • बिजनेस डेवलपमेंट और डिजिटल प्रमोशन का काम।
  • नए स्टार्टअप्स के लिए नेटवर्क और मार्केट बिल्डिंग का काम।
  • इंटेलेक्चुअल प्रॉप्रटी राइट (IPR) और कंपनी रजिस्टर कराने का काम।
  • 10-15 सेलेक्टेड स्टार्टअप्स के लिए मुफ्त में इन्क्यूबेशन की सुविधा।
  • बाकी के लिए तीन से चार हजार रुपए महीने की फीस पर स्टार्टअप शुरू करने की सुविधा।

क्या है स्टार्टअप कम्युनिटी मॉडल, कैसे करते हैं काम?

प्रितेश स्टार्टअप एडवाइजर का भी काम करते हैं। वे बिहार के बाहर भी कई वर्कशॉप और सेमिनार में हिस्सा ले चुके हैं।
प्रितेश स्टार्टअप एडवाइजर का भी काम करते हैं। वे बिहार के बाहर भी कई वर्कशॉप और सेमिनार में हिस्सा ले चुके हैं।

स्टार्टअप कम्युनिटी मॉडल का मतलब एक स्टार्टअप की शुरुआत के लिए ऑफिस लाइट, इंटरनेट कनेक्शन, सिस्टम से लेकर हर वो चीज उपलब्ध कराना जिसकी जरूरत होती है। वे बताते हैं कि हमने पटना में 5 हजार स्क्वायर फिट में अपना ऑफिस खोला है। जिसमें 100 स्टार्टअप्स के लिए वर्कस्पेस है। हमारे 100 के करीब क्लाइंट्स हैं। इनमें से 10 से 15 फ्लिपकार्ट, बजाज और बाटला जैसी बड़ी कंपनियां हैं, जिन्होंने हमारे ऑफिस में स्पेस ले रखा हैं। इसके साथ ही 15 स्टार्टअप कंपनियां हैं और बाकी फ्रीलांस वर्कर्स हैं, जिनके लिए हम वर्क स्पेस प्रोवाइड करा रहे हैं। इसके बदले हमें ये लोग एक फिक्स्ड अमाउंट पे करते हैं। इसके अलावा नए स्टार्टअप को लाइसेंस दिलाने, कंपनी रजिस्टर कराने जैसी चीजें भी पेड सर्विस में आती हैं।

प्रितेश की टीम में 10 लोग काम करते हैं। इनमें से तीन लोग कोर टीम मेंबर्स हैं। वे कहते हैं कि अभी हम पटना और वैशाली में काम कर रहे हैं। आगे हमारी योजना दूसरे शहरों में भी जाने की है। हम देशभर में कोवर्किंग चेन डेवलप करना चाहते हैं। अगर लॉकडाउन नहीं लगा होता तो हम रांची, वाराणसी जैसी जगहों पर अपना काम शुरू कर चुके होते। वे कहते हैं कि स्टार्टअप की फील्ड में स्कोप की कोई कमी नहीं है। बस शुरुआत करने वाले को पता होना चाहिए कि उसे मार्केट तक पहुंचना कैसे है। प्रितेश स्टार्टअप एडवाइजर का भी काम करते हैं। वे बिहार के बाहर भी कई वर्कशॉप और सेमिनार में हिस्सा ले चुके हैं।

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